सेहत-फिटनेस

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27-Jul-2021 5:30 PM (46)

 

केनबरा. कॉफी को लेकर एक नई रिसर्च चौंकाती है. ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों का कहना है कि रोजाना 6 कप से अधिक कॉफी पीते हैं, तो इसका सीधा असर ब्रेन पर पड़ता है. ज्यादा कॉफी पीने वालों में याद्दाश्त घटने (डिमेंशिया) का खतरा 58 फीसदी तक रहता है. इससे स्ट्रोक का डर भी बना रहता है.

दरअसल, कॉफी में कैफीन नाम का तत्व पाया जाता है. यह सीधे दिमाग के नर्वस सिस्टम पर अपना असर छोड़ता है. नतीजा इंसान रिलैक्स महसूस करने लगता है. लेकिन, जब इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तो ये दिमाग पर बुरा असर छोड़ने लगता है. इससे व्यक्ति को नींद न आने की दिक्कत होती है.

वहीं, एक और रिसर्च में कॉफी से आंखों में नुकसान की बात कही गई है. न्यूयॉर्क स्थित माउंट सिनाई के आइकन स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने यह रिसर्च की है. यह रिसर्च ऑप्थेलमोलॉजी नामक जर्नल में छपी है. इस रिसर्च में बताया गया है कि बहुत अधिक मात्रा में कैफीन का इस्तेमाल ग्लूकोमा की आशंका बढ़ा सकता है. रिसर्च के अनुसार, ग्लूकोमा की वजह हमारे खान-पान की आदतें और आनुवांशिक हो सकती हैं. शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि जिन लोगों के परिवार में किसी व्यक्ति को ग्लूकोमा है तो ऐसे लोगों को कैफीन का इस्तेमाल कम करना चाहिए.

अन्य कारण ये भी है कि चाय-कॉफी का ज्यादा सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है, जो कि आंखों की रोशनी में धुंधलापन का कारण बनता है. कैफीन से ग्लूकोमा होने का सीधा संबंध नहीं है लेकिन यह आंखों में इस तरह की परिस्थितियां बना देता है कि उससे ग्लूकोमा होने का खतरा बढ़ जाता है. (news18.com)


13-Jul-2021 8:13 PM (141)

क्या आपने कभी पहले इतनी खूबसूरत गोभी देखी है. अगर नहीं देखी तो अब देख लीजिए, क्योंकि ये है दुनिया की सबसे विचित्र दिखने वाली गोभी. इसके इतने अनोखे दिखने का कारण  है इसके पिरामिड जैसी आकृति वाला टूटा हुआ फूल. वैज्ञानिकों को अब जाकर इसकी वजह पता चल सकी है कि आखिर क्यों ये गोभी दिखने में इतनी अनोखी है.

साइंस न्यूज के मुताबिक, फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के साइंटिस्ट फ्रांस्वा पार्सी और उनके साथियों ने अब यह पता लगा लिया है कि रोमनेस्को कॉलीफ्लावर के फूल इतने विचित्र क्यों होते हैं. इन लोगों ने अपने अध्ययन में पता लगया कि ये गोभी और रोमनेस्को कॉलीफ्लावर में बीच में जो दानेदार फूल जैसी आकृतियां दिखती हैं, वो वाकई में फूल बनना चाहती हैं. लेकिन, फूल बन नहीं पाती. इस वजह से वो कलियों जैसे बड्स में रह जाती हैं. इस वजह से उनकी शक्ल ऐसी दिखती है.

इस गोभी को रोमनेस्को कॉलीफ्लावर कहते हैं. इसके अलावा इसे रोमनेस्को ब्रोकोली के नाम से भी जाना जाता है. बॉटनी यानी वनस्पति विज्ञान की भाषा में इसका नाम ब्रेसिका ओलेरासिया है. जानकारी के मुताबिक, इस प्रजाति के तहत सामान्य गोभी के फूल, पत्ता गोभी, ब्रोकोली और केल जैसी सब्जियां उगती हैं. रोमनेस्को कॉलीफ्लावर सेलेक्टिव ब्रीडिंग का उत्कृष्ट उदाहरण हैं.

फ्रांस्वा पार्सी ने बताया कि रोमनेस्को कॉलीफ्लावर फूल की तरह अपनी पहचान बनाना चाहता है, लेकिन ये असफल होता है. सामान्य गोभी और रोमनेस्को में अंतर सिर्फ इतना ही है कि रोमनेस्को के हर फूल अलग-अलग दिखते हैं, जबकि गोभी के आपस में सटे और ज्यादा चिपके हुए होते हैं. रोमनेस्को कॉली से ज्यादा फूल निकलते हैं, इसलिए वो गोभी से अलग दिखते हैं.

रोमनेस्को कॉलीफ्लावर को खाया जाता है. इसका सबसे पहला उपयोग 16वीं सदी में इटली के कुछ प्राचीन दस्तावेजों में मिलता है. यह आमतौर पर हरे रंग का होता है. इसका स्वाद लगभग मूंगफली जैसा होता है. पकने के बाद यह और स्वादिष्ट लगता है. इसका उपयोग सब्जियों और सलाद में किया जाता है.

रोमनेस्को कॉलीफ्लावर के यही अविकसित फूल वापस से शूट्स बन जाते हैं, वो फिर से फूल बनने का प्रयास करते हैं, लेकिन असफल होते हैं.... यह प्रक्रिया इतनी ज्यादा बार होती है कि एक बड के ऊपर दूसरा, उसके ऊपर तीसरा और फिर इसी तरह ये पिरामिड जैसी हालत बना लेते हैं. ये हरे पिरामिड जैसी आकृति बना लेते हैं.रोमनेस्को कॉलीफ्लावर में भरपूर मात्रा में विटामिन C, विटामिन K, डायटरी फाइबर्स और कैरोटिनॉयड्स होते हैं. ये सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. अमेरिका और यूरोपीय देशों में इसकी खेती भी की जाती है. इसकी खेती से किसानों को काफी फायदा होता है. (ndtv.in)


12-Jul-2021 2:46 PM (92)

खुद को फिट रखने की चाह में लोग बहुत-कुछ कर रहे हैं. इसी में एक तकनीक है, रोजाना 10 हजार कदम पैदल चलना. अक्सर इसे बेहद फायदेमंद बताया जाता रहा. लेकिन क्या वाकई लोग रोज इतने कदम चलते हैं? नहीं, बल्कि पश्चिमी देशों, जैसे अमेरिका और कनाडा में ज्यादातर वयस्क कोशिश के बाद भी रोज 5 हजार से कम स्टेप्स तय करते हैं. तो क्या फिट रहने के लिए हर दिन 10 हजार कदम चलना जरूरी है या इसके बगैर भी स्वस्थ रहा जा सकता है?

फिटनेस ट्रैक करने वाले उपकरण अक्सर बताते हैं कि एक वयस्क को हर दिन 10 हजार कदम चलना चाहिए. बहुत से लोग इसपर भरोसा करते हैं और चलने की कोशिश भी करते हैं. कुछ कामयाब होते हैं तो ज्यादातर ये टारगेट पूरा कर ही नहीं पाते. अगर आप भी इनमें से हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं. दरअसल 10 हजार कदम का विज्ञान से कम और संयोग से ज्यादा वास्ता है.

हार्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रोफेसर डॉ एई मिन ली के मुताबिक, 10 हजार कदम का कंसेप्ट जापान में साठ के दशक में शुरू हुआ था. 1964 में टोक्यो में ओलंपिक के दौरान जापान में सेहत को लेकर लोग काफी कुछ करने लगे थे. तब एक घड़ी निर्माता कंपनी ने ऐसा पेडोमीटर बनाया, जिसपर एक पुरुष चलना हुआ दिखता था, साथ में जापानी भाषा में लिखा था- 10 हजार कदम. ये वॉक का एक टारगेट था, जो यूं ही दिया गया था लेकिन कुछ सालों के भीतर ये दुनियाभर में फैल गया.

फिटनेट के लिए आने वाले ट्रैकर बगैर किसी शोध के डालने लगे कि रोज 10 हजार कदम चलना सेहत के लिए फायदेमंद है. हालांकि विज्ञान कहता है कि सेहतमंद रहने के लिए रोज इतने कदम चलने की जरूरत नहीं. इंडियन एक्सप्रेस में इस बारे में विस्तार से बताया गया है.

एक स्टडी पिछले साल ही की गई. इसमें अलग-अलग देशों से लगभग 5 हजार लोगों ने हिस्सा लिया. युवा से अधेड़ उम्र के इन लोगों के बारे में दिखा कि जो लोग रोज 8 हजार कदम चल रहे थे, दिल के दौरे या इसी तरह की बीमारी से उनकी मौत की आशंका, उनके बराबर थी, जो काफी कम चलते थे. इसका मतलब ये नहीं कि 10 हजार या ज्यादा-कम चलने से कोई नुकसान है, बल्कि बात ये है कि ज्यादा चलने से आप ज्यादा स्वस्थ रहेंगे, ये बात गैर-वैज्ञानिक है.

