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न्याय, समानता और गरिमा के संवैधानिक मूल्यों पर आधारित समावेशी नीतियां आवश्यक-आजाक मंत्री
31-Mar-2026 5:15 PM
न्याय, समानता और गरिमा के संवैधानिक मूल्यों पर आधारित समावेशी नीतियां आवश्यक-आजाक मंत्री

  लॉ, राइट्स एंड इंडिजिनस फ्यूचर्स पर सम्मेलन में नेताम का मुख्य आतिथ्य  

रायपुर, 31 मार्च। हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ने बताया कि दो-दिवसीय ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन लॉ, राइट्स, एंड इंडिजिनस फ्यूचर्स-रीथिंकिंग ट्राइबल जस्टिस इन अ ग्लोबलाइज्ड वर्ल्ड के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, मंत्री राम विचार नेताम ने जनजातीय समुदायों को सतत विकास के सक्रिय भागीदार के रूप में मान्यता देने के महत्व पर बल दिया।

विश्वविद्यालय ने बताया कि मंत्री नेताम ने न्याय, समानता और गरिमा के संवैधानिक मूल्यों पर आधारित समावेशी नीतियों की आवश्यकता को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने जलवायु परिवर्तन और सामाजिक असमानता जैसी समकालीन चुनौतियों से निपटने में जनजातीय ज्ञान प्रणालियों के महत्व को भी रेखांकित किया।

विश्वविद्यालय ने बताया कि प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन, माननीय कुलपति उद्घाटन वक्तव्य से हुई, जिसमें उन्होंने समकालीन विधिक विमर्श में जनजातीय न्याय के महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने वाली जनजातीय प्रणालियों के नैतिक पक्ष को रेखांकित किया, जिसे मास्टेरिंग ऑफ नेचर विकास मॉडल द्वारा धीरे-धीरे नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अब केवल शैक्षणिक विश्लेषण से आगे बढक़र स्पष्ट नीतिगत कार्ययोजना की आवश्यकता है।

विश्वविद्यालय ने बताया कि यह सम्मेलन सेंटर फॉर स्टडी ऑफ लॉ एंड इंडिजिनस पीपल द्वारा आयोजित किया गया, जिसके प्रमुख डॉ. अयान हाजरा के नेतृत्व में कार्यक्रम संपन्न हुआ। डॉ. दीपक श्रीवास्तव, प्रभारी रजिस्ट्रार ने मंत्री एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि आशुतोष कुमार आहिरे ने सम्मेलन के संयोजक के रूप में अपनी भूमिका निभाई। भारत एवं विदेशों से शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, विधि-व्यवसायियों, शोधार्थियों तथा छात्रों की विविध भागीदारी रही।


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