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-दयानिधि
शोधकर्ताओं ने एक अनोखा घुमावदार अवरोधक (बैरियर) तैयार किया है जो सड़क पर चलने वाले लोगों को वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से बचा सकता है।
यह सर्वविदित है कि वायु प्रदूषण दुनिया भर में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक चुनौती बन गया है, शोधकर्ता इस 21वीं सदी की समस्याओं से निपटने के लिए लगातार नए-नए समाधानों पर काम कर रहे हैं। इसी क्रम में इम्पीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने एक अनोखा घुमावदार अवरोधक (बैरियर) तैयार किया है जो सड़क पर चलने वाले लोगों को वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से बचा सकता है।
शोधकर्ताओं ने पैदल चलने वाले लोगों के लिए वायु प्रदूषण के खतरनाक कणों को हटाने हेतु, सड़क के किनारे संरचनाओं के प्रभावों का अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं ने इसे करने के लिए एयरफ्लो मॉडलिंग तकनीकों का उपयोग किया है।
वायु गुणवत्ता में कमी से उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं निम्न आय वाले समुदायों के बीच अधिक हैं, इनके जहां अधिक ट्रैफिक होता है उन मार्गों के पास होने की अधिक संभावना होती है। इसी तरह, बच्चे अधिक आसानी से वायु प्रदूषण के संपर्क में आते हैं, क्योंकि जमीन से उनकी निकटता अधिक होती है या वे लंबाई में छोटे होते हैं, जहां भारी प्रदूषक होता हैं। लंदन और दक्षिण पूर्व इंग्लैंड में वायु प्रदूषण के वास्तविक समय के आंकड़ों को लंदन एयर, एक ऐसा उपकरण जिसे इंपीरियल लंदन एयर क्वालिटी नेटवर्क द्वारा संचालित किया जाता है।
इंपीरियल सेंटर फ़ॉर एनवायर्नमेंटल पॉलिसी के डॉ. टिली कोलिन्स ने इस मुद्दे को चिंताजनक बताया, विशेष रूप से हवा में गंभीर प्रदूषण का अवलोकन करते हुए, उन्होंने देखा कि एक व्यस्त रोड पर स्थित एक स्कूल के खेल का मैदान जिसमें बच्चे नेटबॉल खेल रहे थे।
डॉ. टिली कोलिन्स ने कहा तब मैंने मन ही मन सोचा, कि इससे निपटने के लिए क्या किया जा सकता है? इसलिए, मैंने सड़कों के साथ दीवारों के प्रभाव पर शोध करना शुरू किया। यह स्पष्ट हो गया कि इन सड़क के किनारे की दीवारों के साथ-साथ, वहां हवा की गुणवत्ता वास्तव में और भी बदतर हो सकती है यदि वहां पर प्रदूषकों को रोकने वाली दिवाल नहीं होती तो।
घुमावदार संरचना पार्टिकुलेट को हटाने में मदद करती है
शुरुआत में सरल मॉडल का निर्माण किया गया, जिसे डॉ. कॉलिन्स, डॉ. हुव वुडवर्ड ने किया। इसके बाद सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल पॉलिसी और एनर्जी गार्डन के अगैमेमोन ओटेरो ने शहरी डिजाइन की खोज की, जो वायु प्रदूषण के प्रभावों को कम करेगा और पैदल यात्रियों और विशेष रूप से बच्चों के लिए वायु गुणवत्ता में सुधार करेगा।
जर्मनी और नीदरलैंड में मोटरमार्गों के साथ-साथ बने हवा को रोकने वाले ( एयरफील्ड बफल्स) और घुमावदार ध्वनि-दीवारों से प्रेरित होकर, शोधकर्ताओं ने पाया कि घुमावदार संरचनाएं सड़कों पर प्रभावी ढंग से फैलती हैं और प्रदूषकों को दूर हटाती हैं जो एक सस्ता तरीका है, यह पैदल चलने वालों के लिए वायु गुणवत्ता में बहुत तेजी से सुधार करतीं हैं।
यद्यपि इस तरह के शहरी साज-सज्जा, जैसे कि सड़क की दृश्यता को लागू करने में चुनौतियां हैं, शोधकर्ताओं को विश्वास है कि वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य के लिए तत्काल फायदा हो सकता है। वायु गुणवत्ता को सुधारने के साथ-साथ, ये घुमावदार अवरोध ध्वनि प्रदूषण को भी कम करेंगे। इस तरह ये अवरोधक बड़े शहरों में पर्यावरणीय बुनियादी ढांचे को बढ़ाने में सक्षम होंगे। यह शोध जर्नल सिटीज एंड हेल्थ में प्रकाशित हुआ है।
इस शोध परियोजना के दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे में पूछे जाने पर, डॉ. कोलिन्स ने कहा शुरू में, दूसरों को इस बात के लिए राजी करना मुश्किल था। हमारा उद्देश्य गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को सफलतापूर्वक कम करना था। हमारे बच्चों की सुरक्षा के लिए, विभिन्न वैज्ञानिकों, शहरी डिजाइनरों और वास्तुकारों को इन समाधानों को डिजाइन करने के लिए और अधिक सहयोग करना चाहिए ताकि स्थानीय स्तर पर वायु गुणवत्ता में सुधार और अधिक प्रभावी ढंग से और अधिक जल्दी हो सके।
अनेक बाधाओं के बावजूद डॉ. कॉलिन्स ने कहा कि वे इस परियोजना के भविष्य को लेकर आशावादी हैं। वायु प्रदूषण से जुड़ी चुनौतियों पर ध्यान दिए जाने के साथ, अनुठे और प्रभावी शहरी डिजाइन की आवश्यकता है, ये घुमावदार बाधाएं इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं, जिससे आम जनता को काफी फायदा हो सकता है। (downtoearth.org.in)
-रवि पांडेय
वाराणसी. गंगा नदी वॉटर बोर्ड से खतरनाक स्टंट चर्चा का विषय बना हुआ है. इसके साथ ही घाटों पर रहने वाले लोगो में दहशत का माहौल भी है. बीच नदी में ये स्टंट बदस्तूर जारी है. जिला प्रशासन मूक दर्शक बन शायद बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है. दरअसल 2019 में ही वाराणसी में गंगा नदी में वॉटर एडवेंचर को लेकर पर्यटन विभाग ने योजना बनाई जिसको लेकर कुछ कंपनियों ने इसकी शुरुआत भी की. वॉटर एडवेंचर को लेकर गंगा नदी में स्टीमर और अन्य वॉटर व्हीकल उतारे गए, ताकि यहां आने वाले पर्यटक इसे पसंद करें. हालांकि कोरोना काल के कारण ये योजना ठंडे बस्ते में चली गई लेकिन लॉकडाउन खुलने के बाद एक बार फिर से इसे लागू किया गया.
अब यही वॉटर एडवेंचर किसी बड़े हादसे को दावत दी रहे हैं. स्थनीय लोग इसे लेकर काफी दहशत में हैं. घाट पर नाविक ये स्टंट देखकर भयभीत हैं. अस्सी घाट रहने वाले नाविक भरत का कहना है कि स्टीमर द्वारा ऐसा खतरनाक स्टंट प्रतिदिन किया जाता है. वो भी सवारी बैठा कर कुछ जबकि बिना लाइफ जैकेट के. जिस तरह से वोट को गंगा में घुमाया जाता है वो बड़े हादसे को दावत दे रहा है. हम लोग देख के सहम जाते हैं.
वॉटर बोट को चलाने वाला ड्राइवर बेहद खतरनाक तरीके से बीच गंगा में बोट को घुमाता है जिससे बोट एकदम से पलटने लगती है. भले ही ड्राइवर प्रशिक्षित हो लेकिन किसी दिन एक भी चूक हुई तो परिणाम बहुत खतरनाक होंगे. जाहिर सी बात है कि जिस तरह से इस वॉटर बोट से खेल किये जा रहे हैं, उससे साफ लगता है कि जिला प्रशासन की तरफ से इसके चलने को लेकर कोई मानक तय नहीं किया गया है.
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-भवेश सक्सेना
'काले हीरे' की नगरी के नाम से मशहूर आसनसोल ज़िले और रानीगंज के इलाके में कोयले का गैर कानूनी कारोबार करीब 1 लाख लोगों को डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तौर पर रोज़गार देता है. यहां करीब 3500 अवैध खदानों का रोज़ाना टर्नओवर 200 करोड़ का है यानी आसनसोल और उसके आसपास ये एक पैरेलल इकोनॉमी है. इस काले धंधे के केंद्र में जो नाम पिछले कुछ सालों से बना हुआ है, वो है अनूप मांझी उर्फ लाला. इस लाला की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय काफी अहम भी है.
पश्चिम बंगाल के सबसे पिछड़े ज़िले पुरुलिया के भमूरिया गांव में जन्मा अनूप चार भाइयों और तीन बहनों के बीच गरीब परिवार की भूख से लड़ता हुआ बचपन गुज़ार रहा था, तभी पारखी नज़रें समझ रही थीं कि यह भूख इतिहास रच सकती थी. कोयले की खदान में काम करने वाले मज़दूर के इस बेटे की स्लेट यही खदानें बनीं, जिन पर काले हीरे से उसने अपनी ही नहीं, अपने साथ के लोगों की तकदीर भी लिखना शुरू की.
कोयले की दलाली में हाथ काले हुए
बहुत कम उम्र में गरीब अनूप का सपना बहुत सारी दौलत थी. मछली बेची, छोटे मोटे काम किए लेकिन पैसा उसे कोयले में दबा दिखा. जल्द ही कुछ रिश्तेदारों और दोस्तों की बदौलत वो कोयले की दुनिया में दाखिल हुआ. जवान होते होते रघुनाथपुर, आसनसोल और रानीगंज में उसके पास कोयला फैक्ट्रियां थीं, जहां चोरी के कोयले का पहुंचना शुरू हो चुका था.
भले ही कोयले के धंधे में हाथ काले होते हों, लेकिन नोटों की चमक इस कालिख को ढांक देती है. भूख बढ़ी तो अनूप रघुनाथपुर के जंगलों में कास्ट माइन का गैरकानूनी धंधा भी शुरू किया. यहां से वो अनूप से लाला बनता चला गया और अब सियासत हो या पुलिस, सब उसके साथ के लिए बेताब थे. लाला पैसा और गुंडे मुहैया कराने वाला एक ऐसा माफिया बन गया, जिसकी ज़रूरत पॉलिटिक्स को हमेशा होती है.
दौलत और ताकत का जलवा यही रहा कि सरकारी अफसरों ने आंखें मूंद लीं, पुलिस ने सपोर्ट किया. बहुत वक्त नहीं लगा यह माहौल बनने में कि लाला की अपनी एक पैरेलल हुकूमत चलने लगी. लाला के गुनाह जानते हुए भी किसी ने कुछ नहीं बोला क्योंकि किसी की जेब में उसके पैसे थे, किसी के माथे पर उसके कलंक तो किसी की कनपटी पर उसकी बंदूक.
फिर नज़र में आया कोयला किंग
कहते हैं कि लाला का किरदार रॉबिनहुड जैसा भी था और बॉलीवुड फिल्म के उस डॉन जैसा भी, जो अपने इलाके में मसीहा की हैसियत रखता था. यानी लोगों के लिए वो ही सरकार था और वो ही अदालत. सालों तक बंगाल ही नहीं, बल्कि बंगाल के बाहर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर तक वो कोयले का राजा बना रहा. लेकिन यह भी सच है कि गुनाह के नक्शे कदम कहीं न कहीं रह ही जाते हैं.
लाला को दौलत और ताकत का नशा ऐसा चढ़ा कि उसने बेखौफ होकर अपने साम्राज्य को खुद ही लाइमलाइट खड़ा कर दिया. दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन करवाने वाले लाला ने अपनी छवि धार्मिक लोगों के बीच देवता की बनानी चाही थी, लेकिन इसी से वो जांच एजेंसियों की निगाह में चढ़ने लगा. बंगाल के पिछड़े ज़िलों के दूरदराज इलाकों में बॉलीवुड सेलिब्रिटियां पहुंचने लगीं तो कइयों की नज़रों में लाला आ ही गया.
कोयला माफिया की ज़बरदस्त मोडस ऑपरेंडी
जानवरों के कुख्यात तस्कर इनामुल हक के नेटवर्क का इस्तेमाल लाला ने चोरी का कोयला बंगाल बॉर्डर से बाहर निकालने के लिए किया तो अपने दाएं हाथ जॉयदेब मंडल के हुनर का इस्तेमाल लाला ने बखूबी किया. कोयला और माइनिंग माफिया कृष्ण मुरारी कोयल का पतन लाला के चरम का रास्ता बना. हवाला ट्रेडिंग से लेकर रिज़ॉर्ट बिज़नेस तक लाला का पैसा और तार जुड़े हुए हैं.
लाला और मंडल के सामने बड़ा पहाड़ तब टूटा था, जब जून 2011 में दिनदहाड़े पूर्व स्मगलर रामलखन यादव की हत्या हुई थी. इसके बाद सिर्फ बंगाल ही नहीं, बल्कि झारखंड और अन्य राज्यों की पुलिस भी बंगाल के कोयला माफिया के पीछे पड़ी. तब दोनों को अंडरग्राउंड होना पड़ा और उनकी तलाश जारी रही, लेकिन कारोबार नहीं रुका.
जांच एजेंसियों की मानें तो कोलकाता के चौरंगी में लाला और मंडल की हज़ारों 'सूटकेस कंपनियां' चल रही हैं, जिनके थ्रू पैसे का लेनदेन और सत्ता तक रिश्वत पहुंचाने का सिलसिला लगातार चलता रहता है ताकि माफिया राज पर आंच न आए. जांच के दौरान यह भी पता चला है कि लाला की कुल संपत्ति का अनुमान फिलहाल 20,000 करोड़ रुपये तक है.
साल 2020 से ही सीबीआई सहित केंद्रीय एजेंसियों ने लाला पर शिकंजा कसना शुरू किया ताकि राजनीति के साथ उसके नेक्सस का भंडाफोड़ किया जा सके. इस पूरी कवायद को आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र ही समझा गया. रिपोर्ट्स की मानें तो लाला के खिलाफ चल रही सीबीआई जांच व पूछताछ के दायरे में राज्य की सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की पत्नी और साली भी आ गई हैं.
कितना बड़ा है लाला का एम्पायर?
बताया जाता है कि हर राजनीतिक पार्टी के साथ लाला के संबंध रहे हैं और सभी को रिश्वत पहुंचाने के लिए गाड़ियों में हर महीने सूटकेसों में भरकर पैसा जाता रहा है. 40 की उम्र पार कर चुके लाला का कारोबार कोयला तस्करी के साथ ही आयरन माइन्स, रेत उत्खनन और रिज़ॉर्ट्स व होटलों तक फैल चुका है. हज़ारों करोड़ के एम्पायर के इस बेताज बादशाह के लिए 50,000 से ज़्यादा लोग काम करते हैं. अवैध कारोबार से जुड़ी दो दर्जन से ज़्यादा कोयला कंपनियां व फैक्ट्रियां लाला के नाम बताई जाती हैं.
चुनावों में लाला का पैसा और ताकत इस्तेमाल की जाती रही है. जब ओपन मार्केट में सरकारी कोयला 10 हज़ार रुपये प्रति टन बिकता रहा, तब लाला ने चोरी का कोयला 6000 रुपये के भाव से बेचकर न सिर्फ दौलत, शोहरत हासिल की बल्कि अपने साम्राज्य को फैलाना भी शुरू किया था, जो अब 20,000 हज़ार करोड़ का ब्रांड हो चुका है. थाईलैंड, नेपाल और लंदन तक उसका हवाला लिंक बना हुआ है.
पिछले साल से जो धरपकड़ शुरू हुई है, उसके चलते लाला और मंडल दोनों अंडरग्राउंड या फरार हैं. पहले भी मंडल पुलिस बलों का चकमा और एक करोड़ कैश देकर छूटने की कोशिश के कारण चर्चा में रह चुका है. बताया जा रहा है कि पिछले 15 सालों से ऐसा ही होता रहा है कि जब भी पुलिस या किसी जांच एजेंसी ने लाला या मंडल को पकड़ना चाहा, तो खुफिया जानकारी पहले ही मिल जाने से दोनों पहले ही कुआलालंपुर, सिंगापुर, बर्लिन, लंदन, म्यूनिख, जेनेवा और दुबई भागकर सीक्रेट ठिकानों पर रहते रहे हैं.
-फ़्रैंसीस माओ
अपनी ड्रीम जॉब जॉइन करने के पहले दिन ब्रिटनी हिगिन्स
महज़ 15 दिन पहले ऑस्ट्रेलिया हैरान रह गया जब एक पू्र्व राजनीतिक सलाहकार ने आरोप लगाया कि संसद भवन में उनके साथ बलात्कार हुआ था.
