बलौदा बाजार
78 केंद्रों में धान रखने जगह नहीं, खरीदी बंद होने की आशंका
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 31 दिसंबर। बलौदाबाजार जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए यह लक्ष्य प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। समय पर टोकन नहीं कटने और धान के उठाव की धीमी गति ने पूरी व्यवस्था को दबाव में डाल दिया है। हालात ऐसे हैं कि यदि जल्द खरीदी की गति नहीं बढ़ाई गई या समय सीमा में विस्तार नहीं किया गया तो हजारों किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित रह सकते हैं। जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था गंभीर दबाव में आ गई हैं।
जिले के विभिन्न धान खरीदी केंद्रों का मीडिया ने जायजा लिया तो जमीनी हकीकत चिंताजनक नजर आई। इधर, मिलर्स द्वारा भेजे जा रहे बारदाने में बड़ी संख्या में फटे बारदाने निकल रहे हैं। जिससे खरीदी प्रक्रिया और अधिक प्रभावित हो रही है। सबसे गंभीर स्थिति धान के उठाव को लेकर हैं। खरीदी केंद्रों से धान का परिवहन अत्यंत धीमी गति से हो रहा हैं। नतीजतन जिले के 166 धान खरीदी केंद्रों में से 78 केंद्र बफर की सीमा पार कर चुके हैं। यदि शीघ्र परिवहन की गति नहीं पढ़ाई गई तो आने वाले दिनों में धान रखने की जगह का संकट खड़ा हो जाएगा। ऐसी स्थिति में कई केंद्रों पर खरीदी बंद होने का खतरा भी बन सकता हैं जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा।
24 दिन में 88 हजार से अधिक किसानों का धान खरीदी की चुनौती
जिले में 15 नवंबर से धान खरीदी की शुरुआत हुई थी, लेकिन शुरुआती 2 दिन अवकाश के कारण खरीदी नहीं हो सकी। इसके बाद पहले सप्ताह में लैंम्पस कर्मियों और कंप्यूटर ऑपरेटर की हड़ताल के चलते व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
15 नवंबर से 26 दिसंबर तक कुल 41 दिन बीत चुके हैं, लेकिन शनिवार, रविवार और अन्य अवकाशों को हटाने के बाद वास्तविक रूप से केवल 32 दिन ही खरीदी हो पाई हैं। इन 32 दिनों में मात्र 76 हजार 773 किसानों का ही धान खरीदा जा सका हैं। यानी प्रतिदिन औसतन करीब 2399 किसानों की ही खरीदी हो पाई। यदि यही औसत रहा है सभी किसानों से खरीदना चुनौती होगी।
मिलर्स के भरोसे ही उठाव, संग्रहण केंद्रों में पूरा जाम
जिले में तीन धान संग्रहण केंद्र मौजूद हैं अभी तक एक भी संग्रहण केंद्र से धान का उठाव शुरू नहीं हो पाया हैं। फिलहाल पूरा उठाओ केवल मिलर्स के भरोसे चल रहा है और वह भी बेहद धीमी गति से। जिले में कुल 86 मिलर्स पंजीकृत हैं। लेकिन इनमें से सिर्फ 56 का अनुदान हैं।
केसला में बफर लिमिट से दुगनी खरीदी
केसला धान खरीदी केंद्र की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही हैं। यहां तक अब करीब 17 हजार क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी हैं जबकि केंद्र की बफर लिमिट मात्र 9 हजार क्विंटल हैं। यानी यहां क्षमता से लगभग दुगना धान जमा हो चुका है लेकिन परिवहन की स्थिति शून्य हैं।
25 लाख क्विंटल से अधिक धान केंद्रों में जाम
धान खरीदी शुरू हुए एक 41 दिन बीत जाने के बाद भी जिले के खरीदी केंद्रों में 25 लाख 33 हजार 491 क्विंटल धान जाम पड़ा हुआ है। अब तक कुल 36 लाख 5 हजार 826 क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी हैं। लेकिन इसका महज 30 फीसदी यानी 10 लाख 72 हजार 335 क्विंटल धान ही उठ पाया है।
डीओ काटे जा रहे हैं-डीएमओ
जिला विपणन अधिकारी राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि परिवहन के लिए लगातार डीओ काटे जा रहे हैं और धान का उठाव भी कराया जा रहा हैं। प्रयास किया जा रहा है कि किसी भी केंद्र में धान का स्टॉक बफर लिमिट से अधिक न पहुंचे।


