सेहत-फिटनेस

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04-May-2021 3:00 PM 29

 

विश्व अस्थमा दिवस हर वर्ष मई महीने के पहले मंगलवार को पूरे विश्‍व में मनाया जाता है. आज वर्ल्ड अस्थमा डे है. आज के समय में वायु प्रदूषण को देखते हुए अस्थमा के रोगियों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. इस बीमारी से छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग, सब लोग प्रभावित हो रहे हैं. अस्थमा के खिलाफ लोगों को जागरूक करने और शिक्षित करने के लिए इस दिन को पूरे विश्व में मनाया जाता है. विश्व अस्थमा दिवस ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा द्वारा आयोजित किया जाता है. यह 1993 में स्थापित एक विश्व स्वास्थ्य संगठन सहयोगी संस्था है.

आपको बता दें कि अस्थमा फेफड़ों का रोग है जो सांस की समस्याओं के कारण होता है. इससे दुनियाभर में करीब 1.5 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो अस्थमा से होने वाली 80 फीसदी मौतें कम आय वाले देशों में होती हैं. भारत में 10 में से एक व्यक्ति अस्थमा से प्रभावित है. यह अनुवांशिक बीमारी है. इसमें सही तरीके से बचाव ही कारगर है. अस्थमा को लेकर जागरूकता और सही समय पर इलाज के जरिए इससे काफी हद तक बचा जा सकता है. साल 1998 में पहली बार वर्ल्ड अस्थमा डे मनाया गया था. उसके बाद से हर साल मई महीने के पहले मंगलवार को इसे पूरे विश्‍व में मनाया जाता है.

अस्थमा के लक्षणों में सांस लेने में परेशानी, खांसी, छाती में कड़ापन और बार-बार ऐसे होना शामिल हैं. अगर इसे समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो इससे सांस लेने में समस्या हो सकती है. हालांकि अस्थमा को ठीक नहीं किया जा सकता लेकिन बचाव, दवाइयों और इलाज से लोग सामान्य जिंदगी जी सकते हैं. इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस की थीम- Uncovering Asthma Misconceptions, है जिसका मतलब है अस्थमा से जुड़ी भ्रांति को उजागर करना और इससे संबंधी मिथ्‍स को दूर करना. ऐसा इसलिए क्योंकि अस्थमा पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है, मगर अस्थमा अटैक को कम करने और रोकने के लिए अस्थमा को प्रबंधित करना संभव है. (news18.com)


28-Apr-2021 3:18 PM 94

आज के लाइफस्टाइल में पेट निकलना या पेट लटकना आम बात हो गई है. कोरोना के प्रकोप के चलते ज्यादातर लोग वर्क फ्रॉम होम  कर रहे हैं और ऐसे में घंटो एक ही जगह बैठकर काम करने से लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इस समय ज्यादातर लोग मोटापे और पेट की बढ़ती हुई चर्बी को लेकर परेशान हैं. यह अक्सर वजन बढ़ने के कारण ही होता है. लोग हर तरीके से अपने पेट को अंदर करना चाहते हैं और अपना वजन घटाना चाहते हैं.

पेट की चर्बी को कम करने के लिए कुछ खास फल आपकी मदद कर सकते हैं. फलों में बहुत से पोषक तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य समस्याओं से लड़कर पोषण प्रदान करते हैं. इसके अलावा इन्हें खाना काफी आसान होता है और ये स्वादिष्ट भी होते हैं. आइए आपको बताते हैं 5 ऐसे फलों के बारे में जो पेट की चर्बी को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं.

पेट की चर्बी कम करने में मदद करते हैं ये 5 फल तरबूज

तरबूज का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है. गर्मियों में तरबूज शरीर को हाइड्रेटेड रखता है. इसके अलावा यह त्वचा के लिए भी लाफदायक है. यह वजन कम करता है और पेट की चरर्बी को भी कम करने में मदद करता है.

अनानास

पेट की चर्बी और बढ़ते वजन से छुटकारा पाने के लिए अनानास जरूर खाएं. गर्मियों में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अनानास को डाइट में शामिल करें. इसमें अधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो पेट को लंबे समय तक भरे होने का एहसास करवाता है. इसमें कैलोरी कम होती है.

स्ट्रॉबेरी

बैली फैट को कम करने के लिए स्‍ट्रॉबेरी काफी फायदेमंद हो सकती है. स्ट्रॉबेरी में कैलोरी काफी कम होती है. इसका सेवन करने से न सिर्फ डाइजेशन अच्छा होता है बल्कि टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है. स्ट्रॉबेरी के सेवन से वजन और बेली फैट को कम करने में आसानी होती है.

सेब

शरीर को बीमारियों से दूर रखने के लिए सेब जरूर खाना चाहिए. सेब में अधिक मात्रा में फाइबर, फ्लेवोनोइड्स और बीटा कैरोटीन जैसे गुण पाए जाते हैं, जो पाचनतंत्र को बेहतर बनाने के साथ साथ बढ़ते वजन और पेट की चर्बी को कम कर सकते हैं.

संतरा

संतरे को विटामिन सी का अच्छा सोर्स माना जाता है. संतरे में मौजूद जीरो फैट, कम कैलोरी और एंटीऑक्सीडेंट वजन घटाने में मदद करते हैं. इसके अलावा संतरे का नियमित सेवन करने से इम्यूनिटी भी मजूत होती है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


22-Apr-2021 10:29 AM 234

 

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच यह जरूरी हो जाता है कि हम अपनी सेहत का पूरा ख्‍याल रखें और अपने आहार में ऐसी चीजें शामिल करें जिनसे शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़े. साथ ही खून में ऑक्सीजन की अच्छी मात्रा बनी रहे. ऐसे में डाइट में ऐसी चीजें शामिल करें जो खून में हीमोग्लोबिन को बढ़ाने में मददगार हों. इस संबंध में हार्वर्ड हेल्थ और अमेरिका के फूड एंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन की ओर से कहा गया है कि शरीर में हीमोग्लोबिन की उचित मात्रा बनाए रखने के लिए अपने आहार में कॉपर, आयरन, विटामिन के अलावा फॉलिक एसिड जरूर शामिल करना चाहिए. ये पोषक तत्‍व खून में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने में मददगार होंगे.