ब्रिटनी हिगिन्स का कहना है कि उन पर एक पुरुष सहकर्मी ने यौन हमला किया था- जो सत्ताधारी लिबरल पार्टी की सरकार में 2019 में एक मंत्री के कार्यालय में सलाहकार था.
ब्रिटनी हिगिन्स की कहानी सामने आने के बाद कई महिलाएं बाहर आईं और ऑस्ट्रेलिया की राजनीति में यौन हमले के अपने-अपने अनुभव साझा किए.
इनमें से सबसे विस्फोटक 1988 का एक रेप आरोप है. यह मामला एक अज्ञात कैबिनेट मंत्री का है.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने सोमवार को कहा कि मंत्री ने रेप के आरोपों को ख़ारिज किया है.
पुलिस के पास एक विपक्षी सांसद पर रेप का मामला भी आया है. ऐसे आरोपों की बाढ़ से ऑस्ट्रेलिया की मॉरिसन सरकार पर जवाब देने का दबाव है.
ब्रिटनी हिगिन्स का सामने आना
ब्रिटनी हिगिन्स का कहना है कि तब वो 24 साल की थीं और यह उनकी नई ड्रीम जॉब थी, जिसे जॉइन किए कुछ ही हफ़्ते हुए थे.
मार्च 2019 में एक सीनियर सहकर्मी उन्हें नाइट आउट के बाद संसद लेकर गया था. जमकर शराब पीने के कारण मंत्री के कार्यालय में ही ब्रिटनी को नींद आ गई. ब्रिटनी बताती हैं कि जब नींद खुली तो पता चला कि उस आदमी ने उन पर यौन हमला किया था.
उस व्यक्ति को कुछ ही दिनों में बर्खास्त कर दिया गया. उसकी बर्खास्तगी न केवल कथित यौन हमले के लिए थी बल्कि उसने कार्यालय के सुरक्षा नियमों को भी तोड़ा था, क्योंकि रात में संसद नहीं जाया जा सकता था.
इस बीच ब्रिटनी ने अपनी बॉस और तत्कालीन सुरक्षा उद्योग मंत्री लिंडा रीनॉल्ड्स से कहा कि उन पर यौन हमला हुआ है. लिंडा के साथ उनकी बात उसी रूम में हुई जिसमें ब्रिटनी ने यौन हमले का आरोप लगाया था.
लिंडा का कहना है कि उन्होंने ब्रिटनी को समर्थन देने का भरोसा दिलाया और पुलिस में जाकर शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा.
ब्रिटनी ने कहा कि वे दबाव में थीं कि इससे कहीं उनकी नौकरी ना चली जाए. ब्रिटनी कहती हैं कि उन्हें लिबरल पार्टी ने चुप करा दिया. लेकिन ब्रिटनी ने तब बोलने का फ़ैसला किया जब जनवरी महीने में एक तस्वीर देखी, जिसमें मॉरिसन यौन हमले के ख़िलाफ़ बात कर रहे हैं.
ब्रिटनी ने न्यूज़ डॉट कॉम एयू से कहा, ''मॉरिसन के बगल में एक महिला खड़ी थीं, जो यौन हमला झेल चुकीं महिलाओं के अधिकारों को लेकर कैंपेन चलाती रही हैं. मैंने सोचा कि एक तरफ़ ये तस्वीर है और दूसरी तरफ़ इनकी सरकार मुझे चुप कराने में लगी रही. यह तो धोखा है. झूठ है.''

ब्रिटनी हिगिन्स ने अपनी कहानी स्थानीय मीडिया को बताई है
ऑस्ट्रेलियाई पीएम के रुख़ की हो रही आलोचना
ब्रिटनी के सामने आने के बाद ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने माफ़ी माँगी. दो साल पहले ब्रिटनी की शिकायत को जिस तरह से हैंडल किया गया, उसे लेकर उन्होंने अफ़सोस ज़ाहिर किया. प्रधानमंत्री ने संसद में कार्य-संस्कृति और पॉलिटिकल स्टाफ़ की मदद को लेकर जाँच कराने का वादा किया.
इस मामले में मॉरिसन की एक टिप्पणी को लेकर भी ख़ूब चर्चा हुई. मॉरिसन ने कहा कि ब्रिटनी मामले को उन्होंने और ठीक से तब समझा जब उनकी पत्नी ने उनसे कहा कि वे अपनी दो बेटियों को ध्यान में रखते हुए पूरे मामले को देखें.
मॉरिसन ने पत्रकारों से कहा, ''मेरी पत्नी ने मुझसे कहा कि तुम्हें इस मामले को एक पिता की तरह देखना चाहिए. अगर तुम्हारी बेटियों के साथ ऐसा होता तो तुम क्या करते?''
मॉरिसन की इस बात के लिए भी आलोचना हो रही है कि न्याय दिलाने के लिए पिता होना ज़रूरी नहीं है बल्कि वे प्रधानमंत्री रहकर ऐसा कर सकते थे. कई महिलाओं ने लिखा कि ऑस्ट्रेलिया को पिता नहीं एक प्रधानमंत्री की ज़रूरत है.
प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन की आलोचना हो रही है कि उन्होंने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया. मॉरिसन और उनके मंत्रियों पर ये आरोप भी लगे रहे हैं कि वे सवालों से बच रहे हैं. इनसे पूछा जा रहा है कि सरकार के भीतर इस मामले के बारे में किसे पता था और कब पता चला? अगर पता चला तो इंसाफ़ दिलाने के लिए कितना कुछ किया गया?
इस मामले के बारे में मॉरिसन के कम से कम तीन मंत्रियों को पता था. मॉरिसन का कहना है कि उन्हें इसके बारे जब देश के बाक़ी लोगों को पता चला तभी उन्हें भी जानकारी मिली.
हालाँकि ब्रिटनी हिगिन्स ने कहा है कि प्रधानमंत्री की तरफ़ से पीड़िता पर ही आरोप लगाने की मानसिकता परेशान करती है.
वो कहती हैं," यह केवल मेरे लिए नहीं बल्कि अनगिनत दूसरे पीड़ितों के लिए भी है.''
और महिलाएं भी आईं सामने
ब्रिटनी हिगिन्स के बाद चार अन्य महिलाएं भी स्थानीय मीडिया के सामने आईं और उन्होंने यौन हमले और उत्पीड़न के आरोप लगाए.
एक महिला ने द ऑस्ट्रेलियन से कहा, ''2020 में एक पुरुष ने मेरा रेप किया. उसके साथ मैंने ड्रिंक और डिनर किया था. अगर सरकार ने 2019 में ब्रिटनी मामले को ठीक से हैंडल किया होता तो मेरे साथ 2020 में ये नहीं होता.''
एक और महिला ने कहा कि 2017 में एक नाउट आउट के बाद उसके साथ रेप हुआ था. एबीसी की रिपोर्ट के अनुसार एक तीसरी महिला ने ब्रिटनी हिगिन्स के बोलने के बाद पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है. उस महिला का आरोप है कि 2017 में वो अपने सहकर्मियों के साथ डिनर पर गई थीं तभी एक आदमी ने उनकी जांघ पर हाथ फेरा था.
पिछले बुधवार को एक चौथी महिला ने news.com.au से कहा कि एक व्यक्ति ने सेक्स के लिए दबाव बनाया था. कहा जा रहा है कि ब्रिटनी हिगिन्स के मामले में ऑस्ट्रेलिया के कुछ सांसदों ने चुप्पी साध रखी थी.
शुक्रवार को दो विपक्षी सांसदों- लेबर पार्टी की सांसद पेनी वोंग और ग्रीन्स सीनेटर सारा हैन्सोन-यंग ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से मिले एक पत्र का उल्लेख किया है.
आरोप है कि एक व्यक्ति, जो अभी कैबिनेट मंत्री है, उन्होंने 1988 में 16 साल की एक लड़की के साथ बलात्कार किया था. ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने उस मंत्री और कथित पीड़िता की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया है.

उस महिला ने 49 साल की उम्र में पिछले साल जून में अपनी जान ले ली थी. पिछले साल की शुरुआत में उस महिला ने न्यू साउथ वेल्स पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन मौत के बाद जाँच रोक दी गई.
पिछले हफ़्ते उस महिला के दोस्तों ने पीएम मॉरिसन और दूसरे सांसदों को पत्र लिख पूरे मामले में स्वतंत्र जाँच की माँग की है. मॉरिसन ने इस मांग को नकार दिया था और कहा कि यह मामला पुलिस के पास है. मॉरिसन ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि जिस व्यक्ति पर आरोप है, उसने सख़्ती से ख़ारिज किया है.
जिन्होंने पत्र लिखकर स्वतंत्र जाँच की माँग की है उनका कहना है कि दरअसल, कथित पीड़िता की मौत हो गई है, ऐसे में पुलिस शायद ही अपनी जाँच को आगे बढ़ा पाएगी क्योंकि ऐसे मामलों में शिकायकर्ता से पूछताछ की ज़रूरत पड़ती है. रविवार को एक सरकारी सांसद ने एक लेबर सांसद के ख़िलाफ़ पुलिस में रेप की शिकायत दर्ज कराई है.
आम जनता का दबाव
पिछले 15 दिनों में ऑस्ट्रेलिया की राजनीतिक संस्कृति और लैंगिक भेदभाव को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं. एक महिला जिसने, राजनीतिक सलाहकार पर रेप का आरोप लगाया है, उसने कहा कि वो भायावह राजनीति अंधेरे को कम करने के लिहाज से सामने आने का फ़ैसला किया था.
पिछले हफ़्ते मॉरिसन ने भी माना था कि व्यवस्था में कमियाँ हैं और वर्कप्लेस कल्चर को ठीक करने की ज़रूरत है. लेकिन लोगों का दबाव है कि सरकार कुछ ठोस करे. आलोचकों का कहना है कि एक कैबिनेट मंत्री पर गंभीर अपराध के आरोप हैं तो उनके ख़िलाफ़ ठीक से जाँच होनी चाहिए. हालाँकि सरकार ने ऐसी माँगों को नकार दिया है.
वहीं ब्रिटनी हिगिन्स ने कहा है कि उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और वे चाहती हैं कि व्यवस्था में ठोस सुधार हो ताकि संसद ऐसे मामलों को ठीक हैंडल कर सके. (bbc.com)
Raat Ke Humsafar Cover | Instrumental | Harmonica and Saxophone | Shailesh Mogre and Lilesh Kumar
Shailesh Mogre
पेरिस की एक अदालत ने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोला सारकोजी को भ्रष्टाचार का दोषी पाया है और तीन साल कैद की सजा सुनाई है. इनमें से दो साल की सजा निलंबित होगी.
(dw.com)
आधुनिक फ्रांस में किसी पूर्व राष्ट्रपति को भ्रष्टाचार के लिए कैद की सजा का यह पहला मामला है. अदालत ने कहा है कि सारकोजी घर पर हिरासत में रखे जाने का आग्रह कर सकते हैं. उन्हें इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक ब्रेसलेट पहनना होगा. इस मुकदमे में सारकोजी के सह-अभियुक्त, उनके वकील और लंबे समय के साथी 65 वर्षीय थियेरी हैर्त्सोग और रिटायर्ड मजिस्ट्रेट 74 वर्षीय गिल्बेयर अजीबैर्ट को भी दोषी पाया गया और सारकोजी जितनी ही सजा दी गई.
अदालत ने मुकदमे के बाद "गंभीर सबूतों" के आधार पर पाया कि सारकोजी और उनके सह अभियुक्तों ने भ्रष्टाचार के लिए समझौता किया. अदालत ने अपराध को गंभीर बताते हुए कहा कि वे एक पूर्व राष्ट्रपति द्वारा किए गए, जिन्होंने अपनी हैसियत का इस्तेमाल एक मजिस्ट्रेट को बचाने के लिए किया जिसने उनके निजी हितों को फायदा पहुंचाया था. अदालत ने कहा कि वकील होने के नाते उन्हें अच्छी तरह पता था कि वे अवैध काम कर रहे हैं.
निकोला सारकोजी ने पिछले साल दस दिनों तक चले मुकदमे के दौरान सारे आरोपों से इंकार किया. भ्रष्टाचार का यह मुकदमा फरवरी 2014 में एक टेलिफोन बातचीत पर केंद्रित था. उस समय जांच कर रहे जज ने 2007 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के लिए पैसा इकट्ठा करने पर जांच शुरू की थी. जांच के दौरान अप्रत्याशित रूप से पता चला कि सारकोजी और हैर्त्सोग एक दूसरे से एक गोपनीय टेलिफोन के जरिए बात कर रहे हैं जो पॉल बिस्मुथ नाम के एक शख्स के नाम पर रजिस्टर्ड थी.
इस टेलिफोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग से जांचकर्ताओं को संदेह हुआ कि सारकोजी और हैर्त्सोग मजिस्ट्रेट अजीबैर्ट को फ्रांस की सबसे धनी महिला लिलियाने बेटेनकोर्ट के मुकदमे की जानकारी देने के बदले मोनाको में नौकरी की पेशकश कर रहे थे. फोन पर बातचीत में सारकोजी ने हेर्त्सेग से अजीबैर्ट के बारे में कहा था, "मैं उन्हें आगे बढ़ाउंगा, मैं उनकी मदद करूंगा." ऐसी ही एक और बातचीत में हैर्त्सोग ने सारकोजी को याद दिलाया कि वे मोनाको दौरे पर अजीबैर्ट के समर्थन में कुछ शब्द कहें.
उच्च राजनीतिक पद पर भ्रष्टाचार के दोषी
मेकअप का सामान बनाने वाली कंपनी लोरियाल की माल्किन बेटेनकोर्ट के मामले में सारोकोजी के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई रोक दी गई थी. अजीबैर्ट को मोनाको वाली नौकरी नहीं मिली. हालांकि अभियोजन पक्ष के वकीलों का मानना था कि साफ तौर पर किया गया वादा भी फ्रांसीसी कानून के तहत भ्रष्टाचार है, भले ही वादे को पूरा ना किया गया हो. सारकोजी ने किसी गलत इरादे से इंकार किया और अदालत में कहा कि उनका पूरा राजनीतिक जीवन लोगों की थोड़ी मदद करने पर आधारित है, बस इतना ही, थोड़ी सी मदद.
वकील और उसके क्लाइंट के बीच बातचीत की गोपनीयता इस मुकदमे में बहस का बड़ा मुद्दा था. सारकोजी ने मुकदमे के दौरान कहा था, "आपके सामने वह इंसान खड़ा है जिसके 3700 निजी फोनकॉल रिकॉर्ड किए गए हैं, मैंने इसके लिए क्या किया था?" सारकोजी के वकील जैकलीन लाफों की दलील थी कि पूरा मुकदमा एक वकील और उसके क्लाइंट के बीच हुई गपशप पर आधारित है. अदालत ने कहा कि बातचीत की टैपिंग कानूनी है, यदि वह भ्रष्टाचार से संबंधित मामले में सबूत पाने में मदद करे.
निकोला सारकोजी ने 2017 के राष्ट्रपति चुनावों में कंजरवेटिव पार्टी की उम्मीदवारी नहीं मिलने के बाद सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था. उस चुनाव में इमानुएल माक्रों राष्ट्रपति चुने गए थे. सारकोजी अभी भी दक्षिणपंथी मतदाताओं में बहुत लोकप्रिय हैं और पर्दे के पीछे राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं. उनके राष्ट्रपति माक्रों के साथ भी अच्छे रिश्ते हैं और कहा जाता है कि कुछ मुद्दों पर वे उन्हें सलाह भी देते हैं.
इसी महीने सारकोजी के खिलाफ के खिलाफ एक और मुकदमा चलेगा. यह मुकदमा 2012 के राष्ट्रपति चुनावों में अवैध चंदों के सिलसिले में हैं और इसमें सारकोजी के साथ 13 और लोग अभियुक्त हैं.
