बस्तर

बस्तर के वनाधिकार पट्टाधारियों के लिए बड़ी पहल
04-May-2026 10:38 PM
बस्तर के वनाधिकार पट्टाधारियों के लिए बड़ी पहल

एग्रीस्टेक पोर्टल से जुड़ेंगे 5 हजार से अधिक छूटे हुए किसान

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

जगदलपुर, 4 मई। बस्तर जिले के वनाधिकार पट्टाधारियों और पट्टेदार किसानों को डिजिटल सशक्तिकरण से जोडऩे के लिए महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान जिन किसानों को एग्रीस्टेक पंजीयन से छूट दी गई थी, उन्हें अब विशेष कार्ययोजना के तहत इस पोर्टल में शामिल किया जा रहा है। जिले के ऐसे किसान जो वनाधिकार पट्टाधारी, शासकीय पट्टेदार, कोटवार या अधिया श्रेणी में आते हैं, उनके लिए अब अपनी भूमि को डिजिटल रिकॉर्ड से जोडऩा अनिवार्य और सरल हो गया है। खाद्य नियंत्रक से मिली जानकारी के अनुसार बस्तर जिले में वर्तमान में 5,226 किसान ऐसे हैं जिनका पंजीयन एग्रीस्टेक पोर्टल पर होना शेष है, जिसमें कुल 5,789 खसरों और कम्पार्टमेंट नंबरों का डिजिटल मिलान किया जाना है। 

 इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए दो स्तरीय व्यवस्था लागू की गई है। ऐसे किसान जिनके पास पहले से एग्रीस्टैक आईडी मौजूद है, वे यूएफआर के माध्यम से अपने पट्टे या छूट प्राप्त श्रेणी की भूमि के लिए दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। एक बार दावा पोर्टल पर दर्ज होने के बाद यह सत्यापन हेतु संबंधित तहसीलदार की आईडी पर भेजा जाएगा, जहाँ से अनुमोदन मिलते ही यह भूमि विवरण किसान की स्थायी आईडी से लिंक हो जाएगा। दूसरी ओर जिन किसानों के पास अब तक कोई आईडी नहीं है, उनकी पहचान मार्कफेड द्वारा जारी सूची के आधार पर की जा रही है। इन किसानों को सीजी एग्रीस्टैक मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जिसके पश्चात उन्हें अपनी विशिष्ट फार्मर आईडी और पंजीकृत भूमि का विवरण प्राप्त हो सकेगा। 

   जिले के किसानों की सुविधा के लिए जिलेवार, तहसीलवार और समितिवार लंबित किसानों की सूची मार्कफेड की वेबसाइट पर रिपोर्ट नंबर 29 और 30 के रूप में सार्वजनिक कर दी गई है। साथ ही इन विवरणों को भुइयां पोर्टल के तहसील लॉगिन में भी उपलब्ध कराया गया है ताकि मैदानी स्तर पर पंजीयन कार्य में सहूलियत हो सके। इस डिजिटल एकीकरण से बस्तर के सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले पट्टाधारी किसानों को न केवल अपनी भूमि का पारदर्शी रिकॉर्ड मिलेगा, बल्कि भविष्य में मिलने वाली विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ भी सीधे उनके खाते तक पहुँच सकेगा।


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