-आलू, तिल, काजू और मशरूम में भरपूर मात्रा में कॉपर पाया जाता है.

-इसके अलावा आयरन के लिए चिकन, मांस आदि के अलावाा बीन्स, हरी पत्तेदार सब्जियां और दालों का सेवन कर सकते हैं.

-विटामिन ए अंडों में भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इसके अलावा शकरकंद, गाजर, लौकी, आम और पालक आदि में भी यह पाया जाता है.
-वहीं ओट्स, दही, अंडों, बादाम, पनीर, ब्रेड और दूध आदि में भी पर्याप्‍त मात्रा में राइबोफ्लेविन होता है. इन्‍हें भी आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं.

-विटामिन बी3 मांसाहार से भरपूर मात्रा में लिया जा सकता है. इसके अलावा यह अनाज, रोस्टेड सूरजमुखी और लौकी के बीज, भुनी हुई मूंगफली से भी प्राप्‍त किया जा सकता है.

-चिकन, टूना मछली, अंडे आदि से विटामिन बी5 प्राप्‍त किया जा सकता है. इसके अलावा मशरूम, मूंगफली, एवाकाडो, ब्रोकली और ब्राउन राइस आदि से भी इसकी पूर्ति की जा सकती है.

-इसके अलावा विटामिन बी6 और बी9 भी चिकन, मछली केला, पालक आदि में भरपूर मात्रा में होते हैं.

ये चीजें भी बढ़ाएंगी ऑक्सीजन का स्‍तर
इसके अलावा नींबू में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. आप इसे भी अपनी डाइट में जरूर शामिल करें. इससे कई बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी. साथ ही यह ऑक्सीजन का स्‍तर बढ़ाने में भी मददगार माना जाता है.

लहसुन सेहत के लिए फायदेमंद होता है. इसमें अल्कालाइन पर्याप्‍त मात्रा में पाया जाता है. साथ ही यह ऑक्सीजन को बढ़ाने में भी मदद करता है.

अंकुरित अनाज जहां सेहत के लिए फायदेमंद होता है, वहीं यह शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने का काम भी करते हैं. इसके लिए आप अंकुरित चना, दाल और मूंग अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें) (news18.com)


20-Apr-2021 8:40 AM 269

कोरोना के न्‍यू स्‍ट्रेन ने हर किसी को डरा दिया है. देश में तेजी से और आक्रामक तरीके से बढ़ते इसके मामलों के बीच लोग खुद का बचाव करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं. पिछले एक साल से मास्‍क पहनना और इम्‍युनिटी बढ़ाने के उपायों पर दुनियाभर में चर्चा हो रही है. लोग तरह तरह के नुस्‍खे अपना रहे हैं जिससे कि उनकी इम्‍युनिटी स्‍ट्रॉन्‍ग रहे और कोरोना संक्रमण से बचे रहें. अगर आप भी अपना और अपने परिवार का बचाव करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं तो आपको बताएं कि यहां हम आपके लिए ऐसी सिंपल लेकिन बहुत ही उपयोगी रेसेपी बता रहे हैं जिसकी उपलब्‍धता के लिए आपको दर दर भटकना नहीं होगा बल्कि आप अपने घर के किचन में मौजूद चीजों से ही इसे बना सकते हैं. इसके लिए अगर आपको सबसे पहले किसी चीज की जरूरत होगी तो वो है दूध की. इसके सेवन से आप घर के बच्‍चों से लेकर बुजुर्गों तक की इम्‍युनिटी को स्‍ट्रॉन्‍ग बनाए रख सकते हैं.आइए जानते हैं क्‍या है इन्‍हें बनाने का तरीका और इसके फायदे.

1.खजूर मिल्‍क

खजूर में एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-वायरल व विटामिन और आयरन भरपूर मात्रा में होते हैं. इसके रोजाना सेवन से ब्‍लड शुगर लेवल, हाई ब्‍लड प्रेशर आदि नियंत्रित रहता है. इसमें मौजूद पोषक तत्‍व हार्ट, बोन और ब्रेन के लिए भ्‍ज्ञी बहुत ही फायदेमंद होता है. ऐसे में जब इसे दूध में उबालकर पिया जाए तो इसके गुण दोगुना हो जाते हैं.

2.सीड्स मिल्‍क

ड्राई फ्रूट्स की कैटेगरी में शामिल कद्दू, सूरजमूखी, चिया व अलसी के बीज इम्‍युनिटी को तेजी से बूस्‍ट करते हैं. इन्‍हें मिक्‍सी में पीसकर दूध के साथ उबालें और पिएं. आप इसमें शहद भी डाल सकते हैं. इसके सेवन से वायरल इन्फेक्शस से बचाव होता है. यही नहीं, मौसमी सर्दी, खांसी व बुखार से भी यह दूर रखता है.

3.ड्राई फ्रूट मिल्‍क

सूखे मेवे यानी कि काजू, किशमिश, बदाम, पिस्‍ता आदि में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन-ई व ओमेगा-थ्री फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होते हैं जो शरीर में इम्‍युनिटी को तेजी से स्‍ट्रॉन्‍ग बनाते हैं. ऐसे में इन मेवों को दूध के साथ उबाल लें और और मिक्‍सी में फेटकर शेक बनाएं. इनकी पौष्टिकता बढ़ जाएगी. यह मौसमी बीमारियों के अलावा डायबिटीज, ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल में रखता है.

4.हल्दी वाला दूध पिएं

हल्दी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटी-कैंसर गुण होते हैं. ऐसे में अगर आप सोने से पहले गर्म दूध में आधा चम्‍मच हल्‍दी उबालकर पिएं तो आपकी इम्‍युनिटी स्‍ट्रॉन्‍ग रहेगी.