एमजे/एनआर (एपी)
7 मौतें भी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 1 मार्च। राज्य में आज रात 09.00 बजे तक 256 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इनमें सबसे अधिक 72 रायपुर जिले से हैं।
आज कुल 7 कोरोना मौतें हुई हैं।
राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक दुर्ग 47, राजनांदगांव 15, बालोद 4, बेमेतरा 3, कबीरधाम 0, रायपुर 72, धमतरी 4, बलौदाबाजार 5, महासमुंद 2, गरियाबंद 2, बिलासपुर 34, रायगढ़ 6, कोरबा 9, जांजगीर-चांपा 9, मुंगेली 2, जीपीएम 0, सरगुजा 5, कोरिया 7, सूरजपुर 4, बलरामपुर 1, जशपुर 11, बस्तर 2, कोंडागांव 3, दंतेवाड़ा 3, सुकमा 0, कांकेर 6, नारायणपुर 0, बीजापुर 0 अन्य राज्य 0 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं।
रायपुर, 1 मार्च। रायपुर रेंज पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। इस परीक्षा में तृतीय लिंग समुदाय के 13 उम्मीदवारों का पुलिस आरक्षक पद पर चयन हुआ है और दो उम्मीदवार वेंटिंग लिस्ट में हैं। रायपुर जिले से 8, धमतरी से एक, राजनांदगांव से 2, बिलासपुर से एक, कोरबा से एक, अंबिकापुर से एक तृतीय लिंग के परीक्षार्थी का चयन पुलिस आरक्षक हेतु किया गया है। इनमें
इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया ने सभी चयनित उम्मीदवारों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने तृतीय लिंग समुदाय को बधाई देते हुए कहा है कि तृतीय लिंग समुदाय के शासकीय नौकरी में आने से छत्तीसगढ़ में नई शुरूआत हुई है। यह बदलते छत्तीसगढ़ की पहचान है, जिसमें सभी वर्गों की उन्नति के लिए समान अवसर मौजूद हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि चयनित उम्मीदवारों से प्रेरित होकर तृतीय लिंग समुदाय के और भी व्यक्ति पढेंगे और आगे बढ़ेंगे। श्रीमती भेंड़िया ने कहा कि तृतीय लिंग के व्यक्तियों के शासकीय नौकरी में आने से उनके प्रति समाज के नजरिए में एक बड़ा परिवर्तन आएगा।
उल्लेखनीय है कि आरक्षक भर्ती में तृतीय लिंग समुदाय के 97 लोगों ने लिखित परीक्षा दी थी। जिनमें से 23 परीक्षार्थियों का चयन फिजिकल टेस्ट के लिए किया गया था। समाज कल्याण विभाग ने तृतीय लिंग समुदाय को मुख्य धारा में लाने के लिए निःशुल्क कोंचिंग की व्यवस्था की थी। तृतीय लिंग समुदाय के परीक्षार्थियों को प्रशासन एकेडमी में 30 दिन तक लिखित परीक्षा की तैयारी कराई गई थी। इसके पश्चात् राज्य संसाधन एवं पुनर्वास केन्द्र में 120 दिनों तक लिखित और फिजिकल टेस्ट की तैयारी विषय-विशेषज्ञों के माध्यम से कराई गई। यहां उनके निःशुल्क भोजन और ट्रैक सूट की भी व्यवस्था विभाग द्वारा की गई थी। तृतीय लिंग समुदाय ने सहयोग के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया है।
सीएम बघेल ने कहा- टैक्स माफ करेंगे, ज्यादा उड़ानें दें
मंत्री पुरी ने कहा- आगे सुविधाओं का विस्तार होगा
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 1 मार्च। दोपहर 3.20 बजे जैसे ही दिल्ली से जबलपुर होते हुए एलायंस एयर की फ्लाइट ने बिलासा देवी केंवट हवाईअड्डे में लैंडिंग की, बिलासपुर के विकास में एक नया अध्याय जुड़ गया। हाईकोर्ट और रेलवे जोन मुख्यालय के बाद यह तीसरी बड़ी सौगात बिलासपुर वासियों को मिली है जिसका गर्मजोशी से स्वागत हुआ।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, केन्द्रीय नागरिक विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरण दास महंत सहित अनेक मंत्री, सांसद, विधायक, जन-प्रतिनिधि इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी रहे।

बिलासा देवी केंवट हवाई अड्डा चकरभाठा से आज घरेलू हवाई सेवा का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वर्चुअल उद्घाटन किया। सप्ताह में चार दिन सोमवार, बुधवार, शुक्रवार व शनिवार को जबलपुर से बिलासपुर और प्रयागराज होते हुए नई दिल्ली तक तथा प्रयागराज से बिलासपुर, जबलपुर होते हुए नई दिल्ली तक दो हवाई सेवाओं को संचालन बिलासपुर से आज से शुरू हुआ। इस अवसर पर चकरभाठा स्थित हवाई अड्डा प्रांगण में समारोह आयोजित कर औपचारिक रूप से हवाई सेवा का उद्घाटन किया गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया और शिक्षा मंत्री प्रेम साय सिंह टेकाम वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इस समारोह में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री बघेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह महत्वपूर्ण, ऐतिहासिक दिन है। बहुत सारी कठिनाईयों को पार करते हुए क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, नागरिकों और हर वर्ग के संघर्ष से वर्षों पुरानी मांग पुरी हुई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी इस मामले का संज्ञान लिया था। सभी के प्रयास से यह अभूतपूर्व सफलता प्राप्त हुई। उन्होंने केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री का भी आभार मानते हुए कहा कि उन्होंने सहानुभूतिपूर्वक क्षेत्र की मांग को सुना और 3सी लायसेंस प्राप्त होने के एक माह के भीतर चकरभाठा से हवाई सेवा शुरू कर दी गई।
अध्यक्षता करते हुए केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप एस पुरी ने विडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बताया कि भारत सरकार द्वारा बिलासपुर के हवाई अड्डे के विकास के लिए 52 करोड़ रूपये का बजट स्वीकृत किया है। इन हवाई सेवाओं के संचालन से बिलासपुर, सरगुजा, रायगढ़, बलरामपुर, कोरिया, सहित उत्तर छत्तीसगढ़ के नागरिकों को सुविधा होगी। नागरिकों को चिकित्सा सुविधा भी आसान हो जायेगी। उन्होंने बताया कि रायपुर एयरपोर्ट के विकास के लिए पिछले 6 वर्षों में 130 करोड़ रुपये खर्च किये गये।

कार्यक्रम में लोक निर्माण, गृह, जेल, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, पर्यटन एवं जिले के प्रभारी मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि इस बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सार्थक पहल की गई। मुख्यमंत्री ने इसके लिए 27 करोड़ रुपये स्वीकृत किये । श्री साहू ने दिल्ली से बिलासपुर के लिए सीधे विमान सेवा की मांग केन्द्रीय मंत्री पुरी से की।
कार्यक्रम के प्रारंभ में कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर ने स्वागत उद्बोधन किया। उन्होंने बिलासा देवी केंवट हवाई अड्डा पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के जमाने में यह एक एयरबेस था, सन् 1952 से इसे हवाईपट्टी के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा। उन्होंने बताया कि 3सी केटेगिरी का लायसेंस मिलने के एक माह के अंदर यहां से उड़ान प्रारंभ की गई है। पहले क्षेत्र के नागरिकों को 120 किलोमीटर की दूरी तय कर विमान से दिल्ली आना-जाना पड़ता था। अब उनके समय व धन दोनों की बचत होगी। कलेक्टर ने बताया कि दिल्ली तक जाने वाली दो उड़ानों में आगामी एक हफ्ते के लिए सभी सीटों की बुकिंग हो गई है। हवाई अड्डे में कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए शासन के गाईड लाइन अनुसार अलग कक्ष बनाकर व्यवस्था की गई है। हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ आर्म्सफोर्स और पुलिस को तैनात किया गया है।
समारोह में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, संसदीय सचिव रश्मि सिंह, बिलासपुर के सांसद अरूण साव ने भी अपने विचार रखे।
एलायंस एयर की महाप्रबंधक हरप्रीत कौर ने कहा कि एलायंस का मतलब जोड़ना होता है और हम आज बिलासपुर अंचल के लोगों के साथ दिल से जुड़ गये हैं।
आज दोपहर 3.20 बजे जैसे ही जबलपुर से पहली फ्लाइट बिलासा देवी केंवट एयरपोर्ट पर उतरी उत्साहित नागरिकों व अतिथियों ने तालियों की गड़गड़ाहट व लोक धुनों के साथ स्वागत किया। एयरपोर्ट में भी एलायंस एयर के विमान पर पानी की बौछारें की गईं। इसके बाद शाम 4 बजे प्रयागराज (इलाहाबाद) होते हुए दिल्ली के लिये इसी फ्लाइट ने उड़ान भरी। इस दौरान अतिथियों ने हरी झंडी दिखाई।

कार्यक्रम में बिलासपुर विधायक शैलेष पाण्डेय, जिला पंचायत अध्यक्ष अरूण सिंह चौहान, महापौर रामशरण यादव, नगर निगम सभापति शेख नजीरूद्दीन, मस्तूरी विधायक डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले, बेलतरा विधायक रजनीश सिंह, अपेक्स बैंक के अध्यक्ष बैजनाथ चन्द्राकर, लोरमी विधायक धरमजीत सिंह, संभागायुक्त डॉ. संजय अलंग, पुलिस महानिरीक्षक रतनलाल डांगी, पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और मीडिया, गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद थे।
मुंबई, 1 मार्च| बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान ने अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने के बाद इंस्टाग्राम पर अपनी पहली तस्वीर साझा की है। शेयर तस्वीर में अभिनेत्री धूप का आनंद लेते हुए दिखाई दे रही हैं। इस दौरान करीना ने धूप से बचने वाली टोपी के साथ काला चश्मा लगाए हुए दिखाई दे रही हैं।
शेयर तस्वीर को उन्होंने कैप्शन देते हुए लिखा, "हैलो, मैं सभी को मिस कर रही हूं।"
करीना की 'की एंड का' के सह-अभिनेता अर्जुन कपूर ने उनके कॉमेंट सेक्शन में लिखा, "रोस्ट चिकन ग्लो।"
करीना और उनके पति सैफ अली खान ने 21 फरवरी को अपने दूसरे बच्चे का स्वागत किया।
सैफ और करीना ने कथित तौर पर 'टशन' के बाद डेटिंग शुरू की थी, जिसके बाद उन्होंने 2012 में शादी कर ली और करीना ने 2016 में अपने पहले बच्चे, बेटे तैमूर को जन्म दिया था। (आईएएनएस)
नई दिल्ली, 1 मार्च| आईआईटी दिल्ली की शोधकर्ताओं की एक टीम ने ई-कचरे के प्रबंधन और पुर्नचक्रण के लिए स्थायी तकनीक विकसित की है। आईआईटी द्वारा विकसित यह तकनीक केंद्र सरकार की पहल 'स्मार्ट शहर', 'स्वच्छ भारत अभियान', और 'आत्मनिर्भर भारत' की आवश्यकता को पूरा करेगी। आईआईटी दिल्ली के मुताबिक विश्व में ई-कचरा 3 से 5 प्रतिशत की वार्षिक दर के साथ बढ़ रहा है। ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर रिपोर्ट 2020 का कहना है कि वैश्विक स्तर पर 2019 में 53.7 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) कचरा उत्पन्न हुआ था, और यह 2030 तक 74.7 एमएमटी तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत ई-कचरे का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और अकेले 2019 में ही भारत में 3.23 एमएमटी ई-कचरा उत्पन्न किया है। भारत में बढ़ते उपभोक्तावाद के बीच ई-कचरा प्रबंधन कमजोर स्थिति में है।
आईआईटी दिल्ली के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में कैटेलिटिक रिएक्शन इंजीनियरिंग प्रयोगशाला में यह शोध प्रोफेसर केके पंत के नेतृत्व में किया गया। इस परियोजना को भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्त पोषित किया गया है।
ई-कचरे में विषाक्त पदार्थ होते हैं और इसके अनियमित संचय, लैंडफिलिंग, या अनुचित रीसाइक्लिंग प्रक्रियाएं से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को खतरा है। आईआईटी दिल्ली ने कहा कि इन ई-कचरे को धातु वसूली और ऊर्जा उत्पादन के लिए 'शहरी खान' भी माना जा सकता है।
आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली एक तीन-चरण प्रक्रिया है। सबसे पहले, ई-कचरे को तरल और गैसीय ईंधन प्राप्त करने के लिए बांटा जाता है। यह धातु से समृद्ध ठोस अंश को अलग कर देता है। अलग होने पर, बचे हुए ठोस अवशेषों से 90-95 प्रतिशत शुद्ध धातु मिश्रण और कुछ सामग्री प्राप्त होती है।
कार्बनस्पेस सामग्री आगे तेल रिसाव की सफाई, डाई हटाने, कार्बन डाइऑक्साइड कैप्चर और सुपरकैपेसिटर में उपयोग के लिए एयरगेल में बदल जाती है।
अगले चरण में, धातु मिश्रण से अलग-अलग धातुओं जैसे तांबा, निकल, सीसा, जस्ता, चांदी और सोने को पुनप्र्राप्त करने के लिए एक कम-तापमान वाली तकनीक का उपयोग किया जाता है।
इस तकनीक के जरिये लगभग 93 फीसदी तांबा, 100 फीसदी निकेल, 100 फीसदी जिंक, 100 फीसदी सीसा और 50 फीसदी सोना और चांदी ई-कचरे से हासिल की जा सकती है। यह एक इको फ्रैंडली प्रक्रिया है, जिसमें कोई भी जहरीले रसायनों को पर्यावरण में नहीं छोड़ा जाता है।
आईआईटी दिल्ली केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रोफेसर केके पंत ने कहा, 'इलेक्ट्रॉनिक कचरा (ई-कचरा) उत्पन्न होना अपरिहार्य है और अगर अभी समस्या का समाधान नहीं किया जाता है, तो यह ठोस कचरे के पहाड़ों को जन्म देगा। हमारे अनुसंधान समूह द्वारा अग्रणी प्रौद्योगिकी एक एकीकृत ²ष्टिकोण है जो ई-कचरे से धातु निकालने और ईंधन उत्पादन के अतिरिक्त लाभ के साथ ई-कचरे के उपचार के लिए पर्यावरण के अनुकूल समाधान प्रदान करती है।"
इस प्रोजेक्ट के लिए आईआईटी दिल्ली की टीम को गांधीवादी युवा तकनीकी नवाचार से सम्मानित किया गया। इस प्रौद्योगिकी का पेटेंट भी कराया गया है और इसे अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया गया है। (आईएएनएस)
खुर्रम हबीब
अहमदाबाद, 1 मार्च| पूर्व भारतीय लेफ्ट आर्म स्पिनर और लंबे समय तक मोटेरा स्टेडियम के पिच क्यूरेटर रह चुके धीरज प्रसन्ना ने अक्षर पटेल के उन युवा दिनों को एक बार फिर से याद किया है जब अक्षर ने कैंप के लिए मोटेरा का दौरा किया था।
पटेल ने तीसरे टेस्ट में 70 रन देकर 11 विकेट लिए और भारत को 10 विकेट से जीत दिलाकर सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली। उन्होंने लगातार तीन बार पांच विकेट लिए हैं।
भारत के लिए दो टेस्ट मैच खेलने वाले प्रसन्ना ने कहा है कि समय के साथ सीमित ओवरों के क्रिकेट में ढलने और राइट आर्म गेंदबाजी स्टाइल में बदलाव के कारण उन्हें टेस्ट क्रिकेट में काफी मदद मिली है।
प्रसन्ना ने कहा, " वह अलग है (जो हम थे या अन्य दूसरों से)। अक्षर टी 20 और 50 ओवर के मैचों में खेल रहे हैं। उन्होंने तीनों प्रारूप खेले हैं। लेकिन मुझे याद है कि जब वह मोटेरा में ट्रायल के लिए आते थे और गुजरात के लिए जूनियर क्रिकेट खेलते थे तब अधिक हाइट होने के बावजूद उनके पास एक अच्छा एक्शन था। लेकिन अब वह थोड़ा साइड आर्म के साथ गेंदबाजी कर रहे हैं, जिससे उन्हें मदद मिली है। वह बहुत इंटलीजेंट गेंदबाज है। अपनी ऊंचाई के कारण वह गेंद को बहुत अधिक नहीं फ्लाइट नहीं दे।"
73 साल के प्रसन्ना 1997 से 2018 तक बीसीसीआई के मुख्य क्यूरेटर (वेस्टजोन) और फिर 1982 से 2018 तक अहमदाबाद के मुख्य क्यूरेटर रह चुके हैं।
उन्होंने कहा, "अधिकतर गेंदबाज टर्निग ट्रैक पर उनकी तरह सीधी गेंदबाजी नहीं कर सकते। ऑर्म बॉल, जिसे वह अच्छी तरह से गेंदबाजी करते है, बाएं हाथ के स्पिनर का हथियार है। जब आप आर्म-बॉल फेंकते हैं तो आप बल्लेबाज को बैक-फुट पर खेलाते हैं। यह अचानक आता है। इसलिए उनके पास गेंदबाजी या एलबीडब्लू लेने का एक बड़ा मौका है।"
पूर्व पिच क्यूरेटर ने आगे कहा, "मैं बहुत खुश था कि गुजरात से किसी को तो टेस्ट में खेलने का मौका मिला। वह सही समय पर सही जगह पर है। वास्तव में उनका भविष्य बेहद उज्जवल है।"
प्रसन्ना ने कहा, "अक्षर जानते थे कि वे (इंग्लैंड के खिलाड़ी) स्पिनरों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने अपनी आर्म बॉल के साथ उन्हें अपनी जाल में फंसाया।" (आईएएनएस)
नई दिल्ली/कोलकाता, 1 मार्च| पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के नेता व प्रवक्ता कुणाल घोष को शारदा चिट फंड मनी लॉन्डरिंग मामले में जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए तलब किया है। जांच से जुड़े ईडी के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "घोष को 2 मार्च को सुबह 11 बजे अपने कोलकाता कार्यालय में जांच में शामिल होने के लिए कहा गया है।"
उन्होंने कहा कि घोष का बयान धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज किया जाएगा।
ईडी के सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद घोष को कथित रूप से शारदा समूह से पार्टी की मीडिया इकाई की अध्यक्षता करने के लिए धन प्राप्त हुआ था।
घोष से पहले जुलाई 2019 और अक्टूबर 2013 में मामले के संबंध में एजेंसी द्वारा पूछताछ की गई थी।
ईडी के एक सूत्र ने कहा कि एजेंसी उन फंडों के प्रवाह की जांच कर रही है जो घोष को कथित रूप से शारदा समूह से प्राप्त हुए थे और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी जांच चल रही है।
लगभग 10,000 करोड़ रुपये का शारदा घोटाला अप्रैल 2013 में सामने आया और ईडी ने सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर मामला दर्ज किया है।
पश्चिम बंगाल में 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान आठ चरणों में 27 मार्च, 1 अप्रैल, 6 अप्रैल, 10 अप्रैल, 17 अप्रैल, 22 अप्रैल, 26 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा। मतों की गणना 2 मई को होगी। चुनावी सरगर्मियां तेज होने के साथ ही सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच वाक्युद्ध शुरू हो गया है। (आईएएनएस)
रायपुर/बिलासपुर 1 मार्च : लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क के ऊपर सड़क की परतें बिछाकर सड़कों की ऊंचाई कई फीट बढ़ाने के मामले में रायपुर के याचिकाकर्ता नितिन सिंघवी की रिट पिटिशन पर न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी की पीठ ने याचिकाकर्ता की तकलीफ को वास्तविक मानते हुए शासन को जवाब देने के लिए कहा है. याचिका में सचिव, प्रमुख अभियंता, मुख्य अभियंता रायपुर तथा अधीक्षण अभियंता रायपुर लोक निर्माण विभाग को पक्षकार बनाया गया है.