देखा जाए तो कम ही लोग रोज 10 हजार कदम चल पाते हैं. कनाडा और अमेरिका में सेहत के लिए काफी सचेत लोगों पर हुई एक स्टडी में पाया गया कि अगर इतने कदमों का टारगेट लंबे समय के लिए दिया जाए तो लोग चलना ही बंद कर देते हैं. खुद को टारगेट देकर फिर उसे पूरा न कर पाने से तनाव बढ़ता है, जिससे कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. यही कारण है कि वैज्ञानिक अब 10 हजार कदमों की बजाए छोटे टारगेट पर काम करने को कह रहे हैं. इसके साथ ही व्यायाम और संतुलित भोजन काफी हद तक लाइफस्टाइल के कारण होने वाली बीमारियों से दूर रखता है.

स्टडी के दौरान पाया गया कि अमेरिका और कनाडा जैसे विकसित देशों में लोग ज्यादा आलसी हैं. ये बात पहले भी निकल चुकी है. दो साल पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें देशों की रैंकिंग जारी कर बताया गया कि उनके नागरिक शारीरिक रूप से कितने सक्रिय हैं. इसमें युगांडा के नागरिक सबसे ज्यादा मेहनती और एक्टिव माने गए. इसकी केवल 5.5 प्रतिशत आबादी पर्याप्त रूप से सक्रिय नहीं है.

168 देशों की सूची में अमेरिका समेत कई संपन्न देश काफी पीछे रहे. उनके यहां आधी से ज्यादा वयस्क आबादी शारीरिक व्यायाम नहीं करती है. भारत में भी हाल खास बेहतर नहीं. हम इसकी रैंकिंग में 117 वें स्थान पर रहे. रिसर्च के अनुसार हमारी आबादी का 34 प्रतिशत पर्याप्त सक्रिय नहीं है.

इससे पहले अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी एक रिसर्च ने भी भारत को भी दुनिया के सबसे आलसी देशों की सूची में डाला था. भारत इन देशों में 39वीं रैंकिंग पर था. हमारे यहां लोग औसतन एक दिन में 4297 कदम चलते हैं. हर दिन सबसे ज्यादा चलने में हांगकांग के लोग हैं. हांगकांग में लोग रोज औसतन 6880 कदम चलते हैं. वहीं इंडोनेशिया के लोग महज 3513 कदम ही चलने के साथ सबसे कम एक्टिव देशों में आए. (news18.com)


11-Jul-2021 2:55 PM (75)

नई दिल्ली, 11 जुलाई | बारिश का मौसम बारिश के साइडिफेक्ट ला सकता है, यह उच्च आद्र्रता के स्तर को भी साथ लाता है जो त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बुरा हो सकता है। बेसिक क्लींजिंग टोनिंग और मॉइस्चराइजिंग कभी-कभी विशेष रूप से इस मौसम में पर्याप्त नहीं होते हैं क्योंकि नमी और नीरसता हमारे संकट को बढ़ा देती है। कोलकाता में साल्ट लेक स्थित काया क्लिनिक की सलाहकार और त्वचा एक्सपर्ट डॉ सोहम भट्टाचार्य ने स्वस्थ और चमकती त्वचा के लिए कुछ त्वचा देखभाल सुझाव दिए है।

नियमित रूप से त्वचा की देखभाल विशेष रूप से मानसून के दौरान, आद्र्र मौसम में बहुत महत्वपूर्ण है।

आप क्लीन्जर और फेस वॉश का उपयोग कर सकते हैं जो साबुन मुक्त होते हैं, जिनमें आपकी त्वचा के लिए कोमल तत्व होते हैं। अल्कोहल मुक्त टोनर के साथ इसका पालन करें। मानसून के लिए जोजोबा तेल युक्त मॉइस्चराइजर का उपयोग कर सकते हैं।

अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार 15 से 50 तक के एसपीएफ वाले सनस्क्रीन को कभी न भूलें। सनस्क्रीन हमेशा बाहरी या हल्के एक्सपोजर से 20 मिनट पहले लगाना चाहिए।

इस मौसम के लिए क्लींजिंग और टोनिंग के बाद रात में हमेशा विट सी फॉमूर्ला वाला सीरम लगाएं और उसके बाद हल्की नाइट क्रीम लगाएं।

हमेशा आंखों के नीचे के क्षेत्र पर विशेष ध्यान दें और रात में इसे हाइड्रेट और पोषित रखें, जिसमें सक्रिय सोया और राइस पेप्टाइड्स युक्त ब्राइटनिंग और फमिर्ंग आई सीरम हो।

जैसा कि हम में से अधिकांश लोगों को इस मौसम में थोड़ा अधिक पसीना आता हैं, अपनी त्वचा और शरीर को हाइड्रेट रखने की कोशिश करें। एंटीऑक्सिडेंट, सलाद, फल, सब्जियों के रस से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। एक स्वस्थ कसरत व्यवस्था बनाए रखें।

आरामदायक कपड़े अधिमानत सूती या लिनन पहनें।

एल ऑकिटेन के राष्ट्रीय प्रशिक्षक देबाबनी गुहा सुझाव देते हैं,

छूटना कुंजी है। - हफ्ते में कम से कम दो बार एक्सफोलिएट करें और उसके बाद जेल बेस्ड मास्क लगाएं। मेरी प्राथमिकता हमेशा रात में स्क्रब और मास्क का उपयोग करना है क्योंकि तब त्वचा आराम करती है और उसके बाद सुबह प्रभाव शानदार होता है!

साथ ही दिन में दो बार स्किनकेयर रेजिमेंट का इस्तेमाल करना न भूलें।

एक प्राकृतिक फेस उयाल (तेल) का प्रयोग करें जो त्वचा की कोशिकाओं को पोषण देता है और कोशिकाओं को नरम चमकदार दिखने के लिए मोटा होने में मदद करता है। (आईएएनएस)
 


09-Jul-2021 6:01 PM (78)

 

World Population Day 2021 : हर साल 11 जुलाई को दुनिया भर में वर्ल्‍ड पॉपुलेशन डे मनाया जाता है. इसका उद्देश्‍य दुनियाभर में आबादी से जुड़ी समस्‍याओं के प्रति लोगों को जागरुक करना है. जागरुकता के तहत फैमिली प्‍लानिंग, जेंडर इक्‍वैलिटी, गरीबी, मेटरनल हेल्‍थ और मानवाधिकार से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जाती है. हमारे देश के लिए भी बढ़ती आबादी कई समस्‍याओं का कारण बनती जा रही है. इसकी वजह बर्थ कंट्रोल से जुड़ी जानकारियों का अभाव भी माना जाता है. दरअसल हमारे देश में बर्थ कंट्रोल के रूप में सबसे ज्‍यादा प्रचलन नसबंदी, कॉन्डम और गर्भनिरोधक गोलियां ही हैं. जबकि एनएचएसयूके के मुताबिक, ऐसे बहुत से गर्भनिरोधक तरीके भी हैं जिनके बारे में लोगों की जागरूकता सीमित है. तो आइए आज जानते हैं कि बर्थ कंट्रोल के अन्य क्‍या क्‍या तरीके हैं जिसे आसानी से अपनाया जा सकता है.

1.कॉन्डम का प्रयोग

यह लेटेक्स या पॉलीयूरिथेन से बना हुआ पुरुष गर्भनिरोधक का तरीका है जो बर्थ कंट्रोल के साथ साथ यौन संचारित रोगों जैसे एचआईवी/एड्स से भी सुरक्षित रखता है.

2.फीमेल कॉन्डम का प्रयोग

यह गर्भनिरोधक स्त्रियों की योनि में लगाया जाता है जो स्पर्म को कॉन्डम के अंदर रखता है और उसे यूट्रस के अंदर जाने से रोकता है. यह भी यौन संचारित रोगों से बचाव करता है.

3.डायाफ्राम का प्रयोग

डायाफ्राम दरअसल लेटेक्स या सिलिकॉन से बना हुआ एक लचीली रिम वाला कप होता है जो डॉक्‍टरों की सलाह लेकर योनि के अंदर फिट किया जाता है जिससे अंडे फ़र्टिलाइज़ ना हो सके. बता दें कि सेक्स के बाद डायाफ्राम को कम से कम 6 घंटों तक योनि के भीतर ही रखा जाता है.

4.वजाइनल रिंग का प्रयोग

यह एक छोटी सी प्लास्टिक की रिंग होती है जिसे योनि के अंदर लगाया जाता है.  वजाइनल रिंग एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टोजेन जैसे हारमोंस को लगातार रक्त में मिलाती रहती है जिससे प्रेगनेंसी को रोका जा सकता है.

5.इंट्रायूटरिन डिवाइस का प्रयोग

यह लंबे समय तक चलने वाला गर्भनिरोध है.  यह कॉपर और हार्मोनल दोनों प्रकार के होते हैं और तीन साल से बारह साल तक इसे इस्तेमाल किया जा सकता है.

6.गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग

गर्भनिरोधक गोलियां दरअसल दो प्रकार की होती हैं. एक है संयुक्त गोली जिसमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टोजेन हार्मोन होते हैं जबकि दूसरा है जिसमें केवल प्रोजेस्टोजेन हार्मोन होते हैं.  इन दोनों को दिन में एक बार रोज सेवन करना होता है.

