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रायपुर, 23 दिसंबर। केंद्रीय इस्पात और भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने प्रमुख भागीदार देशों के राजदूतों और प्रतिनिधियों के साथ एक संवादमूलक बैठक में भाग लिया और उन्हें इस्पात मंत्रालय के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन-सह-प्रदर्शनी, भारत इस्पात 2026 में सक्रिय रूप से हिस्सा् लेने के लिए आमंत्रित किया, जो अप्रैल 2026 में आयोजित होने वाला है।
इस संवादमूलक सत्र में वैश्विक इस्पात मूल्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले देशों के राजदूतों और राजनयिक प्रतिनिधियों की अच्छीा भागीदारी देखी गई। यह बैठक अंतरराष्ट्रीय सहयोग को गहरा करने और वैश्विक इस्पात उत्पादक एवं इस्पात उपभोक्ता देशों के साथ भारत की भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए मंत्रालय के प्रयासों का हिस्सा थी। केंद्रीय मंत्री श्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी भागीदारी भारत द्वारा विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को दिए जाने वाले महत्व को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत का इस्पात क्षेत्र आज देश के व्यापक आर्थिक परिवर्तन का प्रतिबिंब है और विकास, दृढ़ता और वैश्विक एकीकरण का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है।
श्री कुमारस्वाामी ने रेखांकित किया कि भारत वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश है। यह स्थान निरंतर सुधारों, स्थिर निवेशों और आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और स्थिरता पर केंद्रित स्पष्ट दीर्घकालिक विजन के माध्यम से प्राप्त किया गया है। उन्होंने बताया कि इस्पात क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 2.5 प्रतिशत का योगदान देता है और लगभग 28 लाख लोगों की आजीविका का आधार है। बुनियादी ढांचे के विस्तार, विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि और रक्षा एवं परिवहन जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के कारण इस्पात क्षेत्र की मांग बढ़ रही है। केंद्रीय मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रक मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत 2030 तक 300 मिलियन टन इस्पात उत्पादन क्षमता अर्जित करने की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है।