क्या है पूरा मामला
नगर पालिक निगम तथा लोक निर्माण विभाग द्वारा रिन्यूअल के नाम से हर 3-4 साल में सड़क के ऊपर सड़क की परतें बिछाने के कारण शहरी क्षेत्रों में सड़कों की ऊंचाई विगत 25 सालों में 2 से 3 फिट बढ़ गई है. इस मामले में एक जनहित याचिका के.के. पालिया एवं वन्य विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की युगल पीठ में जनवरी 2018 में आदेशित किया था कि याचिकाकर्ता लोक निर्माण विभाग अथवा नगरी प्रशासन के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपनी समस्या बताएं.
हाईकोर्ट के निर्णय के आधार पर सिंघवी ने प्रमुख अभियंता तथा मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग रायपुर को मार्च 2019 और अक्टूबर 2020 में लिखित में बताया कि उनके घर के और कार्यालय के सामने कुछ वर्ष पूर्व फुटपाथ की ऊंचाई सड़क की ऊंचाई से ज्यादा थी. सड़क की ऊंचाई लगातार बढाने से, बाद में सड़क ऊंची हो गई और फुटपाथ नीचे हो गया. सड़क पर सीढी के समान कदम रखकर चढ़ना पड़ता है. 25 वर्ष पूर्व यह सड़क 2 फीट नीचे थी. इसके कारण से परिवार को बहुत कठिनाई हो रही है. बरसात के दौरान मकान की सीढी तक पानी भर जाता है और कार्यालय तथा मकान में रहने का प्राकृतिक आनंद असंभव हो गया है, इसलिए सड़क पर मोटी बिछाई गई परत को हटाकर पुरानी स्थिति में लाया जावे. लोक निर्माण विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने के कारण याचिका दायर की गई.
लोक निर्माण विभाग के मानद सलाहकार और तत्कालीन मध्य प्रदेश के पूर्व प्रमुख अभियंता ने भी इसे माना था गंभीर लापरवाही
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया गया कि छत्तीसगढ़ शासन लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन मानद सलाहकार तथा मध्य प्रदेश से सेवानिवृत्त हुए प्रमुख अभियंता बी.एस.गुप्ता ने पत्र में बताया था कि-
“कई संबंधित विभाग के अभियंतागण, बिना समुचित डिजाईन के विद्यमान सड़कों पर 50 cm से 75 व 100 cm तक की कर सड़कों को मनमानी ऊंचाई कर देते है। कई जगह बरसात में पानी भर जाता है। किसी तरह से यह उचित नहीं है तथा यह क्रस्ट डिजाईन के - या तो डामरीकरण या फिर सीमेन्टीकरण का बिना सही डिजाईन लिये कर दिया जाता है। पूर्व के क्रस्ट के गहराई को हटाकर तथा इसका फिर से उपभाग किया जा सकता है तथा नया लेयर डाला जा सकता है जिससे की सड़क की ऊंचाई पास के मकान से ऊची नहीं होंवे।”
भारतीय रोड कांग्रेस ने भी जारी कर रखे हैं मानक
भारतीय रोड कांग्रेस ने अपने प्रकाशन आईआरसी 120:2015 तथा सड़कों एवं ब्रिज के लिए जारी स्पेसिफिकेशन में पुरानी सड़कों की ऊपरी परत से निकाले गए मटेरियल को रीसाइक्लिंग करने के तरीके बता दिए हैं.
क्या है रायपुर की स्थिति
रायपुर शहर में लोक निर्माण विभाग तथा नगर पालिक निगम द्वारा सड़कों की ऊंचाई इतनी बढ़ाई गई है कि पुराने डिवाइडर अदृश्य हो गए और उनके ऊपर नए डिवाइडर बनाने पड़े. कई लोगों को लाखों खर्च कर जैक से मकान ऊपर उठाने पड़े. कई कॉलोनी के रहवासी घर के सामने की सड़क, मकान की प्लिंथ से ऊँची हो जाने के कारण बरसात में पानी भरने से परेशान है.
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 1 मार्च। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पत्रकारवार्ता में केंद्र सरकार पर प्रश्न उठाए जाने पर कहा कि भूपेश सरकार के बजट में कहीं भी छत्तीसगढ़ को नई दिशा देने वाला कोई प्रावधान नहीं दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि बार-बार अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश में लगे मुख्यमंत्री यह भूल गए कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोनाकाल जैसी विपरीत परिस्थिति में से निकाल कर देश को कैसे पुन: ऊंचाइयों पर ले जाया जाता है यह कर दिखाया है। आज इंटरनेशनल मॉनिटरिंग फंड ने भारत की विकास दर को 13.5 प्रतिशत होने का संकेत दिया है, जो विश्व में किसी भी देश में सर्वाधिक है। विपरीत परिस्थितियों में 80 करोड़ लोगों को निशुल्क राशन वितरित किया। 3 करोड़ लोगों को निशुल्क कोरोना वैक्सीन और अब 45 व 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए निशुल्क कोरोना वैक्सीनेशन की व्यवस्था कर यह बता दिया है कि देश में अगर किसी के पास नेतृत्व क्षमता है तो वह केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही है।
डॉ. रमन ने कहा कि मोदी सरकार ने प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल जीवन मिशन के तहत 7 हजार करोड़ रुपए दिए, 6 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास स्वीकृति किया। भूपेश बघेल ने केन्द्र सरकार की योजनाओं का नाम बदल का यह बजट बनाया है।
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन ने कहा कि भूपेश बघेल सदैव केंद्र को उपदेश देकर अपनी जिम्मेदारियों से बचने जनता की भावनाओं से खेलते हैं और यह दिखावा ज्यादा दिन नहीं टिक सकता है। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल को अपने अंदर झांकने की आवश्यकता है ताकि समय रहते सुधार आए और प्रदेश का भला हो सके।
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 1 मार्च। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बजट को गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ के मूल मंत्र में समाहित भावनाओं को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश को हर क्षेत्र में नई ऊंचाईयों पर ले जाने वाला करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा शासित राज्यों से बेहतर छत्तीसगढ़ का वित्तीय प्रबंधन है।
श्री बघेल ने मीडिया से चर्चा में कहा कि कोरोना की वजह से केंद्र और राज्य सरकार की आय में कमी आई है। फिर भी आम लोगों पर कम से कम प्रभाव पड़े। इस दिशा में कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से जीएसटी को मिलाकर राज्य के हिस्से की करीब 18 हजार करोड़ की राशि मिलनी थी, लेकिन यह नहीं मिली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बावजूद इसके आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो, इस दिशा में कोशिश की गई है। जबकि कई राज्यों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन में कटौती की गई थी। विधायकों के वेतन भत्ते में कटौती की गई, लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसा कुछ नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में छत्तीसगढ़ को नक्सल प्रभावित इलाका माने जाने की मानसिकता में बदलाव आया है। राजीव न्याय योजना में सारे किसानों को इसके दायरे में लाया जाए, इस दिशा में नियम बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने पेट्रोलियम पदार्थों पर वैट कम करने के सवाल पर कहा कि छत्तीसगढ़ में पेट्रोल और डीजल के दाम अभी भी आसपास के राज्यों से कम हैं। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने जोर देकर कहा कि भाजपा शासित राज्यों से ज्यादा बेहतर प्रबंधन छत्तीसगढ़ का है।
श्री बघेल ने पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि महान अर्थशास्त्री डॉ. रमन सिंह को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मार्गदर्शक मंडल में शामिल किया जाना चाहिए।
भारत भवन की तर्ज पर 36गढ़ में भी संस्थान
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 1 मार्च। सीएम भूपेश बघेल ने सोमवार को विधानसभा में वित्त विभाग के मुखिया के नाते सरकार का वर्ष 2021-22 का बजट पेश किया। कुल 97 हजार करोड़ से अधिक के बजट में साढ़े 3 हजार करोड़ से अधिक के घाटे का अनुमान है। कोरोना काल में राजस्व में कमी के बावजूद शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना विकास के लिए भरपूर प्रावधान किया गया है। बजट में गांवों की आर्थिक प्रगति पर विशेष जोर दिया गया है।
बजट में एचईआईजीएसटी शब्द के हर अक्षर से विकास की अवधारणा के विभिन्न आयामों को परिभाषित किया गया है। इसमें समग्र विकास, शिक्षा, अधोसंरचना, स्वास्थ्य और बदलाव के आधार पर बजट तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि देश-दुनिया समेत छत्तीसगढ़ की सरकार के लिये भी पिछला वर्ष बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहा है। कोविड-19 महामारी के संक्रमण से बचाव के लिए लागू लॉकडाउन के कारण राज्य में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित रहीं, जिसके कारण राजस्व प्राप्तियों में कमी आई। महामारी काल में आजीविका के साधनों की कमी के कारण आम जनता को राहत पहुंचाने के लिए कल्याणकारी योजनाओं में अधिक संसाधनों की आवश्यकता पड़ी।
संकट के दौर में भी हमारी सरकार के संवेदनशील और सुसंगत प्रयासों के कारण महात्मा गांधी नरेगा योजना में रोजगार देने तथा मजदूरी भुगतान करने का कीर्तिमान बना। वनोपज खरीदी का राष्ट्रीय कीर्तिमान बना। शिक्षा, स्वास्थ्य तथा पोषण के लिए किए गए नवाचारों तथा प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी और पुनर्वास के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। स्वास्थ्य विभाग के लिये 670 करोड़ के अतिरिक्त बजट की तत्काल व्यवस्था की गई।
छत्तीसगढ़ के स्थानीय कृषि उत्पादों-वनोपज से निर्मित उत्पाद तथा टेराकोटा, बेलमेटल, बांसशिल्प, चर्मशिल्प, लौहशिल्प, कोसा सिल्क तथा छत्तीसगढ़ी व्यंजनों जैसी सभी सामग्रियों को एक ही छत के नीचे विपणन की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसके लिये राज्य एवं राज्य के बाहर सी-मार्ट स्टोर की स्थापना की जायेगी, जो विशिष्ट छत्तीसगढ़ी ब्राण्ड के रूप में मशहूर होंगे। योजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादकों को अधिक लाभांश दिलाने की व्यवस्था भी की जायेगी।
होलिस्टिक डेवलपमेंट यानि समग्र विकास का सूचक है। इस समग्र विकास का लाभ हमारे किसानों को, श्रमिकों को, वनवासी भाईयों को, माताओं और बच्चों को समान रूप से प्राप्त होता है। विकास की इस अवधारणा में बड़े नगरों का आधुनिकीकरण के साथ-साथ सूदूर दुर्गम क्षेत्र के गांवों में भी बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करायी जाती हैं। विकास की इस प्रक्रिया में सुशासन की स्थापना के लिये आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं, साथ ही अपनी संस्कृति और परम्पराओं का संरक्षण कर उन्हें चिरंजीवी रखने के लिये भी पूर्ण प्रयास करते हैं।
खास बातें
- -बस्तर टाइगर्स नाम से विशेष पुलिस बल का गठन
- -छत्तीसगढ़ी कला, शिल्प, वनोपज उत्पाद-व्यंजन एक
- छत के नीचे उपलब्ध कराने सी-मार्ट स्टोर की स्थापना
- -ग्रामीण क्षेत्रों में रूरल इण्डस्ट्रियल पार्क की स्थापना
- - तेलघानी, चर्म शिल्पकार, लौह शिल्पकार और रजककार विकास बोर्ड का गठन
- -ग्रामीण कृषि भूमिहीन श्रमिकों के लिए नवीन न्याय योजना
- -शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना
- -मुख्यमंत्री धरसा विकास योजना शुरू होगी
- -भारत भवन की तर्ज पर छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक परिक्षेत्र की स्थापना
- -119 नए अंग्रेजी स्कूल खुलेंगे
- -नवा रायपुर में राष्ट्रीय स्तर के बोर्डिंग स्कूल की स्थापना
- -पंडरी में जेम्स-ज्वेलरी पार्क की स्थापना
- -11 नई तहसीलें-5 नए अनुविभागों की स्थापना
- -महिला होमगार्ड के 22 सौ पदों पर भर्ती
- -चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज दुर्ग का शासकीयकरण
- -स्वच्छता दीदियों के मानदेय एक हजार बढ़ा
- -सन्ना, जशपुर, शिवरीनारायण-जांजगीर में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और रिसाली-भिलाई में 30 बिस्तर अस्पताल की स्थापना
- -मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनीक योजना हेतु 13 करोड़ का प्रावधान
- -पटवारियों के मासिक स्टेशनरी भत्ता में 250 रूपये की वृद्धि
- -पत्रकारों को दुर्घटना जन्य आकस्मिक मृत्यु पर परिवार को 5 लाख की सहायता
- -द्वितीय संतान बालिका के जन्म पर कौशल्या मातृत्व
- योजना के तहत महिलाओं को 5 हजार की
किसान
राजीव गांधी किसान न्याय योजना में धान एवं अन्य फसलों को शामिल करके बोये गये रकबे के आधार पर किसानों को प्रोत्साहन राशि देकर हमनें कास्त लागत को कम करने का प्रयास किया है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के लिए वर्ष 2021-22 के बजट में 5 हजार 703 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। बस्तर संभाग के 7 आदिवासी बहुल जिले एवं मुंगेली जिले से चयनित कुल 14 विकासखण्डों में पोषण सुरक्षा तथा किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए चिराग योजना के लिए 2021-22 के बजट में 150 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
कृषक जीवन ज्योति योजना अंतर्गत कृषि पम्पों को नि:शुल्क विद्युत प्रदाय हेतु 2 हजार 500 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। योजना में लगभग साढ़े 5 लाख किसानों को लाभान्वित किया जायेगा। कृषि पम्पों के ऊर्जीकरण के लिये डेढ़ सौ करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है। सौर सुजला योजना अंतर्गत सरकार के गठन के बाद अब तक 31 हजार 712 सोलर पंपों की स्थापना की जा चुकी है। वर्ष 2021-22 में इस योजना के लिये 530 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
किसानों को शून्य ब्याज दर पर 5 हजार 900 करोड़ का अल्पकालीन कृषि ऋ ण वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। ब्याज अनुदान के भुगतान के लिए वर्ष 2021-22 में 275 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। फसल बीमा योजना में 606 करोड़, कृषक समग्र विकास योजना में 81 करोड़, कृषि यंत्र सेवा केन्द्र की स्थापना एवं कृषि यंत्रों पर अनुदान एवं नि:शुल्क वितरण हेतु 95 करोड़ का प्रावधान किया गया है। । प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना एवं शाकम्बरी योजना में 123 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
नगद आमदनी के कारण फ ल-फू ल और सब्जियों की खेती के प्रति कृषकों की रूचि बढ़ रही है। इस वर्ष 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बहुवर्षीय फलोद्यान, साढ़े 4 हजार हेक्टेयर में सब्जी उत्पादन तथा 13 सौ हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती के लिए अनुदान देने का लक्ष्य रखा गया है। कुल उद्यानिकी फसलों के लिए 2021-22 में 495 करोड़ के बजट का प्रावधान रखा गया है।
