बस्तर
श्वेत क्रांति की राह पर बस्तर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 15 फरवरी। बस्तर संभाग में दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के पशुपालकों और बिहान समूह की महिलाओं का प्रतिनिधिमंडल गुजरात के बनासकांठा पहुंच गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की इस पहल के तहत बस्तर के 22 प्रतिनिधियों सहित प्रदेश के कुल 56 सदस्य एशिया की अग्रणी डेयरी प्रणालियों में शामिल बनास डेयरी और अमूल के सहकारी मॉडल का प्रत्यक्ष अनुभव ले रहे हैं। बनासकांठा पहुंचने पर दल के सदस्यों में उत्साह देखा गया, जहां वे सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण सशक्तिकरण के व्यावहारिक पहलुओं को समझ रहे हैं।
इस अध्ययन भ्रमण का नेतृत्व उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप कर रहे हैं, जो राज्य सरकार की प्राथमिकता और इस पहल की गंभीरता को दर्शाता है। बस्तर के पशुपालकों और स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए यह भ्रमण केवल अवलोकन नहीं, बल्कि एक गहन प्रशिक्षण प्रक्रिया बन गया है, जिसमें वे आधुनिक डेयरी प्रबंधन, सहकारी ढांचे और आय वृद्धि के प्रभावी मॉडल को करीब से समझ रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल दुग्ध संकलन केंद्रों से लेकर आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों और गुणवत्ता नियंत्रण की उन्नत तकनीकों का अध्ययन कर रहा है। विशेष रूप से बिहान समूह की महिलाएं महिला उद्यमिता के माध्यम से डेयरी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के मॉडल को समझने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, ताकि बस्तर लौटकर स्थानीय स्तर पर इसी तरह के डेयरी क्लस्टर विकसित किए जा सकें।
भ्रमण के दौरान राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और अमूल के विशेषज्ञों द्वारा संतुलित पशु आहार, उन्नत नस्ल सुधार और वैज्ञानिक पशुपालन से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल वहां की विपणन व्यवस्था और डेयरी उत्पाद निर्माण प्रक्रिया का भी अध्ययन कर रहा है, जिससे बस्तर क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन और विपणन को नई दिशा मिल सके।
इस अध्ययन यात्रा में सहकारिता सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना और अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक केएन कांडे सहित वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, जो इस मॉडल को जमीनी स्तर पर लागू करने की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं। 18 फरवरी तक चलने वाले इस अध्ययन प्रवास के माध्यम से बस्तर के प्रतिनिधि सहकारी डेयरी मॉडल की सभी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को समझेंगे। शासन का यह प्रयास बस्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, दूध उत्पादन बढ़ाने और बिहान समूह की महिलाओं के लिए स्थायी आय के नए अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सहकारिता आधारित समृद्धि का सपना धरातल पर साकार होने की उम्मीद जताई जा रही है।