5.अदरक मिलाकर पिएं

अदरक में विटामिन, आयरन, कैल्शियम, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-वायरल गुण होते हैं. ऐसे में आप इसे दूध में डालकर पिएं और इसका फायदा देखें. कुछ ही दिनों में आपको इसका असर दिखने लगेगा. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


11-Apr-2021 10:57 AM 92

रमजान में खजूर की बहुत अहमियत है. यही वजह है कि दुनिया भर के मुसलमान खजूर से रोजा खोलना पसंद करते हैं. वहीं सेहत के लिए भी खजूर कई तरह से फायदा पहुंचाता है. खजूर एक तरह का फल है. यह ज्‍यादातर मिस्र और फारस की खाड़ी क्षेत्र में पाया जाता है. दुनिया में सबसे अच्‍छी किस्‍म का खजूर, जो कई बीमारियों को ठीक करने में मददगार होता है सऊदी अरब के पवित्र शहर मदीना और इसके आस-पास पाया जाता है. खजूर में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यही वजह है कि रमजान में इफ्तार के दौरान खजूर का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि दिन भर जब रोजा रखने के बाद शरीर की एनर्जी कम होने लगती है, तो ऐसे में रोजा खोलने के लिए खजूर जैसे आसानी से पचने वाले फल की जरूरत होती है, जिससे ज्‍यादा से ज्‍यादा एनर्जी मिल सके.

हाजमा रखता है दुरुस्‍त
ईटीवी उर्दू की एक रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि इफ्तार में खजूर खाने के कई फायदे हैं. दिन भर जब रोजा में पाचन क्रिया सुस्‍त पड़ जाती है, तब खजूर भोजन को पचाने में मदद करता है.

जिस्‍म को देता है ताकत

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो जब हम खजूर से अपना रोजा खोलते हैं तो इसकी मिठास तुरंत मुंह की लार झिल्ली में जज्‍ब होकर ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाती है, जिससे शरीर में हरारत आती है और ताकत मिलती है.

कई बीमारियों से बचाता है
खजूर सर्दी के असर से होने वाली कई बीमारियों से बचाता है. साथ ही यह मस्तिष्क की कमजोरी से छुटकारा दिलाता है और भूलने की बीमारी को दूर करने में भी मददगार होता है.

खून की कमी दूर करता है
खजूर दिल को मजबूती देता है. साथ ही शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करता है. इससे सेवन से गुर्दे मजबूत बनते हैं और श्वसन रोगों में उपयोगी होता है. आमतौर पर अस्थमा में.

खजूर कई पोषक तत्‍वों से भरपूर
अरबों में एक पुरानी कहावत है कि साल में जितने दिन होते हैं, उतने ही खजूर के इस्‍तेमाल और फायदे होते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक खजूर में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन सी, विटामिन के और अन्य पोषक तत्‍व भरपूर मात्रा में होते हैं. (news18.com)


08-Apr-2021 9:14 AM 105

पिछले एक साल में दुनियाभर में जो सबसे ट्रेंडी शब्‍द रहा वो है इम्‍यूनिटी. जी हां, कोरोना की मार झेल रही दुनिया ने पिछले एक साल में इम्‍यूनिटी के महत्‍व को समझा है और अपने परिवार को इस भयानक वायरस से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया है. लेकिन विडम्‍बना ये है कि हम इन तमाम मशक्‍कतों में इम्‍यूनिटी बढ़ाने वाले भोजन के विषय में तो सारी जानकारियां हासिल की लेकिन जो भोजन हमारी इम्‍यूनिटी को कम कर रहे हैं उनकी तरफ गौर नहीं किया. तो आइए जानते हैं उन फूड्स के बारे में जो हमारी इम्‍यूनिटी को कम करने का काम करते हैं और जो घर घर के फ्रिज में मिल जाता है.

1.सोडा

ये हम सभी जानते हैं कि सोड़ा में मिठास और हाई कैलोरी के अलावा कोई भी न्‍यूट्रिशन वैल्‍यू नहीं होता. ईट दिस नॉट दैट के मुताबिक, 2011 के एक शोध में यह पाया गया कि सोडा के सेवन से अनावश्‍यक वजन बढ़ता है जिससे लोगों में ओ‍बेसिटी की समस्‍या हो सकती है. ओबेसिटी की वजह से इम्‍यून सिस्‍टम को बुरी तरह नुकसान होता है.

2.फ्राइड फूड
अगर आप इम्‍यूनिटी को बढ़ाना चाहते हैं तो अपने फेवरेट फ्रेंच फाइज़, चिकन फ्राइज़, चिकन विंग्‍स आदि से दूरी बना लें. अगर आप इनका अभी भी सेवन कर रहे हैं तो बता दें कि ये हाई फैट कंटेन करते हैं. 2016 की एक स्‍टडी के मुताबिक, हाई फैट डायट आपकी इम्‍यूनिटी पर बहुत ही बुरा प्रभाव डालते हैं.

3.अल्‍कोहल

अत्‍यधिक अल्‍कोहल का सेवन लोगों के इम्‍यून पाथवे को प्रभावित करतीं हैं. यही नहीं, अल्‍कोहल के सेवन से नींद का पैटर्न भी खराब होता है और इन दोनों वजहें शरीर की इम्‍यूनिटी को कम करने के लिए काफी हैं.

4.कैंडी, केक, पेस्‍ट्री और कुकीज

कैंडी, चौकलेट, टॉफी, केक, कुकीज़ जैसी शुगरी और हाई फैट वाली चीजें हमारे शरीर की इम्‍यूनिटी को तेजी से कम करते हैं. इनमें मौजूद चीनी की मात्रा हमारे शरीर के इन्‍फ्लामेशन को बढ़ा देते हैं जो हमारे इम्‍यून सिस्‍टम पर गलत प्रभाव डालते हैं.

5.एनर्जी ड्रिंक

बाजार में कई तरह के एनर्जी ड्रिंक मिलते हैं जो आपकी एनर्जी को सुपर बूस्‍ट करने का दावा करते हैं. दरअसल बता दें कि ये आपकी इम्‍यूनिटी सिस्‍टम के लिए बहुत घातक हैं. इनमें काफी मात्रा में कैफीन होतीं हैं जो शरीर में इन्‍फ्लामेशन को बढ़ाती हैं. बता दें कि इनके सेवन से आपकी नींद बाधित होती है जो इम्‍यून सिस्‍टम को स्‍ट्रॉंन्‍ग बनाने के लिए बहुत जरूरी है.

