बेमेतरा
डाक्टरों ने दवा लेने की दी सलाह
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 22 मई। बेरला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव में जहां लकवा (पैरालिसिस) का दोबारा अटैक आने पर एक बुजुर्ग ने मिट्टी का तेल (केरोसिन) पी लिया। जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए। बुजुर्ग ने 9 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद आखिरकार दम तोड़ दिया। पुलिस मार्ग कायम कर शव का पंचनामा कर लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक शत्रुघ्न साहू पूर्व से ही लकवा की बीमारी से ग्रसित है। बीते 12 मई की रात में अचानक दोबारा लकवा का तेज अटैक आया। रात में घर में रखे मिट्टी का तेल पी लिया जिससे उनकी तबीयत बेहद बिगड़ गई। परिजनों ने तुरंत मौके पर पहुंच कर देखा बुजुर्ग शत्रुघ्न साहू की हालत गंभीर थी और वे बातचीत करने की स्थिति में नहीं थे।
परिजनों ने आनन-फानन में एक निजी वाहन की व्यवस्था की और बुजुर्ग को कोई इलाज के लिए निडी अस्पताल बेरला में भर्ती कराया। वहां से 20 मई तक उनका लगातार इलाज चलता रहा, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। स्थिति बिगड़ती देख परिजन बुधवार की शाम उन्हें अन्य निजी अस्पताल बेमेतरा लेकर आए और दाखिल कराया। अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में इलाज के दौरान गुरुवार की सुबह शत्रुघ्न साहू की मृत्यु हो गई।
परिजनों और सूचनाकर्ता की रिपोर्ट पर स्थानीय पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर सब को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस द्वारा मर्ग इंटीमेशन कायम कर शव का पंचनामा तैयार किया गया और आगे की वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। शव का पोस्टमार्टम जिला अस्पताल में किया गया।
मिट्टी तेल पीना एक भ्रम, ऐसा न करें - सीएस
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. लोकेश साहू ने बताया कि लकवा आने पर दवाइयां ही बेहतर उपाय है। मेडिकल साइंस में लगवा आने के विभिन्न कारण है। जिसका उपचार किया जा सकता है। समय पर डॉक्टर के यहां पहुंचना बहुत जरूरी होता है। भ्रांति के फेर में ना आए और इस तरह की स्थिति में सीधा डॉक्टर के पास पहुंचे।