7.इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोलियां

इसे असुरक्षित यौन संबंध होने पर 72 घंटों के भीतर लेना होता है.  इसमें मौजूद हार्मोन सिंथेटिक होता है इसलिए यह शरीर के लिए हार्मफुल भी होता है.

8.पुरुष नसबंदी

एक एक छोटा सा ऑपरेशन होता है जिसमें पुरुषों की उस ट्यूब को काट दिया जाता है जो स्पर्म को वृषण से लिंग तक पहुंचाता है.  इस प्रक्रिया के बाद सेक्स पर कोई भी असर नहीं पड़ता. यह उपाय स्थाई है.

9.महिला नसबंदी

यह भी एक स्थाई उपाय है जिसमें ऑपरेशन की मदद से फैलोपियन ट्यूब को अवरुद्ध कर दिया जाता है जिससे अंडे गर्भ तक नहीं पहुंचते और महिला गर्भवती नहीं होती.

10.गर्भनिरोधक इंजेक्शन

इसे एक महीने में या फिर तीन महीने में एक बार डॉक्टर की सलाह पर लगवाना पड़ता है.  यह गर्भनिरोधक गोलियों की तरह ही काम करता है.  इसका असर 8 से 13 सप्ताह तक बना रहता है.

11.गर्भनिरोधक प्रत्‍यारोपण

गर्भनिरोधक प्रत्यारोपण छोटी और पतली प्लास्टिक की रॉड होती है जिसे महिला की बांह की अंदरूनी त्वचा में फिट किया जाता है.  इसमें ईटोनोगेस्ट्रेल हार्मोन होते हैं जो धीरे-धीरे रक्त में मिलता रहता है.  यह अधिकतर 4 साल तक के लिए गर्भावस्था से सुरक्षा प्रदान करता है.

12.गर्भनिरोधक पैच

यह एक प्रकार का गर्भनिरोधक पैच होता है जिसे महिला अपने पेट, पीठ, बाँह और कूल्हे पर लगा सकती हैं.  इसमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोजेन हार्मोन होते हैं जो अंडों को अंडाशय से बाहर नहीं निकलने देते. एक पैच तीन सप्ताह तक सुरक्षा प्रदान करता है. (news18.com)


27-Jun-2021 8:57 AM (218)

बचपन में ट्रेन का सफर...यानी खूब सारी मूंगफली खाने की आजादी. जी हां, दरअसल मूंगफली ना केवल स्‍वाद में बेहतरीन होती है, ये सेहत के मामले में भी कई ड्राइफ्रूट्स से आगे है. वेबएमडी के मुताबिक, कई लोग इसे ड्राइफ्रूट समझते हैं लेकिन दरअसल ये फलियों जैसे सोयाबीन, मटर, दाल आदि के वर्गीकरण में आता है. इसका प्रयोग हम भूनकर, चटनी के रूप में या अन्‍य तरीके से भी करते हैं लेकिन अगर आप इसे रात भर पानी में भिगोकर सुबह इसका सेवन करें तो यह सेहत को कहीं ज्‍यादा फायदा पहुंचा सकता है. आइए जानते हैं कि इसके क्‍या क्‍या फायदे हैं.

हार्ट को रखता है हेल्‍दी

मूंगफली में कार्डियो प्रोटेक्टिव गुण पाया जाता है. ऐसे में जो लोग इसका नियमित सेवन करते हैं उन्‍हें दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है. यह कोलेस्‍ट्रॉल को ठीक करता है और स्‍मॉल ब्‍लड क्‍लॉट की समस्‍या को होने से रोकता है जिससे हार्ट अटैक और स्‍ट्रोक का खतरा नहीं होता.
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ब्रेन को रखता है हेल्‍दी

मूंगफली में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है. यह एक ऐसा फैटी एसिड है जो दिमाग की कार्यक्षमता को बढ़ाता है जिससे  मेमोरी अच्‍छी होती है. ऐसे में बच्‍चों को नाश्‍ते में रोज सुबह भीगी हुई मूंगफली नियमित रूप से खिलाना चाहिए.

स्किन के लिए अच्‍छा

मूंगफली में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाई जाती है जो स्किन को एजिंग से बचाता है और स्किन को हेल्‍दी रखने में मदद करता है.

बॉडी बिल्डिंग के लिए

जो लोग बॉडी बिल्डिंग करते हैं उन्‍हें रोज सुबह भीगी मूंगफली का सेवन करना काफी फायदेमंद हो सकता है. इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है जो मसल्‍स को बनने में मदद करता है.

पाचनतंत्र को रखता है ठीक

इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन क्रिया को सुचारू रूप से चलाने में मददगार  होता है. इसका सेवन करने से आपका पाचन तंत्र ठीक तरह से काम करता है और पेट से जुड़ी कई समस्याएं दूर रहती हैं. (news18.com)


25-Jun-2021 12:37 PM (104)

पर्याप्त नींद इंसान के शरीर की जरूरत है. डॉक्टर भी सामान्य इंसान को 6 से 8 घंटे की नींद लेने की सलाह देते हैं. पर्याप्त नींद लेने से बॉडी क्लॉक सही रहती है और इसका प्रभाव हमारी पूरी जीवनशैली पर व्यापक तरीके से पड़ता है. वहीं अगर रात में बेहतर नींद नहीं आती है तो यह कई सारी शारीरिक और मानसिक समस्याओं की वजह बन सकता है. सीएनएन हेल्थ पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग रात में ठीक से नहीं सो पाते हैं या कम नींद लेते हैं उनमें डिमेंशिया नामक बीमारी होने का रिस्क काफी बढ़ जाता है. इसके अलावा भी कम नींद लेने से बॉडी क्लॉक पर विपरीत प्रभाव पड़ता है जिसके कारण कई ऐसे कारण पैदा हो जाते हैं जो जल्दी मौत की वजह बनते हैं.

इस सिलसिले में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में मेडिसिन इंस्ट्रक्टर रेबिका रोबिन्सन का कहना है कि स्टडी में जो तथ्य सामने आए हैं उन्हें देखते हुए ऐसा लगता है कि हर रात की नींद हमारे जीवन के लिए बेहद अहम है. पूरी नींद लेने से हमारा न्यूरोलॉजिकल सिस्टम ठीक तरह से काम करता है और असमय मौत का खतरा भी काफी कम हो जाता है. विश्व भर में कम नींद लेने के कारण और डिमेंशिया के कारण जल्दी होने वाली मौतों के बीच की कड़ी एक्सपर्ट्स के लिए वाकई परेशान करने वाला है.

वर्ल्ड स्लीप सोसायटी का इस सिलसिले में कहना है कि विश्व की 45 प्रतिशत जनसंख्या के लिए कम नींद लेना वाकई सेहत के लिए काफी खतरनाक है. रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि, 5 से 7 करोड़ अमेरिकी नागरिक स्लीप डिसऑर्डर, स्लीप एप्निया, इंसोमेनिया और रेस्टलेस लेग सिंड्रोम जैसी बीमारियों का शिकार है. सीडीएस ने इसे पब्लिक हेल्थ प्रॉब्लम करार दिया है. इसकी वजह है कि कम नींद लेने की इस समस्या का जुड़ाव शुगर, स्ट्रोक, कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों और डिमेंशिया से भी है.

एक्सपर्ट्स ने इस स्टडी के लिए साल 2011 से 2018 के बीच कई लोगों की स्लीपिंग हैबिट का डाटा जुटाया और इसकी जांच की. यह बात सामने आई कि जिन लोगों की अनिद्रा की शिकायत थी उन्हें लगभग हर रात ऐसे परेशानियों को झेलना पड़ रहा था. बता दें कि जर्नल ऑफ स्लीप रिसर्च में छपी इस शोध का विश्लेषण नेशनल हेल्थ एंड एजिंग स्टडी द्वारा किया गया है. (news18.com)


25-Jun-2021 12:36 PM (90)

 

बहुत सारे लोग नहाते समय बॉडी क्लीनिंग के लिए लूफा का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इसके इस्तेमाल का सही तरीका नहीं जानते हैं. जिसकी वजह से शरीर को वो फायदे नहीं मिल पाते हैं जो कि मिलने चाहिए. अब आप सोच रहे होंगे कि लूफा के इस्तेमाल से भला क्या फायदे हो सकते हैं. तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लूफा इस्तेमाल करने के कई सारे फायदे होते हैं. आइये जानते हैं इसके बारे में.

ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाता

नहाते समय लूफा का इस्तेमाल करने से बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. जब आप लूफा के ज़रिये अपने स्किन की क्लीनिंग करते हैं तो ये स्क्रब के तौर पर बॉडी मसाज का काम करता है जो ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है. इससे स्किन में कसाव आता है जिससे स्किन में चमक भी बढ़ती है.

डेड स्किन हटाता

लूफा बॉडी के डेड स्किन सेल्स को हटाकर नए सेल्स बनाने में मदद करता है. इससे स्किन कोमल और मुलायम होती है साथ ही इससे स्किन में ग्लो भी आता है.