6.फास्‍ट फूड

अगर आप सच में अपने इम्‍यून सिस्‍टम को स्‍ट्रॉन्‍ग बनाकर रखना चाहते है तो फास्‍ट फूड जैसे बर्गर, पिज्‍जा, सैंडविच आदि खाना छोड़ दें. इनमें भारी मात्रा में कैलोरी, सैचुरेटेड फैट, साडियम और शुगर आदि होते हैं जो इम्‍यूनिटी को कम करने के लिए काफी हैं. यही नहीं, इनके सेवन से डायबिटीज़ टाइप टू और हार्ट डिजीज़ की भी संभावना बढ़ जाती है.

7.आइसक्रीम

यह भले ही स्‍वाद में बहुत ही लजीज और आपकी फेवरेट हो लेकिन बता दें कि सैचुरेटेड फैट और शुगर की बहुततायत की वजह से यह हमारे शरीर में इन्‍फ्लामेशन को बढ़ाती है जो इम्‍यूनिटी सिस्‍टम के लिए बहुत ही बुरा है.

8.पोटैटो चिप्‍स

किसी भी तरह के पैकेट वाले चिप्‍स भले हीं स्‍वाद में बहुत चटपटे और फील गुड कराने वाले हों लेकिन आपको बताएं कि इनमें नमक और सैचुरेटेड फैट बहुत अधिक मात्रा में होते हैं जो इम्‍यूनिटी के दुश्‍मन होते हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


05-Apr-2021 12:24 PM 166

 

Benefits Of Poppy Seeds: क्या आपने कभी खसखस खाया है. क्या आपको पता है कि कई घरों में इसकी सब्जी बनाई जाती है. जी हां, खसखस एक ऐसा फूड है जो किसी भी व्यंजन का स्वाद बढ़ाने का काम कर सकता है. दरअसल खसखस एक प्रकार का तिलहन है, जिसे अंग्रेजी में पॉपी सिड्स कहते हैं. खसखस का साइंटिफिक नाम पेपेवर सोम्निफेरम है. लंबे समय से इसका इस्तेमाल कई तरह के पकवानों को बनाने में किया जाता है. फूड एनडीटीवी की खबर के अनुसार खसखस सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इसमें कैलोरी, प्रोटीन, फैट, फाइबर, कैल्शियम, फॉस्फोरस और आयरन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह शरीर को कई बीमारियों से बचाता है. खासतौर पर कब्ज की समस्या में खसखस को काफी फायदेमंद माना जाता है. आइए आपको बताते हैं खसखस से होने वाले शारीरिक फायदों के बारे में.

खसखस के फायदे

इम्यूनिटी बढ़ाता है
इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए खसखस का सेवन किया जा सकता है. खसखस में मौजूद आयरन, विटामिन और जिंक इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करते हैं. इम्यून सिस्टम के स्ट्रॉन्ग होने से शरीर कई तरह के वायरल इंफेक्शन से बचा रहता है.

कब्ज में फायदेमंद
खसखस में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इसके सेवन से कब्ज और पेट संबंधी समस्याएं दूर होती हैं.

एनर्जी बढ़ाता है
खसखस के बीज में ढेर सारा कार्बोहाइड्रेट मौजूद होता है. यह बॉडी में घुलकर एनर्जी प्रदान करते हैं. इसके अलावा यह पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम को अवशोषित करने में भी मदद करता है.

मुंह के छाले की समस्या होती है दूर
गर्मियों के मौसम में बहुत से लोगों को मुंह में छालों की समस्या हो जाती है. मुंह के छालों को दूर करने के लिए खसखस का इस्तेमाल किया जा सकता है. खसखस की तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह पेट की गर्मी को शांत कर मुंह के छालों से आराम दिलाने में मदद कर सकता है.

हड्डियां होती हैं मजबूत
खसखस खाने से कमजोर हड्डियां मजबूत होती हैं. खसखस कैल्शियम, जिंक और कॉपर जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है.

मेमोरी बढ़ाता है
खसखस में कैल्शियम, आयरन और कॉपर अधिक मात्रा में पाया जाता है. ये सभी दिमाग के लिए जरूरी माने जाते हैं. खसखस के सेवन से मेमोरी बढ़ती है. (news18.com)


05-Apr-2021 12:23 PM 58

फ्लोलेस और यंग स्किन हर किसी का सपना होता है लेकिन खान पान और लाइफ स्‍टाइल की वजह से हमारी स्किन और ब्‍लड टॉक्सिन के प्रभाव से बच नहीं पाते. लिहाजा, चेहरे पर असमय झुर्रियां, एक्‍ने, पिंपल्‍स आदि नजर आने लगते हैं. अगर आपकी स्किन पर भी असमय बढ़ती उम्र का असर दिखाई देने लगा है और आप उम्र के हिसाब से अधिक मेच्‍योर दिखने लगे हैं तो काली किशमिश आपके बहुत काम आ सकती है. यह सुपर ऐंटी-एजिंग फूड की कैटैगरी में आती है जो आपको एजिंग की समस्‍या से लंबे समय तक बचाकर रख सकती है. आइए जानते हैं कि काली किशमिश के रोजाना सेवन से आपकी स्किन को किन किन चीजों का फायदा मिलता है.

