भिलाई नगर, 9 जनवरी। ग्राम छावनी में आज दोपहर को पति द्वारा पत्नी की हत्या कर दी गई। आरोपी पति के द्वारा बाद में फांसी के फंदे पर झूलकर आत्महत्या करने का भी प्रयास किया गया जिसका इलाज लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में चल रहा है। जामुल पुलिस द्वारा अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।
जामुल पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आज दोपहर को ग्राम छावनी निवासी राजकुमार पटेल 42 वर्ष के द्वारा अपने पत्नी श्रीमती अनीता पटेल 35 वर्ष के सिर पर रॉड से हमला करके उसकी हत्या कर दी गई। इसके पश्चात आरोपी पति के द्वारा खुद को भी खत्म करने का प्रयास किया गया। सफलता नहीं मिलने पर फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया गया। पड़ोसियों से मिली सूचना पर जामुल पुलिस ने घटनास्थल पहुंचकर घायल राजकुमार पटेल को शासकीय अस्पताल सुपेला में भर्ती कराया। जहां उसका इलाज चल रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों पति-पत्नी मजदूरी का कार्य कर साथ में रहते हैं। मूलत पाटन के रहने वाले हैं। इनकी एक बेटी है जो अपने चाचा के साथ रहती है। फिलहाल जामुल पुलिस के द्वारा अपराध पंजीबद्ध कर पति पत्नी के बीच हुए विवाद का कारण ज्ञात करने का प्रयास किया जा रहा है।
इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता से उड़ान भरने के बाद एक यात्री विमान लापता हो गया है. इस विमान में 62 लोग सवार थे. अधिकारियों का कहना है कि श्रीविजया एयर बोइंग 737 से, जकार्ता से वेस्ट कलिमनतन प्रांत के रास्ते में संपर्क टूट गया और विमान लापता हो गया.
जकार्ता, 9 जनवरी | फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटरडार24.कॉम के मुताबिक, ये विमान एक मिनट से भी कम समय में दस हज़ार फुट नीचे आया. परिवहन मंत्रालय का कहना है कि विमान का पता लगाने के लिए राहत और बचाव दलों को सक्रिय किया गया है.
श्रीविजया एयर का कहना है कि वो इस उड़ान के बारे में और अधिक जानकारी जुटा रही है. अधिकारियों का कहना है कि लापता हुए विमान से आख़िरी संपर्क स्थानीय समयानुसार दोपहर 2.40 मिनट पर हुआ था.
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्हें कम से कम एक धमाके की आवाज़ सुनाई दी. सोलिहिन नामक एक मछुआरे ने बीबीसी की इंडोनेशियन सर्विस को बताया कि उन्होंने हादसा होते हुए देखा, जिसके बाद उन्होंने अपने कैप्टन के साथ द्वीप लौट जाने का फ़ैसला किया.
उन्होंने बताया, ''विमान बिजली की तरह समुद्र में गिरा और पानी में धमाका हो गया. हम नज़दीक थे कि कुछ मलबा हमारे जहाज़ से टकराया.''
नेशनल सर्च एंड रेस्क्यू एजेंसी के एक अधिकारी बामबैंग सुरयो अजी का कहना है कि ''हम हादसे की सटीक जगह का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि आज रात तक इसका पता चल जाएगा. समुद्र की गहराई लगभग 20-23 मीटर है.''
उन्होंने स्वीकार किया कि समुद्र में एक जगह पर मलबा नज़र आया है.
'26 साल पुराना था विमान'
बीबीसी के बिज़नेस संवाददाता थियो लेगेट के मुताबिक, इंडोनेशिया में कई विमान बहुत पुराने हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उड़ान भर रहे हैं.
उनका कहना है शनिवार को लापता हुआ विमान 26 साल पुराना था. सुरक्षित उड़ानों के मामलों में इंडोनेशिया का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है. इंडोनेशिया में ऐसे कई विमान अभी भी प्रयोग में लाए जा रहे हैं जो अस्सी और नब्बे के दशक में बने थे.
इंडोनेशिया में इससे पहले दो बड़े विमान हादसे हो चुके हैं जिनमें 737 मैक्स बोइंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए थे. हालांकि शनिवार को जकार्ता से उड़ा विमान 737 मैक्स श्रेणी का नहीं है.
अक्तूबर 2018 में इंडोनेशियन लायन एयर की फ्लाइट हादसे का शिकार हुई थी जिसमें 189 लोग मारे गए थे और विमान का मलबा समुद्र में मिला था.(bbc.com/hindi)
रामल्ला, 9 जनवरी | फिलिस्तीनी अधिकारियों ने दक्षिणी वेस्ट बैंक के हेब्रोन शहर में स्थित प्राचीन इब्राहिमी मस्जिद स्थल को 10 दिनों के लिए बंद करने के इजरायल के फैसले की निंदा की है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, धार्मिक मामलों और इस्लामी संबंधों पर फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के सलाहकार महमूद अल-हबाश ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि इजरायल द्वारा मस्जिद को बंद करना एक 'युद्ध अपराध' है।
अल-हबाश ने कहा, "मुस्लिम उपासकों को मस्जिद में नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध लगाने से दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाएं भड़क सकती हैं।" उन्होंने कहा कि यह अल-वक्फ विभाग में हस्तक्षेप है।
फिलिस्तीनी अल-वक्फ मंत्रालय पवित्र स्थलों का प्रभारी है, मुख्य रूप से फिलिस्तीनी क्षेत्रों में स्थित मस्जिदों का।
इससे पहले इजरायली मीडिया ने बताया था कि यहूदी देश के अधिकारियों ने हेब्रोन में फैले कोविड-19 से निपटने के लिए एहतियाती उपायों के तहत मस्जिद को 10 दिनों के लिए बंद करने का फैसला किया है।
इब्राहिमी मस्जिद के निदेशक हेफजी अबू स्नीनेह ने कहा, "इजरायल का बहाना निराधार है, क्योंकि सभी उपासक और आगंतुक मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग के सुरक्षा उपायों को अपनाकर स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन कर रहे थे।"
नई दिल्ली, 9 जनवरी | कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कृषि कानूनों पर सरकार पर शुरू से हमलावर रहे हैं, लेकिन अब उन्होंने हमला करने के लिए तुकबंदी शैली को अपना लिया है। उन्होंने सरकार पर हमला करने की रणनीति में बदलाव किया है और लोग भी नोटिस कर रहे हैं कि वह कविता और तुकबंदी के साथ सरकार पर हमला कर रहे हैं।
शुक्रवार को, राहुल गांधी ने हिंदी में ट्वीट किया, "नीयत साफ नहीं है जिनकी, तारीख पे तारीख देना स्ट्रैटिजी है उनकी। "
पार्टी में मौजूद सूत्रों ने कहा कि प्रत्येक ट्वीट राहुल खुद से लिखते हैं, लेकिन वह दूसरे से इनपुट ले सकते हैं।
किसान दिल्ली की सीमाओं पर बीते 45 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं और अबतक सरकार से बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला है।
नई दिल्ली, 09 जनवरी | सरकार अपनी गोल्ड बॉन्ड योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन करने और डिजिटल मोड के माध्यम से भुगतान करने वाले निवेशकों को 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट देगी। वित्त मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, सब्सक्रिप्शन के लिए डिजिट मोड का उपयोग करने वाले निवेशकों के लिए, सोने के बॉन्ड की कीमत 5,054 रुपये प्रति ग्राम होगी।
अन्यथा, सदस्यता अवधि के दौरान बॉन्ड का निर्गम मूल्य 5,104 रुपये प्रति ग्राम होगा।
नई दिल्ली, 9 जनवरी | भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) ने शनिवार को किसानों के आंदोलन में हो रही मौतों पर प्रकाश डालते हुए केंद्र पर निशाना साधा और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके परिजनों को सांत्वना तक नहीं दिया है। कांग्रेस की युवा इकाई ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने अभी तक विरोध स्थल का दौरा भी नहीं किया है और वह आंदोलनकारी किसानों से मुलाकात नहीं कर रहे हैं।
यूथ कांग्रेस ने कहा कि वह गांवों से मिट्टी एकत्र करेंगे और भारत का नक्शा तैयार करेंगे।
यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, पार्टी की युवा इकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी. ने कहा, "किसान अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीके से ऐसी ठंड में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि पुलिस किसानों पर निर्दयतापूर्वक लाठीचार्ज कर रही है, आंसूगैस छोड़ रही है और पानी की बौछारें कर रही है, जो कि सरकार के तानाशाही चेहरे को दिखाता है।
उन्होंने कहा कि खुद को गरीब, मजदूर, किसान का बेटा बताने वाले प्रधानमंत्री अमेरिका के लोकतंत्र की चिंता तो करते हैं, लेकिन उन्हें अपने आवास से महज 10 किलोमीटर दूर धरने पर बैठे हुए लाखों किसानों की आवाज सुनाई नहीं देती।
श्रीनिवास ने कहा, "वास्तव में यह सरकार गूंगी, बहरी और तानाशाह हो गई है।"