पशुपालकों को न्याय
गोठानों को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए गोधन न्याय योजना प्रारंभ की गई है। गोठान समितियों द्वारा पशुपालकों से 2 रू. किलो की दर से गोबर क्रय हेतु 80 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। स्व सहायता समूहों द्वारा गोबर से वर्मी कंपोस्ट एवं अन्य उत्पाद तैयार किया जा रहा है। अब तक 71 हजार 300 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा चुका है।
मछुआरों को न्याय
मत्स्य पालन हेतु उपलब्ध जल क्षेत्रों में से 95 प्रतिशत क्षेत्र को विकसित करके 2 लाख से अधिक मछुआरों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने हेतु इसे कृषि के समान दर्जा दिये जाने की कार्यवाही की जायेगी। वर्ष 2021-22 के बजट में मत्स्य पालन की गतिविधियों के लिये 171 करोड़ 20 लाख का प्रावधान किया गया है।
परम्परागत कर्मकारों को न्याय
परम्परागत ग्रामीण व्यवसायिक कौशलों के पुनरूद्धार एवं कर्मकारों को सहयोग प्रदान करने के लिए तेलघानी विकास बोर्ड, चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड, लौह शिल्पकार विकास बोर्ड एवं रजककार विकास बोर्ड की स्थापना की जायेगी।
श्रमिकों को सहायता
असंगठित श्रमिक सुरक्षा एवं कल्याण मण्डल अंतर्गत पंजीकृत श्रमिक से संबंधित आंकड़ों के ऑनलाईन संधारण तथा विभिन्न योजनाओं का त्वरित लाभ पहुंचाने की दृष्टि से विभिन्न एप्प निर्माण एवं राज्य स्तरीय हेल्प डेस्क सेन्टर की स्थापना हेतु नवीन मद में प्रावधान रखा गया है।
असंगठित श्रमिकों, ठेका मजदूरों, सफाई कामगारों एवं घरेलू कामकाजी महिलाओं के कल्याण की योजना में 61 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। राज्य बीमा अस्पताल योजना में 56 करोड़ तथा कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालयों हेतु 48 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। राजीव किसान न्याय योजना का दायरा भूमिधारी कृषकों से आगे बढ़ाने के लिये ग्रामीण कृषि भूमिहीन श्रमिकों को सहायता के लिए नवीन न्याय योजना प्रारंभ की जायेगी।
वन आश्रितों को सहायता
पूर्व में निरस्त किये गये वन अधिकार मान्यता पत्रों की पुन: समीक्षा की जाकर 24 हजार 827 नये वन अधिकार पत्रों सहित अब तक 4 लाख 36 हजार 619 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्रों का वितरण किया जा चुका है। वन अधिकार पत्र धारी वनवासियों को भी किसानों के समान अधिकार देते हुए इस वर्ष किसान न्याय योजना का लाभ दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा विशेष पहल करते हुए पहली बार 2 हजार 175 सामुदायिक वन संधारण अधिकार ग्राम सभाओं को दिये गये हैं। सामुदायिक वन अधिकार पत्र के रूप में वितरित वन भूमि पर फलदार वृक्षों के रोपण को प्रोत्साहित किया जायेगा।
12 लाख 50 हजार तेंदू पत्ता संग्राहक परिवारों को आकस्मिक मृत्यु अथवा दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षा प्रदान करने के लिए शहीद महेंद्र कर्मा तेंदू पत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना’’ प्रारंभ की गई है। वर्ष 2021-22 के बजट में इस हेतु 13 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
पत्रकारों को सहायता
पत्रकारों की दुर्घटनाजन्य आकस्मिक मृत्यु के प्रकरणों में दी जाने वाली सहायता राशि को 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया जायेगा।
महिलाओं और बच्चों को पोषण और सुरक्षा
मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत विगत 1 वर्ष में 99 हजार बच्चे कुपोषण से मुक्त किये जा चुके हैं। वजन त्यौहार आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में कुपोषण का स्तर 26.33 प्रतिशत था जो घटकर वर्ष 2019 में 23.37 प्रतिशत हो चुका है। लॉकडाउन के दौरान कुपोषित महिलाओं, शिशुवती महिलाओं एवं शाला त्यागी किशोरियों एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों के लगभग 24 लाख 38 हजार हितग्राहियों को भी घर-घर जाकर रेडी-टू-ईट फूड वितरित किया गया।
महिलाओं के पोषण में सुधार के लिए द्वितीय संतान बालिका के जन्म पर राज्य द्वारा 5 हजार रूपये की एकमुश्त सहायता राशि दी जायेगी। इसके लिये नवीन कौशल्या मातृत्व योजना प्रारंभ की जायेगी। बच्चों की देखरेख सुरक्षा एवं संरक्षण संबंधी कार्यों के लिये एकीकृत बाल संरक्षण योजना हेतु वर्ष 2021-22 के बजट में 47 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। विशेष पोषण आहार योजना में 732 करोड़, आंगनबाडिय़ों का सुधार एवं निर्माण योजना में 39 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
बुजुर्गों-दिव्यांगजनों को सहायता
निराश्रितों एवं बुजुर्गों को मासिक पेंशन हेतु सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में 343 करोड़, राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना में 190 करोड़ एवं मुख्यमंत्री पेंशन योजना में 170 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना में 70 करोड़ एवं सुखद सहारा पेंशन योजना में 98 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना में 12 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। दिव्यांगजनों के लिए माना स्थित विभिन्न संस्थाओं के जर्जर भवनों के स्थान पर सर्वसुविधा युक्त एकीकृत नवीन भवन के निर्माण हेतु नवीन मद में 2 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के निराकरण हेतु हेल्प लाइन की स्थापना एवं उनके भरण-पोषण हेतु नवीन मद में 75 लाख का प्रावधान रखा गया है। सभी पांच संभागीय मुख्यालयों पर आदर्श पुनर्वास केन्द्र की स्थापना हेतु नवीन मद में 1 करोड़ 50 लाख का प्रावधान रखा गया है।
मानसिक रोग से उपचारित व्यक्तियों के पुनर्वास एवं प्रशिक्षण के लिए रायपुर और दुर्ग में ‘हॉफ वे होम’ की स्थापना हेतु 3 करोड़ 13 लाख का प्रावधान किया गया है। तृतीय लिंग के व्यक्तियों के पुनर्वास हेतु आश्रम सह पुनर्वास केन्द्र स्थापित किया जायेगा। इसके लिये बजट में 76 लाख का प्रावधान रखा गया है। यह देश में अपनी तरह का पहला केन्द्र होगा।
शहरों का आधुनिकीकरण
नगरीय क्षेत्रों में सुशासन की स्थापना एवं आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था हेतु राज्य सरकार द्वारा कई अभिनव पहल की गई है। विभिन्न शासकीय सेवाओं की घर पहुंच सेवा के लिये मुख्यमंत्री मितान योजना में 10 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत 14 नगर निगमों में 60 मोबाइल एम्बुलेन्स एवं दाई-दीदी क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है। इसके माध्यम से नि:शुल्क परीक्षण, उपचार एवं दवाई वितरण की सुविधा दी जा रही है। वर्ष 2021-22 के बजट में भी 50 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
शहरी गरीबों को काबिज भूमि का पट्टा देने का निर्णय लिया गया है, इस निर्णय से उनके मकान निर्माण का मार्ग सुगम हुआ है। शहरी निर्धन परिवारों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने के लिए मोर जमीन-मोर मकान तथा मोर मकान-मोर चिन्हारी योजनाओं में किये गये कार्यों को भारत सरकार द्वारा जनवरी 2021 में पुरस्कृत किया गया है। सबके लिए आवास योजना के तहत 2021-22 में 457 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
अमृत योजना में शामिल 9 शहरों में दिसंबर 2018 तक स्वच्छ पेयजल हेतु 23 हजार 876 नल कनेक्शन दिये गये थे। यह संख्या अब बढक़र डेढ़ लाख हो चुकी है। अमृत मिशन योजना के लिए इस वर्ष 220 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। नगरीय क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास कार्यों के लिए 482 करोड़, तथा जल आवर्धन योजनाओं के लिए 120 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र में सम्मिलित 17 नवीन ग्रामों में जल प्रदाय व्यवस्था हेतु बजट में प्रावधान किया गया है।
ग्राम विकास
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत लॉकडाउन के दौरान सुरक्षा उपायों का पालन करते हुये मई एवं जून 2020 में प्रतिदिन औसतन 24 लाख श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। इस वर्ष 2 हजार 590 करोड़ की मजदूरी का भुगतान किया गया। 12 करोड़ 21 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन करके ग्रामीणों को आजीविका प्रदाय किया गया। इस योजना हेतु वर्ष 2021-22 के बजट में 16 सौ 03 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 20 लाख से अधिक गरीब परिवार की महिलाओं को सवा लाख से अधिक स्व सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका की गतिविधियों से जोड़ा गया है। योजना हेतु वर्ष 2021-22 में 4 सौ करोड़ का प्रावधान रखा गया है। उद्यमिता एवं रोजगार को बढ़ावा देने के लिये सभी निर्माण विभागों में स्नातक बेरोजगारों को ‘‘ई-श्रेणी’’ में पंजीयन की सुविधा दी गई है। अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में कक्षा बारहवीं उत्तीर्ण आवेदकों को भी ई श्रेणी में पंजीयन हेतु पात्रता दी गई है।
रूर्बन मिशन योजना में 16 जिलों के 18 क्लस्टर के 118 ग्राम पंचायतों में शहरी सुविधायें उपलब्ध कराते हुये सामाजिक एवं आर्थिक विकास हेतु गतिविधियां प्रारंभ की गयी है। भारत सरकार से जारी रूर्बन रैंकिंग के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य प्रथम स्थान पर है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के प्रारंभ से अब तक 10 लाख 97 हजार स्वीकृत आवासों में से 70 प्रतिशत आवास निर्माण पूर्ण हो चुके हैं। योजना के क्रियान्वयन, कार्य निष्पादन एवं मूल्यांकन की राष्ट्रीय सूचकांक तालिका में छत्तीसगढ़ राज्य द्वितीय स्थान पर है। इस योजना हेतु वर्ष 2021-22 के बजट में 15 सौ करोड़ का प्रावधान किया गया है।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के द्वितीय चरण में 1282 ग्रामों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन एवं सामुदायिक शौचालय बनाने का कार्य किया गया है। गोबर.धन योजना के अंतर्गत 199 बायोगैस संयंत्रों की स्थापना की गई है। योजना हेतु इस वर्ष 4 सौ करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है। ओडीएफ प्लस पंचायतों की श्रेणी में छत्तीसगढ़ राज्य को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है। स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिये राज्य को 68 करोड़ 42 लाख का परफार्मेंस ग्रांट प्राप्त हुआ है।
प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना अंतर्गत 34 हजार 835 किलोमीटर लंबी सडक़ों का निर्माण कर 10 हजार 316 बसाहटों को जोड़ा जा चुका है। आगामी तीन वर्षों के लिये राज्य को 5 हजार 612 किलोमीटर की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। योजना के लिए इस वर्ष 2 हजार 67 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है। किसानों को खेतों तक आवागमन की सुविधा देने के लिये कच्चे धरसा को पक्के मार्ग में बदलने के लिये मुख्यमंत्री धरसा विकास योजना प्रारंभ की जा रही है। इसके लिये बजट में 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
आधुनिक प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन
राज्य के नागरिकों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्घ कराने के लिए नई सुसंगत प्रणालियों तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। सामान्य सेवा केन्द्रों द्वारा शासकीय सेवाओं के अतिरिक्त टेलीमेडिसिन, टेलीकिसान, बैंक मित्र, टेली-लॉ, ग्रामीण ई-स्टोर, ई-स्टाम्प रजिस्ट्रेशन, रंगीन मतदाता परिचय पत्र, आधार पंजीयन, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, पेंशनधारियों का आधार सीडिंग जैसी सेवाएं प्रदान की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के विस्तार के लिये 235 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है। खनिजों का अवैध उत्खनन रोकने के लिये आधुनिक स्पेस टेक्नॉलॉजी एवं रिमोट सेंसिंग इमेज के माध्यम से माइनिंग सर्विलांस सिस्टम लागू किया गया है।
छत्तीसगढ़ी कला, संस्कृति एवं पर्यटन का विकास
राज्य की पुरातात्विक धरोहरों के अध्ययन, खोज एवं संधारण कार्यों को गति देने के लिये पुरातत्व विभाग के पृथक संचालनालय का गठन किया जायेगा। छत्तीसगढ़ से संबंधित अभिलेखों के संधारण एवं प्रदर्शन हेतु अभिलेखागार भवन निर्माण के साथ-साथ डिजिटाइजेशन एवं मोबाइल एप्प का विकास किया जायेगा। इन सभी कार्यों के लिए 2021-22 के बजट में 6 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
राज्य में विभिन्न कलाओं तथा विधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद का गठन किया गया है। नवा रायपुर में भारत भवन, भोपाल की तर्ज पर छत्तीसढ़ सांस्कृतिक परिक्षेत्र का निर्माण किया जायेगा। मानव विकास का क्रम, रहन-सहन, तीज-त्यौहार, प्राचीन कला, परंपरागत विधाओं के प्रदर्शन हेतु मानव संग्रहालय के निर्माण हेतु 1 करोड़ का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ी लोक कला एवं नृत्यों के संरक्षण तथा संवर्धन हेतु लघु फिल्म, डॉक्यूमेन्ट्री तथा अन्य कार्यों हेतु 2021-22 में 2 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवद्र्धन हेतु ‘‘छायांकित अभिलेखीकरण श्रृंखला’’ के अंतर्गत कमार, अबूझमाडिय़ा, बैगा, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, भुंजिया एवं पण्डो जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों सहित कुल 35 जनजातियों की जीवनशैली पर आधारित फोटो हैण्डबुक्स का प्रकाशन किया गया है। जनजातीय संस्कृति में आस्था के प्रतीक देवगुड़ी स्थल के निर्माण और संरक्षण के लिये 5 लाख तक का अनुदान दिया जायेगा। अबूझमाडिय़ा जनजाति समुदाय में प्रचलित घोटुल प्रथा को संरक्षित रखने के लिये विशेष प्रयास किया जायेगा।
शहीद वीरनारायण सिंह स्मारक एवं संग्रहालय के निर्माण हेतु 2021-22 में 5 करोड़ का नवीन मद में प्रावधान रखा गया है। नवनिर्मित आदिवासी संग्रहालय की गैलरी में जनजातीय संस्कृति के प्रदर्शन की व्यवस्था हेतु 01 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। आदिवासी जन-जीवन एवं ग्रामीण संस्कृति के प्रति विदेशी पर्यटकों तथा अन्य लोगों की भी रूचि को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में होम-स्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है।