1.एजिंग को रोके

काली किशमिश में पाए जानेवाले एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री-रेडिकल्स को शरीर से खत्म करते हैं. ये फ्री रेडिकल्स ही हमारी स्किन में झुर्रियों, झाइयों, फाइन लाइन्स, क्रोज फीट्स और सैगिंग आदि को पैदा करते हैं. ऐसे में काली किशमिश के नियमित सेवन से असमय आने वाले एजिंग प्रोसेस को रोका जा सकता है.
इसे भी पढ़ें : बेदाग स्किन चाहिए तो भोजन में करें इन चीजों को शामिल, स्किन नेचुरली रहेगी प्रॉब्‍लम फ्री
2.स्किन दिखेगी रेडिऐंट

अगर आप नियमित रूप से काली किशमिश का सेवन करते हैं तो इसकी वजह से आपकी स्किन पर रेडिऐंड ग्लो नजर आएगा. दअरसल काली किशमिश नेचुरल तरीके से आपकी बॉडी और ब्‍लड को लगातार डिटॉक्स करती रहती है. यह शरीर के अंदर से टॉक्सिन्स, बैड फ्लूइड और गैस को बाहर करती है जिस वजह से आपकी स्किन की कई समस्‍याएं अपने आप दूर होने लगतीं हैं और चेहरे पर ग्‍लो नजर आने लगता है.

3.डैमेज और ब्रेकआउट्स से बचाता है ये

काली किशमिश के नियमित सेवन से त्वचा की कोशिकाओं के क्षतिग्रस्त होने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है. यही नहीं, यह नई कोशिकाओं को तुरंत बनने में भी काफी मदद करती है जिस वजह से चेहरे पर आए ऐक्ने और ब्रेकआउट्स आदि की रिकवरी में समय नहीं लगता और स्किन क्लीन और प्रॉब्‍लम फ्री बनी रहती है.

4.टैनिंग से भी बचाए

गर्मी के दिनों में स्किन टैनिंग की समस्‍या आम है. अगर गर्मी में काली किशमिश का सेवन किया जाए तो यह आपकी स्किन को सन डैमेज से भी बचाती है. यही नहीं, यह टैनिंग दूर करने और सनबर्न को हील करने में भी असरदार है.

5.खूबसूरती बढ़ाए

काली किशमिश में विटमिन-सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो स्किन की रिपेयरिंग की स्पीड को बढ़ा देता है.  यही नहीं, यह स्किन की नमी को भी ब्लॉक करने में मददगार है जबकि दाग-धब्बों से तुरंत निजात दिलाता है. एजिंग प्रोसेस को भी यह कम करता है. इन सब वजहों से आपकी स्किन लंबे समय तक खूबसूरत बनी रहती है.

कैसे करें सेवन

आप हर दिन 15 से 20 काली किशमिश खा सकते हैं. आप चाहें तो काली किशमिश को रातभर पानी में भिगोकर रख दें और अगले दिन नाश्ते में इनका सेवन करें. इसके अलावा, किशमिश को स्नैक्स के रूप में भी आप सुबह शाम खा सकते हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


03-Apr-2021 9:34 PM 77

-सविता यादव

Yoga Session- आज के लाइव योगा सेशन में हमने बॉडी को लचीला बनाने वाले और वजन कम करने वाले कई छोटे-छोटे कई योगाभ्यासों को सीखा. योग स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाए रखते हैं. जो लोग चाहते हैं कि उनकी सहनशक्ति बढ़े और वे लंबे समय तक बैठ कर काम कर पाएं. तो योग जरूर करें. वहीं इम्युनिटी को बेहतर बनाए रखने में भी योग की महत्वपूर्ण भूमिका है. ये आसन पैरों की मजबूती को बढ़ाते हैं और पाचन बेहतर बनाए रखते हैं. इन आसन के जरिए स्वास्‍थ्‍य बेहतर बना रहता है और तनाव से भी मुक्ति मिलती है. इसलिए योग को अपनी नियमित दिनचर्या में जरूर शामिल करें. योगाभ्‍यास करते समय इस बात का ध्‍यान रखें कि इसे धीरे-धीरे करना चाहिए. व्‍यायाम से पहले ये तीन नियम जरूर ध्‍यान रखें कि अच्‍छा गहरा लंबा श्‍वास लें, गति का पालन करें और अपनी क्षमता के अनुसार योग करें.

चक्‍की चलनासन
इस आसन की उत्‍पत्ति पुराने जमाने में हाथ से चलाई जाने वाली चक्‍की से हुई है. इसलिए इसका नाम भी चक्‍की चलनासन है यानी यह आसन उस तरह किया जाता है, जिस तरह हाथ से आटा पीसने वाली चक्‍की चलाई जाती है.

चक्‍की चलनासन कैसे करें

चक्‍की चलनासन करना बेहद आसान है. इसके लिए आप फर्श पर दरी या मैट बिछाकर बैठ जाएं.
बैठने के बाद अपने दोनों पैरों को बिल्‍कुल सामने की ओर फैला लें. हालांकि चक्‍की बैठकर चलाई जाती थी पर इसमें आपको पैरों के बल नहीं बल्कि कूल्‍हों को जमीन पर टिका कर आराम से बैठना है.
बैठने के बाद दोनों हाथों को जोड़कर पैरों के पास तक यानी अपने सामने लाएं. दोनों हाथों को जोड़े हुए ही इसे क्‍लॉक वाइज घुमाना शुरू करें, जिस तरह चक्‍की चलाई जाती है. इसी तरह एंटी क्‍लॉक वाइज घुमाएं. शुरुआत में आप इसे 10 मिनट कर सकते हैं.

चक्‍की चलनासन के फायदे
इस आसन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बैली फैट घटाने में मदद मिलती है. लटके हुए पेट को वापस शेप में लाने के लिए यह आसन बहुत फायदेमंद है. चक्‍की चलनासन करने से लोअर एब्‍डोमन और पेल्विक एरिया का भी एक्सरसाइज होता है. इससे कमर को लचीला बनाने में भी मदद मिलती है.

बटरफ्लाई आसन:
बटरफ्लाई आसन को तितली आसन भी कहते हैं. महिलाओं के लिए ये आसन विशेष रूप से लाभकारी है. बटरफ्लाई आसन करने के लिए पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएं,रीढ़ की हड्डी सीधी रखें. घुटनो को मोड़ें और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएं. दोनों हाथों से अपने दोनों पांव को कस कर पकड़ लें. सहारे के लिए अपने हाथों को पांव के नीचे रख सकते हैं. एड़ी को जननांगों के जितना करीब हो सके लाने का प्रयास करें. लंबी,गहरी सांस लें, सांस छोड़ते हुए घटनों एवं जांघो को जमीन की तरफ दबाव डालें. तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें. धीरे धीरे तेज करें. सांसें लें और सांसे छोड़ें. शुरुआत में इसे जितना हो सके उतना ही करें. धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं.