कांग्रेस की युवा इकाई ने केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के सम्मान में शनिवार को 'एक मुट्ठी मिट्टी शहीदों के नाम' अभियान शुरू किया।
भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास के मुताबिक, किसान आंदोलन में 60 से अधिक किसानों की शहादत हुई है और उनके सम्मान में यह अभियान शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया कि मिट्टी से भारत का नक्शा बनाया जाएगा और यह नक्शा किसानों के योगदान के लिए एक स्मारक के तौर पर होगा और यह युवा कांग्रेस की ओर से उन्हें एक श्रद्धांजलि होगी।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव कृष्ण अल्लवरु ने कहा कि किसानों, माताओं एवं बहनों और बच्चों द्वारा विभिन्न स्थानों पर किए जा रहे अहिंसक और लोकतांत्रिक आंदोलन को लेकर बरती जा रही क्रूरता किसानों का अपमान है।
उन्होंने कहा, "यह संविधान में वर्णित भारत की संस्कृति नहीं है।"
उन्होंने कहा कि एक मुट्ठी मिट्टी शहीदों के नाम अभियान के द्वारा भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को गांव-गांव भेजा जाएगा, जहां से वह एक मुट्ठी मिट्टी एकत्रित करेंगे और यह संदेश भी देंगे कि संविधान ने अधिकार दिया है कि किसान अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अहिंसक आंदोलन के लिए स्वतंत्र हैं।
उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार मनमाने ढंग से किसी भी व्यक्ति पर उसकी मर्जी के खिलाफ कोई कानून नहीं थोप सकती।
गुवाहाटी, 9 जनवरी | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के आह्वान के तहत और महात्मा गांधी के प्रति सम्मान के तौर पर भाजपा की अगुवाई वाली असम सरकार जल्द ही राज्य के चतुर्थ श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों को खादी के कपड़े मुफ्त देना शुरू करेगी। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। सीएम सचिवालय के एक अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को अधिकारियों और संबंधित मंत्री के साथ बैठक की और असम में उत्पादित सिल्क की एक किस्म 'एरी' से बने खादी शर्ट, और शॉल और स्टोल इस महीने से चरणबद्ध तरीके से चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को प्रदान करने का फैसला किया।
अधिकारी ने कहा, "खादी के कपड़े पुरुष और महिला दोनों कर्मचारियों को उपहार के रूप में दिए जाएंगे और वे उन्हें अपनी आधिकारिक यूनिफार्म के रूप में इस्तेमाल करेंगे।"
राज्य के सरकारी कर्मचारियों को मुफ्त खादी के कपड़े प्रदान करने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम 'आत्मनिर्भर' अभियान का हिस्सा है और असमिया बुनकरों को बढ़ावा देने के लिए है।
सोनोवाल ने कहा कि इस कदम से असम में खादी उद्योग मजबूत होगा और स्थानीय बुनकरों को सशक्त बनाया जाएगा, क्योंकि पहले चरण में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को उपहार के रूप में दिए जाने वाले लगभग 80,000 खादी शर्ट, शॉल और स्टोल की जरूरत होगी।
उन्होंने बैठक में मौजूद हथकरघा और वस्त्र मंत्री रंजीत दत्ता से योजना के सफल और शीघ्र कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए कहा।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी उद्योग स्थानीय उद्योग का गौरव है और इसका प्रचार हर एक पुरुष और महिला के आत्मनिर्भरता और सशक्तीकरण की विचारधारा का समर्थन करने के लिए होगा।
मुंबई, 9 जनवरी | फिल्मकार श्रेयसी चौधरी के निर्देशन में बनी फिल्म 'द ग्रीड : लोभ' नशे के खतरे और आम आदमी की जिंदगी पर इसके प्रभाव की बात करती है। श्रेयसी का कहना है कि फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह से ड्रग्स से संबंधित समस्याओं का सामना कर एक बेहतर जिंदगी को जीया जा सकता है। श्रेयसी ने आईएएनएस को बताया, "जब दर्शक इस फिल्म को देखेंगे, तब उन्हें समझ में आएगा कि यह हमारी दैनिक मानसिकता के बारे में हैं। हम सभी कुछ न कुछ मायनों में लोभी हैं। जिंदगी में चीजों को हासिल करने के लिए लोग कई बार हदें पार कर देते हैं, लेकिन वे इसके परिणामों के बारे में नहीं सोचते हैं, तो कुछ यही हमने फिल्म में दिखाने का प्रयास किया है।"
यह फिल्म एक आम आदमी की महत्वाकांक्षाओं के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो करोड़पति बनने के अपने सपने के लिए गलत राह पकड़ लेता है।
फिल्म में कुलदीप सिंह, प्रिया सोनी, नंदन मिश्रा और अन्नपूर्णा वी. भैरी जैसे कलाकार हैं। इसे एमएक्स प्लेयर, हंगामा प्ले, एयरटेल एक्सट्रीम और वीआई पर प्रसारित किया जाएगा।
नई दिल्ली, 9 जनवरी | अरशद वारसी का मानना है कि एक अभिनेता के रूप में स्टीरियोटाइप होना आसान है और उससे दूर होना बहुत मुश्किल है। अभिनेता का कहना है कि वह कॉमिक भूमिकाओं में अपनी भारी लोकप्रियता के बावजूद छवि के जाल से बचने में सफल रहे हैं, क्योंकि उनकी गंभीर भूमिकाओं को भी उतना ही पसंद किया गया।
अरशद ने आईएएनएस को बताया, "यह मुश्किल है (स्टीरियोटाइप को तोड़ना)। हम सभी स्टीरियोटाइप हो जाते हैं, हम सभी किरदार करते हैं, हर अभिनेता करता है। यही है कि आप एक निश्चित भूमिका करते हैं या आप कुछ ऐसा करते हैं जो लोग आनंद लेते हैं, और फिर वैसे ही किरदार आने लगते हैं, क्योंकि आपका वह किरदार बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने लगता है।"
उन्होंने कहा, "इससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। सौभाग्य से मैं पूरी तरह से इससे निकलने में कामयाब रहा, क्योंकि लोगों ने मेरे गंभीर अभिनय के साथ-साथ मेरी कॉमेडी का भी आनंद लिया।"
अभिनेता ने आगे कहा, "आमतौर पर, जब कोई कॉमेडी करता है, तो उसकी गंभीर भूमिकाएं बहुत कमाल नहीं कर पातीं, क्योंकि आप उस व्यक्ति के इमेज को मन से बाहर नहीं निकाल पाते हैं।"
अरशद ने किरदार को अलग-अलग तरीके से पेश करने को लेकर कहा, "मैं चरित्र में इस कदर ढल जाता हूं कि मैं आपको भूलने में मदद करता हूं कि मैं कौन हूं। मैं आपको यह भूलने में मदद करता हूं कि मेरा पिछला किरदार क्या था, और वह मेरे लिए काम करता है।"
पिछले साल उन्होंने मनोवैज्ञानिक थ्रिलर 'असुर' के साथ अपना डिजिटल डेब्यू किया। उन्हें फिल्म 'दुर्गामती : द मिथ' में एक राजनेता की भूमिका में भी देखा गया।
अरशद फिलहाल जैसलमेर में अक्षय कुमार, कृति सैनन और जैकलीन फर्नाडीज के साथ 'बच्चन पांडे' की शूटिंग कर रहे हैं। शूट मार्च तक जारी रहेगा।
नई दिल्ली, 9 जनवरी | केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शनिवार को कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई वाली बैंकों के कंसोर्टियम से 4,736.57 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा करने वाली हैदराबाद की एक कंपनी के खिलाफ उसने केस दर्ज किया गया है, जिसमें कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक और गारंटर सहित और भी कई डायरेक्टर्स शामिल हैं। इसके साथ ही एजेंसी ने कई जगहों पर छापेमारी भी की है। सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि उनके द्वारा हैदराबाद के कोस्टल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर और गारंटर सब्बिनेनी सुरेंद्र, एमडी और गारंटर गरपति हरिहर रॉव, होल-टाइम डायरेक्टर और डायरेक्टर फाइनेंस श्रीधर चंद्रशेखरन निवारथी, गारंटर और मोर्टगैगर ए.के. रामुलु, के. अंजम्मा, रवि कैलास बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर/डायरेक्टर रमेश पासुपुलेटी और गोविंद कुमार इनाणी सहित कुछ अज्ञात लोक सेवकों व अन्यों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
अधिकारी ने कहा कि एजेंसी ने आईडीबीआई बैंक, कैनरा बैंक, बीओबी, बीओएम, पीएनबी, यूबीआई, एक्सिम बैंक की तरफ से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा की गई एक शिकायत पर मामला दर्ज किया है, जिसमें बैंकों ने इन पर कथित तौर पर 4,736.57 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है।
अधिकारी ने कहा कि बैंक ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपी ने अज्ञात लोक सेवकों सहित अन्य लोगों के साथ मिलकर बैंकों के कंसोर्टियम को चूना लगाया है।
इंडोनेशिया, 9 जनवरी | इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता से उड़ान भरने के बाद एक यात्री विमान लापता हो गया है. इस विमान में 62 लोग सवार थे.