श्रीराम वन गमन पर्यटन परिपथ के प्रति आम जनता की श्रद्धा एवं लोकप्रियता को देखते हुए योजना अंतर्गत चिन्हित कार्यों को गति प्रदान करने हेतु 2021-22 में 30 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। पर्यटन के नवीन क्षेत्र में नई संभावना के तौर पर हसदेव बांगो जलाशय सतरेंगा, जिला कोरबा में विश्व स्तरीय साहसिक जल क्रीडा गतिविधियों का संचालन प्रारंभ करने की योजना है। भविष्य में इसे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण-विकास
प्राकृतिक वन सम्पदा हमारे राज्य की अनमोल धरोहर है। वन सम्पदा के दोहन के साथ-साथ वन क्षेत्रों के विस्तार एवं गुणात्मक सुधार हेतु भी निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं।
36 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बिगड़े वनों के सुधार कार्य हेतु वर्ष 2021-22 में 257 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। नदियों के संरक्षण हेतु नदी तट वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत 15 लाख पौधों के रोपण हेतु 7 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी अंग्रेजी माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की योजना शुरू की गई है। प्रदेश में 52 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का संचालन प्रारंभ हो चुका है। 119 नये अंग्रेजी माध्यम स्कूल 2021-22 के बजट में प्रस्तावित किये गये हैं। नवा रायपुर में स्व-वित्तीय मॉडल पर सर्व सुविधायुक्त राष्ट्रीय स्तर के बोर्डिग स्कूल की स्थापना की जायेगी। इस स्कूल में पढऩे वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के शुल्क की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा की जायेगी। कांकेर जिले में बी.एड. कॉलेज की स्थापना हेतु नवीन मद में 01 करोड़ का प्रावधान किया गया है। पढऩा-लिखना अभियान योजना के लिए नवीन मद में 5 करोड़ 85 लाख का प्रावधान रखा गया है।
ग्राम नागपुर जिला कोरिया, ग्राम सन्ना जिला जशपुर, ग्राम बांकीमोंगरा जिला कोरबा, ग्राम नवागांव नवा रायपुर, रिसाली जिला दुर्ग, सारागांव जिला जांजगीर चाम्पा, पेण्ड्रावन जिला दुर्ग में नवीन महाविद्यालय तथा सूरजपुर, बलरामपुर एवं गोबरा नवापारा जिला रायपुर में नवीन कन्या महाविद्यालय की स्थापना की जायेगी। 15 महाविद्यालयों में स्नातक स्तर के तथा 15 महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर स्तर के नवीन पाठ्यक्रम प्रारंभ किये जायेंगे। नारायणपुर, कोण्डागांव, महासमुंद, कोरबा, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर में एक-एक बालक एवं कन्या छात्रावास की स्थापना के लिए नवीन मद में 2 करोड़ 80 लाख का प्रावधान रखा गया है।
बलरामपुर में पिछड़ा वर्ग के लिये एक-एक नवीन प्री-मैट्रिक बालक एवं कन्या छात्रावास तथा पाटन जिला दुर्ग में एक प्री-मैट्रिक अनुसूजित जाति बालक छात्रावास स्थापित किया जायेगा। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों के संचालन हेतु 371 करोड़ एवं विवेकानंद गुरूकुल उन्नयन योजना अंतर्गत निर्माण कार्यों के लिए 281 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। निकुम जिला दुर्ग, भाठागांव जिला रायपुर, वटगन जिला बलौदाबाजार, आमदी जिला धमतरी, चिरको जिला महासमुंद तथा नरहरपुर जिला कांकेर स्थित शासकीय महाविद्यालयों के लिये नवीन भवन निर्माण किया जायेगा।ग्राम टेकारी, विकासखंड आरंग तथा ग्राम नेवरा विकासखंड तखतपुर में नवीन आई.टी.आई. की स्थापना की जायेगी। छत्तीसगढ़ रीजनल साईंस सेन्टर परिसर में इनोवेशन हब की स्थापना हेतु 1 करोड़ 80 लाख तथा 40 पॉलीटेक्निक संस्थाओं में फर्नीचर मशीन तथा उपकरण के लिए 20 करोड़ 55 लाख का प्रावधान रखा गया है।
सडक़
सडक़ों को अर्थव्यवस्था की धमनियां माना जाता है। राज्य में रेल मार्गों की सीमित उपलब्धता के कारण सडक़ों के विकसित नेटवर्क की आवश्यकता को देखते हुए सडक़ तथा पुल-पुलिया निर्माण को बजट में विशेष प्राथमिकता दी गई है।
छत्तीसगढ़ सडक़ एवं अधोसंरचना विकास निगम द्वारा 5 हजार 225 करोड़ की लागत के 3 हजार 900 किलोमीटर लंबी सडक़ों एवं पुल-पुलिया के निर्माण का कार्य किया जायेगा। इन कार्यों के लिये निगम को सहायता देने हेतु बजट में 150 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री सुगम सडक़ योजना के अंतर्गत पहुंच विहीन शासकीय भवनों तथा कार्यालयों को पहुंच मार्ग से जोडऩे का प्रावधान किया गया है। इस वर्ष योजना अंतर्गत 255 करोड़ की लागत से 2 हजार 195 सडक़ कार्य स्वीकृत किये गए हैं। वर्ष 2021-22 के बजट में इस योजना के लिये 100 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
एशियन डेवलपमेंट बैंक की सहायता से फेज़-3 परियोजना में 826 किलोमीटर लंबाई के 24 मार्गों का निर्माण कार्य प्रगति पर है एवं फेज़-4 परियोजना के अंतर्गत 1 हजार 275 किलोमीटर लंबाई के 31 मार्गों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। ए.डी.बी. सहायता वाली इन परियोजनाओं के लिये बजट में 940 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस बजट में 12 नये रेलवे ओव्हर ब्रिज एवं अंडर ब्रिज तथा जवाहर सेतु योजना के अंतर्गत 151 नवीन मध्यम पुलों के निर्माण के लिये 102 करोड़ का प्रावधान किया गया है। 6 राज्य मार्ग, 5 शहरी मार्ग, 20 मुख्य जिला मार्ग तथा 435 ग्रामीण मार्गों के निर्माण हेतु 310 करोड़ का प्रावधान किया गया है। नाबार्ड की ग्रामीण अधोसंरचना विकास निधि के अंतर्गत 119 ग्रामीण मार्गों के निर्माण हेतु 92 करोड़ का प्रावधान किया गया है। ।
नक्सल प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर आवागमन सुविधा देने हेतु स्वीकृत 312 कार्यों में से 18 कार्य पूर्ण तथा शेष कार्य प्रगतिरत है। आगामी चरण में 104 सडक़ एवं 16 पुल निर्माण कार्य किया जाना प्रस्तावित है। योजना के लिये बजट में 12 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
हवाई सेवा
प्रदेश की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों में प्रदेश के भीतर तथा अन्य राज्यों से संपर्क सुविधाओं में वृद्धि हेतु विमानन सेवाओं का विशेष महत्व है जिसे देखते हुए माँ दन्तेश्वरी एयरपोर्ट, जगदलपुर को 2 सीवीएफआर श्रेणी में लाइसेंस मिलने के उपरांत 21 सितंबर 2020 से हैदराबाद एवं रायपुर के लिये यात्री सेवा आरंभ हो चुकी है। इस सुविधा से दुर्गम बस्तर क्षेत्र को त्वरित आवागमन सुविधा का लाभ मिल रहा है।
बिलासा देवी केंवट हवाई अड्डा, बिलासपुर (चकरभाठा) का भी 3 सीवीएफआर श्रेणी में उन्नयन किया जा चुका है तथा शीघ्र ही विमानन सेवा प्रारंभ हो जायेगी। अम्बिकापुर क्षेत्र को शीघ्र ही वायुमार्ग से जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है तथा इस वर्ष के बजट में कोरिया जिले में हवाई पट्टी निर्माण का प्रावधान रखा गया है। रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट के पुराने टर्मिनल को आधुनिक एयर कार्गो हब में परिवर्तित करने हेतु प्रयास किया जा रहा है।
सिंचाई
राज्य में कृषि, पेयजल, निस्तारी एवं औद्योगिक प्रयोजनों हेतु जल की आपूर्ति तथा जल स्रोतों के संरक्षण व दोहन के लिये बहुस्तरीय प्रयास किये जा रहे हैं। भू-जल संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर क्रियान्वयन करने हेतु भू-जल संरक्षण कोष का निर्माण किया जायेगा। भू-जल का उपयोग करने वाले उद्योगों तथा कच्चे माल के रूप में जल का उपयोग करने वाले उद्योगों से प्राप्त जलकर की राशि इस कोष में जमा की जायेगी।
सिंचाई की 4 वृहद परियोजनाओं अरपा-भैंसाझार, केलो जलाशय, राजीव समोदा निसदा व्यपवर्तन एवं सोंढूर जलाशय हेतु वर्ष 2021-22 के बजट में 203 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। एनीकट एवं व्यपवर्तन योजनाओं के निर्माण से उपलब्ध जल के उपयोग हेतु सूक्ष्म सिंचाई एवं सौर सूक्ष्म सिंचाई की 33 योजनाएं स्वीकृत हैं। वर्ष 2021-22 के बजट में 4 सूक्ष्म सिंचाई योजना, 5 सौर सूक्ष्म सिंचाई योजना एवं 8 उद्वहन सिंचाई योजनाओं हेतु नवीन मद में प्रावधान किया गया है।
वृहद, मध्यम एवं लघु बांधों के पुनर्वास एवं सुधार कार्य हेतु वर्ष 2021-22 के बजट में 70 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। अहिरन-खारंग लिंक, छपराटोला फीडर जलाशय, रेहर-ऐटम (झिंक) लिंक परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ अधोसंरचना विकास निगम द्वारा किया जायेगा। इसके लिये निगम को 5 करोड़ की सहायता दी जायेगी।
स्वच्छ पेयजल
राज्य के 45 लाख 48 हजार ग्रामीण घरों को वर्ष 2023 तक नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल आपूर्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पेयजल हेतु घरों तक नल कलेक्शन की सुविधा देने के लिए जल जीवन मिशन योजना में 850 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। नलकूपों के अनुरक्षण हेतु 106 करोड़ तथा पाईप द्वारा ग्रामीण जल प्रदाय योजना में 32 करोड़ एवं ग्रामों में पेयजल प्रदाय के लिए 70 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। मिनीमाता अमृतधारा नल योजना में 11 करोड़ एवं गोठानों मेें नलकूप खनन हेतु 10 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
उद्योग
नवीन फूडपार्क की स्थापना के लिए 110 ब्लाकों में भूमि का चिन्हांकन और 45 विकासखण्डों में भूमि का अधिपत्य उद्योग विभाग को प्राप्त हो चुका है। इस योजना हेतु बजट में 50 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। पिछड़े क्षेत्रों में वनोपज, हर्बल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिये नई औद्योगिक नीति 2019-24 में वनांचल उद्योग पैकेज का प्रावधान रखा गया है। कोर सेक्टर के उद्योगों को उनकी मांग अनुसार प्रोत्साहन प्रदान करने के लिये नई औद्योगिक नीति में बी-स्पोक पॉलिसी लागू की गयी है।
किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलवाने के लिये धान और गन्ने पर आधारित जैव ईंधन/एथेनॉल उद्योगों के लिये विशेष प्रोत्साहन पैकेज जारी किया गया है। राज्य में 350 करोड़ की लागत से पंडरी जिला रायपुर में 10 एकड़ भूमि पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर जेम्स एण्ड ज्वेलरी पार्क की स्थापना की जा रही है। नये औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना हेतु 65 करोड़ तथा औद्योगिक क्षेत्रों में अधोसंरचना उन्नयन कार्य हेतु 10 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
ऊर्जा
विद्युतीकृत ग्रामों के शेष रह गये पारा-टोलों तक विद्युत लाइन पहुंचाने के लिये मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना में 45 करोड़ का प्रावधान है। नदियों के तट पर स्थित खेतों को सिंचाई की सुविधा देने के लिये नदियों के किनारे-किनारे विद्युत लाइन के विस्तार का कार्य किया जायेगा। मुख्यमंत्री विद्युत अधोसंरचना विकास योजना अंतर्गत नवीन सबस्टेशन निर्माण, ट्रान्सफार्मर क्षमता वृद्धि तथा लाइन विस्तार के कार्यों के लिये 25 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
औद्योगिक क्षेत्रों में सुपरवाइजरी कन्ट्रोल के लिये स्काडा योजना में 50 करोड़ का प्रावधान है। शहरी क्षेत्र के विद्युतीकरण कार्यों के लिये मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना में 100 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
राजस्व प्रशासन
इस वर्ष के बजट में 11 नवीन तहसील एवं 5 नये अनुविभागों का गठन किया जायेगा। नयी तहसीलों का गठन1.सारागांव, 2.नांदघाट, 3.सुहेला, 4.सीपत, 5.बिहारपुर, 6.चांदो, 7.रघुनाथपुर, 8.सरिया, 9.छाल, 10.अजगरबहार, 11.बरपाली तथा अनुविभाग कार्यालयों का गठन 1.लोहांडीगुड़ा, 2.भैयाथान, 3.पाली, 4.मरवाही एवं 5.तोंकापाल में किया जायेगा।
पटवारियों को खसरा पांचसाला तथा बी-1 की कम्प्यूटराइज्ड प्रतिलिपियां प्रदान की जायेगी। इससे मौके पर अभिलेखों का मिलान एवं गिरदावरी कार्य में सुविधा होगी। इस हेतु नवीन मद में 3 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
पटवारियों को देय मासिक स्टेशनरी भत्ता में 250 रूपये की वृद्धि की जायेगी। इसके लिये बजट में 3 करोड़ 48 लाख का प्रावधान रखा गया है। सभी तहसीलों में राजस्व निरीक्षक मण्डल स्तर पर नवीन वर्षामापी केन्द्रों की स्थापना की जायेगी। इसके लिये बजट में 1 करोड़ 50 लाख का प्रावधान रखा गया है। स्वामित्व योजना अंतर्गत ग्रामीण आबादी क्षेत्र का ड्रोन आधारित सर्वे किया जाकर धारित भूमि का नक्शा तथा अधिकार अभिलेख रहवासियों को वितरित किया जायेगा।
सामान्य प्रशासन
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शासकीय सेवकों को प्रोत्साहित करने के लिये राज्य सिविल सेवा पदक एवं राज्य पुलिस सेवा पदक से पुरस्कृत करने की योजना शुरू की जायेगी।
पुलिस प्रशासन
बस्तर संभाग के सभी जिलों में ‘बस्तर टाइगर्स’ विशेष बल का गठन किया जायेगा। बल में अंदरूनी ग्रामों के स्थानीय युवाओं को भर्ती में प्राथमिकता दी जायेगी।
युवाओं के अंदरूनी क्षेत्र एवं जंगल की जानकारी का लाभ नक्सल विरोधी अभियान के दौरान पुलिस बल को प्राप्त हो सकेगा। इस हेतु वर्ष 2021-22 के बजट में 2 हजार 800 व्यक्तियों की भर्ती की जायेगी। इस पर 92 करोड़ का व्यय संभावित है।
राज्य पुलिस मुख्यालय में साइबर फोरेंसिक लैब की स्थापना हेतु 20 नवीन पद सृजित किये जाएंगे। इसके लिये वर्ष 2021-22 के बजट में 1 करोड़ 33 लाख का नवीन मद में प्रावधान किया गया है।शहरी जनसंख्या के दबाव को देखते हुये प्रभावी नागरिक सुरक्षा व्यवस्था हेतु रायपुर-पश्चिम एवं जांजगीर-चांपा में तथा नक्सल ऑपरेशन को गति प्रदान करने हेतु मानपुर जिला राजनांदगांव, बीजापुर (नक्सल ऑपरेशन) एवं भानुप्रतापपुर जिला कांकेर में कुल 5 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नवीन कार्यालय स्थापित किये जायेंगे।
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में पुलिस जवानों के लिये आवासीय भवन निर्माण किया जायेगा। राज्य में भवन विहीन पुलिस चौकियों के लिये 10 चौकी भवनों का निर्माण किया जायेगा। कन्या छात्रावास एवं आश्रमों में निवासरत बालिकाओं की सुरक्षा के लिये महिला होमगार्ड के 22 सौ नवीन पदों की स्वीकृति हेतु बजट में प्रावधान किया गया है। उप जेल नारायणपुर एवं उप जेल बीजापुर का जिला जेल में उन्नयन तथा भाटापारा में उप जेल की स्थापना हेतु 48 नवीन पदों के सृजन का प्रावधान किया गया है। राज्य के कुल 06 जेल में 50-50 बंदी क्षमता के 10 बैरकों का निर्माण किया जायेगा।
