बस्तर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 15 फरवरी। बस्तर जिले के विद्यार्थियों के लिए अब विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वास्तविक अनुभवों के माध्यम से सीखने का अवसर मिला।
समग्र शिक्षा राज्य कार्यालय रायपुर के निर्देशानुसार राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत जिले के चयनित विद्यार्थियों का अंतरराज्यीय शैक्षणिक भ्रमण भुवनेश्वर और पुरी में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जिला कलेक्टर आकाश छिकारा और जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में आयोजित इस यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान, गणित, नवाचार और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी समझ विकसित करना रहा। जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल के अनुसार यह भ्रमण बच्चों के समग्र व्यक्तित्व विकास को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया गया। 20 सदस्यीय दल को जिला मिशन परियोजना समन्वयक अशोक पांडे और एबीईओ राजेश गुप्ता ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
शैक्षणिक भ्रमण की शुरुआत क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय से हुई, जहां विद्यार्थियों ने विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों और जीव-जंतुओं के जीवाश्मों का अध्ययन किया। विशाल व्हेल और मगरमच्छ के कंकालों को देखकर बच्चों ने जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन का महत्व समझा। इसके बाद पठानी सामंत प्लेनेटेरियम में आयोजित सत्र ने उन्हें ब्रह्मांड की उत्पत्ति, तारों के जीवन चक्र और ग्रहों की कार्यप्रणाली से परिचित कराया, जिसने उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नई दिशा दी।
इसके पश्चात दल ने क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र का भ्रमण किया, जहां जुरासिक पार्क, गणित और दर्पण गैलरी के प्रयोगात्मक मॉडलों को विद्यार्थियों ने स्वयं करके समझा। इस दौरान शिक्षक मनीष कुमार अहीर और दीप्ति ठाकुर ने जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाया। प्रकृति के साथ प्रत्यक्ष अनुभव के लिए विद्यार्थियों को नंदनकानन वन्यप्राणी अभयारण्य ले जाया गया, जहां उन्होंने वन्यजीवों को करीब से देखा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित की।
शिक्षा यात्रा केवल विज्ञान तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यार्थियों ने जगन्नाथ मंदिर और लिंगराज मंदिर के दर्शन कर भारतीय स्थापत्य और धार्मिक परंपराओं को जाना। कोणार्क सूर्य मंदिर की भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व ने उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। वहीं पुरी समुद्र तट पर विद्यार्थियों ने समुद्री पारिस्थितिकी, ज्वार-भाटा की प्रक्रिया और प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभावों को भी समझा।यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और अनुभव का अनूठा संगम साबित हुआ, जिसने उन्हें विज्ञान, प्रकृति और भारतीय संस्कृति को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर प्रदान किया ।
तथा उनके भीतर जिज्ञासा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण की भावना को और मजबूत किया।


