बस्तर

बस्तर पंडुम
18-Jan-2026 9:30 PM
बस्तर पंडुम

तस्वीर / ‘छत्तीसगढ़’ / विमल मिंज


‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता 
जगदलपुर, 18 जनवरी।
बाकवंड ब्लॉक के आसना स्थित बादल (बस्तर अकेडमी ऑफ डांस, आर्ट-लिटरेचर) में पारंपरिक पूजा की शुरुआत से बस्तर पंडुम मनाया गया।

बस्तर में आदिम संस्कृति पारंपरिक खान-पान और रीति रिवाज को विश्व के पटल पर लाने के उद्देश्य से अलग-अलग विकास खण्डों में बस्तर पंडुम का भव्य आयोजन किया गया, ताकि आने वाली नई पीढ़ी बस्तर के इन रीति रिवाज और संस्कृति खान पान को न भूलें, इस आयोजन में बस्तर के जंगलों में पाए जाने वाली जड़ी बूटियों की जानकारी और उसके उपयोग की जानकारी बस्तर के कावापाल निवासी राजदेव बघेल दे रहे थे, और जनजातीय आभूषण का स्टॉल लगाया था जिसमें कुंती मौर्य ने अपने लाए हुए जनजातीय आभूषण का प्रदर्शन किया जिसकी जानकारी लोगों ने ली, जिसमें लुरकी, करधन, सुतिया, पैरी, बाहूंटा, बिछिया, ऐंठी, बन्धा, फुली, धमेल, नांगमोरी, खोंचनी, मुंदरी, सुर्रा, सुता, पटा, पुतरी, ढार, नकबसेर था। 

खाद्य एवं पेय पदार्थों का स्टॉल भी लगाया गया था। इनमें बस्तर में वनोपज से प्राप्त फलों से नौ प्रकार के पेय पदार्थ बनाए जाते हैं ये यहां आकर लोगों को यह जानकारी मिली।


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