स्वास्थ्य
सार्वभौम स्वास्थ्य सेवाओं का वादा निभाते हुए प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केन्द्रों का उन्नयन, आधुनिक सुविधाओं का विकास करने के साथ ही विभिन्न बसाहटों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने का प्रयास किया गया है। रायपुर जिला अस्पताल में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था सी.डी.सी. के तकनीकी सहयोग से संचालित अत्याधुनिक ‘हमर लैब’ में 90 तरह की जांच सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। भविष्य में इसमें 30 और जांच सम्मिलित किया जाना प्रस्तावित है।
9 शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में वायरोलॉजी लैब की स्थापना हेतु 63 नवीन पदों का सृजन एवं 01 करोड़ का नवीन मद में प्रावधान रखा गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रामानुजगंज का 100 बिस्तर अस्पताल में तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र राखी (नवा रायपुर) का 50 बिस्तर अस्पताल में उन्नयन किया जायेगा। इस हेतु अतिरिक्त पदों की स्वीकृति सहित नवीन मद में 01 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
ग्राम सन्ना, जिला जशपुर एवं शिवरीनारायण, जिला जांजगीर-चांपा में नवीन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा भिलाई के रिसाली क्षेत्र में 30 बिस्तर अस्पताल की स्थापना हेतु 01 करोड़ 50 लाख का प्रावधान रखा गया है। वनांचल एवं दूरस्थ क्षेत्रों में मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना के माध्यम से नि:शुल्क स्वास्थ जांच, चिकित्सा सुविधा एवं दवाईयां वितरण की सुविधा ग्रामीणों को उपलब्ध करायी जा रही है। इसके लिये वर्ष 2021-22 के बजट में 13 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
नवीन चिकित्सा महाविद्यालय कांकेर, कोरबा एवं महासमुंद के भवन निर्माण हेतु 300 करोड़ का प्रावधान वर्ष 2021-22 के बजट में रखा गया है। 25 उप स्वास्थ्य केन्द्र, 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और 2 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के भवन निर्माण हेतु 17 करोड़ 50 लाख का प्रावधान रखा गया है। चन्दूलाल चन्द्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, दुर्ग का शासकीयकरण किया जायेगा।
बदलाव
बदलाव के लिये मिले जनादेश का सम्मान करते हुए हमने प्रदेश की संस्कृति, परम्परा तथा लोक-आस्था से जुड़े विषयों पर संवेदनशील पहल करते हुए छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान को पुनर्जीवित किया है। जनहित से जुड़ी व्यवस्था तथा कार्यप्रणालियों में सुधार करके हमने ‘‘शासन-जनता के लिये‘‘ की अभिकल्पना को साकार करने का प्रयास किया है। विलुप्त हो रहे हरेली, तीजा-पोरा, गौरा-गौरी, मातर और गोवर्धन पूजा जैसे त्यौहारों के सार्वजनिक आयोजनों से इन त्यौहारों का गौरव पुनस्र्थापित किया गया है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी, नवा रायपुर को कांक्रीट के जंगल से बदलकर एक जीवंत आबाद शहर के रूप में बसाने के लिये हमारी सरकार बहुत तेजी से प्रयास कर रही है। नवा रायपुर की विविध योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये वर्ष 2021-22 के बजट मे 3 सौ 55 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
2021-22 का बजट अनुमान
वर्ष 2020-21 में राजस्व प्राप्ति के बजट अनुमान 96 हजार 91 करोड़ की तुलना में पुनरीक्षित अनुमान 90 हजार 621 करोड़ है। राजस्व प्राप्तियों में होने वाली कमी को देखते हुये विभिन्न विभागों से समीक्षा उपरांत व्यय का बजट अनुमान 95 हजार 650 करोड़ से कम करके पुनरीक्षित अनुमान 91 हजार 482 करोड़ प्रस्तावित किया गया है।
वर्ष 2021-22 हेतु कुल राजस्व प्राप्तियां 79 हजार 325 करोड़ अनुमानित है। इसमें राज्य का राजस्व 35 हजार करोड़ एवं केन्द्र से प्राप्त होने वाली राशि 44 हजार 352 करोड़ है। वर्ष 2021-22 के लिए अनुमानित सकल व्यय 1 लाख 05 हजार 213 करोड़ का है। सकल व्यय से ऋणों की अदायगी एवं पुनप्र्राप्तियों को घटाने पर शुद्ध व्यय 97 हजार 106 करोड़ अनुमानित है। राजस्व व्यय 83 हजार 27 करोड़ एवं पूंजीगत व्यय 13 हजार 839 करोड़ है। वर्ष 2021-22 में पूंजीगत व्यय कुल व्यय का 14 प्रतिशत है।
प्रदेश में अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग के विकास के लिए अनुसूचित जनजाति उपयोजना मद मे 34 प्रतिशत एवं अनुसूचित जाति उपयोजना मद में 13 प्रतिशत का बजट प्रावधान किया गया है। वर्ष 2021-22 के बजट में सामाजिक क्षेत्र के लिये 38 प्रतिशत, आर्थिक क्षेत्र के लिये 390प्रतिशत एवं सामान्य सेवा क्षेत्र के लिये 23 प्रतिशत का प्रावधान किया गया है।
राज्य के आय-व्यय को संतुलित रखने की दृष्टि से व्यय में मितव्ययिता के भी प्रयास किये गये हैं। राज्य का सकल वित्तीय घाटा 17 हजार 461 करोड़ अनुमानित है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 4.56 प्रतिशत है। वर्ष 2021-22 हेतु कुल प्राप्तियां 97 हजार 145 करोड़ के विरूद्ध शुद्ध व्यय 97 हजार 106 करोड़ अनुमानित है। इन वित्तीय संव्यवहारों के फलस्वरूप 39 करोड़ की बचत अनुमानित है। वर्ष 2021-22 में 3 हजार 702 करोड़ का राजस्व घाटा अनुमानित है। वर्ष 2021-22 का वार्षिक वित्तीय विवरण तथा अनुदान की मांगे इन दो पंक्तियों के साथ सदन के समक्ष प्रस्तुत है-
रास्ते की अड़चनों से, हम कभी डरते नहीं।
बात हो जब न्याय की, पीछे कभी हटते नहीं।।
अफगानिस्तान में काफी नुकसान पहुंचा चुके चिपकने वाले बमों का अब कश्मीर में इस्तेमाल किया जा रहा है. इन्हें गाड़ियों पर चिपका कर दूर से विस्फोट किया जा सकता है, लेकिन कश्मीर में ये बम आखिर आ कहां से रहे हैं?
डॉयचे वैले पर चारु कार्तिकेय की रिपोर्ट-
यह बम आकार में छोटे लेकिन काफी शक्तिशाली होते हैं. इनमें चुंबक लगा होता है जिसकी मदद से इन्हें गाड़ियों पर आसानी से चिपकाया जा सकता है और फिर दूर से ही विस्फोट किया जा सकता है. कश्मीर में दशकों से चल रही इंसर्जेन्सी का सामना कर रहे सुरक्षा बल इस नए खतरे को लेकर चिंतित हैं. तीन वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि प्रदेश में हाल ही में मारे गए छापों में ये बम पाए गए.
कश्मीर के पुलिस प्रमुख विजय कुमार ने बताया, "ये काफी शक्तिशाली आईईडी होते हैं और ये निश्चित ही मौजूदा सुरक्षा माहौल पर असर डालेंगे, क्योंकि इस समय घाटी में पुलिस और सुरक्षा बालों की गाड़ियां काफी ज्यादा संख्या में मौजूद हैं और वो कई बार इधर से उधर जाती हैं." फरवरी में सिर्फ एक ही छापे में ऐसे 15 बम मिले थे और इससे यह चिंता बढ़ रही है कि भारत-पाकिस्तान विवाद में अब एक एक ऐसा हथियार आ गया है जिसका काफी परेशान करने वाला इस्तेमाल अफगानिस्तान में तालिबान कर चुका है.
बीते कुछ महीनों में अफगानिस्तान में सुरक्षा बलों, जजों, सरकारी अधिकारियों, ऐक्टिविस्टों और पत्रकारों पर इस तरह के बमों से कई हमले हुए हैं. इनमें से कुछ हमले तब हुए जब हमलों के शिकार बीच सड़क पर ट्रैफिक में थे. इनसे आम लोगों का मारा जाना तो कम हुआ है लेकिन लोगों के अंदर डर पैदा हो गया है. कश्मीर में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में जो भी इस तरह के बम बरामद हुए हैं वो इस इलाके में नहीं बने थे. उनका इशारा था कि बम पाकिस्तान से लाए जा रहे हैं.
नाम ना बताने की शर्त पर उन्होंने बताया, "सारे बम या तो ड्रोनों से गिराए गए हैं या सुरंगों के जरिए लाए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि ये बम ज्यादा चिंता का विषय इसलिए बने हुए हैं क्योंकि इन्हें चुंबकों की मदद से गाड़ियों पर चिपकाया जा सकता है. इससे आतंकवादी घाटी में नियमित रूप से इधर से उधर जाने वाली सेना की गाड़ियों को भी निशाना बना सकते हैं.
पुलिस प्रमुख विजय कुमार ने बताया कि नए खतरे से निपटने के लिए सुरक्षाबल अपने प्रोटोकॉल बदल रहे हैं. नए कदमों के तहत अब निजी और सैन्य गाड़ियों के बीच के फासले को बढ़ा दिया गया है, गाड़ियों पर और ज्यादा कैमरे भी लगा दिए गए हैं और काफिलों की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है. कश्मीर के आतंकवादियों और अफगानिस्तान के तालिबान में एक फर्क यह है कि तालिबान शहरी और ग्रामीण इलाकों में अच्छी तरह से घुसने में सक्षम हैं.
इसके साथ साथ बम आसानी से मिल जाने के कारण इन बमों से काफी खतरा पैदा हो जाता है. तालिबान ने शुरू में माना भी था की कुछ हमलों के पीछे उसी का हाथ था, लेकिन बाद में वो अपने दावों से मुकर गया. लंदन के एसओएस विश्वविद्यालय में वरिष्ठ लेक्चरर अविनाश पालीवाल ने बताया, "तालिबान के पास उसके शिकार हैं, वो उन तक पहुंच सकता है और बेरहमी से उन्हें मार सकता है. हमले का यह पूरा ढांचा और इसे बार बार दोहराया जाना इन बमों को असरदार बनाता है. कश्मीर में, इतनी आसानी से यहां से वहां जाना और इस तरह के हमलों को कर पाने की गुंजाइश सीमित है."
सीके/एए (रॉयटर्स)
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बीजापुर, 1 मार्च। सोमवार को जांगला थाना क्षेत्र में दो तेज रफ्तार बाइकों की आपस में भिड़ंत हो गई। हादसे में दो युवकों की मौत मौके पर ही हो गई, वहीं दो घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है।
जांगला थाना क्षेत्र से मिली जानकारी के अनुसार घटना दोपहर लगभग 1 बजे की है। जगदलपुर के दो खिलाड़ी अविनाश(अक्कू) और करनदीप अंतरराज्यीय क्रिकेट स्पर्धा खेलकर बीजापुर से जगदलपुर जा रहे थे और वहीं नकुलनार निवासी मोहन लेकामी (26) अपनी पत्नी के साथ कुटरू के पेदुमपाल जा रहे थे, तभी माटवाड़ा के मोड़ पर यह सडक़ दुर्घटना घटित हो गई, जिसमें जगदलपुर निवासी अविनाश (अक्कू) और मोहन लेकामी की मौत हो गई। वहीं करनदीप और मोहन लेकामी की पत्नी को काफी चोंटे आई है। करनदीप को बेहतर इलाज के जगदलपुर के डिमरापाल अस्पताल के लिए भेज दिया गया है और महिला का इलाज भैरमगढ़ अस्पताल में चल रहा है।
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 1 मार्च। राज्य में आज शाम 5.54 तक 208 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इनमें सर्वाधिक 64 अकेले रायपुर जिले के हैं।
आईसीएमआर के मुताबिक आज बालोद 4, बलौदाबाजार 5, बलरामपुर 1, बस्तर 1, बेमेतरा 2, बीजापुर 0, बिलासपुर 23, दंतेवाड़ा 3, धमतरी 4, दुर्ग 39, गरियाबंद 2, जीपीएम 0, जांजगीर-चांपा 7, जशपुर 7, कबीरधाम 0, कांकेर 3, कोंडागांव 3, कोरबा 8, कोरिया 7, महासमुंद 2, मुंगेली 1, नारायणपुर 0, रायगढ़ 2, रायपुर 64, राजनांदगांव 11, सुकमा 0, सूरजपुर 4, और सरगुजा 5 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं।
केन्द्र सरकार के संगठन आईसीएमआर के इन आंकड़ों में रात तक राज्य शासन के जारी किए जाने वाले आंकड़ों से कुछ फेरबदल हो सकता है क्योंकि ये आंकड़े कोरोना पॉजिटिव जांच के हैं, और राज्य शासन इनमें से कोई पुराने मरीज का रिपीट टेस्ट हो, तो उसे हटा देता है। लेकिन हर दिन यह देखने में आ रहा है कि राज्य शासन के आंकड़े रात तक खासे बढ़ते हैं, और इन आंकड़ों के आसपास पहुंच जाते हैं, कभी-कभी इनसे पीछे भी रह जाते हैं।
-चियो रॉबर्टसन
दुनिया को कोविड वैक्सीन मुहैया कराने की दौड़ में भारत की एक फ़ार्मा कंपनी ने बड़ी बढ़त बना ली है.
द सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (एसआईआई) कोई ऐसा नाम नहीं है जिसे हर घर में जाना जाता हो, लेकिन यह दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी है.
पुणे (महाराष्ट्र) स्थित अपने प्लांट में यह कंपनी हर साल 1.5 बिलियन यानी डेढ़ अरब वैक्सीन डोज़ बनाती है.
फ़िलहाल एसआईआई एस्ट्राज़ेनेका जैसी दवा कंपनियों के लाइसेंस के तहत कोविड की वैक्सीन बना रही है.
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने बीबीसी को बताया, "हमने 2020 में कई टीकों पर दाँव लगाया था, जिन्हें उस वक़्त तक अप्रूवल (मान्यता) भी नहीं मिला था. यह एक बड़ा, लेकिन नपा-तुला जोखिम था, क्योंकि हमें अपने पुराने तज़ुर्बे के आधार पर ऑक्सफ़र्ड के वैज्ञानिकों की क्षमता का पूरा अंदाज़ा था."
ऑक्सफ़र्ड और एसआईआई ने मिलकर मलेरिया की वैक्सीन तैयार की थी.
द सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया एक निजी कंपनी है जिसकी वजह से पूनावाला और उनके वैज्ञानिकों के बीच तेज़ी से निर्णय लिये जा सके, पर फ़ंडिंग जुटाना एक चुनौती थी.
एसआईआई ने कोविड वैक्सीन के प्रोजेक्ट में लगभग 260 मिलियन डॉलर का निवेश किया था और बाकी का फ़ंड कंपनी ने बिल गेट्स जैसे लोगों और कुछ अन्य देशों से जुटाया.
मई 2020 तक, कई कोविड वैक्सीन बनाने के लिए एसआईआई ने 800 मिलियन डॉलर जमा कर लिये थे.
वैक्सीन बनाने की तैयारी
लेकिन सवाल ये है कि एसआईआई ने इतनी बड़ी मात्रा में कोविड वैक्सीन बनाने की तैयारी कैसे की?
कंपनी के अनुसार, अप्रैल 2020 में ही अदार पूनावाला ने इस बात का अंदाज़ा लगा लिया था कि वायल (वैक्सीन की शीशियों) से लेकर फ़िल्टर्स तक, उन्हें किन-किन चीज़ों की कितनी ज़रूरत पड़ेगी.
पूनावाला ने बताया, "हमने समय रहते 600 मिलियन वायल (वैक्सीन की शीशियाँ) ख़रीद ली थीं और सितंबर महीने में ही उन्हें अपने वेयरहाउस (गोदाम) में रखवा दिया था. ये हमारी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिसकी वजह से हम जनवरी में 70-80 मिलियन डोज़ तैयार कर पाये. यह इसलिए भी संभव हो पाया क्योंकि हमने जोखिम उठाते हुए, अगस्त में ही वैक्सीन बनानी शुरू कर दी थी."

उन्होंने कहा, "काश, बाकी कंपनियों ने भी ऐसा रिस्क लिया होता, तो दुनिया के पास आज बहुत अधिक वैक्सीन डोज़ होतीं."
अदार पूनावाला वैश्विक स्तर पर टीकों के नियामन की प्रणाली और आपस में सामंजस्य की कमी को वैक्सीन में देरी का कारण मानते हुए इनकी आलोचना करते हैं.
उन्होंने कहा कि "यूके की मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (एमएचआरए), यूरोपियन मेडिसिन्स एजेंसी (ईएमए) और अमेरिका की फ़ूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) सहित दुनिया की अन्य नियामक एजेंसियों को मिलकर गुणवत्ता के एक मानक पर जल्द से जल्द सहमति बनानी चाहिए थी. मिलकर ऐसा किया जा सकता था."
इसी आधार पर पूनावाला भारत से लेकर यूरोप तक, विभिन्न सरकारों की भी आलोचना करते हैं कि 'वो किसी एक अंतरराष्ट्रीय मानक पर सहमत होने के लिए एकजुट हो सकते थे.'