पश्चिमोत्तानासन:
पश्चिमोत्तानासन योग का नाम दो शब्दों के मेल से बना है- पश्चिम और उत्तान. पश्चिम यानी पश्चिम दिशा या शरीर का पिछला हिस्सा और उत्तान मतलब खिंचा हुआ. रीढ़ की हड्डी के दर्द से निजात पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पश्चिमोत्तानासन योग करना चाहिए. इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के पिछले हिस्से यानी रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न होता है, इस कारण इस आसन को पश्चिमोत्तानासन कहा जाता है. इस आसन को करने से शरीर का पूरा हिस्सा खिंच जाता है और यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उनके लिए पश्चिमोत्तानासन रामबाण की तरह काम करता है और इस रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए भी यह आसन बहुत फायदेमंद माना जाता है.

पश्चिमोत्तानासन के फायदे
तनाव दूर करने में फायदेमंद
पेट की चर्बी दूर करने में मददगार
हड्डियों को लचीला बनाने में कारगर
बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद
अनिद्रा की समस्या को दूर करता है
उष्ट्रासन:
उष्ट्र से तात्पर्य ऊंट से है. इस आसन को करने ले लिएअपने योग मैट पर घुटने के सहारे बैठ जाएं और कुल्हे पर दोनों हाथों को रखें.

घुटने कंधो के समानांतर हो तथा पैरों के तलवे आसमान की तरफ हो.
सांस लेते हुए मेरुदंड को खींचे जैसे कि नाभि से खींचा जा रहा है.
गर्दन पर बिना दबाव डालें बैठे रहें
इसी स्थिति में कुछ सांसे लेते रहे.
सांस छोड़ते हुए अपने प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं.
हाथों को वापस अपनी कमर पर लाएं और सीधे हो जाएं. (news18.com)


01-Apr-2021 1:50 PM 39

 

कई लोग अपनी रोज की डाइट में सफेद बीन्स का इस्तेमाल जरूर करते हैं. विभिन्न पोषक तत्वों से भरपूर ये अनाज वास्तव में पोषण का खजाना है जिसे किसी न किसी रूप में जरूर खाना चाहिए. फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होने की वजह से सफेद बीन्स को पोषण का पावर हाउस कहा जाता है. यह कई सूक्ष्म पोषक तत्वों का एक अच्छा स्रोत हैं, जिनमें फोलेट, मैग्नीशियम और विटामिन बी 6 शामिल हैं. आइए आपको बताते हैं कि सफेद बीन्स खाने से आपकी सेहत को कैसे फायदा हो सकता है.

प्रोटीन से भरपूर
सफेद बीन्स प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत हैं. इसे डाइट में शामिल करने से मांसपेशियां स्वस्थ रहती हैं. इसमें अमीनो एसिड मौजूद होता है जो प्रोटीन के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाते हैं और कई शारीरिक प्रक्रियाओं में भी एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं. इसमें मांसपेशियों का निर्माण, पोषक तत्व परिवहन और हॉर्मोन उत्पादन शामिल हैं. शाकाहारी भोजन करने वालों के लिए ये बीन्स प्राथमिक प्रोटीन स्रोतों में से एक के रूप में काम कर सकते हैं.

फाइबर से भरपूर

सफेद बीन्स में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है. उच्च फाइबर डाइट बेहतर पाचन स्वास्थ्य से जुड़े हैं और मल की मात्रा में वृद्धि और आंतों को स्वस्थ रखने का काम करते हैं. यह सभी फाइबर तत्व मल त्याग की प्रक्रिया को आसान करके कब्ज की समस्या से भी निजात दिलाते हैं.

वजन करे कंट्रोल
सफेद बीन्स में एक उच्च पोषक तत्व घनत्व और काफी कम कैलोरी की मात्रा मौजूद होती है. सफेद बीन्स खाने से मोटापे की समस्या कम होती है. साथ ही वजन कंट्रोल में रहता है और पेट की चर्बी भी नहीं बढ़ती. सफेद बीन्स को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें. ये महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए तो बहुत ही अच्छा है.

हड्डियां बनाए मजबूत
सफेद बीन्स का इस्तेमाल हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभदायक है. इनमें मौजूद उच्च प्रोटीन और कैल्शियम तत्व हड्डियों को भीतर से मजबूती प्रदान करने के साथ हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होते हैं. इनके सेवन से हड्डियों से सम्बंधित कई समस्याओं से निजात पाया जा सकता है. इसके अलावा हड्डियों से संबंधी कई समस्याओं जैसे ऑर्थराइटिस से भी छुटकारा पाया जा सकता है.(Disclaimer:इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


01-Apr-2021 1:50 PM 57

 

कई और पोषक तत्वों की तरह ही हमारे शरीर को प्रोटीन की जरूरत भी होती है. जो लोग नॉन वेजिटेरियन हैं, वो तो शरीर में इसकी ज़रुरत को नॉनवेज के ज़रिये पूरा कर लेते हैं. लेकिन जो लोग प्योर वेजिटेरियन हैं. वो प्रोटीन की कमी को किन सोर्सेज़ के ज़रिये पूरा करें ? ये सवाल आम है. दरअसल पुरुष और महिला की बॉडी में प्रोटीन की जरूरत अलग-अलग होती है. पुरुष को रोज़ाना जहां 55 ग्राम प्रोटीन चाहिए होता है, तो महिला को 45 ग्राम प्रोटीन की जरूरत हर रोज़ होती है. आइये बताते हैं, नॉनवेज खाये बिना, प्रोटीन की कमी को किस तरह से पूरा किया जा सकता है.

प्रोटीन से भरपूर हैं ये दालें, ज़रूर करें सेवन  

सौ ग्राम मसूर दाल में 17 ग्राम प्रोटीन होता है.