अधिकारियों का कहना है कि श्रीविजया एयर बोइंग 737 से, जकार्ता से वेस्ट कलिमनतन प्रांत के रास्ते में संपर्क टूट गया, जिसके बाद विमान लापता हो गया.
फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटरडार24.कॉम के मुताबिक, ये विमान एक मिनट से भी कम समय में दस हज़ार फुट नीचे आया.
परिवहन मंत्रालय का कहना है कि विमान का पता लगाने के लिए राहत और बचाव दलों को सक्रिय किया गया है.
श्रीविजया एयर का कहना है कि वो इस उड़ान के बारे में और अधिक जानकारी जुटा रही है.
अधिकारियों का कहना है कि लापता हुए विमान से आख़िरी संपर्क स्थानीय समयानुसार दोपहर 2.40 मिनट पर हुआ था.
नेशनल सर्च एंड रेस्क्यू एजेंसी के एक अधिकारी बामबैंग सुरयो अजी का कहना है कि ''हम हादसे की सटीक जगह का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि आज रात तक इसका पता चल जाएगा. समुद्र की गहराई लगभग 20-23 मीटर है.''
उन्होंने स्वीकार किया कि समुद्र में एक जगह पर मलबा नज़र आया है.
इंडोनेशिया में इससे पहले दो बड़े विमान हादसे हो चुके हैं जिनमें 737 मैक्स बोइंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए थे. हालांकि शनिवार को जकार्ता से उड़ा विमान 737 मैक्स श्रेणी का नहीं है.
अक्तूबर 2018 में इंडोनेशियन लायन एयर की फ्लाइट हादसे का शिकार हुई थी जिसमें 189 लोग मारे गए थे और विमान का मलबा समुद्र में मिला था.(bbc.com/hindi)
नई दिल्ली, 9 जनवरी | बीते चार महीनों में भारत के तमाम न्यूज़ चैनलों से लेकर अख़बारों और वेबसाइटों पर किसानों का मुद्दा छाया हुआ है.
वहीं, 'न्यूयॉर्क टाइम्स' से लेकर 'द गार्डियन' जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अख़बार भारतीय किसानों के विरोध को दुनिया भर में पहुँचा रहे हैं.
ट्विटर से लेकर फेसबुक पर किसान आंदोलन का मुद्दा 26 दिनों के बाद भी गरम है. लेकिन जहां एक ओर इस मुद्दे का हल निकलता नहीं दिख रहा है.
वहीं, किसान आंदोलन में शामिल कुछ युवाओं ने 'किसान एकता मोर्चा' नाम से एक आईटी सेल शुरू किया है जिसमें 10 से 15 लोगों की टीम काम कर रही है.
आईटी सेल के मीडिया कॉऑर्डिनेटर हरिंदर हैप्पी बताते हैं कि विरोध प्रदर्शन में शामिल कुछ युवाओं ने किसानों के विरोध प्रदर्शन से जुड़ी जानकारियों को जनता के बीच पहुंचाने के लिए ये आईटी सेल शुरू किया है.
चार दिन में पॉपुलर हुए सोशल मीडिया अकाउंट
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ से ग्रामीण विकास की पढ़ाई करने वाले हरिंदर कहते हैं, "हम सभी युवा काफ़ी समय से खेती पर मंडरा रहे संकट को देख रहे हैं. एक तरह से हम ये संकट झेलते हुए बड़े हुए हैं. लेकिन अब इन तीन कृषि क़ानूनों की वजह से किसानों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है. इस वजह से हम इस संघर्ष में शामिल हुए."
कुछ दिनों पहले शुरू हुए किसान एकता मोर्चे के फेसबुक फॉलोअर्स की संख्या 1.30 लाख के पार पहुंच चुकी है.
वहीं, ट्विटर फॉलोअर्स 94.6 हज़ार के पार पहुँच चुके हैं. यूट्यूब चैनल के सब्सक्राइबर्स की संख्या 6.75 लाख हो चुकी है.
और इन सोशल मीडिया अकाउंट्स पर विरोध प्रदर्शन के भाषण, फैक्ट चेक, और काउंटर आर्ग्यूमेंट डाले जा रहे हैं.
लेकिन सवाल ये उठता है कि आख़िर इस आईटी सेल को बनाने की ज़रूरत क्या थी.
स्थितियां चुनौतीपूर्ण
बढ़ती सर्दी और ज़्यादा काम के साथ साथ हरिंदर जैसे कई युवा अपनी आईटी सेल को चलाने में उपकरणों की कमी का भी सामना कर रहे हैं.
हरिंदर कहते हैं, "हम इस आंदोलन में उस दिन से ही सक्रिय रूप से लगे हैं जब से कॉल आया था कि दिल्ली चलो. इसके बाद से हम घर नहीं गए हैं. अभी चार दिन पहले हमने आईटी सेल शुरू किया है. हमारे किसान नेताओं से लेकर सभी लोग हमारी इस पहल का स्वागत कर रहे हैं. हमें सभी का समर्थन हासिल है क्योंकि ये हमारा व्यक्तिगत नहीं सामूहिक प्रयास है."
"हम चाहते हैं कि हम अपनी आईटी सेल से बीजेपी की आईटी सेल का सामना कर सकें. हमारे पास संसाधन कम हैं. दो तीन लैपटॉप हैं. स्थानीय स्तर पर एक घर किराए पर लेकर वहीं, ये सब काम शुरू किया है हमने. हमारी कोशिश है कि किसान नेताओं के भाषणों को लाइव दिखाया जा सके. इसमें हम फिलहाल समस्या का सामना कर रहे हैं. और स्थितियां चुनौती पूर्ण हैं, ज़्यादा लोगों की ज़रूरत है, ऐसे में हम काम के घंटे बढ़ाकर काम कर रहे हैं."