उन्होंने कहा कि "हम अब भी इसे लेकर क्यों सामंजस्य नहीं बैठा सकते और क्यों इस समय को बचाने के बारे में नहीं सोचते, विशेष रूप से नये टीकों के लिए. मुझे अगर इस सब से दोबारा गुज़रना पड़ा, तो मुझे बड़ी चिढ़ होगी."
पूनावाला कोविड के नए वैरिएंट्स को लेकर ज़्यादा चिंतित नहीं दिखते.
वे कहते हैं, "जिस भी व्यक्ति ने ऑक्सफ़र्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन ली है, उसे अब तक अस्पताल नहीं जाना पड़ा है. कोई ऐसा केस नहीं है जिसे वेंटिलेटर पर ले जाना पड़ा हो या उसकी जान जोखिम में हो."
"उन्होंने संक्रमण किसी और को पास ज़रूर किया है, जो आदर्श स्थिति नहीं है, लेकिन इसने आपके जीवन को रक्षा प्रदान की है."
भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया, दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य अगस्त महीने तक क़रीब 300 करोड़ लोगों को कोविड की वैक्सीन लगाना है.
लेकिन ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, जितने लोग फ़िलहाल कोविड वैक्सीन लेने के पात्र हैं, उनमें से सिर्फ़ 56 प्रतिशत ही वैक्सीन लगवाने के लिए आगे आये हैं.
बीबीसी से बातचीत में पूनावाला ने कहा कि "कुछ सिलेब्रिटीज़ (मशहूर लोगों) और ग़ैर-विशेषज्ञों के यह कहने पर कि कोविड वैक्सीन सुरक्षित नहीं है, काफ़ी लोगों में कोविड वैक्सीन को लेकर एक झिझक पैदा हुई है."
"इसलिए मैं सिलेब्रिटीज़ और अन्य सभी लोगों से, जो सोशल मीडिया पर अपना ज़बरदस्त प्रभाव रखते हैं, यही गुज़ारिश करता हूँ कि वे बहुत ही ज़िम्मेदारी से अपनी बात रखें और तथ्यों को जाने बिना इन विषयों पर ना बोलें." (bbc.com)
-विवेक मिश्रा
कीटनाशक छिड़काव के दौरान पीपीई का अनिवार्य तौर पर इस्तेमाल किया जाए तो यह खेतिहर मजदूरों और सामान्य लोगों को कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है।
देश में तीसरे सबसे बड़े कीटनाशक उपभोक्ता पंजाब के किसानों की सेहत दांव पर है। राज्य के 83 फीसदी भू-भाग पर फैली हुई खेती में काम करने वाले खेतिहर मजदूर सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। खेतों ंमें काम करने वाले कृषि मजदूरों को जीनोटॉक्सिसिटी यानी कीटनाशकों के कारण उनकी कोशिकाओं के भीतर ऐसे स्थायी परिवर्तन हो सकते हैं जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं। वहीं, पीपीई किट पहनकर खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव करने वाले ऐसे दुष्प्रभाव से थोड़े सुरक्षित पाए गए हैं।
पंजाब के अमृतसर स्थित गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के शोध में यह बात कही गई है। इस शोध में कुल 248 लोगों को चुना गया। इनमें 148 खेतिहर मजदूर थे और जिनका 10 वर्षों का खेती का अनुभव रहा है और ग्रामीण परिवेश में रहते थे। वहीं, अन्य 148 लोग ऐसे थे जिनका खेती से कोई ताल्लुक नहीं था और यह लोग ग्रामीण परिवेश में नहीं थे । इसके अलावा कीटनाशक छिड़काव के सीजन और गैर सीजन का ध्यान रखा गया । कोशिकाओं के भीतर हो रहे बदलावों की सूक्ष्म जांच के लिए सभी के ब्लड सैंपल लिए गए। इन्हें छह घंटे बाद जांचा गया। परीक्षण के लिए कॉमेट एसे तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यह तकनीक कोशिकाओं के भीतर होने वाले म्यूटेशन यानी स्थायी बदलावों के बारे में स्पष्ट परिणाम बताती है।
शोध के निष्कर्ष में कहा गया है कि पंजाब के खेतिहर मजदूर विभिन्न तरह के मिश्रित कीटनाशकों के इस्तेमाल करने और उनके जद में रहने के कारण जीनोटॉक्सिसिटी के जोखिम में हैं। कीटनाशकों के कारण उनकी कोशिकानुवंशकी प्रभावित हो रही है। यदि पीपीई को अनिवार्य तौर पर कीटनाशक छिड़काव के दौरान इस्तेमाल किया जाए तो यह खेतिहर मजदूरों और सामान्य लोगों को उनके दुष्प्रभावों से बचा सकती है।
शोध में शामिल किए गए 148 खेतिहर मजदूरों में 93 फीसदी जो कीटनाशक की जद में आए उनकी कोशिकानुवंशिकी में स्थायी बदलावों (म्यूटेशन) के जोखिम ज्यादा पाए गए जबकि 26 फीसदी में ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा तब हुईं जब वे कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे थे। वहीं, कीटनाशकों के जद में रहने वालों के सैंपल में पाया गया कि कीटनाशकों से बाहर रहने वालों की तुलना में उनके मेटाफेज में काफी बढ़ोत्तरी थी।
इस शोध में किसी खास कीटनाशक का नाम नहीं लिया गया है और आबादी की विशेषताओं को शामिल नहीं किया गया है। शोध में कहा गया है कि ऑर्गेनिक फॉर्मिंग और जैविक कीटनाशकों का इस्तेमाल बढ़ाने से इस जोखिम को कम किया जा सकता है। (downtoearth.org.in)
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायगढ़, 1 मार्च। आज सुबह जिले के धरमजयगढ़ तहसील क्षेत्र कापू थाना अंतर्गत खम्हार ग्रामीण बैंक के कैशियर को अज्ञात बदमाशों ने गोली मारकर बैग लूट लिए जाने का मामला प्रकाश में आया है।
इस संबंध में जानकारी के मुताबिक धरमजयगढ़ सीएमपीआईडी कॉलोनी के रहने वाले विनोद कुमार लकड़ा खम्हार में ग्रामीण बैंक में कैशियर के पद पर कार्यरत हैं। आज सुबह लगभग सवा 10 बजे धरमजयगढ़ से खम्हार ड्यूटी जाते वक्त मिरिगुड़ा के करीब अज्ञात बाइक सवारों ने बैंककर्मी विनोद लकड़ा को लूट के इरादे से पीठ पर गोली चलाई। उन्हें धरमजयगढ़ सिविल अस्पताल में प्रारंभिक जांच करने के बाद रायगढ़ भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
बहरहाल लूट की रकम के बारे में अब तक पुलिस को स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक बैंक कर्मी के बैग में बैंक से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज थे, जिन्हें आरोपी लेकर फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा मौके के लिए डाग स्क्वायड साइबर टीम के साथ निकल गए हंै। इसके अलावा क्षेत्र से बाहर निकलने वाले इलाके के सर्चिंग व नाकेबंदी कर दी गयी है।
दोपहर 3 बजे समाचार लिखे जाने तक कैशियर से क्या लूटा गया है, इसका पता नहीं चला है। जानकारी यह भी मिल रही है कि कैशियर के बैग में महत्वपूर्ण कागजात थे और नगदी राशि कम थी। बहरहाल जांच के बाद ही पता चलेगा कि गोली मारकर फरार होने वाले अपराधियों ने क्या लूटा है?
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायगढ़, 1 मार्च। रायगढ़ जिला कांग्रेस के सचिव महेन्द्र यादव ने पारिवारिक कलह के चलते खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली है। आत्महत्या का कारण पारिवारिक झगड़ा बताया जा रहा है।
महेंद्र यादव ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में अपने गृहग्राम में खुद को गोली मार ली। मृतक की आयु 30 साल के आस-पास बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेता महेन्द्र यादव पिछले कुछ समय से पारिवारिक कलह के कारण काफी परेशान थे और इस दौरान उन्होंने अपने मित्रों से इस बात का जिक्र भी किया था। माना जा रहा है कि इसी तनाव के कारण महेन्द्र ने मौत को गले लगाने का आत्मघाती निर्णय ले लिया।
घटना की जानकारी मिलने पर रायगढ़ विधायक प्रकाश नायक सहित वरिष्ठ कांग्रेसियों ने उन्हें सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी है। सोशल मीडिया में दिवंगत कांग्रेस नेता को श्रद्धांजलि देने का क्रम जारी है।
-श्रुति मेनन
भारत में जड़ी-बूटियों का एक विवादित मिश्रण एक बार फिर सुर्ख़ियों में है, नए दावे किए जा रहे हैं कि ये कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ प्रभावी है.
कोरोनिल नाम की इस दवा को हाल में कुछ सरकारी मंत्रियों की मौजूदगी में लॉन्च किया गया.
लेकिन इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि ये काम करता है और इसके इस्तेमाल की मंज़ूरी के बारे में भ्रामक दावे किए गए हैं.
कोरोनिल के बारे में हम क्या जानते हैं?
ये पारंपरिक तौर पर भारतीय दवाओं में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियों का मिश्रण है और इसे भारत की एक बड़ी कंपनी पतंजलि बेच रही है. इसे कोरोनिल नाम दिया गया है.
सबसे पहले इसके बारे में बीते साल जून में चर्चा शुरू हुई थी, जब मशहूर योग गुरु बाबा रामदेव ने इसे बिना किसी आधार के कोविड-19 का 'इलाज' बताकर प्रचारित किया था.
लेकिन भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद इसकी मार्केटिंग रोकनी पड़ी. सरकार ने तब कहा था कि ऐसा कोई डेटा नहीं है, जो दिखाता हो कि इससे इलाज हो सकता है.
हालाँकि सरकार ने कहा था कि इसे "इम्युनिटी बूस्टर" के तौर पर बेचना जारी रखा जा सकता है.
इस साल 19 फरवरी को कंपनी ने एक और इवेंट किया, जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन भी मौजूद थे. इस आयोजन में ये दावा दोहराया गया कि कोरोनिल कोविड-19 से बचाव और उसका इलाज कर सकती है.
डॉ हर्षवर्धन की मौजदगी की भारत में डॉक्टरों की सबसे बड़ी संस्था, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने आलोचना की.
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संस्था ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री की मौजूदगी में एक 'अवैज्ञानिक दवा' का प्रचार भारत के लोगों का अपमान है और एसोसिएशन ने मंत्री से ये स्पष्ट करने को कहा कि क्या उन्होंने इसका इलाज के तौर पर समर्थन किया.
आयोजन में डॉ हर्षवर्धन की मौजूदगी के बारे में पूछने के लिए हमने स्वास्थ्य मंत्रालय से संपर्क किया, लेकिन ये लेख प्रकाशित होने तक हमें उनका कोई जवाब नहीं मिला.
पतंजलि कंपनी ने मंत्री की मौजूदगी का बचाव किया और कहा, "उन्होंने न तो आयुर्वेद (भारत की पारंपरिक चिकित्सा) का समर्थन किया, न ही आधुनिक चिकित्सा पद्धति का."
कोरोनिल के बारे में क्या दावे किए गए?
कंपनी बार-बार कह रही है कि उनका उत्पाद कोविड-19 पर काम करता है.
पतंजलि के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण ने बीबीसी से कहा, "इसने लोगों का इलाज किया है."
कंपनी ने हमें कहा कि इसके वैज्ञानिक ट्रायल हुए हैं, जिसके नतीजे कई अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हुए है.
कंपनी ने ख़ास तौर पर नवंबर 2020 में स्विट्ज़रलैंड स्थित एमडीपीआई की ओर से प्रकाशित एक जर्नल का ज़िक्र किया, जो लैब ट्रायल पर आधारित है.
हालाँकि ये अध्ययन मछली पर किया गया था, और इसमें ये नहीं कहा गया कि इस बात के सबूत हैं कि कोरोनिल इंसानों में कोरोना वायरस का इलाज कर सकती है.
इसमें सिर्फ़ ये कहा गया है कि मौजदा प्री-क्लीनिकल अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि इंसानों में विस्तृत क्लीनिकल ट्रायल किए जा सकते हैं.
ब्रिटेन के साउथैम्प्टन विश्वविद्यालय में ग्लोबल हेल्थ के विशेषज्ञ डॉ. माइकल हेड ने बीबीसी से कहा कि लैब में प्री-क्लीनिकल ट्रायल करने और इंसानों पर काम करने वाली किसी चीज़ के लिए रेगुलेटरी मंज़ूरी हासिल करने में अंतर होता है.
उन्होंने कहा, "कई दवाइयां लैब में कुछ ठीक नतीजे देती हैं, लेकिन जब इनका इंसानों पर ट्रायल किया जाता है, तो वो कई वजहों से काम नहीं करतीं."
कोरोना वायरस से पॉज़िटिव पाए गए 95 मरीज़ों पर बीते साल मई और जून के बीच एक इंसानी ट्रायल किया गया था.
इनमें से 45 को उपचार दिया गया और 50 प्लेसीबो समूह का हिस्सा था (जिन्हें कुछ नहीं दिया गया).
पतंजलि कंपनी ने कहा कि इसके नतीजे एक जाने-माने जर्नल साइंस डायरेक्ट के अप्रैल 2021 के एडिशन में छप रहे हैं.
कंपनी ने कहा कि नतीजों से पता चला कि जिन लोगों को कोरोनिल दी गई, वो लोग उन लोगों के मुक़ाबले जल्दी ठीक हो रहे थे, जिन्हें ये नहीं दी गई थी.
हालाँकि, ये एक छोटे सैंपल साइज़ पर किया गया पायलट अध्ययन था.
इसलिए इसके नतीजों को पुख़्ता मानना मुश्किल लगता है, क्योंकि रिकवरी की दरों में कई अन्य वजहों से भी अंतर हो सकता है.
दिसंबर 2020 में उत्तराखंड स्थित पतंजलि कंपनी ने राज्य प्रशासन से कोरोनिल के मौजूदा 'इम्युनिटी बूस्टर' के लाइसेंस को 'कोविड-19 की दवा' में बदलने के लिए कहा.
इस साल जनवरी में पतंजलि कंपनी ने कहा कि उत्पाद को कोविड के ख़िलाफ़ एक 'सहायक उपाय' के तौर पर मंज़ूरी मिल गई है.
राज्य प्रशासन ने बीबीसी से बातचीत में पुष्टि की है कि उन्होंने नया लाइसेंस जारी किया है, लेकिन साथ ही ये भी स्पष्ट किया कि ये लाइसेंस कोविड के 'इलाज' के तौर पर नहीं है.
पारंपरिक चिकित्सा विभाग और राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण के निदेशक डॉ. वाईएस रावत ने बीबीसी को बताया, "अपग्रेडेड लाइसेंस का मतलब है कि इसे ज़िक, विटामिन सी, मल्टी-विटामिन या किसी अन्य सप्लिमेंटल मेडिसिन की तरह बेचा जा सकता है."
उन्होंने साथ ही कहा, "ये (कोरोनिल) इलाज नहीं है."
कंपनी ने ये भी बताया कि उसे गुड मैन्युफ़ैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) प्रमाणपत्र मिला है, जो कहता है कि ये 'विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सर्टिफ़िकेशन स्कीमों के अनुरूप है'.
एक वरिष्ठ एक्ज़िक्यूटिव राकेश मित्तल ने एक ट्वीट में ये दावा भी किया था कि कोरोनिल को डब्ल्यूएचओ से मान्यता मिली है, लेकिन बाद में उन्होंने इस ट्वीट को हटा दिया था.
दरअसल भारत का शीर्ष ड्रग रेगुलेटर ही डब्ल्यूएचओ से मान्यता प्राप्ता एक स्कीम के तहत जीएमपी सर्टिफ़िकेशन देता है और ये निर्यात के मक़सद से उत्पादन मानकों को सुनिश्चित करने के लिए दिया जाता है.
उत्तराखंड राज्य सरकार के डॉ. रावत ने बताया, "जीएमपी प्रमाणपत्र का दावा की प्रभावकारिता से कुछ लेना-देना नहीं है, ये मैन्युफ़ैक्चरिंग के दौरान गुणवत्ता के मानकों को बनाए रखने के लिए होता है."
डब्ल्यूएचओ ने बीबीसी को इस बात की पुष्टि की कि उन्होंने "कोविड -19 के उपचार के लिए किसी भी पारंपरिक दवा की प्रभावशीलता को प्रमाणित नहीं किया है."
साउथैम्प्टन विश्वविद्यालय के डॉ हेड कहते हैं, "अभी कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है कि ये उत्पाद कोविड -19 के इलाज या बचाव के लिए फ़ायदेमंद है." (bbc.com)