बॉडी क्लीन कर स्किन पोर्स खोलता 

पसीने और धूल-मिट्टी की वजह से बॉडी पर गंदगी जमा हो जाती है. लूफा इस गंदगी को हटाकर स्किन को क्लीन करता है. इससे स्किन पोर्स भी खुलते हैं जिसकी वजह से मुंहासे और दाने जैसी दिक्कत भी नहीं होती है.

बॉडी के बैक पार्ट्स क्लीन करता

नहाते समय बॉडी के बैक पार्ट्स को अच्छी तरह से अपने हाथों से क्लीन करना बहुत मुश्किल होता है. क्योंकि वहां हाथ पहुंचना आसान नहीं होता है. खासकर पीठ पर. लूफा आपकी बॉडी के बैक पार्ट्स को भी अच्छी तरह से क्लीन करता है. जिससे गंदगी के साथ बैक्टीरिया भी दूर होते हैं.

ऐसे करें इस्तेमाल

ड्राई लूफा को बॉडी पर कभी इस्तेमाल न करें. इससे स्किन रगड़ सकती है और रैशेज़ हो सकते हैं. लूफा को इस्तेमाल करने से पहले इसको सबसे पहले पानी से भिगो लें. जब ये अच्छी तरह से भीग जाये तब इस पर थोड़ा सा लिक्विड बॉडी वॉश लगाएं. फिर इसके ज़रिये अपनी बॉडी को हल्के हाथों से स्क्रब करें. अगर आप लिक्विड बॉडी वॉश का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो आप पहले बॉडी पर बाथ सोप लगा लें फिर इससे पूरी बॉडी को स्क्रब करें.

लूफा के इस्तेमाल में बरतें ये सावधानियां

नहाने के बाद लूफा को अच्छी तरह से धोकर सूखने रख दें वरना इस पर फंगस होने और बैक्टीरिया पनपने का खतरा होता है.

हर हफ्ते लूफा को डिटॉल या सेवलॉन के पानी से ज़रूर साफ़ करें.

अगर आप नेचुरल लूफा का इस्तेमाल करते हैं तो इसको हर महीने बदलना न भूलें.

अगर प्लास्टिक का लूफा इस्तेमाल करते हैं तो इसको दो-तीन महीने पर ज़रूर बदल दें.

अपने लूफा को किसी और के साथ कभी शेयर न करें.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


15-Jun-2021 9:30 AM (131)

 

कोरोना महामारी के दौर में हर कोई फेफड़ों को मजबूत बनाने की सलाह ले रहा है. फेफड़ा हमारे शरीर को शुद्ध ऑक्सीजन से भरता है और इसी पर शरीर की प्रत्येक गतिविधियां निर्भर करती हैं. ऐसे में अगर व्यायाम की मदद से हम इन्‍हें मजबूत रखें तो कोरोना संक्रमण के बाद भी शरीर में ऑक्सीजन के बेहतर आपूर्ति के लिए फेफड़े पहले से तैयार रहेंगे. इसके लिए आप ब्रीदिंग एक्सरसाइज, कार्डियो एक्सरसाइज आदि कर इसकी कैपेसिटी को बढ़ा सकते हैं और लाइफस्टाइल में बदलाव लाकर अपने फेफड़ों को सपोर्ट दे सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि हम अपने फेफड़ों की कैपेसिटी को बढ़ाने के लिए  डेली रुटीन में किन गतिविधियों को शामिल करें.

इस तरह करें ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज

एक हाथ अपनी छाती पर और दूसरा पेट पर रखें. नाक से सांस लेते समय फेफड़ों में हवा खींचे और ध्यान दें कि इस समय पेट फूलता जाए.  इसके बाद, सांस को छाती में भर लें. इसे 5 से 20 सेकंड तक होल्ड करें और फिर पेट संकुचित होने तक मुंह से धीरे-धीरे सांस छोड़ते जाए. इसे पांच बार रिपीट करें. इससे आपको पता चलेगा कि एक बार में आप कितनी हवा खींच सकते हैं. इससे ज्यादा गहरी सांसे भरना सीखने में भी मदद मिलेगी. रोज सांस रोकने की समय सीमा को बढ़ाते जाएं.

कार्डियोवास्कुलर एक्सरसाइज करें

दिन में कम से कम 30 मिनट तक कार्डियो एक्सरसाइज करें. ऐसी कार्डियो चुनें जो आपकी हार्ट रेट बढ़ा दे और जिससे सांस तेजी से चलने लगें. कार्डियो, हार्ट को मजबूती देते हुए फेफड़ों के फंक्शन को सुधार देता है. एक स्ट्रोंग हेल्दी हार्ट रक्त को ज्यादा बेहतर तरीके से पंप कर सकता है और ऑक्सीजन को पूरे शरीर में ले जा सकता है. इसके लिए आप एरोबिक्स, साइकिलिंग, दौड़ें, डांस करें वॉटर एरोबिक्स करें और जम्पिंग जैक और लेग लिफ्ट्स करें.

हंसें और गाएं

हेल्‍दी फेफड़ों के लिए जोर जोर से हंसना और गाना जरूरी है. ये आपके फेफड़ों की क्षमता तो बढ़ाते ही हैं आपके शरीर में ज्यादा से ज्यादा फ्रेश एयर जाती है. गाना गाने से डायाफ्राम की मांसपेशियां काम करती है, जिससे फेफड़ों की कैपिसिटी बढ़ती है.

फूंकने वाला इंस्ट्रूमेंट बजाएं

विंड इंस्ट्रूमेंट्स मनोरंजन तो करता ही है आपके फेफड़ों की नियमित एक्सरसाइज भी कराता है. लकड़ी की बांसुरी या बांस के इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल करें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


25-May-2021 7:29 PM (205)

 

कोरोना संक्रमण से देशभर में अफरातफरी है वहीं कई राज्‍यों में ब्‍लैक फंगल ने आतंक मचा रखा है. यह पाया जा रहा है कि जिन लोगों को डायबिटीज की समस्‍या है वे ब्‍लैक फंगल की चपेट में अधिक आ रहे हैं. ऐसे में खुद को डायबिटीज से बचने और अपना ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए लोग हर संभव प्रयास कर र‍हे हैं. हालांकि डायबिटीज को लाइफस्‍टाइल मॉडिफिकेशन और मेडिकेशन की मदद से कंट्रोल किया जा सकता है लेकिन मेडिकल न्‍यूज टुडे के मुताबिक, कुछ घरेलू उपाय हैं जिनको अपनाकर आप टाइप टू डायबिटीज में सुधार ला सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि अपने ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए किन घरेलू उपायों की मदद ले सकते हैं.

1.एलोवेरा का प्रयोग

एलोवेरा एक ऐसा प्‍लांट है जिसका कई अलग अलग चीजों में प्रयोग किया जाता है. ज्‍यादातर लोग इसे स्किन केयर के लिए प्रयोग करते हैं लेकिन आपको बता दें कि यह डायबिटीज टाइप टू को कम करने में काफी कारगर है. इसमें एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं जो बीटा सेल्‍स को रिपेयर करने में काफी काम आते हैं. इसका प्रयोग आप स्‍मूदी या कैप्‍सूल के रूप में कर सकते हैं.

2.दालचीनी का सेवन
घर घर की रसोई में मिलने वाली दालचीनी का सेवन ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रख सकता है. ऐसे में आप सुबह की चाय से पहले इसका रोजाना सेवन करें. अगर आप 1 ग्राम दालचीनी का सेवन रोज करते हैं तो यह आपको डायबिटीज से दूर रख सकता है.

3.सहजन के पत्तियों का प्रयोग

सहजन का आयुर्वेद में काफी महत्‍व है. इसे मोरिंगा भी कहा जाता है. आयुर्वेद के मुताबिक, अगर आप सहजन के फलों के साथ साथ उनकी पत्तियों का भी सेवन करें तो यह आपके ब्‍लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है और आप डायबिटीज से बचे रहते हैं. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्‍या है वे भी इसके सेवन से अपने ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल रख सकते हैं.

4.नीम की पत्तियां

नीम की पत्तियों में इंसुलिन रिसेप्टन सेंसिटिविटी बढ़ाने का गुण होता है. यही नहीं, यह शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को भी ठीक रखने में मदद करता है जिससे आपका ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है. ऐसे में डायबिटीज के मरीजों को  रोजाना खाली पेट नीम की पत्तियों का रस पीना चाहिए. जिन लोगों को डायबिटीज नहीं है वह भी अगर इसका सेवन करें तो डायबिटीज से बचे रह सकते हैं.

5.तुलसी के पत्‍तों का प्रयोग

अगर आप डायबिटीज से बचना चाहते हैं तो आपको रोज खाली पेट 2 से 3 तुलसी की पत्तियों को चबाना चाहिए. दरअसल इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट तत्‍व पाए जाते हैं जो शरीर में इंसुलिन रिलीज करने और स्‍टोर करने वाली कोशिकाओं को हेल्‍दी रखने में मदद करता है.