हरिंदर बताते हैं, "दिल्ली में हमारे साथ कुल दस लोग हैं जो कि आईटी सेल का काम संभाल रहे हैं. इनमें से किसी के पास पाँच साल का अनुभव है तो किसी के पास दस सालों का अनुभव है. ये लोग आईटी बैकग्राउंड से आते हैं. और इस टीम के लीडर बलजीत सिंह हैं. लेकिन ये पर्याप्त नहीं है जिसकी वजह से हमें ज्यादा देर तक काम करना पड़ता है. कभी कभी तो सुबह चार बजे तक काम करना पड़ता है."
बीजेपी आईटी सेल का सामना?
किसान आंदोलन को बीते 26 दिनों में अलग-अलग ढंग से प्रोपेगैंडा का शिकार होना पड़ा है. और किसान आंदोलन को बढ़ा चढ़ाकर दिखाने वाली पोस्ट्स भी सामने आई हैं. फैक्ट चैक करने के लिए जानी जाने वाली वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ ने तमाम ख़बरों का खंडन किया है.
लेकिन हरिंदर बताते हैं, "हम उन बातों का खंडन करते हैं जो सरकार की ओर से आती हैं. उदाहरण के लिए अगर प्रधानमंत्री मोदी झूठ बोलते हैं तो हम अपने वीडियो में उनके बाद खंडन लगाते हैं. जिससे लोगों को पता चल जाए कि सही क्या है."
"पहले चल रहा था कि किसान आतंकवादी हैं, खालिस्तानी हैं. तो ऐसे दुष्प्रचारों को हम काउंटर करेंगे. इसके साथ ही सरकार के कुछ नुमाइंदे ये कह रहे हैं कि किसान भ्रमित हो रहा है, और एपीएमसी नहीं हटेगी आदि, इस सबको हम अपने नेताओं की ओर से काउंटर करा रहे हैं. इसके साथ ही पंजाब में जो कुछ हो रहा है, उसे हम यहां दिखा रहे हैं. उदाहरण के लिए, लोग जियो की सिम हटवा रहे हैं और अपनी ज़मीनों से जियो के टावर उखाड़ रहे हैं. उनमें हम बत्तियां गुल करेंगे. हम इस सबको भी अपने पेज़ पर डाल रहे हैं ताकि बीजेपी आईटी सेल वाले ये सब की जानकारी लें. लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूँ कि हम यहां जो कुछ भी दिखा रहे हैं, डाल रहे हैं, वो सब कुछ पूरी तरह सच है."
लेकिन अगर इस आईटी सेल को सच-झूठ, सही-गलत से परे हटते हुए देखा जाए तो किसान एकता मोर्चा आधिकारिक रूप से किसानों का पक्ष रखने वाले मंच के रूप में उभरता दिख रहा है.
हरिंदर कहते हैं, "हमारे पंजाब में ज़िला स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. लेकिन वो सब कुछ मीडिया में नहीं आ पाता है. ऐसे में हमने ऐसी सभी जानकारियां इस मंच के ज़रिए पहुँचाने की कोशिश की है."
मोर्चा के नेता बलजीत सिंह भी एक वीडियो में लोगों से आह्वान करते हुए कहते हैं, "अगर लोग किसानों के समर्थन में किसी भी तरह की गतिविधि करते हैं तो उसकी एक छोटी सी वीडियो क्लिप बनाकर किसान एकता मोर्चा के इनबॉक्स में भेज दें ताकि किसान एकता मोर्चा उसे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचा सके."(bbc.com/hindi)
नई दिल्ली, 9 जनवरी | मोदी सरकार के तीन कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों और केंद्र के बीच आठ दौर की अब तक बातचीत हो चुकी है.
लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा निकलता हुआ नहीं दिख रहा है.
शुक्रवार को हुई बैठक में बातचीत की अगली तारीख़ 15 जनवरी को तय हुई है.
हालांकि किसान संगठनों को इस बातचीत से कोई नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं है.
बीबीसी ने 'भारतीय किसान यूनियन उगराहां' के प्रमुख जोगिंदर सिंह उगराहां से एक लाइव प्रोग्राम में किसानों की रणनीति को लेकर कई सवाल पूछे जिनका उन्होंने खुलकर जवाब दिया.
सवाल: आठ दौर की बातचीत हो चुकी है. क्या नतजा निकलते हुए देख रहे हैं?
जवाब: नतीजा तो नहीं निकला है लेकिन सरकार को ये तो बोलना पड़ गया कि इन क़ानूनों में कुछ न कुछ ग़लती तो हुई है. क़ानूनों में शोध करानी है, जितनी मर्ज़ी शोध करा लो.
सवाल: तो क्या किसान संगठन क़ानून में संशोधन पर बात मानने के लिए तैयार हैं?
जवाब: ये हमारी मांग ही नहीं है. जो नुक़्स चीज़ है, उसे ग्राहक क्यों खरीदेगा? आपकी चीज़ में नुक़्स है, आपने नुक़्स वाली चीज़ बनाई है. उसकी जिम्मेवारी आपकी है. इसे आप अपने पास रखें. हमें ये क़ानून नहीं चाहिए.
सवाल: सरकार अगर क़ानून में कमियों को दूर करने के तैयार है तो इसमें क्या दिक्कत है?
जवाब: आप ले लेंगे? आप दुकान में जाने पर क्या कट लगा हुआ सामान ले लेंगे? हम क्यों लेंगे नुक़्स वाली चीज़."
सवाल: सरकार ये कह रही है कि ये क़ानून किसानों की भलाई के लिए है. आप उनकी बात मानकर देंखें. सरकार इस तरह की बातें कह रही हैं.
जवाब: हमें इतना भी नहीं पता है कि किस बात में हमारी भलाई है और किस बात में हमारी बुराई? हम इतना तो जानते होंगे. हम अगर फसलों को उगा सकते हैं और जब हमें ये पता लग जाता है कि ये बीज पांच दिन में उगेगा और छह महीने में पकेगा और पंद्रह दिन बाद काटा जाएगा. जब हमें इतनी नॉलेज है तो क्या हमें इतना भी दिमाग नहीं है कि हमारे लिए अच्छा क्या है और बुरा क्या है?
सवाल: सरकार ये कह रही है कि किसानों को बहलाया-फुसलाया गया है. किसान समझ नहीं पा रहे हैं, ये बहुत बढ़िया क़ानून है. उनका ये भी कहना है कि बहुत सारे लोग और किसान इन क़ानूनों का समर्थन कर रहे हैं.
जवाब: सरकार ने ये बात हरित क्रांति के समय भी कही थी. उस समय हम आधी ज़मीन में खेती करते थे. जब हम सारी ज़मीन पर खेती करने लगे तो सरकार उस समय कहती थी कि आप मालामाल हो जाएंगे. अनाज पैदा हो गया, गोदाम भर गए तो सिर पर कर्जे का पहाड़ खड़ा हो गया. किसान खुदकुशियां करने लगे. पानी ख़त्म हो गया. बीमारियां बढ़ गईं. पानी गंदा हो गया. हवा गंदी हो गई. क्या फ़ायदा हुआ हमारी हरित क्रांति का. सरकार उसे भी तो डेवलपमेंट कहती थी. ऐसी तरक्की हमें नहीं चाहिए.
सवाल: लेकिन इससे क्या होगा? आप किसानों के इतने बड़े नेता हैं. हज़ारों की संख्या में किसान आपके साथ खड़े हैं. कब तक ऐसा ही चलता रहेगा, कृषि क़ानून का विरोध कर रहे किसान कब तक दिल्ली बोर्डर पर बैठे रहेंगे?
जवाब: अगर डेढ़ महीने के धरने में लोग बढ़ रहे हैं तो कोई बात तो उन्हें अच्छी लगती होगी. तभी तो ये लोग हमारे पास आ रहे हैं. अगर इन्हें हमारे पर विश्वास है तभी तो ये लोग आते हैं. हिंदुस्तान में दो सौ राजनीतिक पार्टियां हैं. कोई पांच दिन सड़क पर बैठकर दिखाए.
