अभिजीत श्रीवास्तव
- टी20 क्रिकेट में पहली बार हुआ ऑस्ट्रेलिया और अफ़ग़ानिस्तान का मुक़ाबला.
- 4 रन के मामूली अंतर से जीती वर्तमान चैंपियन और मेज़बान ऑस्ट्रेलियाई टीम.
- सेमीफ़ाइनल की रेस में बने रहने के लिए ऑस्ट्रेलिया का जीतना था ज़रूरी.
- बहुत कम रनों के अंतर से मिली जीत के बाद नेट रन रेट में सुधार भी हुआ मामूली.
- ग्रुप-1 से न्यूज़ीलैंड की टीम सेमीफ़ाइनल में पहुंच गई है.
- तो अब क्या है स्थिति? क्या ऑस्ट्रेलिया अब भी सेमीफ़ाइनल में पहुंच सकेगा?
यह पहली बार था जब टी20 क्रिकेट में अफ़ग़ानिस्तान की टीम ऑस्ट्रेलियाई टीम से भिड़ रही थी. लेकिन जैसा प्रदर्शन उन्होंने कंगारुओं के ख़िलाफ़ किया उसकी जितनी तारीफ़ की जाए वो कम है.
मैच में शुरू से ही अफ़ग़ानिस्तान की टीम कंगारुओं पर हावी रही, लेकिन अंत में बाज़ी ऑस्ट्रेलियाई टीम के हाथ लगी. लेकिन अब भी कंगारू टीम की सेमीफ़ाइनल की राह मुश्किल दिख रही है.
ख़तरा इस बात का है कि मौजूदा टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन और मेज़बान ऑस्ट्रेलिया सेमीफ़ाइनल में भी नहीं पहुंच सकेगा. क्या होगा नतीजा ये तो अभी शनिवार को होने वाले इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच मुक़ाबले पर टिका है.
क्या हुआ आज के मैच में?
अफ़ग़ानिस्तान के कप्तान मोहम्मद नबी ने टॉस जीत कर ऑस्ट्रेलिया को पहले बल्लेबाज़ी के लिए उतारा. लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के गेंदबाज़ों ने 20 ओवर में केवल 168 रन बनने दिए.
नवीन उल-हक़ ने केवल 21 रन देकर 5.25 की इकॉनमी से गेंदें डालीं और डेविड वॉर्नर, स्टीव स्मिथ, पैट कमिंस के विकेट लिए.
मेज़बान कंगारू टीम की शुरुआत वैसी तो नहीं हुई जैसा कि वो चाहती थी. हालांकि पावरप्ले (पहले छह ओवरों) में कंगारुओं ने 52 रन बना लिए थे, लेकिन इस दरम्यान दोनों ओपनर समेत उसके तीन खिलाड़ी पवेलियन लौट चुके थे.
कप्तान एरॉन फ़िंच की ग़ैर मौजूदगी में कैमरुन ग्रीन ने डेविड वॉर्नर के साथ पारी की शुरुआत की, लेकिन दोनों 48 रन बनने तक आउट हो गए. टिम डेविड की जगह टीम में लाए गए स्टीव स्मिथ भी आने के साथ वापस लौट गए. तब स्कोरबोर्ड पर केवल 52 रन ही थे.
यहां से मिशेल मार्श ने पारी संभालने की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर ली और 30 गेंदों पर 45 रनों की पारी खेली. मार्कस स्टोयनिस ने भी महत्वपूर्ण 25 रन बनाए लेकिन ऑस्ट्रेलियाई पारी का आकर्षक रहे ग्लेन मैक्सवेल जो अपने चिर परिचित अंदाज में दिख रहे थे.
'मैन ऑफ़ द मैच' ग्लेन मैक्सवेल ने 32 गेंदों पर 54 रनों की नाबाद पारी खेली और 168 रनों का एक चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा करने में अहम योगदान दिया.
ऑस्ट्रेलिया ने भले ही 168 रन बना लिए, लेकिन अफ़ग़ानिस्तान जब बल्लेबाज़ी करने उतरा तो विकेटकीपर रहमनुल्लाह गुरबाज़ ने बल्ले से कमाल दिखाया.