सौ ग्राम मूंग दाल आपको 7.02 ग्राम प्रोटीन देगी.
सौ ग्राम चना दाल में 20 ग्राम प्रोटीन होगा.

सौ ग्राम अरहर दाल आपको 22 ग्राम प्रोटीन देगी.

सौ ग्राम उड़द दाल आपके शरीर में 25 ग्राम प्रोटीन की ज़रुरत पूरी करेगी.

सौ ग्राम राजमा 21 ग्राम प्रोटीन देता है.

सौ ग्राम लोबिया में आपको 8 ग्राम प्रोटीन मिलता है.

इसे भी पढ़ेंः हाई ब्लड प्रेशर को रखना है कंट्रोल, तो इन 5 चीजों को करें डाइट में शामिल

इन सब्ज़ियों को करें डाइट में शामिल, मिलेगा प्रोटीन

पालक खाएं, सौ ग्राम पालक में 2.9 ग्राम प्रोटीन मिलेगा.

ब्रोकली खाएं, आधा कप ब्रोकली में 2 ग्राम प्रोटीन मिलेगा.

कॉर्न यानि मक्का का सेवन करें, आधा कप में 2.5 ग्राम प्रोटीन होता है.

लीमा बीन्स  को  करें डाइट में शामिल, एक कप पकी बीन्स में 11.6 ग्राम प्रोटीन मिलेगा.

चुकंदर खाएं, 250 ग्राम में आपको 4 ग्राम प्रोटीन मिलेगा.

फ्रेंच बीन्स खाएं, ढाई सौ ग्राम में 5 ग्राम प्रोटीन होता है.

मटर, ढाई सौ ग्राम मटर  में 7 ग्राम प्रोटीन होता है.

आलू खाएं, 3 मीडियम आलू में 5 ग्राम प्रोटीन मिलेगा.

भिंडी खाएं, 250 ग्राम में 5 ग्राम प्रोटीन मिल जायेगा.

ये भी पढ़ेंः हाई बीपी में राहत देता है अजवाइन का पानी, जानें कैसे करें इस्तेमाल 

प्रोटीन के लिए इन फलों का करें सेवन

एक कप कीवी में 2.05 ग्राम प्रोटीन होता है.

आधा कप अमरुद में प्रोटीन की मात्रा 2.11 होती है.

आड़ू में प्रति कप 1 ग्राम प्रोटीन मिलता है.

एक कप खरबूजा आपको 1.5 ग्राम प्रोटीन देगा.

एक कप एवोकाडो आपकी 3 ग्राम प्रोटीन की ज़रूरत पूरी करेगा.

सौ ग्राम अंगूर में 2 ग्राम प्रोटीन होगा.

चौथाई कप चेरी आपको 1 ग्राम प्रोटीन देगी.

इनके सेवन से भी मिलेगा भरपूर मात्रा में प्रोटीन

एक गिलास दूध में आपको 8 ग्राम प्रोटीन मिलेगा.

एक कप दही में 11 ग्राम प्रोटीन मिलता है.

सूखे मेवे में भरपूर  मात्रा में प्रोटीन होता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


01-Apr-2021 8:11 AM 40

गर्भावस्था के बाद शरीर में बहुत सारे शारीरिक बदलाव होते हैं और इसलिए ऐसे में हर औरत वर्कआउट के साथ अपने पुराने शेप में आने के लिए आतुर रहती हैं. लेकिन अक्सर नई-नई मां बनी औरतों को प्रसव के बाद के वक्त में किए जा सकने वाले वर्कआउट को लेकर कंफ्यूजन रहता है.वह समझ नहीं पातीं कि उनके लिए कौन सा वर्कआउट स्टाइल या एक्सरसाइज सबसे बेहतर रहेगी.देखा जाए तो वह किसी भी तरह का वर्कआउट कर सकती हैं बशर्ते की वो उसमें आराम,आसानी और सहजता महसूस करें. प्रेग्नेंसी के बाद यह उनके पूरे फिटनेस रूटीन को बढ़ावा देने में मदद करता है. यहां हम आपको पोस्ट प्रेग्नेंसी फिटनेस रूटीन के बारे में कुछ अहम बातें बताने जा रहे हैं.

कोर स्ट्रेंथ पर ध्यान देंः 

पहले यह समझना अहम है कि गर्भावस्था मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम पर कैसे असर डालती है.जैसे ही पेट फैलता है, एब्डोमिनल खिंचाव और पीठ की मांसपेशियां छोटी हो जाती हैं. लिनिया अल्बा का संयोजी ऊतक पतला और अलग हो जाता है, लिंगामेंट पेल्विस के जोड़ बहुत अस्थिर हो जाते हैं. पेल्विक फ्लोर अक्सर भ्रूण के भार से कमजोर होता है. इस हिस्से के अधिक खिंचने की वजह से गर्भावस्था के बाद औरतों पेट में एक अलग एहसास होता है.पोस्टपार्टम के दौरान वर्कआउट करने से पहले हमें इसी कोर स्ट्रेंथ का ध्यान रखना होता है.यह महिलाओं की पूरी सेहत और बेसिक फिटनेस का सबसे अहम हिस्सा है, इसलिए अधिकांश मां बनने वाली औरतों को अपने कोर में बदलाव होने की शिकायत रहती है. महिलाएं कमजोर, असंतुष्ट और अब्सेंट- माइंडेड महसूस करती हैं. तो उन्हें शुरू में पहले अपने कोर को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए.
  
हीलिंग प्रोसेस का अलग-अलग होनाः 

लेबर यानी बच्चा पैदा होने के बाद हर औरत में हीलिंग प्रोसेस का अपना अलग- अलग वक्त होता है. डॉक्टरों के मुताबिक, आपकी गर्भावस्था के बाद की सेहतमंदी और तंदुरुस्ती काफी हद तक आपके गर्भावस्था से पहले की फिटनेस पर निर्भर करती है. इसलिए, यदि आपकी गर्भावस्था के दौरान अच्छी फिटनेस रही है, तो आपको जल्द ही ठीक होने की संभावना है. हालांकि अधिकतर औरतें प्रसव के 6 सप्ताह के अंदर सभी सामान्य कामों को फिर से शुरू कर सकती हैं.