सरकार और वे संगठन जो ये कहते हैं कि ये क़ानून अच्छे हैं तो वे लोग पांच दिनों तक कोई धरना लगाकर दिखाएं तो सही. चार तारीख को रात में बारिश हुई थी. कितने लोगों का सामान भीग गया. कपड़े भीग गए, राशन भीग गया. एक बुजुर्ग थर-थर कांप रहा था. नौजवानों ने रात को उसके कपड़े बदले. उसको आग में सेंकाया. खुद गीले रहे, उस बुजुर्ग को सूखे जगह पर रखा. कितने टेंट फट गए. रात कैसे कटी है, पता है? 70 बंदे इस आंदोलन में शहीद हो गए.
सवाल: आप बता रहे हैं कि 70 बंदों की जान जा चुकी है. ऐसे कब तक चलता रहेगा? क्यों अब ठंड तो बढ़ रही है.
जवाब: लड़ने वाले जब तक दम होता है, तब तक लड़ते हैं. लड़ते-लड़ते मारे जाएंगे या जीत जाएंगे.
सवाल: अभी क्या लग रहा है? क्या जीतने का कोई चांस है? नौवीं मीटिंग होने वाली है.
जवाब: हमारे पास हारने के लिए तो कुछ है ही नहीं. हम तो जितना लड़ेंगे, उतना जीतेंगे.
सवाल: अब क्या होगा? क्या 15 जनवरी को होने वाली बातचीत में आप हिस्सा लेंगे?
जवाब: देखेंगे कि अब क्या होता है. हम लोग मीटिंग में जाएंगे और खाली वापस लौट कर भी आएंगे. हमें पहले से ही पता है कि कुछ नहीं होने वाला है."
सवाल: फिर क्यों जा रहे हैं? जब सरकार पर भरोसे की इतनी कमी है तो...
जवाब: जाना तो पड़ेगा. हम नहीं जाएंगे तो फिर सवाल उठेगा कि आप क्यों नहीं गए. यही बात भगत सिंह से पूछा गया था कि जब आप इन अदालतों पर भरोसा नहीं करते हैं तो क्यों इसकी कार्रवाई में हिस्सा ले रहे हैं. तो भगत सिंह ने कहा था कि अदालत के बारे में तो हमें पता है. हम अदालत की पेशी के लिए नहीं आते हैं.
हम लोगों को अपनी बात बताने के लिए आते हैं. हमें मालूम है कि 15 तारीख को कोई नतीजा नहीं निकलेगा. हम तो इस सरकार का पर्दाफाश करने के लिए जाते हैं कि बार-बार बुलाती है लेकिन करती कुछ नहीं है. किसान वापस लौटते हैं तो ये बात अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक जाती है. किसान पिछले डेढ़ महीने से सड़कों पर बैठे हैं.
70 किसान शहीद हो गए. हर बात मीडिया तक जाती है. अगर सरकार बातचीत के लिए बुलाती है और देती कुछ नहीं है तो इसमें सरकार की बदनामी है या हमारी बदनामी?
सवाल: सरकार तो ये कह रही है कि किसान संगठन ज़िद पर अड़े हुए हैं.
जवाब: क्या है हमारी ज़िद. आप बताइए. जब हम कह रहे हैं कि ये क़ानून हमारे काम की चीज़ नहीं है तो क्यों इसे क्यों हम पर थोपा जा रहा है. जिस क़ानून की हमें ज़रूरत ही नहीं है, वो हम पर थोपा जा रहा है. हमें सरकार पर भरोसा नहीं है. सरकार हमारी नहीं है, वो बड़े-बड़े लोगों की सरकार है."
सवाल: ऐसे आरोप लग रहे हैं कि लेफ़्ट के नेता किसानों को प्रभावित कर रहे हैं?
जवाब: लेफ़्ट क्या है? कौन सा लेफ़्ट है और कौन सा राइट. ये हमें नहीं मालूम. हम तो किसान हैं. ये सरकार को पता होगा. कभी वे हमें खलिस्तानी बता देते हैं. कभी हमें नक्सली कह दिया जाता है तो कभी लेफ्ट करार दे दिया जाता है. कभी किसानों को पाकिस्तान का एजेंट कह दिया जाता है तो कभी चीन का एजेंट कहा जाता है. कभी दलाल बोला जाता है, कभी बिचौलिया कहा जाता है. ये क्या है?"
सवाल: क्या इससे किसानों को मनोबल पर असर पड़ता है?
जवाब: अगर किसान खलिस्तानी होते तो यहां हरियाणा के किसान क्यों आते. राजस्थान का किसान यहां किसलिए आता है.
सवाल: 15 जनवरी की मीटिंग के लिए क्या रणनीति है?
जवाब: सरकार आंदोलन को नाकाम करना चाहती है. सरकार लोगों को ये बताना चाहती है कि वे कुछ देने वाली नहीं है. सरकार ये बताना चाहती है कि उसका फ़ैसला ही अंतिम है. लोकतंत्र में यही सिस्टम चल रहा है कि मोदी है तो मुमकिन है. हम यही भरम तोड़ना चाहते हैं कि मोदी है तो मुमकिन नहीं है.(bbc.com/hindi)
सिडनी, 9 जनवरी | भारतीय टीम के बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने कहा है कि रवींद्र जडेजा में खाली गेंद निकालने की काबिलियत है और इसी कारण वह विपक्षी टीम पर दबाव बनाते हैं। जडेजा यहां सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (एससीजी) में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन शनिवार को बल्लेबाजी करते हुए चोटिल हो गए और इसी कारण गेंदबाजी नहीं कर पाए।
जडेजा को बल्लेबाजी करते हुए मिशेल स्टार्क की गेंद बाएं हाथ के अंगूठे पर लगी थी। वह 28 रन बनाकर नाबाद लौटे थे लेकिन गेंदबाजी करने नहीं आए।
पुजारा ने कहा, "जब आप रवींद्र जडेजा जैसा गेंदबाज खो देते हैं तो यह आसान नहीं होता है। उन्होंने पहली पारी में चार विकेट लिए थे। वह एक छोर से लगातार एक ही जगह गेंदबाजी कर सकते हैं। वह ऐसे गेंदबाज हैं जो बल्लेबाजों पर खाली गेंद फेंकते हुए दबाव बनाते हैं। वह मैदान पर भी काफी अहम होते हैं सिर्फ गेंदबाज के तौर पर नहीं बल्कि फील्डर के तौर पर भी। उनका न होना बड़ा झटका है।"
पुजारा ने कहा कि जडेजा के बिना भारतीय बल्लेबाजी कमजोर है, खासकर तब जब मोहम्मद शमी, उमेश यादव और ईशांत शर्मा टीम में नहीं हैं।
पुजारा ने कहा, "अगर आप हमारा गेंदबाजी आक्रमण देखेंगे तो हमारी टीम में कई ऐसे हैं जो अपना पहला या दूसरा टेस्ट मैच खेल रहे हैं। वह सीख रहे हैं। वह गेंदबाजी में सुधार कर रहे हैं। हमारा गेंदबाजी आक्रमण कम अनुभवी है। यह एक अच्छा मौका है उनके लिए कि वह सीखें और सुधार करें।"
पुजारा ने कहा, "टीम प्रबंधन और अजिंक्य ने गेंदबाजों से बात की है। आप उन पर ज्यादा दबाव नहीं डाल सकते। यह नवदीप सैनी का पहला मैच है और सिराज का दूसरा। हां वह गलती करेंगे। आपको सिर्फ उन्हें सैटल होने के लिए थोड़ी छूट देनी होगी खासकर तब जब आप सिडनी में गेंदबाजी कर रहे हैं, यह आसान नहीं है। इसलिए मैं उन पर ज्यादा दबाव नहीं बनाऊंगा। उन्हें कुछ और चीजें सीखनी होगी और मुझे पूरा भरोसा है कि वह सीखेंगे।"
पुजारा ने कहा कि भारतीय गेंदबाजों को अनुशासन में रहकर गेंदबाजी करनी होगी।
उन्होंने कहा, "ईमानदारी से कहूं तो, कभी न कभी जडेजा की कमी खलेगी क्योंकि हमारे पास सिर्फ चार गेंदबाज हैं और यह अतिरिक्त दबाव डालता है। हमें अपनी गेंदबाजी में थोड़ा अनुशासन बरतने की जरूरत है, लेकिन हम वो करेंगे जो हम सर्वश्रेष्ठ कर सकते हैं।"
32 साल के पुजारा ने कहा कि आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने अच्छी लाइन लैंग्थ के साथ गेंदबाजी की।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि उन्होंने अच्छी लाइन और लैंग्थ के साथ गेंदबाजी की। उनको पिच का अच्छा आइडिया है। इसलिए मुझे लगता है कि आपको उनके गेंदबाजों को श्रेय देना चाहिए क्योंकि मुझे नहीं लगता कि उन्होंने खराब गेंदें फेंकी।"
