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एनएमडीसी द्वारा 100 प्रतिशत प्लेसमेंट वाले बस्तर के 80 युवाओं के पहले बैच का स्वागत
06-Feb-2026 2:44 PM
एनएमडीसी द्वारा 100 प्रतिशत प्लेसमेंट वाले बस्तर के 80 युवाओं के पहले बैच का स्वागत

रोजगार-उन्मुख कौशल प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण

हैदराबाद, 6 फरवरी। एनएमडीसी के अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकने बताया कि भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक एनएमडीसी लिमिटेड ने रोजगार-उन्मुख कौशल प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर 100 प्रतिशत प्लेसमेंट प्राप्त करने वाले बस्तर प्रभाग के 80 युवाओं के पहले बैच का स्वागत किया। यह छत्तीसगढ़ के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और कौशल विकास, समावेशी विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए एनएमडीसी की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।

श्री मुखर्जी ने बताया कि यह कार्यक्रम एनएमडीसी के सीएसआर प्रयासों के हिस्से के रूप में केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईपीईटी) के सहयोग से लागू की गईकौशल विकास पहल के तहतकिया गया था। इस पहल का उद्देश्य बस्तर के बेरोजगार और वंचित आदिवासी युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशल से लैस करके स्थायी आजीविका में सक्षम बनाकर सशक्त करना है।

श्री मुखर्जी ने बताया कि  यह सम्मान समारोह और चर्चा सत्र एनएमडीसी के वरिष्ठ नेतृत्व की उपस्थिति में आयोजित किया गया जिसमें श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, श्री विनय कुमार, निदेशक (तकनीकी) और निदेशक (वाणिज्यिक, अतिरिक्त प्रभार), श्री जॉयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन) और निदेशक (कार्मिक, अतिरिक्त प्रभार), श्री पी.श्याम, महाप्रबंधक (सीएसआर) और श्री बी. रवि, प्रधान निदेशक, सीआईपीईटी, एनएमडीसी और सीआईपीईटी के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।

श्री मुखर्जी ने बताया कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों और साधारण परिवारों (दंतेवाड़ा, बस्तर, सुकमा, नारायणपुर, कोंडागांव और बीजापुर सहित) से आए छात्रों ने वहां के जीवन के बारे में बात की, जहां अवसर सीमित थे और विकल्प कम थे। उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल रोजगार प्रदान करता है, बल्कि अपने गृहनगर से बाहर  निकलकर अपनी शर्तों पर आय अर्जित करने का आत्मविश्वास भी प्रदान करता है।

श्री मुखर्जी ने बताया कि बस्तर से आए कक्षा 12 उत्तीर्ण युवक सुखराम ने बताया कि किस प्रकार उनका बचपन शुरुआत में हुए नुकसान और सीमित साधनों में बीता था। उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने से उनके परिवार के जीवन की दिशा बदल जाएगी। उन्होंने कहा, मुझे कभी नहीं पता था कि मैं अपना गृहनगर कैसे छोड़ूंगा।


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