बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 6 फरवरी। बलौदाबाजार जिले के जनपद पंचायत पलारी के अंतर्गत ग्राम पंचायत दत्तान में भवन निर्माण से जुड़ी अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि लगभग सात वर्ष पुराने अधूरे भवन में कुछ अतिरिक्त स्तंभ जोडक़र उसे अटल डिजिटल भवन के रूप में प्रस्तुत किया गया और इसके लिए स्वीकृत 5 लाख रुपये की राशि का उपयोग किया गया। मामले में तत्कालीन सब इंजीनियर गोपाल कृष्ण शर्मा पर अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में कलेक्टर द्वारा शासन को कार्रवाई के लिए अनुशंसा भी की गई थी। शिकायत मिलने पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी जांच एवं कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था।
पुराने भवन को नया दिखाने का आरोप
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत दत्तान में अटल डिजिटल सुविधा भवन निर्माण के लिए 5 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। आरोप है कि आरईएस के तत्कालीन सब इंजीनियर गोपाल कृष्ण शर्मा ने पुराने भवन में कुछ अतिरिक्त स्तंभ बनवाकर उसे नया निर्माण बताने का प्रयास किया।
पूर्व सरपंच महेश बारले और ग्रामीणों ने इस संबंध में जनपद पंचायत, जिला पंचायत और कलेक्टर से शिकायत की थी। शिकायत के बाद जांच कराई गई। कलेक्टर दीपक सोनी ने 25 दिसंबर 2025 को सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को पत्र लिखकर सब इंजीनियर गोपाल कृष्ण शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की थी।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी 10 नवंबर को प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर मामले की जांच एवं कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
इसी बीच सब इंजीनियर शर्मा को पदोन्नति देकर आरईएस में एसडीओ बना दिया गया और वे वर्तमान में पलारी में ही पदस्थ हैं।
सरपंच को आर्थिक नुकसान होने का आरोप
वर्तमान सरपंच अंजलि फेकर का कहना है कि शर्मा के निर्देश पर पुराने भवन में ही कार्य प्रारंभ कराया गया था, जिसमें पंचायत की ओर से लगभग 1 लाख 75 हजार रुपये खर्च हुए। बाद में शिकायत होने पर यह कार्य रोक दिया गया और दूसरी जगह नया भवन बनाना पड़ा।
सरपंच का आरोप है कि सब इंजीनियर के निर्देश पर किए गए इस कार्य के कारण पंचायत को आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने मांग की है कि पुराने भवन पर हुए खर्च की राशि संबंधित अधिकारी से वसूल की जाए और उचित कार्रवाई की जाए।
फाइल गायब करने और अफसरों को गुमराह करने का आरोप
पूर्व सरपंच महेश बारले और अन्य शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पदोन्नति के बाद पुरानी जांच से संबंधित फाइल उपलब्ध नहीं हो पा रही है और नए दस्तावेज प्रस्तुत कर अधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है।
उनका कहना है कि जांच के दौरान अनियमितता की पुष्टि हुई थी, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की गई।