सिडनी, 9 जनवरी | भारतीय क्रिकेट टीम के अधिकारियों ने शिकायत की है कि सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (एससीजी) पर आस्ट्रेलिया के साथ खेले जा रहे तीसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन शनिवार को तेज गेंदबाज-जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज पर दर्शकों ने नस्लीय टिप्पणी की है। तीसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद आईसीसी, स्टेडियम के सुरक्षा अधिकारी बुमराह और सिराज के साथ लंबी बातचीत करते हुए नजर आए और इस दौरान भारतीय टीम प्रबंधन के सदस्य भी उनके साथ थे।
टीम के कप्तान अजिंक्य रहाणे भी सुरक्षा अधिकारियों से बातें करते हुए नजर आए।
आस्ट्रेलियाई अखबार द डेली टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, "यह पता चला है कि भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि बुमराह और सिराज पर दर्शकों द्वारा बीते दो दिन से फब्तियां कसी जा रही हैं जो नस्लीय हैं। मैदान के रैंडविंक छोर की तरफ जहां सिराज फील्डिंग कर रहे थे वहां दर्शकों में से यह टिप्पणी की गई।"
रिपोर्ट के मुताबिक, "एक और वाक्ये में, जब मैच चल रहा था तब भारतीय स्टाफ बुमराह के पीछे बाउंड्री के बाहर खड़ा था और उनसे बात भी कर रहा था।"
वॉशिंगटन, 9 जनवरी | वाशिंगटन के गवर्नर जे.इंसली ने कहा है कि अमेरिकी राज्य वॉशिंगटन, विधायकों, राज्य के कर्मचारियों और कैपिटल कैंपस की इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठा रहा है। यहां 11 जनवरी को 2021 को विधानमंडल का गठन होना है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने इंसली के बयान के हवाले से कहा, "जैसे ही वॉशिंगटन राज्य के लोगों की ओर से विधायक काम करना शुरू करते हैं, हमें वह सब सुनिश्चित करना होगा जो हम कर सकते हैं, ताकि वे अपने काम को बिना किसी भय, धमकी या उत्पीड़न के कर सकें।"
उन्होंने बयान में कहा, "इस सप्ताह की शुरूआत में वॉशिंगटन डीसी और ओलंपिया में जो हुआ, वह पूरी तरह से अस्वीकार्य थी और इसे दोहराने नहीं दिया जाएगा।"
इंसली ने वाशिंगटन स्टेट पैट्रोल और नेशनल गार्ड को ओलंपिया में सक्रिय कर दिया है। इसमें नियमित तौर पर कैपिटल कैंपस की सुरक्षा करने वाली टीमों के अलावा 750 सदस्य और बड़ी संख्या में वाशिंगटन स्टेट पैट्रोल के सैनिकों को शामिल किया गया है।
इंसली ने कहा है कि वे राज्य में किसी भी ऐसे काम को बर्दाश्त नहीं करेंगे, जिससे लोकतांत्रिक संस्थानों के कामों में बाधा आए।
बता दें कि गवर्नर की यह घोषणा मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों द्वारा कैपिटल बिल्डिंग पर हमला करने के बाद आया है, जिसके जरिये उन्होंने 2020 के राष्ट्रपति चुनावों में जो बाइडेन की जीत की पुष्टि करने की प्रक्रिया भंग करने की कोशिश की थी। हमले में हुई हिंसा में कम से कम पांच लोगों की जान चली गई है।
मुंबई, 9 जनवरी | अभिनेत्री जैकलीन फर्नाडीज ने वीकेंड के दौरान इंस्टाग्राम पर अपनी बचपन की एक तस्वीर साझा की है। अभिनेत्री ने पासपोर्ट साइज की अपनी बचपन की तस्वीर को साझा करते हुए उसके कैप्शन में लिखा, "यह सप्ताहांत है।"
जैकलीन के लिए यह साल काफी व्यस्तताओं से भरा रहने वाला है। उनके पास कई फिल्में हैं।
उन्होंने अपनी हॉरर कॉमेडी फिल्म 'भूत पुलिस' के लिए शूटिंग की है और अक्षय कुमार और कृति सैनन के साथ की फिल्म 'बच्चन पांडेय' के लिए शूटिंग शुरू की है।
वह 'किक 2' में सुपरस्टार सलमान खान के साथ फिर से नजर आएंगी। दोनों ने 2014 की एक्शन हिट फिल्म 'किक' में अभिनय किया था।
जैकलीन रोहित शेट्टी की 'सर्कस' में रणवीर सिंह के साथ स्क्रीन स्पेस भी साझा करेंगी।
नई दिल्ली, 9 जनवरी | दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षकों के लिए टीचिंग इंगलिश टू स्टूडेंट्स ऑफ अदर लैंगवेजेज (टीईएसओएल) का कोर सर्टिफिकेट प्रोग्राम लॉन्च किया गया है। दिल्ली के सरकारी विद्यालयों में यह कार्यक्रम दिल्ली सरकार और अमेरिकी दूतावास के सहयोग से शुरू किया गया है। अभी तक इसके अंतर्गत 800 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है। भारत स्थित अमेरिकी दूतावास के क्षेत्रीय अंग्रेजी भाषा अधिकारी रूथ गूड की मौजूदगी में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस कोर्स की शुरूआत की। इस सर्टिफिकेट प्रोग्राम का उद्देश्य दिल्ली के सरकारी स्कूलों के अंग्रेजी शिक्षकों की भाषा शिक्षण क्षमता बढ़ाकर अंग्रेजी की उत्कृष्ट पढ़ाई सुनिश्चित करना है। इस सर्टिफिकेट प्रोग्राम में 50 शिक्षकों को शामिल किया गया है।
इस दौरान डिप्टी सीएम सिसोदिया ने कहा, "शिक्षकों को अपना कौशल लगातार बढ़ाते रहना जरूरी है। हम चाहते हैं कि हमारे शिक्षक जिन चीजों को पहले से जानते हैं, उन्हें खास तरीके से करें। इस सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम से शिक्षकों को अपनी कक्षाओं में अधिक रचनात्मकता लाने में मदद मिलेगी।"
लॉन्च के दौरान भारत स्थित अमेरिकी दूतावास के क्षेत्रीय अंग्रेजी भाषा अधिकारी रूथ गूड भी मौजूद थीं। उन्होंने दिल्ली सरकार के साथ अमेरिकी दूतावास के लंबे अरसे से जारी सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा, "दिल्ली सरकार के शिक्षकों के उत्कृष्ट प्रशिक्षण की दिशा में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के प्रयास सराहनीय हैं। दिल्ली सरकार के साथ हमारे संबंध काफी महत्वपूर्ण हैं। हमने अब तक लगभग 800 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है और भविष्य में और ऐसे प्रशिक्षण जारी रखेंगे।"
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि अंग्रेजी अब एक जरूरी भाषा बन चुकी है। हमारे शिक्षक अपने छात्रों को अंग्रेजी पढ़ाना जानते हैं। लेकिन हम शिक्षकों को और अधिक रचनात्मक तरीके से छात्रों को पढ़ाने में मदद करना चाहते हैं। इस पाठ्यक्रम के जरिए हम शिक्षण के नए तरीके सीखने के लिए शिक्षकों को हर तरह की सहायता एवं प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
उल्लेखनीय है कि अन्य भाषाओं के स्टूडेंट्स को अंग्रेजी पढ़ाने के लिए इस खास प्रशिक्षण की अवधि कुल 140 घंटे है। टीचिंग इंगलिश टू स्टूडेंट्स ऑफ अदर लैंगवेजेज नामक यह सर्टिफिकेट प्रोग्राम छह माह में पूरा होगा। अमेरिकी दूतावास के क्षेत्रीय अंग्रेजी भाषा कार्यालय ने 2017 से अब तक दिल्ली सरकार के स्कूलों के लगभग 800 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है। उन्होंने मास्टर ट्रेनर भी विकसित किए हैं जो प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल के शिक्षकों को बेहतर अंग्रेजी शिक्षण का प्रशिक्षण देते हैं।
