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विद्यार्थी और शिक्षक-शिक्षिकाएं मानसिक चुनौतियां बिना झिझक बता सकें, ऐसी कार्यसंस्कृति हो-चौबे
01-May-2026 2:44 PM
विद्यार्थी और शिक्षक-शिक्षिकाएं मानसिक चुनौतियां बिना झिझक बता सकें, ऐसी कार्यसंस्कृति हो-चौबे

जेपी इंटरनेशनल में कार्यशाला, 60 को मिला प्रशिक्षण

कांकेर, 1 मई। जेपी इंटरनेशनल के प्राचार्य रितेश कुमार चौबे ने बताया कि विद्यार्थियों की मानसिक सेहत को शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में लाने की दिशा में एक सार्थक कदम उठाते हुए सीबीएसई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (ष्टशश्व), भुवनेश्वर ने मंगलवार को जे.पी. इंटरनेशनल स्कूल, कांकेर में एक विशेष क्षमता संवर्धन कार्यशाला का सफल आयोजन किया।

श्री चौबे ने बताया कि विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण विषयक इस प्रेरणादायी कार्यक्रम में बस्तर संभाग के विभिन्न विद्यालयों से आए लगभग 60 उत्साही शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यशाला के मुख्य रिसोर्स पर्सन बी. हेमलता और आनंद कुमार त्रिपाठी ने चार गहन और ज्ञानवर्धक सत्रों में शिक्षकों को प्रशिक्षित किया। उन्होंने बताया कि एक संवेदनशील शिक्षक न केवल पाठ्यक्रम का मार्गदर्शन करता है, बल्कि एक ‘मेंटल हेल्थ मेंटर’ के रूप में विद्यार्थी की भावनात्मक यात्रा में भी उसका साथी बनता है।

श्री चौबे ने बताया कि विशेषज्ञों ने सोशल इमोशनल लर्निंग (स्श्वरु) को दैनिक पाठ योजनाओं में सहजता से एकीकृत करने के व्यावहारिक तरीके भी साझा किए। मानसिक स्वास्थ्य अब शिक्षा के हाशिए पर नहीं, बल्कि उसके केंद्र में होना चाहिए। हमें ऐसी कार्यसंस्कृति बनानी होगी जहाँ विद्यार्थी और शिक्षक — दोनों — अपनी मानसिक चुनौतियों पर बिना किसी झिझक के बात कर सकें। सुबह विद्यालय परिसर में पारंपरिक स्वागत और पूजन के साथ कार्यशाला की शुभ शुरुआत हुई।

सुश्री करिश्मा परवीन ने विशेषज्ञों का प्रभावी परिचय प्रस्तुत किया। दोपहर के समापन सत्र में प्राचार्य श्री चौबे ने दोनों मुख्य रिसोर्स पर्सन को शॉल, श्रीफल और स्मृति चिह्न भेंट कर भावभीना सम्मान किया। श्री अवनीश ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसके बाद सामूहिक फोटोग्राफी और सहभोज के साथ इस यादगार कार्यक्रम का समापन हुआ।

श्री चौबे ने बताया कि  शिक्षा जगत में एक नई ऊर्जा और सकारात्मक बदलाव का संदेश लेकर आई है। निश्चित रूप से इस प्रशिक्षण का प्रभाव कांकेर और बस्तर संभाग के स्कूलों की कक्षाओं में दिखेगा, जहाँ अब अंकों के साथ-साथ विद्यार्थी की मुस्कान और मानसिक स्वास्थ्य को भी उतनी ही प्राथमिकता मिलेगी।


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