बेमेतरा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 11 जून। जिला मुख्यालय समेत आसपास ग्रामीण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध ईट भ_ा संचालित हो रहे हैं। यहां नियम और पर्यावरण मानको को ताक पर रख दिया गया है। कई ईट भ_ा बिना अनुमति संचालित हो रहे हैं। कार्यवाही के अभाव में बेखौफ संचालक लाखों ईट का निर्माण कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति काफी भयावह है जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर के दायरे में दर्जन भर से अधिक गांव में हिट भ_ा का संचालन किया जा रहा है। जिसमें मुख्य रूप से नेशनल हाईवे से सिर्फ 50 मीटर की दूरी पर घनी आबादी के पास बिना अनुमति संचालित हो रहे हैं। लगातार शिकायत के बावजूद इन ईट भ_ों पर कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में खासी नाराजगी है। इससे खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बिना अनुमति ईट भ_े का संचालन
ईट भ_ा संचालकों की ओर से नियमों की खुलेआम अदेखेगी जा रही है। क्षेत्र में अधिकांश ईट भ_ी बिना किसी वैध एनओसी के अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। नियमानुसार भ_ा शुरू करने से पहले कई तरह की वैधानिक स्वीकृतियां लेनी पड़ती है। लेकिन यहां बिना किसी औपचारिकता के ही पूरा खेल चल रहा है। ‘छत्तीसगढ़’ की पड़ताल में ग्राम पिपरभ_ा, भोईनाभाटा, बहेरा (क), मोटेसरा सहित दर्जनों गांव में ईट भ_ा संचालित हो रहे हैं।
इन भ_ा से निकलने वाली जहरीली गैसों, कार्बन व भूल के बारीक कड़ों से आसपास के वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है।
साथ ही ईंटों को पकाने और तैयार करने के लिए भ_ा संचालक भू-जल का अनियंत्रित दोहन कर रहे हैं। नतीजा भू-जल स्लतर गातार नीचे गिर रहा है। जिससे पेयजल का गंभीर संकट खड़ा होना तय है।
कृषि भूमि की तबाही
भ_ा संचालक कृषि योग्य उपजाऊ मिट्टी का बड़े पैमाने पर दोहन किया जा रहे हैं। खेतों की उपजाऊ मिट्टी की ऊपरी परत को जेसीबी मशीनों से खोद कर ईट बनाने का प्रयोग किया जा रहा है। अंधाधुंध खनन से उपजाऊ कृषि भूमि धीरे-धीरे गहरी गढ़ों में तब्दील हो रही है।
सुरक्षा मानको और यातायात नियमों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गो और रिहाईसी इलाकों के पास ऐसी प्रदूषण गतिविधियों की सख्त मनाही है। यहां कवर्धा मार्ग पर ग्राम बैजी में नेशनल हाईवे 30 पर 50 मीटर की दूरी पर अवैध ईट भ_ा संचालित हो रहा है।
इसके अलावा ग्राम पिपरभ_ा में घनी आबादी से महत्व 50 मीटर की दूरी पर एक भट्ट संचालित हो रहा है। यहां पकाने के दौरान धुएं का गुब्बार उठने के कारण मार्ग गुजरने वाले वाहन चालकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और हमेशा हादसों की आशंका बनी रहती है।
इन गांवों में संचालित
गांवों में बड़े पैमाने पर ईट भ_ों का संचालन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार तेंदूभाटा, पिपरभ_ा, डोलिया, चारभाठा,बैजी, बहेरा (का), बहेरा (कु), बीजाभाठ , कोबिया, गुंडबोड, हथमुड़ी, किरकी में ईट भ_ों से निकलने वाले लगातार धुएं और धूल के कारण आसपास का वातावरण प्रदूषित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी प्रशासन को ओर से सख्त कदम नहीं उठा रहा है।
क्षेत्र में बिना श्रम लाइसेंस का अवैध रूप से संचालित हो रही एट भट्टों पर मजदूरों का शोषण चरम पर है। बिना पंजीकरण के कर रहे इन भ_ों पर ना तो श्रमिकों के हितों का ध्यान रखा जा रहा है और ना ही उन्हें न्यूनतम मजदूरी मिल रही है। श्रम विभाग के नियमों को ताक पर रखकर भ_ा संचालक बाल श्रम और बंधुआ मजदूरों जैसी प्रथाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण अवैध संचालकों के हौसले बुलंद है।
कुम्हार जाति का जरूरी
खनिज विभाग से मिली जानकारी का अनुसार अवैध हिट भट्टे पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। अब तक 24 ईट भ_ा संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। संचालकों को नोटिस जारी कर उनसे कुम्हार जाति व निवास प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। इन दस्तावेजों की अनूपलबद्धता पर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है। इसके अलावा कुम्हार का स्थानिक ग्राम पंचायत में निवास जरूरी है। स्थल की उपलब्धता नहीं होने की स्थिति में आसपास से गांव के ग्राम पंचायत की अनुमति के बाद ही भ_ा संचालित कर सकता है।
शिकायतों पर कार्यवाही की जा रही हैं - खनिज अधिकारी
खनिज अधिकारी रोहित साहू ने बताया कि जिलेभर में 1000 से अधिक ईट भ_ा संचालित है। अवैध संचालन की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। वहीं संचालकों को नियमों के कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।


