बलौदा बाजार

गहराता जल संकट, 26 में से 17 जलाशय अभी से सूखे
27-Mar-2026 4:10 PM
गहराता जल संकट, 26 में से 17 जलाशय अभी से सूखे

 गर्मी बढऩे के साथ ही बलौदाबाजार में जल संकट, अभी से जवाब देने लगे बोर और हैंडपंप

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 27 मार्च। बलौदाबाजार डिवीजन में 26 डैम में से 17 पूरी तरह सूख चुके हैं। आमतौर पर अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में बनने वाली स्थिति इस वर्ष मार्च में ही दिखाई दे रही हैं। जल स्तर 350 फीट से नीचे पहुंच गया हैं। शेष जलाशयों में औसत 11 फीसदी से भी कम पानी बचा हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 14 फीसदी था।

विशेषज्ञों के अनुसार अभी भीषण गर्मी के दो महीने शेष हैं। ऐसे में पेयजल और सिंचाई दोनों पर गंभीर संकट की आशंका बढ़ गई हैं। डिवीजन के प्रमुख छुईहा जलाशय में मात्र 36 फीसदी पानी शेष है, जबकि कारी जलाशय में सर्वाधिक 48 फीसदी जलभराव हैं। अन्य जलाशयों में यह स्टार 19 से 39 फीसदी के बीच हैं। जल स्रोतों के संरक्षण की अनदेखी से स्थिति और बिगड़ती जा रही हैं। कुओं के बाद अब तालाब भी सूखने लगे हैं। जिससे निस्तारी का संकट गहरा रहा हैं। डिवीजन के 70 गांव में से 50 गांव इस स्थिति से प्रभावित हो चुके हैं। करीब 6 हजार हेक्टेयर किसी भूमि की सिंचाई प्रभावित हैं।

मार्च के अंतिम हफ्ते में तापमान 47 डिग्री

मार्च के अंतिम हफ्ते में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया हैं। जिससे जलस्तर तेजी से गिर रहा हैं। अहिल्दा, चंगोरी, पैसर, अमलीडीह खमरिया, करदा, तिल्दा, डोगरी, चिचिरदा, जुरा, लाहौद बगपुरा, सीतावर, परसापाली, खैरा, कुमारी सहित अनेक गांव में पेयजल संकट गहरा गया हैं। कई स्थानों पर तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं, और जहां थोड़ा पानी बचा है वह भी उपयोग योग्य नहीं हैं। ऐसे में कई इलाकों में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने के साथ पशुओं की निस्तारी जैसी समस्याएं भी आ रही हैं। इधर जिले में महानदी, शिवनाथ और जोक जैसी नदियों के साथ कई नाले और हजारों तालाब डाबरी व कुएं होने के बावजूद जल संकट की स्थिति चिंताजनक हैं। मुरूम भूमि और ऊंचाई वाले जलाशयों में पानी टिक नहीं पाता, जिससे वे तेजी से सूख जाते हैं।

बलौदाबाजार जिले में गर्मी की शुरुआत में ही जल स्तर गिरने का प्रमुख कारण यहां लगे औद्योगिक प्लांट हैं। बलौदाबाजार के आसपास ही 6 से ज्यादा प्लांट हैं। चूना पत्थर निकालने के लिए इन प्लांट में स्वीकृति से ज्यादा दूर तक और गहरी खुदाई की जाती हैं। नतीजा यह है कि आसपास का भूजल प्लांट्स के इन गहरी खदानों में इक_ा होने लगता हैं। पिछले साल की गर्मी में ऐसे ही एक प्लांट की वजह से आसपास के गांव का भूजल तेजी से गिरा तो मुद्दा बन गया।

जलाशयों में जलभराव की

स्थिति 25 मार्च तक 

जलाशय       सिंचाई क्षमता पानी   (मि.ध.मी)     मौजूदा स्तर

खपरी                34.00                0.463               खाली

खैरी                 81.00               0.265                खाली

खमरिया       76.00               0.141                खाली

भरतपुर        211.00              01.164              खाली

कुकड़ा        81.00               0.191              खाली

हरिनभ_ा    36.00               0.047                खाली

छेरकापुर       121.00              0.414                खाली

बोईरडीह        54.00              0.209              खाली

पत्थरचुवा      75.00               0.155              खाली

तिल्दा बांधा    162.00              0.533              खाली

हिरमी               162.00              0.354              खाली

करही                162.00       0.459                     खाली

तिथिडीह      227.00       0.622               खाली

बिटकुली      200.00       0.544               खाली

कामता               121.00       0.340               खाली

दुलदुला              87.00        0.300               खाली

झिरिया              00.00.              0.700               खाली

कलेक्टर ने जांच के लिए टीम भेजी तो बात सही निकली। इसके बाद मंथली निगरानी के साथ प्लांट्स पर कार्रवाई लिए एक विशेष टीम बनाई गई थी। इनका काम प्लांट्स के आसपास के क्षेत्र के भूजल स्तर में सुधार लाना था। संबंधित कंपनियों से भी कहा गया था कि वह प्रभावित क्षेत्र के लोगों को पीने का पानी मुहैया कराने हर तरह के प्रबंध करेंगे। टीम गठित की घोषणा के बाद फिर उसे टीम की कभी कोई रिपोर्ट नहीं आई न कोई कार्यवाई हुई। प्लांट्स के भूजल के बेजा दोहन की निगरानी का भी कोई अता पता नहीं हैं।

पिछले साल के मुकाबले ज्यादा गिरा जल स्तर। सिंचाई विभाग के अनुविभागीय अधिकारी पीएल जांगड़े ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में जल स्तर में अधिक गिरावट आई हैं। मुरूम भूमि वाले जलस्तर पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि मिट्टी वाले जलाशयों में कुछ पानी शेष हैं। क्षेत्र चट्टानी होने से जलाशयों में पानी लंबे समय तक नहीं टिक पाता।


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