6.मेथी का प्रयोग

मेथी भी घर घर के किचन में मिलता है. ऐसे में अगर आप चाहें तो इसका रोजाना सेवन कर ब्लड शुगर को कंट्रोल कर सकते हैं. आप अगर रात को सोने से पहले एक गिलास पानी में 1 चम्मच मेथी दाना भिगो कर रख दें और सुबह खाली पेट इस पानी का सेवन करें तो यह काफी फायदेमंद है. (news18.com)


25-May-2021 8:05 AM (149)

Eye Healthcare Tips : हमारा देश कोरोना महामारी के भयानक दौर से गुजर रहा है. रोजाना हजारों लोग जान से हाथ धो रहे हैं.  ऐसे में घर के अंदर ही लोगों की जिंदगी कैद हो गई है. दफ्तर का काम हो या स्‍कूल कॉलेज, सारी चीजों के लिए लैपटॉप और मोबाइल पर निर्भरता बढ़ी है. यही नहीं, शारीरिक गतिविधियां भी पहले की तुलना में कई गुना कम हो गई हैं. आर्टीफीशियल लाइट्स के अंदर 24 घंटे रहना हमारी आंखों की सेहत को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं. ऐसे में कुछ बुनियादी बातों को अगर हम फॉलो करें तो अपना और परिवार के अन्‍य सदस्‍यों की आंखों का ख्‍याल रख सकते हैं.

1.ब्रेक दें आंखों को

आर्टीफीशियल ब्‍लू लाइट्स से ब्रेक आंखों के लिए बहुत जरूरी है. आप दिनभर में कम से कम 4 से 5 बार अपनी खुली बालकनी या खिड़कियों पर जाने की आदत डालें. अगर आपके पास बालकनी नहीं है तो एक कप चाय या कॉफी या जूस के साथ अपनी खिड़की के पास खड़े होकर दूर तक निहारें. आप ऐसा 2 से 3 मिनट तक कर सकते हैं.

इसे भी पढ़ें : तेजपत्‍ते का काढ़ा पीने से मिनटों में दूर होता है दर्द, जानें इसके फायदे और बनाने की विधि
2.कूलिंग जरूरी

स्‍क्रीन पर आंखों को टिकाएं. आंखों के आस पास की नसें और टिश्‍यू तनाव में आ जाती हैं. ऐसे में इन्‍हें रिलैक्‍स करना बहुत जरूरी है. आप इसके लिए खीरे का टुकड़ा या रूई में गुलाबजल डालकर आंखों पर रखें और 5 मिनट तक ऐसे ही रिलैक्‍स करें. इससे आसपास के सेल्‍स हाइड्रेट होंगे और थकान दूर होगी.

3.फिटनेस के लिए निकालें समय

बॉडी के साथ साथ आंखों की फिटनेस भी जरूरी है. इसके लिए कुछ आई एक्‍सरसाइज करें. अपनी आंखों को चारों तरफ़ गोल-गोल घुमाएं. दस बार ऐसा करें. इसके बाद आंखों को दस बार ऊपर और नीचे घुमाएं. अपनी पलकों को लगातार झपकाएं और फिर आंखें दबाकर बंद करें. दस तक गिनें और आंखें खोलें.

4.कम रोशनी में मोबाइल टीवी से रहें दूर

अगर आप अंधेरे घर में लैपटॉप या मोबाईल पर काफी देर से काम करते हैं तो आपकी यह आदत आंखों को अतिरिक्‍त तनाव देता है. आई एक्‍सपर्ट की मानें तो हमेशा बैठकर, खास दूरी से और रोशनी में ही इनका प्रयोग करें. टीवी के साइड बैठने की बजाय बिलकुल सामने बैठकर ही देखें.

5.भोजन में शामिल करें ये चीजें

प्‍लांट बेस्‍ड भोजन आंखों के लिए अच्‍छे होते हैं. इसके अलावा, तरह तरह के बेरीज़, रंगबिरंगे फल, फिश, अंडे आदि का प्रयोग करें. जिंक, विटामिन ए, एंटीऑक्‍सीडेंट रिच फूड आदि का रोजाना सेवन करें.

6.ब्‍लड ग्‍लूकोज और ब्‍लड प्रेशर को रखें मेंटेन

अपने ब्‍लड ग्‍लूकोज लेवल को मेंटेन रखें. इनकी वजह से आंखों में कई समस्‍याएं शुरू हो सकती हैं. इसके अलावा घर पर भी एक्टिव रहें और हेल्‍दी भोजन करें. ऐसा करने से वजन नियंत्रित रहेगा और ब्‍लड प्रेशर भी ठीक रहेगा. ये सभी हेल्‍दी आई साइट के लिए बहुत जरूरी है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


24-May-2021 8:09 AM (148)

कोरोना संक्रमण का दौर जारी है. लोग कोरोना से बचने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं. यही नहीं, संक्रमण से बचने के लिए बताए जा रहे खान पान और लाइफ स्‍टाइल को भी लोग फॉलो कर रहे हैं. जिन लोगों को कोरोना हो चुका है और वे रिकवरी प्रोसेस में हैं उन्‍हें डाइट में पनीर खाने की सलाह दी जा रही है. दरअसल पनीर को सुपरफूड की कैटेगरी में रखा गया है जो कोरोना से रिकवरी में प्रोटीन की कमी को पूरा करता है. यह हमारे बोन्‍स और मसल्‍स के साथ साथ हमारे ब्रेन के लिए भी बहुत ही फायदेमंद है. हेल्‍थशॉट्स के मुताबिक, यह कोरोना रिकवरी में काफी फायदेमंद साबित हो रहा है.

शरीर के लिए क्‍यों जरूरी है पनीर

कोरोना संक्रमण से रिकवरी के लिए शरीर को प्रोटीन की बहुत आवश्‍यकता होती है. प्रोटीन डैमेज टिशू को जल्‍दी ठीक करता है जिससे रिकवरी फास्‍ट होता है. ऐसे में  पनीर प्रोटीन से भरपूर होता है और इसमें मौजूद अमीनो एसिड  खतरनाक पैथोजन से सुरक्षा प्रदान करता है. ऐसे में जो लोग रिकवरी प्रोसेस में हैं उन्‍हें रोजाना 75 से 100 ग्राम पनीर का सेवन जरूर करना चाहिए.

कब खाएं पनीर

अगर आप चाहें तो पनीर का सेवन कभी भी कर सकते हैं लेकिन अगर आप इसे ब्रेकफास्‍ट और लंच से 1 घंटा पहले खाएं तो यह काफी फायदेमंद होगा. इसके अलावा, आप इसे रात को सोने से 1 घंटे पहले भी खा सकते हैं. इससे आपको भरपूर एनर्जी मिलेगी और शरीर को जरूरत के हिसाब से प्रोटीन भी मिल पाएगा. इसे पचाना भी आसान होता है.

अत्‍यधिक पनीर भी खतरनाक

अगर आप जरूरत से ज्‍यादा पनीर खाएंगे तो यह आपके सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. बता दें कि पनीर दूध से बना होता है जिसके अ‍धिक सेवन से कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ने का खतरा हो सकता है.

पनीर के अन्‍य फायदे

पनीर में प्रोटीन के अलावा कैल्शियम, फॉस्फोरस, फोलेट, विटामिन डी जैसे न्यूट्रीएंट्स होते हैं जो बच्चों और बड़ों की सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद है. इसमें मौजूद कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों के लिए जरूरी हैं और आर्थराईटिस जैसी बीमारियों के बचाव में सहायक है. इसमें पाया जाने वाला सेलेनियम नामक एंटी ऑक्सीडेंट लंबे समय तक हेल्दी रखता है और बॉडी में एजिंग को स्लो करता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) 

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17-May-2021 3:00 PM (189)

हमारी बॉडी में कुछ ऐसे हॉर्मोंस होते हैं जो हमें खुश और सकारात्‍मक रखने के लिए जिम्‍मेदार होते हैं. सरल भाषा में कहें तो दरअसल डोपामाइन एक ऐसा कैमिकल मैसेंजर है जो दिमाग को कई अच्‍छी चीजें करने के लिए मोटिवेट करता हैं. जब ब्रेन में बड़ी संख्‍या में डोपामाइन कैमिकल रिलीज होता है तो कई सकारात्‍मक भावनाएं जैसे प्रेरणा, यादें, खुशी और सुकून आदि मन में पैदा होती हैं.वहीं जब कम संख्‍या में ये कैमिकल रिलीज होता है तो लोगों में निराशा जैसे बिहेवियर देखने को मिलते हैं. हालांकि इसका घटना या बढ़ना  पूरी तरह से मानव मस्तिष्क और न्यूरोट्रांसमीटर बैंड्स पर डिपेंड करता है लेकिन कुछ नेचुरल तरीके हैं जिन्‍हें आजमा कर इसे किसी हद तक बढ़ाया जा सकता है. तो अगर आप खुद को सकारात्‍मक और खुश रखना चाहते हैं तो इन बातों को अपना सकते हैं.

1.प्रोटीन का भरपूर प्रयोग

हेल्‍थलाइन के मुताबिक, दरअसल प्रोटीन में 23 टाइप के अमिनो एसिड पाए जाते हैं जिनमें से कुछ अमिनो एसिड शरीर में डोपामाइन कैमिकल को बनाने का काम करती हैं. एक शोध में पाया गया कि प्रोटीन रिच फूड में मौजूद इन अमिनो एसिड की वजह से ब्रेन में डोपामाइन लेवल तेजी से बढ़ा जिससे डीप थिंकिंग और मेमोरी पावर भी तेजी से इंप्रूव हुई.