सोल, 9 जनवरी | एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने कहा कि अगले हफ्ते आयोजित होने वाले कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो (सीईएस) में उनके द्वारा स्पीकर के रूप में एक वर्चुअल ह्यूमन को पेश किया जाएगा और ऐसा करने का मकसद दुनिया को उनकी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) से रूबरू कराना है। दक्षिण कोरिया की इस दिग्गज तकनीकि कंपनी ने कहा है कि इस आर्टिफिशियल ह्यूमन का नाम 'रिएह कीम' है, जिसके द्वारा सोमवार को डिजिटली आयोजित हो रहे सीईएस के दौरान कंपनी के प्रेस इवेंट में तीन मिनट के एक प्रेजेंटेशन को प्रस्तुत किया जाएगा।
एलजी ने इस वर्चुअल इंसान को एक 23 वर्षीय महिला म्यूजिशियन के तौर पर डिजाइन किया है। योनहाप समाचार एजेंसी के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर इसके अभी से ही 5,000 से अधिक फॉलोअर्स हो गए हैं।
एलजी ने कहा है कि वर्चुअल ह्यूमन के रिएह नाम का मतलब 'भविष्य का बच्चा' है। हालांकि एलजी ने अभी भी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इवेंट में रिएह कुछ कहेगी भी या नहीं और कंपनी किस तरह से अपने अत्याधुनिक एआई सिस्टम का इस्तेमाल करेगी, लेकिन इस बात की जानकारी मिली है कि रिएह कीम इवेंट में लोगों के साथ कोई बात नहीं करेगी।
सिडनी, 9 जनवरी | भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने कहा है कि आस्ट्रेलियाई गेंदबाज पैट कमिंस की जिस गेंद पर आउट हुए थे वो अनप्लेएबल थी और इस सीरीज की सर्वश्रेष्ठ गेंद भी थी जो किसी भी बल्लेबाज को आउट कर सकती थी। पुजारा ने 176 गेंदों पर 50 रन बनाए, लेकिन भारत को मैच में बनाए रखा। उन्होंने ऋषभ पंत के साथ 53 रनों की साझेदारी भी निभाई।
लंच के बाद हालांकि दोनों बल्लेबाज आउट हो गए।
दिन का खेल खत्म होने के बाद पुजारा ने कहा, "मैं जिस गेंद पर आउट हुआ वो इस सीरीज की सबसे अच्छी गेंद थी। मुझे नहीं लगता कि मैंने जो किया मैं उससे बेहतर कर सकता था, चाहे मैं 100 या 200 पर बल्लेबाजी कर रहा होता, मुझे नहीं लगता कि मैं उस गेंद पर बच पाता। मुझे उस गेंद को खेलना पड़ा। उसमें अतिरिक्त उछाल था। इसलिए एक गेंद थी जो अच्छी थी और दुर्भाग्यवश मैं उससे पार नहीं पा सका। आपको इसे मानना होगा।"
उन्होंने कहा, "कमिंस नंबर-1 टेस्ट गेंदबाज हैं। वह बार-बार इस बात को साबित कर रहे हैं। उनको इस विकेट पर खेलना मुश्किल हो रहा है, जहां ज्यादा मदद नहीं है। उन्हें इस विकेट के बारे में ज्यादा पता है। कई बार वह अनप्लेएबल गेंद डाल देते हैं, जैसे जिस गेंद पर आज मैं आउट हुआ।"
पुजारा ने कहा कि पंत के आउट होने से भारतीय पारी पर असर पड़ा।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि पंत के आउट होने के बाद से पारी बदल गई। हम तब तक अच्छी स्थिति में थे। हम 180 रनों के आस-पास थे और हमारे चार विकेट ही गिर थे। पंत जब आउट हुए तब चीजें बदल गईं और फिर मैं आउट हो गया। हमारा लक्ष्य 330-340 का स्कोर करने का था। हम वहां तक नहीं पहुंच सके। अजिंक्य रहाणे का विकेट बड़ा झटका था, लेकिन हमने वहां से वापसी की और पंत के साथ मेरी अच्छी साझेदारी हुई।"
उनसे जब पूछा गया कि क्या पंत के जाने से उनकी बल्लेबाज पर असर पड़ा? तो उन्होंने इससे मना कर दिया।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि पंत के जाने से मुझपर असर पड़ा, लेकिन हां जब वह थे तो मैं थोड़ा सहज था और हम साझेदारी बना रहे थे। मैं यह नहीं कह सकता क्योंकि पंत को गेंद लगी और वह फिर आउट हो गए। मैं अपनी एकाग्रता खो बैठा। वह शानदार गेंद थी।"
चेन्नई, 9 जनवरी | छात्रों को मुफ्त लैपटॉप वितरण के लिए आपूर्ति में घोटाले का आरोप लगाते हुए द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने शनिवार को तमिलनाडु सरकार से चीनी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने और खराब उत्पादों की आपूर्ति पर भारी जुर्माना लगाने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने सरकार को चीनी कंपनी को किए जाने वाले 456 करोड़ रुपये के भुगतान को भी रोकने की मांग की।
स्टालिन के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ तमिलनाडु लिमिटेड (एलकॉट) ने 1,921 करोड़ रुपये के आउटले पर छात्रों को मुफ्त आपूर्ति के लिए 15.66 लाख लैपटॉप खरीदने की निविदा जारी की थी।
स्टालिन ने चीनी कंपनी का नाम लिए बगैर कहा कि कंपनी ने निविदा के लिए बोली में भाग लिया था और दो मॉडलों के परीक्षण और रिपोर्ट पेश किए थे, जबकि दोनों मॉडलों की कीमत समान थी।
स्टालिन ने कहा कि टेस्ट रिपोटरें के अनुसार, एक लैपटॉप मॉडल ने 465 मार्क्स प्राप्त किए और अन्य 265 मार्क्स प्राप्त किए हैं, जिसका अर्थ है कि मॉडल में से एक प्रदर्शन में निम्न गुणवत्ता का है।
डीएमके नेता के अनुसार, सरकार ने कम प्रदर्शन करने वाले लैपटॉप मॉडल को खरीदने का विकल्प चुना, जिससे चीनी कंपनी ने 469 करोड़ रुपये का कारोबार किया।
इतना ही नहीं, निविदा शर्तो में से एक यह था कि लैपटॉप में अपनी मेमोरी क्षमता को 4 जीबी से बढ़ाकर 8 जीबी करने का प्रावधान होना चाहिए, लेकिन चीनी कंपनी द्वारा आपूर्ति किए गए लैपटॉप में वह सुविधा नहीं थी।
स्टालिन ने कहा कि सरकार ने नए मदरबोर्ड की लागत के लिए अतिरिक्त 392 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है, ताकि लैपटॉप की मेमोरी क्षमता 8 जीबी तक बढ़ाई जा सके।
तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता स्टालिन ने कहा कि राज्य सरकार ने चीनी कंपनी को पहले ही 1,465 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है और चुनावी मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट में 456 करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
चेन्नई, 9 जनवरी | तमिलनाडु में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक की जनरल काउंसिल ने शनिवार को पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में और संयुक्त समन्वयक के रूप में पलानीस्वामी के नामांकन की पुष्टि की। परिषद ने चेन्नई के पास आयोजित बैठक में इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया।