उन्होंने केवल 17 गेंदों पर 30 रन जड़ दिए. जहां ऑस्ट्रेलिया ने पावरप्ले में 52 रन बनाए थे, वहीं अफ़ग़ानिस्तान भी बहुत पीछे नहीं था. गुरबाज़ के कमाल से उसने पावरप्ले में 47 रन बना लिए.
गुलबदीन नायब ने भी 23 गेंदों पर 39 रन बनाए. लेकिन 99 के स्कोर पर अफ़ग़ानिस्तान ने तीन विकेट गंवा दी. और यही मैच का टर्निंग पॉइंट भी बना.
लेकिन मैच में तब एक बड़ा मोड़ आया जब राशिद ख़ान ने इसके बाद अपने बल्ले का मुंह खोल दिया.
तब राशिद ख़ान 11 गेंद पर 10 रन बना कर खेल रहे थे. इसके बाद उन्होंने 18वें ओवर की आखिरी दो गेंदों पर छक्का लगाया और एक बार लगने लगा कि जो राशिद ख़ान आईपीएल-2022 में अपनी बल्लेबाज़ी से मैच जिता रहे थे वो कंगारू टीम को भी घुटने टेकने के लिए मजबूर न कर दें.
19वें और 20वें ओवर में राशिद के बल्ले से दो छक्के और इतने ही चौके निकले.
जिस राशिद ने 11 गेंदों पर 10 रन बनाए थे उन्होंने अगले 12 गेंदों पर 38 रन ठोक डाले.
अंतिम ओवरों में अपनी आतिशी बल्लेबाज़ी से राशिद ने 48 रन बनाए और अफ़ग़ानिस्तान को जीत की दहलीज़ तक ले गए, लेकिन अफ़ग़ानिस्तान एक बड़ा उलटफेर करने से चूक गया.
श्रीलंका के ख़िलाफ़ पिछले मैच में राशिद को घुटने की तक़लीफ़ का सामना करना पड़ा था. लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से ऑस्टेलिया की पेशानी पर बल डाल दिया.
भले ही ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच चार रन से जीत लिया हो, लेकिन अपने दमदार प्रदर्शन से दिल अफ़ग़ानिस्तान ने जीता.
अफ़ग़ानिस्तान-ऑस्ट्रेलिया के मैच के बाद हर्ष भोगले ने जो प्रतिक्रिया दी वो उसके प्रदर्शन को बख़ूबी बयां करती है.
कमेंटेटर हर्ष भोगने ने ट्वीट किया, "क्या ज़ोरदार मैच हुआ. अफ़ग़ानिस्तान भले हार गया, लेकिन बातें उनकी ही हो रही थीं. ऑस्ट्रेलिया आसानी से जीत सकता था लेकिन वास्तव में वो कैसे जीते, ये देख कर अच्छा लगा कि नैरेटिव कैसे बदलता गया."
नबी ने छोड़ी कप्तानी
ऑस्ट्रेलिया के हारने के बाद मोहम्मद नबी ने ट्विटर पर एक पोस्ट डाल कर कप्तानी छोड़ने की घोषणा कर दी.
अफ़ग़ानिस्तान की टीम अपने पांच में एक भी मुक़ाबले जीत नहीं सकी. तीन में उसे हार का सामना करना पड़ा तो दो मैच बारिश की वजह से धुल गए.
नबी ने ट्वीटर पर लिखा कि "जो नतीजे टी20 वर्ल्ड कप में आए हैं उसकी न तो हमें और न ही हमारे समर्थकों को उम्मीद थी."
"बीते एक वर्ष से, हमारी टीम इस टूर्नामेंट की तैयारी कर रही थी, लेकिन हमारा प्रदर्शन उस स्तर का नहीं रहा जो इस जैसे बड़े टूर्नामेंट में एक कप्तान उम्मीद करता है."
उन्होंने तुरंत प्रभाव से कप्तानी छोड़ने के एलान के साथ ही ये भी लिखा कि वो देश के लिए खेलना जारी रखेंगे.
अफ़ग़ानिस्तान के साथ मुक़ाबले में ऑस्ट्रेलिया के सामने पहला लक्ष्य था कि वो अफ़ग़ानिस्तान को 106 रन से कम पर रोक दे, जिससे उनका नेट रन रेट इंग्लैड से बेहतर हो जाए. लेकिन ये हो न सका.