2.कम से कम सैचुरेटेड फैट का करें प्रयोग
कुछ शोधों में पाया गया है कि सैचुरेटेड फैट जैसे एनिमल फैट, बटर, फुल फैट डेयरी, पाम ऑयल, कोकोनट ऑयल के अत्‍यधिक सेवन से ब्रेन में डोपामाइन लेवल कम हो जाता है. ऐसे में जहां तक हो सके भोजन में सैचुरेटेड फैट का कम से कम प्रयोग करें.

3.प्रोबायोटिक का करें प्रयोग

वैज्ञानिकों ने पाया है कि आंतों का ब्रेन से गहरा संबंध होता है. ऐसे में आंतों का हेल्‍दी होना बहुत जरूरी है. दरअसल आंतों में अगर गुड बैक्‍टीरिया हेल्‍दी रहते हैं तो यह ब्रेन में डोपामाइन लेवल को बढाने में मदद करते हैं. जिसका असर मूड और बिहेवियर पर पड़ता है. ऐसे में प्रोबोयोटिक प्रोडक्‍ट का सेवन जरूरी है.

4.एक्‍सरसाइज करें

एक शोध में पाया गया कि एक सप्‍ताह में 6 दिन एक एक घंटे रोज योगा किया जाए तो इसका असर डोपामाइन लेवल पर पड़ता है इसका असर पार्किंसन जैसी बीमारियों पर भी पड़ता है जो दरअसल ब्रेन में डोपामाइन लेवल कम होने की वजह से होता है. इस तरह कहा जा सकता है कि अगर आप रेग्‍युलर व्‍यायाम करें तो यह आपके मूड को अच्‍छा रखने के साथ में कई बीमारियों को दूर रखता है.

5.पर्याप्‍त नींद जरूरी

नींद की कमी ब्रेन के इस कैमिकल को डायरेक्‍ट प्रभावित करता है. पर्याप्‍त नींद के अभाव में बॉडी का नेचुरल डोपामाइन रिदम डिस्‍टर्ब होता है और आप कई साइकोलोजिकल डिजीज से घिर जाते हैं इसलिए रोज पर्याप्‍त नींद जरूर लें.

6. म्‍यूजिक और मेडिटेशन

एक शोध में पाया गया कि म्‍यूजिक सुनने से लोगों के ब्रेन में 9 प्रतिशत डोपामाइन इंक्रीज हुआ जबकि एक अन्‍य शोध मे पाया गया कि एक घंटा मेडिटेशन से 64 प्रतिशत डोपामाइन में बढ़ोतरी हुई. ऐसे में अपने जीवन में म्‍यूजिक और योग को शामिल करें.

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जानें इसके फायदे

7.सनलाइट जरूरी

अगर आप डिप्रेशन महसूस कर रहे हैं और नकारात्‍मक भावनाओं से परेशान हैं तो घर के अंदर रहने की बजाए बाहर निकलें और थोड़ा सनलाइट में रहें. आपको अंतर महसूस होगा. दरअसल सनलाइट का एक्‍सपोजर हमारे शरीर में मौजूद डोपामाइन को बूस्‍ट करता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)

 


14-May-2021 12:04 PM (380)

कोरोना संक्रमण देशभर में तेजी से बढ़ रहा है. लोग खुद को संक्रमण से बचाने के लिए तमाम तरह के प्रिकोर्शन्‍स ले रहे हैं. ऐसे में बाजार के सामान को घर लाने और उनकी सफाई को लेकर हर किसी के मन में कई सवाल हैं. विशेषज्ञों को मानना है कि अगर बाहर से लाई गई चीजों को पहले सैनेटाइज कर लिया जाए तो कोरोना के संक्रमण से किसी हद तक बचा जा सकता है. फिर वह ग्रोसरी के सामान हों या फल सब्जियां. इन सब को बाहर से लाने के बाद तुरंत सही तरीके से सैनेटाइज करना बहुत जरूरी हो है. तो आइए जानते हैं कि हम फलों या सब्जियों को खरीदकर घर लाएं तो किन बातों को ध्‍यान में रखकर उनकी सफाई करें जिससे संक्रमण भी ना फैले और वे खराब भी ना हों. जानें क्‍या है तरीका.

क्‍या कहता है WHO

WHO के मुताबिक, अन्‍य चीजों की तरह ही फलों और सब्जियों को भी कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए धोना जरूरी है. इन्‍हें साफ करने से पहले अपने हाथों को अच्‍छी तरह से साबुन से धो लें इसके बाद ही इन्‍हें धोएं. इसके लिए आप साबुन और पानी का प्रयोग कर सकते हैं. अगर आप इन्‍हें कच्‍चा खाने वाले हैं तो इनकी सफाई और भी अधिक जरूरी हो जाती है.

सबसे पहले हाथ को साफ करना जरूरी
फलों और सब्जियों को साफ करने से पहले आप अपने हाथों को 20 सेकंड तक तक साबुन से साफ करें. इसके बाद सब्जियों को साफ करें. इससे आपके हाथ पर मौजूद वायरस हट जाएंगे और आप साफ फलों को दुबारा संक्रमण से रोक पाएंगे. बेहतर होगा कि आप सफाई के बाद भी हाथों को साफ कर लें.

रनिंग वॉटर में करें सफाई

जब आप इन्‍हें साफ करें तो इस बात का ध्‍यान रखना जरूरी है कि उन्‍हें नल के नीचे ही धोएं. अगर आप किसी बाल्‍टी का टब में जमा पानी से इन्‍हें साफ कर रहे हैं तो वे वायरस के संक्रमण के संपर्क में रह जाते हैं. ऐसे में सब्जियों और फलों को धोने के लिए नल के नीचे या सिंक का ही प्रयोग करें.

डिटर्जेंट का ना करें प्रयोग

एफडीए के मुताबिक, इन्‍हें साफ करने के लिए किसी तरह के डिटर्जेंट या सोप की जरूरत नहीं. आप इन्‍हें रनिंग वॉटर में अच्‍छी तरह रगड़ रगड़ कर साफ कर सकते हैं. अगर फल या सब्जियों में छेद या कटा हिस्‍सा हो तो इन्‍हें बनाने से इस हिस्‍से को काट कर हटा दें.

स्‍पंज या ब्रश कर करें प्रयोग

जरूरत हो तो आप आलू, गाजर, मूली जैसी सब्जियों को साफ करने के लिए स्‍पंज या सॉफ्ट ब्रश  का प्रयोग कर सकते हैं.

कुछ फलों और सब्जियों को दें एक्‍स्‍ट्रा केयर

कुछ फल और सब्जियों को सफाई के समय एक्‍ट्रा केयर की जरूरत पड़ती है. ऐसे में आप उन्‍हें साफ करते वक्‍त खास ध्‍यान दें. लेटस, पत्‍तागोभी आदि पत्‍तेदार सब्जियों को धोनें के बाद कुछ देर आइस वॉटर में रख दें और पानी अच्‍छी तरह से निकलने के बाद ही फ्रिज में स्‍टोर करें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


10-May-2021 8:49 PM (210)

• यह एक दुर्लभ फंगल इन्फेक्शन है जो कोरोना काल में ज्यादा हो रहा है 
• कोविड-19 से ठीक हुए मरीजों में यह इन्फेक्शन दिखने को मिल रहा है
• डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरनाक, शुगर लेवल नियंत्रित रखें
रायपुर  10 मई|
कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच कई लोग म्यूकोरमाइकोसिस नाम के फंगल इन्फेक्शन की चपेट में आ रहे हैं। यह दुर्लभ फंगल इन्फेक्शन है जो किसी व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर होती है| कोविड-19 और डायबिटीज के मरीजों के लिए यह इन्फेक्शन और ज्यादा  खतरनाक साबित हो सकता है।  इस संक्रमण को `ब्लैक फंगस’ के नाम से भी जाना जाता है|

क्या है म्यूकोरमाइकोसिस?
इंडियन काउन्सल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा जारी अड्वाइज़री के अनुसार म्यूकोरमाइकोसिस फंगल इंफेक्शन है जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है। म्यूकोरमाइकोसिस इंफेक्शन नायक, आँख, दिमाग, फेफड़े या फिर स्किन पर भी हो सकता है। इस बीमारी में कई लोगों की आंखों की रौशनी चली जाती है वहीं कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी गल जाती है।

कोरोना के मरीजों को ज्यादा खतरा
म्यूकोरमाइकोसिस आम तौर पर उन लोगों को तेजी से अपना शिकार बनाती है जिन लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। कोरोना के दौरान या फिर ठीक हो चुके मरीजों का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है इसलिए वो आसानी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। खासतौर से कोरोना के जिन मरीजों को डायबिटीज है। शुगर लेवल बढ़ जाने पर उनमें म्यूकोरमाइकोसिस खतरनाक रूप ले सकता है।