परिषद ने पार्टी के समन्वयक और उपमुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम और पलानीस्वामी को चुनावी सहयोगियों को तय करने और अंतिम रूप देने के लिए अधिकृत किया।
अन्नाद्रमुक की जनरल काउंसिल ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार के फैसले की पुष्टि ऐसे समय की है, जब भाजपा के प्रदेश नेता कह रहे हैं कि इसके हाईकमान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रमुख की घोषणा करेंगे।
हालांकि, एआईएडीएमके नेता तमिलनाडु में यह स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि हमारी पार्टी ही गठबंधन का नेतृत्व करेगी और जो सहमत हैं वे गठबंधन में रह सकते हैं या जा सकते हैं।
जनरल काउंसिल ने अक्टूबर 2020 में गठित 11 सदस्यीय संचालन समिति की भी पुष्टि की।
नई दिल्ली, 9 जनवरी | कोविड-19 महामारी के दौर में भी सर्वश्रेष्ठ भारतीय टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना शांत नहीं बैठे थे। एटीपी का नया सीजन मंगलवार को खत्म हो गया है और डेलरे बीच, यूएसए और एंटाल्या, तुर्की में आयोजनों के साथ, पुरुषों की शीर्ष टेनिस संस्था एटीपी ने केवल पहली तिमाही के लिए कैलेंडर जारी किया है। इसका मतलब है कि खिलाड़ी जुलाई में टोक्यो ओलंपिक तक होने वाले आयोजनों की योजना नहीं बना सकते, लेकिन दो दशक के पेशेवर अनुभव वाले 40 वर्षीय बोपन्ना नींद लेकर समय खराब नहीं करना चाहते।
बोपन्ना ने ओलंपिक चैनल से कहा, "मैं इसे ओलंपिक वर्ष के रूप में नहीं देख रहा हूं, क्योंकि हम यह भी नहीं जानते हैं कि ऐसा होने वाला है या नहीं। अभी यह वक्त हमारी व्यक्तिगत रैंकिंग पर ध्यान केंद्रित करने का है। यह क्वालीफाई करने का एकमात्र तरीका है।"
बोपन्ना 39वें और दिविज शरण 63वें स्थान पर रहने वाले एकमात्र भारतीय खिलाड़ी हैं जो वर्तमान में युगल में शीर्ष-100 में शामिल है। यह उनकी संयुक्त रैंकिंग के साथ एक टीम के रूप में क्वालीफाई करना बाकी है, लेकिन उनके पास सात जुलाई, 2021 तक टोक्यो के लिए एक स्थान पक्का करने का मौका है।
आईटीएफ के नियमों के अनुसार, शीर्ष 10 युगल खिलाड़ी 32-टीम इवेंट के लिए अपने आप क्वालीफाई कर लेंगे और उनके पास साथी का विकल्प भी होगा (300 से नीचे रैंक नहीं हो)। मेजबान के लिए एक टीम का स्थान आरक्षित होने के साथ, बाकी टीमों के पास प्रतिस्पर्धा करने के लिए 21 स्थान निर्धारित है।
भारतीय खिलाड़ी 31 जनवरी से शुरू होने वाले ऑस्ट्रेलियन ओपन इवेंट्स में से एक में मेलबर्न में 2021 के अभियान की शुरुआत करेंगे। वो मेलबोर्न मेजर सहित साल के पहले दो इवेंट के लिए जोआओ सोसा के साथ खेलेंगे।
महामारी ने न केवल जनजीवन को प्रभावित किया, बल्कि आजीविका को भी बाधित किया, लेकिन बोपन्ना उन भाग्यशाली लोगों में से एक थे जिन्होंने समय का सदुपयोग किया और फिटनेस पर ध्यान केंद्रित किया।
टेनिस दौरे पर सालों से विशेष रूप से सख्त कोर्ट पर उन्होंने अपने घुटनों को काफी थकाया। इससे उनके लिए दर्द को भुलाकर खेलना मुश्किल हो गया। छह महीने तक टेनिस से दूरी बनाने के बाद उन्होंने इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए अयंगर योग का सहारा लिया।
उन्होंने कहा, "मेरे घुटने की हड्डियों में लचीलापन पूरी तरह खत्म हो गया। इस कारण मेरी हड्डियां आपस में रगड़ खाती हैं। यह बेहद दर्दनाक होता है। ऐसे दिन भी देखे, जब मैं जागने के बाद भी कोर्ट में नहीं जाना चाहता था।"
बोपन्ना ने कहा, "महामारी के दौरान मैंने तीन महीने के लिए सप्ताह में चार बार अयंगर योग करना शुरू किया। इसने घुटने के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करने और जोड़ों के भार झेलने की क्षमता को बढ़ाने में मदद की। इसने मेरी दशा को सुधारने में भी मदद की है।"
उन्होंने आगे कहा, "इसमें बहुत सारी सामग्री और क्रियाओं का उपयोग किया जाता है- ब्लॉक, रस्सी, विभिन्न प्रकार की ताकत। आप अपने शरीर के वजन का उपयोग करते हैं। यह केवल सांस लेने तक ही सीमित नहीं है। यह एक सक्रिय योग है। मुझे लगता है कि मेरे मूवमेंट में अब कोई रुकावट नहीं है। इससे मन को शांत करने में भी मदद मिली है।"
इसने उन्हें बैंगलोर में रोहन बोपन्ना टेनिस अकादमी में पिछले ढाई सप्ताह के प्री-सीजन प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने में मदद की। सीजन में भाग लेने की बजाय, पहले हफ्ते में खेलकर, आराम करने और तरोताजा हुए बोपन्ना सतर्कता भरे कदम उठा रहे हैं, जो उम्मीद है कि उन्हें ओलंपिक में ले जाएंगे।
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया फिर मोंटपेलियर में जाने की योजना बनाई है। इसके बाद रॉटरडैम, 500 इवेंट। हालांकि पता नहीं कि कौन सा क्षेत्र उनके लिए कितना कठिन होगा।
टेनिस खिलाड़ी ने कहा, "मैंने पिछले साल वहां सेमीफाइनल खेला था, इसलिए मुझे बचाव के बिंदुओं के बारे में नहीं सोचना चाहिए। उसके बाद दोहा, दुबई और फिर मियामी मास्टर्स है लेकिन मैं हर हफ्ते खेलकर खुद को मुश्किल में नहीं डालना चाहता।"
उन्होंने कहा, "मेरे पास पहले तीन महीनों के लिए एक निश्चित साथी खिलाड़ी नहीं हो सकता है, लेकिन मैं कोशिश करूंगा और बड़े आयोजनों में उतरूंगा, इसलिए मेरे पास पर्याप्त अंक हासिल करने और ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का मौका है।"
तिरुवनंतपुरम, 9 जनवरी | केरल उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश केमल पाशा ने कहा है कि वह अगला विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। न्यायमूर्ति पाशा ने आईएएनएस को बताया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने उनसे संपर्क किया है और उन्हें एक सीट की पेशकश की है, लेकिन यह निर्वाचन क्षेत्र उनकी पसंद के अनुसार नहीं था और अगर उन्हें एक बेहतर सीट मिलती है तो वह इस पर विचार करेंगे।
राज्य में कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश बहुत मुखर रहे हैं और राज्य में एलडीएफ सरकार के आलोचक रहे हैं।
न्यायमूर्ति पाशा ने कई ऐतिहासिक निर्णय लिए थे और अपने करियर के दौरान उन्हें एक लोकप्रिय न्यायाधीश माना जाता था।
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और वरिष्ठ नेता मनाकाडू सुरेश ने कहा, "अगले विधानसभा चुनाव में यूडीएफ के उम्मीदवार के रूप में न्यायमूर्ति केमल पाशा जैसे व्यक्ति का स्वागत करना एक स्वागत योग्य संकेत है और इससे हमारी पार्टी और यूडीएफ की रेटिंग में वृद्धि होगी। न्यायमूर्ति पाशा सत्तारूढ़ दलों के मुखर आलोचक रहे हैं और हमेशा लोगों के न्यायाधीश रहे हैं।"