बलौदा बाजार
नववर्ष पर बारनवापारा अभ्यारण में पर्यटकों की बढ़ी बुकिंग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 30 दिसंबर। शीतकालीन छुट्टियों और नववर्ष को लेकर जिले में पर्यटन गतिविधियां बढऩे लगी हैं। इस क्रम में बारनवापारा अभ्यारण इस वर्ष पर्यटकों की पसंद बना हुआ है। नववर्ष से पहले ही अभ्यारण के रेस्ट हाउस और कॉटेज की अग्रिम बुकिंग पूरी हो चुकी है। वन विभाग के अनुसार, उपलब्ध आवास क्षमता भर जाने के कारण फिलहाल नई बुकिंग नहीं ली जा रही है।
बारनवापारा के अलावा तुरतुरिया, गिरोधपुरी जैतखाम, सोनाखान और बलार जलाशय जैसे पर्यटन स्थलों पर भी नववर्ष के दौरान पर्यटकों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
रेस्ट हाउस और कॉटेज की स्थिति
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, अभ्यारण के देवपुर और नवागांव स्थित रेस्ट हाउस में नववर्ष अवधि के लिए अग्रिम बुकिंग की जा चुकी है। बारनवापारा पर्यटक ग्राम में 800 से 3000 रुपये की श्रेणी में कुल 34 कमरे उपलब्ध हैं, जो दिसंबर के मध्य तक बुक हो गए हैं। मोहदा गेस्ट हाउस, जिसकी बुकिंग रायपुर कार्यालय से होती है, वहां भी अग्रिम बुकिंग पूर्ण हो चुकी है।
बारनवापारा कैसे पहुंचे
बारनवापारा अभ्यारण रायपुर से पिथौरा मार्ग तथा बलौदाबाजार से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर सडक़ मार्ग से पहुंचा जा सकता है। वन विभाग द्वारा पर्यटकों को ठंड के मौसम को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कपड़े, मच्छररोधी सामग्री और आवश्यक सामान साथ रखने की सलाह दी गई है। साथ ही सुरक्षा कारणों से बिना गाइड के जंगल में प्रवेश न करने और वन्यजीवों के निकट न जाने की अपील की गई है।
वन्यजीव और प्राकृतिक सौंदर्य मुख्य आकर्षण
वन विभाग के अनुसार, लगभग 243 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले बारनवापारा अभ्यारण में हिरण, सांभर, चीतल, गौर, तेंदुआ, भालू, जंगली कुत्ता, मोर सहित विभिन्न पक्षी और सरीसृप प्रजातियां पाई जाती हैं। नववर्ष के दौरान यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ती है। विभाग के अनुसार इस वर्ष पर्यटकों की संख्या पूर्व वर्षों की तुलना में अधिक हो सकती है।
अन्य पर्यटन स्थल
कसडोल-सिरपुर मार्ग पर बरबसपुर गांव से लगभग 4 किलोमीटर अंदर स्थित सिंघनगढ़ किला क्षेत्र का एक पुराना स्थल है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, किले तक पहुंचने के लिए पैदल मार्ग है और वहां एक प्राचीन प्रवेश द्वार मौजूद है।
इसके अलावा जिले में एक दिवसीय भ्रमण के लिए तुरतुरिया (वाल्मीकि आश्रम), गिरोधपुरी जैतखाम, अमृत कुंड, पंचकुंडी, छाता पहाड़, सोनाखान, दामाखेड़ा, बलार जलाशय, सोनबरसा, खेरवारडीह जंगल तथा महानदी, शिवनाथ और लीलागर नदियों का संगम प्रमुख स्थल हैं।