दूसरा लक्ष्य ये था कि वो अफ़ग़ानिस्तान को 119 रन से अधिक न बनाने दे, जिससे शनिवार को इंग्लैंड के मामूली अंतर से जीतने की स्थिति में नेट रन रेट के आधार पर भी सेमीफ़ाइनल में पहुंचने की उम्मीद कर सके. कंगारू टीम ऐसा भी नहीं कर सकी.
इस मुक़ाबले से पहले ऑस्ट्रेलिया का नेट रन रेट -0.304 था.
केवल 4 रन के अंतर से मिली जीत ने ऑस्ट्रेलिया के रन रेट पर बहुत असर नहीं डाला.
उसके नेट रन रेट में मामूली सुधार हुआ, जो अब -0.173 पर है.
अब ऑस्ट्रेलिया केवल दो ही तरीक़ों से सेमीफ़ाइनल में पहुंच सकेगा.
अब उसे शनिवार को इंग्लैंड पर श्रीलंका की जीत या बारिश की वजह से इस मैच के धुलने की उम्मीद करनी होगी.
यानी श्रीलंका पर इंग्लैंड की जीत से मेज़बान ऑस्ट्रेलिया टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगा.
मेज़बान का सेमीफ़ाइनल से रहा है छत्तीस का आंकड़ा
ऐसा नहीं है कि यह पहली बार होगा कि मेज़बान टीम टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफ़ाइनल में नहीं पहुंचेगी. इससे पहले भी अधिकांश मौके पर मेज़बान को अंतिम चार से बाहर ही रहना पड़ा है. केवल दो मौके ऐसे आए जब मेज़बान टीम सेमीफ़ाइनल में पहुंची, जबकि एक मौके पर वो फ़ाइनल में भी पहुंची है.
पहली बार टी20 वर्ल्ड कप खेला गया था तब दक्षिण अफ़्रीका मेज़बान देश था, लेकिन वो सेमीफ़ाइनल में नहीं पहुंच सका था. उस साल भारत और पाकिस्तान की टीमें फ़ाइनल खेली थीं. जहां महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने ख़िताब अपने नाम किया था.
2009 में भी मेज़बान इंग्लैंड सेमीफ़ाइनल में नहीं पहुंच सका था. तब भारतीय टीम भी अंतिम चार में मौजूद नहीं थी. फ़ाइनल मुक़ाबले में पाकिस्तान ने श्रीलंका को हरा कर ट्रॉफ़ी जीती थी.
अगले साल यानी 2010 में एक बार फिर मेज़बान वेस्टइंडीज़ सेमीफ़ाइनल में नहीं पहुंचा. तब वनडे वर्ल्ड कप कभी न जीत पाने वाले इंग्लैंड ने चिर प्रतिद्वंद्वी ऑस्ट्रेलिया को हरा कर ख़िताब जीता था. (बाद में इंग्लैंड ने 2019 का वनडे वर्ल्ड कप भी जीता)
2012 में श्रीलंका ने मेज़बानी की. यह पहला मौक़ा था जब कोई मेज़बान सेमीफ़ाइनल और फिर फ़ाइनल तक पहुंचा था. हालांकि फ़ाइनल में वेस्टइंडीज़ की टीम पहली बार यह ट्रॉफ़ी जीतने में कामयाब हुई थी.
2014 में मेज़बान बांग्लादेश सेमीफ़ाइनल में नहीं पहुंच सका. तब श्रीलंका ने भारत को हरा कर यह ट्रॉफ़ी जीती थी.
दो साल बाद 2016 में एक बार फिर मेज़बान भारत सेमीफ़ाइल में पहुंच गया. लेकिन वो इस दहलीज़ को पार नहीं कर सका. फ़ाइनल में इंग्लैंड को हरा कर वेस्टइंडीज़ की टीम दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप की चैंपियन बनी. आज तक वेस्टइंडीज़ के अलावा कोई और टीम यह कारनामा नहीं दोहरा सकी है.
बीते वर्ष 2021 में चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई टीम बनी. उसने फ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड को हराया. जबकि होस्ट यूएई और ओमान सेमीफ़ाइनल में नहीं पहुंच सके थे.
ये वो ही टूर्नामेंट था जिसे पहले भारत में खेला जाना था, लेकिन कोरोना महामारी के चलते भारत ने उसे यूएई और ओमान में करवाने का निर्णय लिया. (bbc.com/hindi)