यह संक्रमण सांस द्वारा नायक से व्यक्ति के अंदर चला जाता है| जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता काम होती है उनको यह जकड़ लेता है| 
लक्षण
• नाक में दर्द हो, खून आए या नाक बंद हो जाए
• नाक में सूजन आ जाए
• दांत या जबड़े में दर्द हो या गिरने लगें
• आंखों के सामने धुंधलापन आए या दर्द हो, बुखार हो
• सीने में दर्द
     बुखार, सिर दर्द, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, खून की उल्टियाँ होना, कभी दिमाग पर भी असर होता है 
किन रोगियों में ज्यादा पाया गया है:
· जिनका शुगर लेवल हमेशा ज्यादा रहता है
· जिन रोगियों ने कोविड के दौरान ज्यादा स्टेरॉइड लिया हो
· काफी देर आय सी यू में रहे रोगी 
· ट्रांसप्लांट या कैंसर के रोगी

कैसे बचें
• किसी निर्माणधीन इलाके में जाने पर मास्क पहनें
• बगीचे में जाएं तो फुल आस्तीन शर्ट, पैंट व गलब्स पहनें
• ब्लड ग्लूकोज स्तर को जांचते रहें और इसे नियंत्रित रखें

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है हल्के लक्षण दिखने पर जल्दी से डॉक्टर से संपर्क करें| कोविड के रोगियों में अगर बार-बार नाक बंद होती हो या नाक से पानी निकलता रहे, गालों पर काले या लाल चकते दिखने लगें, चेहरे के एक तरफ सूजन हो या सुन्न पद जाए, दांतों और जबड़े में दर्द, कम दिखाई दे या सांस लेने में तकलीफ हो तो यह ब्लैक फंगस हो सकता है|


10-May-2021 8:31 PM (242)

नई दिल्ली. फिटनेस का प्रतीक मानी जाने वाली पतली कमर अब कोविड के इलाज के दौरान भी काम आ सकती है. वहीं अगर कमर मोटी है तो समझ लीजिए की ये चिंता की बात हो सकती है. कोविड के इलाज के दौरान सामने आया है कि अगर मरीज दूसरी बीमारियों से जूझ रहा है, तो उसके इलाज और ठीक होने में खासी परेशानियां आ रही हैं. मोटापा भी अब कोविड के इलाज में एक अहम चुनौती बनकर कर सामने आ रहा है. मोटे मरीजों को जहां ठीक होने में समय लग रहा है, वहीं उन्हें हाई वेंटीलेशन प्रेशर की जरूरत भी पड़ती है.

डॉक्टर का कहना है कि ऐसे युवा जिनकी कमर पिछले एक साल में ही चर्बी की वजह से बढ़ी है, उन्हें उतना ही खतरा है, जितना किसी मोटे इंसान को हो सकता है. ऐसे लोग जिनका बॉडी मास इंडेक्स यानि शरीर द्रव्यमान सूचकांक भले ही अच्छा हो, लेकिन उनकी कमर में चर्बी हो, उनकी तुलना में पतली कमर वाले लोग कोविड से जल्दी ठीक हो जाते हैं. अब चूंकि तीसरी लहर कभी भी सिर उठा सकती है, ऐसे में डॉक्टर का कहना है कि लोगों को अपनी शारीरिक फिटनेस पर ध्यान देना चाहिए, जिससे वो कोविड की गंभीर परिणामों का सामना कर सकें.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

गंभीर रोगों की देखरेख में विशेषज्ञ डॉ. नूर मोहम्मद का कहना है कि ‘पेट के दबाव की वजह से फेफड़ों की क्षमता कम हो जाती है. पेट और छाती पर चर्बी जमा होने की वजह से फेफड़े सिकुड़े ही रह जाते हैं और ठीक से फूल नहीं पाते हैं. मोटापे से पीड़ित लोगों को लंबे वक्त तक के लिए बाइपेप (लंबे समय से सांस की तकलीफ से जूझ रहे लोगों के इस्तेमाल में आने वाली मशीन) और वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है. अगर पेट पर चर्बी नहीं होगी तो लोगों के जल्दी ठीक होने की संभावना भी ज्यादा रहती है.
डॉ. नूर मोहम्मद बताते हैं कि कोविड के इलाज में फेफड़ों का फैलना अहम गतिविधि होती है और मोटापे में ये करना बेहद दुखदायी होता है. ऐसे मरीज के साथ प्रोन पोजीशन का इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकता है. साथ ही जहां पूरा देश इस वक्त ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहा है, ऐसे में मोटे मरीजों के लिए ऑक्सीजन मास्क का आकार भी एक चुनौती बन जाता है, जो आमतौर पर उपलब्ध नहीं रहता है. कोविड के मामले में तो हल्का मोटापा भी नुकसानदायक हो सकता है.

'लॉकडाउन के दौरान घरों में रह रहे लोग, करते नहीं कसरत'

किंग्सवे हॉस्पिटल के कोविड इन्चार्ज डॉ. हर्षवर्धन बोरा के मुताबिक ‘युवाओं में मोटापा पहली लहर के दौरान भी उतना ही खतरनाक था. क्योंकि लॉकडाउन के वक्त ज्यादातर वक्त लोग घर पर रहे, इस वजह से लोगों का वजन बढ़ गया उस पर किसी तरह की कोई कसरत नहीं कर पाना करेले का नीम चढ़ा होना साबित हुआ. मोटे लोग इलाज के दौरान जल्दी प्रतिक्रिया नहीं देते हैं यहां तक कि इस समूह के लोगों में स्लीप एप्निया की वजह से ऑक्सीजन स्तर भी कम रहता है.’

सेनगुप्ता हॉस्पिटल के डॉ. शांतनु सेनगुप्ता बताते हैं , ‘अगर आपने वैक्सीन लगवा ली है, और आप रोजाना कसरत करते हैं तो आपके अस्पताल जाने के खतरा कम रहता है.' अपनी बात को बढ़ाते हुए सेनगुप्ता कहते हैं कि उम्मीद करते हैं कि तीसरी लहर ना आए, लेकिन ऐसे वक्त के लिए लोगों को खुद को तैयार करके रखना चाहिए. रोजाना 1 से 2 घंटे की कसरत, हेल्दी खाना और वैक्सीन खुद को बचाए रखने में अहम भूमिका निभा सकती है.’ (news18.com)


04-May-2021 3:00 PM (105)

 

विश्व अस्थमा दिवस हर वर्ष मई महीने के पहले मंगलवार को पूरे विश्‍व में मनाया जाता है. आज वर्ल्ड अस्थमा डे है. आज के समय में वायु प्रदूषण को देखते हुए अस्थमा के रोगियों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. इस बीमारी से छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग, सब लोग प्रभावित हो रहे हैं. अस्थमा के खिलाफ लोगों को जागरूक करने और शिक्षित करने के लिए इस दिन को पूरे विश्व में मनाया जाता है. विश्व अस्थमा दिवस ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा द्वारा आयोजित किया जाता है. यह 1993 में स्थापित एक विश्व स्वास्थ्य संगठन सहयोगी संस्था है.

आपको बता दें कि अस्थमा फेफड़ों का रोग है जो सांस की समस्याओं के कारण होता है. इससे दुनियाभर में करीब 1.5 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो अस्थमा से होने वाली 80 फीसदी मौतें कम आय वाले देशों में होती हैं. भारत में 10 में से एक व्यक्ति अस्थमा से प्रभावित है. यह अनुवांशिक बीमारी है. इसमें सही तरीके से बचाव ही कारगर है. अस्थमा को लेकर जागरूकता और सही समय पर इलाज के जरिए इससे काफी हद तक बचा जा सकता है. साल 1998 में पहली बार वर्ल्ड अस्थमा डे मनाया गया था. उसके बाद से हर साल मई महीने के पहले मंगलवार को इसे पूरे विश्‍व में मनाया जाता है.

अस्थमा के लक्षणों में सांस लेने में परेशानी, खांसी, छाती में कड़ापन और बार-बार ऐसे होना शामिल हैं. अगर इसे समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो इससे सांस लेने में समस्या हो सकती है. हालांकि अस्थमा को ठीक नहीं किया जा सकता लेकिन बचाव, दवाइयों और इलाज से लोग सामान्य जिंदगी जी सकते हैं. इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस की थीम- Uncovering Asthma Misconceptions, है जिसका मतलब है अस्थमा से जुड़ी भ्रांति को उजागर करना और इससे संबंधी मिथ्‍स को दूर करना. ऐसा इसलिए क्योंकि अस्थमा पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है, मगर अस्थमा अटैक को कम करने और रोकने के लिए अस्थमा को प्रबंधित करना संभव है. (news18.com)


28-Apr-2021 3:18 PM (265)

आज के लाइफस्टाइल में पेट निकलना या पेट लटकना आम बात हो गई है. कोरोना के प्रकोप के चलते ज्यादातर लोग वर्क फ्रॉम होम  कर रहे हैं और ऐसे में घंटो एक ही जगह बैठकर काम करने से लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इस समय ज्यादातर लोग मोटापे और पेट की बढ़ती हुई चर्बी को लेकर परेशान हैं. यह अक्सर वजन बढ़ने के कारण ही होता है. लोग हर तरीके से अपने पेट को अंदर करना चाहते हैं और अपना वजन घटाना चाहते हैं.

