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रायपुर के प्रकाश गर्ग की अभिनव पहल
नशाला (हिमाचल प्रदेश) 16 मई। रायपुर के युवा कलाकार प्रकाश गर्ग द्वारा परिकल्पित वन स्टेट वन आर्टिस्ट (ओसोआ) का पहला संस्करण 1 से 9 मई 2026 तक हिमाचल प्रदेश के नशाला में सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। इस नौ दिवसीय सांस्कृतिक रेजिडेंसी में भारत के विभिन्न राज्यों से आए 38 युवा लोक एवं पारंपरिक कलाकारों और 32 स्वयंसेवकों ने भाग लिया, जिन्होंने मिलकर सामूहिक कलाकृतियों को तैयार किए तथा अपनी क्षेत्रीय कला परंपराओं, तकनीकों और सांस्कृतिक कहानियों का आदान-प्रदान किया।
श्री गर्ग ने बताया कि ऐसे समय में जब भारत की कई पारंपरिक लोक कला शैलियाँ धीरे-धीरे मुख्यधारा से दूर होती जा रही हैं, तब हिमाचल प्रदेश की वादियों में एक अनूठी पहल ने देशभर के युवा कलाकारों को एक मंच पर लाकर भारतीय लोक परंपराओं को संरक्षित, प्रोत्साहित और नए रूप में प्रस्तुत करने का कार्य किया है। ओसोआ द्वारा पूर्ण रूप से प्रायोजित यह पहल केवल एक कला शिविर तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सांस्कृतिक संवाद, रचनात्मक सहयोग और राष्ट्रीय एकता का जीवंत मंच बन गई।
श्री गर्ग ने बताया कि आयोजन के दौरान कला कार्यशालाएँ, सांस्कृतिक संध्याएँ, स्थानीय प्रदर्शनियाँ, संवाद सत्र और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिन्होंने कलाकारों को एक-दूसरे की परंपराओं को समझने और सीखने का अवसर दिया। इस पहल का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को भारत की लोक एवं जनजातीय कला परंपराओं के संरक्षण से सक्रिय रूप से जोडऩा था।
श्री गर्ग ने बताया कि भारत की पारंपरिक कलाएँ केवल कला नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक स्मृतियाँ और पीढिय़ों से चली आ रही पहचान हैं, जिन्हें युवा पीढ़ी के माध्यम से आगे बढ़ाना आवश्यक है। भारत की लोक कलाएँ तभी जीवंत रह सकती हैं जब युवा पीढ़ी उनसे सक्रिय रूप से जुड़े, उन्हें समझे और आधुनिक समय में नई पहचान दे।
श्री गर्ग ने बताया कि ओसोआ का उद्देश्य एक दीर्घकालिक सांस्कृतिक आंदोलन तैयार करना है, जो युवाओं, परंपरा और रचनात्मक सहयोग को एक राष्ट्रीय मंच पर जोड़ सके। रेजिडेंसी के दौरान तैयार किए गए इन कलाकृतियों और उससे संबंधित दस्तावेजों को भविष्य में प्रदर्शनियों, प्रकाशनों, डॉक्यूमेंट्री, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अभिलेखीय संरक्षण के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
श्री गर्ग ने बताया कि अपने पहले सफल संस्करण के साथ वन स्टेट वन आर्टिस्ट (ओएसओए) भारत की लोक कला विरासत को संरक्षित करने और युवाओं को सांस्कृतिक रूप से जोडऩे वाली एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल के रूप में उभरकर सामने आया है।