पेट की चर्बी को कम करने के लिए कुछ खास फल आपकी मदद कर सकते हैं. फलों में बहुत से पोषक तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य समस्याओं से लड़कर पोषण प्रदान करते हैं. इसके अलावा इन्हें खाना काफी आसान होता है और ये स्वादिष्ट भी होते हैं. आइए आपको बताते हैं 5 ऐसे फलों के बारे में जो पेट की चर्बी को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं.

पेट की चर्बी कम करने में मदद करते हैं ये 5 फल तरबूज

तरबूज का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है. गर्मियों में तरबूज शरीर को हाइड्रेटेड रखता है. इसके अलावा यह त्वचा के लिए भी लाफदायक है. यह वजन कम करता है और पेट की चरर्बी को भी कम करने में मदद करता है.

अनानास

पेट की चर्बी और बढ़ते वजन से छुटकारा पाने के लिए अनानास जरूर खाएं. गर्मियों में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अनानास को डाइट में शामिल करें. इसमें अधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो पेट को लंबे समय तक भरे होने का एहसास करवाता है. इसमें कैलोरी कम होती है.

स्ट्रॉबेरी

बैली फैट को कम करने के लिए स्‍ट्रॉबेरी काफी फायदेमंद हो सकती है. स्ट्रॉबेरी में कैलोरी काफी कम होती है. इसका सेवन करने से न सिर्फ डाइजेशन अच्छा होता है बल्कि टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है. स्ट्रॉबेरी के सेवन से वजन और बेली फैट को कम करने में आसानी होती है.

सेब

शरीर को बीमारियों से दूर रखने के लिए सेब जरूर खाना चाहिए. सेब में अधिक मात्रा में फाइबर, फ्लेवोनोइड्स और बीटा कैरोटीन जैसे गुण पाए जाते हैं, जो पाचनतंत्र को बेहतर बनाने के साथ साथ बढ़ते वजन और पेट की चर्बी को कम कर सकते हैं.

संतरा

संतरे को विटामिन सी का अच्छा सोर्स माना जाता है. संतरे में मौजूद जीरो फैट, कम कैलोरी और एंटीऑक्सीडेंट वजन घटाने में मदद करते हैं. इसके अलावा संतरे का नियमित सेवन करने से इम्यूनिटी भी मजूत होती है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


22-Apr-2021 10:29 AM (322)

 

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच यह जरूरी हो जाता है कि हम अपनी सेहत का पूरा ख्‍याल रखें और अपने आहार में ऐसी चीजें शामिल करें जिनसे शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़े. साथ ही खून में ऑक्सीजन की अच्छी मात्रा बनी रहे. ऐसे में डाइट में ऐसी चीजें शामिल करें जो खून में हीमोग्लोबिन को बढ़ाने में मददगार हों. इस संबंध में हार्वर्ड हेल्थ और अमेरिका के फूड एंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन की ओर से कहा गया है कि शरीर में हीमोग्लोबिन की उचित मात्रा बनाए रखने के लिए अपने आहार में कॉपर, आयरन, विटामिन के अलावा फॉलिक एसिड जरूर शामिल करना चाहिए. ये पोषक तत्‍व खून में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने में मददगार होंगे.

-आलू, तिल, काजू और मशरूम में भरपूर मात्रा में कॉपर पाया जाता है.

-इसके अलावा आयरन के लिए चिकन, मांस आदि के अलावाा बीन्स, हरी पत्तेदार सब्जियां और दालों का सेवन कर सकते हैं.

-विटामिन ए अंडों में भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इसके अलावा शकरकंद, गाजर, लौकी, आम और पालक आदि में भी यह पाया जाता है.
-वहीं ओट्स, दही, अंडों, बादाम, पनीर, ब्रेड और दूध आदि में भी पर्याप्‍त मात्रा में राइबोफ्लेविन होता है. इन्‍हें भी आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं.

-विटामिन बी3 मांसाहार से भरपूर मात्रा में लिया जा सकता है. इसके अलावा यह अनाज, रोस्टेड सूरजमुखी और लौकी के बीज, भुनी हुई मूंगफली से भी प्राप्‍त किया जा सकता है.

-चिकन, टूना मछली, अंडे आदि से विटामिन बी5 प्राप्‍त किया जा सकता है. इसके अलावा मशरूम, मूंगफली, एवाकाडो, ब्रोकली और ब्राउन राइस आदि से भी इसकी पूर्ति की जा सकती है.

-इसके अलावा विटामिन बी6 और बी9 भी चिकन, मछली केला, पालक आदि में भरपूर मात्रा में होते हैं.

ये चीजें भी बढ़ाएंगी ऑक्सीजन का स्‍तर
इसके अलावा नींबू में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. आप इसे भी अपनी डाइट में जरूर शामिल करें. इससे कई बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी. साथ ही यह ऑक्सीजन का स्‍तर बढ़ाने में भी मददगार माना जाता है.

लहसुन सेहत के लिए फायदेमंद होता है. इसमें अल्कालाइन पर्याप्‍त मात्रा में पाया जाता है. साथ ही यह ऑक्सीजन को बढ़ाने में भी मदद करता है.

अंकुरित अनाज जहां सेहत के लिए फायदेमंद होता है, वहीं यह शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने का काम भी करते हैं. इसके लिए आप अंकुरित चना, दाल और मूंग अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें) (news18.com)


20-Apr-2021 8:40 AM (377)

कोरोना के न्‍यू स्‍ट्रेन ने हर किसी को डरा दिया है. देश में तेजी से और आक्रामक तरीके से बढ़ते इसके मामलों के बीच लोग खुद का बचाव करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं. पिछले एक साल से मास्‍क पहनना और इम्‍युनिटी बढ़ाने के उपायों पर दुनियाभर में चर्चा हो रही है. लोग तरह तरह के नुस्‍खे अपना रहे हैं जिससे कि उनकी इम्‍युनिटी स्‍ट्रॉन्‍ग रहे और कोरोना संक्रमण से बचे रहें. अगर आप भी अपना और अपने परिवार का बचाव करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं तो आपको बताएं कि यहां हम आपके लिए ऐसी सिंपल लेकिन बहुत ही उपयोगी रेसेपी बता रहे हैं जिसकी उपलब्‍धता के लिए आपको दर दर भटकना नहीं होगा बल्कि आप अपने घर के किचन में मौजूद चीजों से ही इसे बना सकते हैं. इसके लिए अगर आपको सबसे पहले किसी चीज की जरूरत होगी तो वो है दूध की. इसके सेवन से आप घर के बच्‍चों से लेकर बुजुर्गों तक की इम्‍युनिटी को स्‍ट्रॉन्‍ग बनाए रख सकते हैं.आइए जानते हैं क्‍या है इन्‍हें बनाने का तरीका और इसके फायदे.

1.खजूर मिल्‍क

खजूर में एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-वायरल व विटामिन और आयरन भरपूर मात्रा में होते हैं. इसके रोजाना सेवन से ब्‍लड शुगर लेवल, हाई ब्‍लड प्रेशर आदि नियंत्रित रहता है. इसमें मौजूद पोषक तत्‍व हार्ट, बोन और ब्रेन के लिए भ्‍ज्ञी बहुत ही फायदेमंद होता है. ऐसे में जब इसे दूध में उबालकर पिया जाए तो इसके गुण दोगुना हो जाते हैं.

2.सीड्स मिल्‍क

ड्राई फ्रूट्स की कैटेगरी में शामिल कद्दू, सूरजमूखी, चिया व अलसी के बीज इम्‍युनिटी को तेजी से बूस्‍ट करते हैं. इन्‍हें मिक्‍सी में पीसकर दूध के साथ उबालें और पिएं. आप इसमें शहद भी डाल सकते हैं. इसके सेवन से वायरल इन्फेक्शस से बचाव होता है. यही नहीं, मौसमी सर्दी, खांसी व बुखार से भी यह दूर रखता है.

3.ड्राई फ्रूट मिल्‍क

सूखे मेवे यानी कि काजू, किशमिश, बदाम, पिस्‍ता आदि में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन-ई व ओमेगा-थ्री फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होते हैं जो शरीर में इम्‍युनिटी को तेजी से स्‍ट्रॉन्‍ग बनाते हैं. ऐसे में इन मेवों को दूध के साथ उबाल लें और और मिक्‍सी में फेटकर शेक बनाएं. इनकी पौष्टिकता बढ़ जाएगी. यह मौसमी बीमारियों के अलावा डायबिटीज, ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल में रखता है.

4.हल्दी वाला दूध पिएं

हल्दी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटी-कैंसर गुण होते हैं. ऐसे में अगर आप सोने से पहले गर्म दूध में आधा चम्‍मच हल्‍दी उबालकर पिएं तो आपकी इम्‍युनिटी स्‍ट्रॉन्‍ग रहेगी.

5.अदरक मिलाकर पिएं

अदरक में विटामिन, आयरन, कैल्शियम, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-वायरल गुण होते हैं. ऐसे में आप इसे दूध में डालकर पिएं और इसका फायदा देखें. कुछ ही दिनों में आपको इसका असर दिखने लगेगा. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


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