नया दर्द और कष्ट होनाः 

गर्भावस्था के दौरान आपको बहुत आराम मिलता है, इसलिए, जब आप अपना वर्कआउट रूटीन शुरू करेंगे,तो आपको नया दर्द और कष्ट झेलना पड़ सकता है. तो, इस दौरान आपको एक्सरसाइज और डेली लाइफ को बैलेंस रखने पर ध्यान देना होगा. रोज 20 से 30 मिनट एक्टिव रहने की आदत डालें.

पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन के लिए एक्सरसाइजः 

पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन मौजूदा वक्त में नई मांओं के बीच एक बहुत ही आम मुद्दा है. इस तरह के अवसाद के लक्षण किसी भी समय दिखाई दे सकते हैं. एक हेल्दी एक्सरसाइज रूटीन बनाए रखने से आपको अपना मूड ठीक करने के साथ ही,पोस्टपार्टम के अवसाद के लक्षणों को कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी. बच्चे के जन्म के बाद साधारण एक्सरसाइज से शुरुआत करें.फिट रहने के लिए केवल 10 मिनट की वर्कआउट भी काफी होता है. अगर किसी भी तरह का दर्द महसूस हो तो एक्सरसाइज तुरंत बंद कर दें.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)

 


30-Mar-2021 2:17 PM 78

तनाव और चिंता इन दिनों हमारे जीवन का एक अभिन्‍न हिस्सा बन  चुके हैं. हम किसी भी समय खुद को तनाव से मुक्‍त नहीं रख पाते जिसका असर धीरे धीरे हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है. लेकिन यह हमें समझना होगा कि तनाव एक नेचुरल प्रक्रिया है जिसे रोका नहीं जा सकता. हां, हम अपनी लाइफ स्‍टाइल में कुछ बदलाव लाकर इसके प्रभावों को कम कर सकते हैं. ऐसे में अपनी जीवनशैली में सकारात्‍मक होकर रोजाना व्यायाम करना, सही आहार और खुशहाल रहने की कोशिश हमें कई समस्‍याओं से बचा सकती हैं. इसके अलावा, आयुर्वेद की मदद से भी हम तनाव और चिंता की नेचुरल प्रक्रिया को कंट्रोल कर सकते हैं और इनसे राहत पा सकते हैं.आइए जानते हैं कि आयुर्वेद की मदद से हम किस तरह चिंता और तनाव को दूर रख सकते हैं.

1.मालिश करें

आयुर्वेद के अनुसार, आप अगर लगातार तनाव में हैं तो अपने दिनचर्या में मालिश को जगह दें. तनाव दूर करने के लिए अगर आप तिल के तेल का मालिश करते हैं तो ये आपके लिए काफी फायदेमंद होगा. अगर आपके पास तिल का तेल नहीं है तो आप आंवला तेल या बदाम तेल भी हेड मसाज या बॉडी मसाज के लिए प्रयोग कर सकते हैं. यह आपके तनाव को कम करने में काफी फायदेमंद साबित होगा. इसके अलावा, आप रोज रात में सोने से पहले पैरों पर मालिश करें, आप बहुत रिलैक्‍स महसूस करेंगे.

2.प्राणायाम करें
प्राणायाम के साथ आप अपने दिन की शुरुआत कर सकते  हैं. अगर आपको प्राणायाम नहीं आता तो आप ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज करें. इसकी मदद से ब्रेन में भरपूर ऑक्‍सीजन पहुंचता है जो दिमाग को रिलैक्‍स करता है और आप रिलैक्‍स महसूस करते हैं.

3.वात बढ़ाने वाले भोजन से रहें दूर

चिंता और तनाव हमारे शरीर में वात दोष से भी बढ़ता है. ऐसे में फ्राई चीजों, जंक और फास्‍ट फूड आदि से बचें. चाय और कॉफी भी शरीर में वात बढ़ाते हैं. ऐसे में इनसे दूरी भी जहां तक हो सके बनाएं.

4.भोजन में शामिल करें ये चीजें

स्‍ट्रेस से नहीं उबर पा रहे हैं तो आंवला मुरब्‍बा, अश्‍वगंधा, ब्राम्‍ही को अपने भोजन में शामिल करें. आप रातभर कुछ बदाम को पानी में फूला दें और सुबह दूध के साथ इनका सेवन करें. ये आपके दिमाग को रिलैक्‍स करने में काफी कारगर हैं.

5.भरपूर लें नींद

आयुर्वेद में रात की नींद का बहुत महत्‍व है. यह आपके मेंटल, फिजिकल और इमोशनल फीलिंग को रिलैक्‍स करता है. दोपहर की नींद से बचें.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


25-Mar-2021 3:53 PM 56

आम तौर पर लोग रोने को कमजोरी की निशानी मानते हैं. यही वजह है कि पुरुष आंसू बहाने या रोने से परहेज करते हैं. लेकिन विज्ञान में यह बात साबित हुई है कि अगर आप अपनी भावनाओं को खुलकर व्‍यक्‍त करते हैं और हंसने के साथ साथ  रोते भी हैं तो इसके कई फायदे हो सकते हैं. जिस तरह खुलकर हंसना हेल्‍थ के लिए अच्‍छा माना जाता है उसी तरह मन भर रोना भी शरीर और मन के लिए बहुत जरूरी है.

तीन तरह के होते हैं आंसू

रिफ्लैक्‍स आंसू तब आता है जब आंखों में कोई कचरा या धुंआ गया हो. दूसरा है बुनियादी आंसू जिसमें 98 प्रतिशत पानी होता है और यह आंखों को लुब्रिकेट रखता है और इंफेक्शन से बचाता है. तीसरा है भावनात्मक आंसू जिसमें स्ट्रेस हॉर्मोन्स और टॉक्सिन्स की मात्रा सबसे अधिक होती है और इनका बाहर निकलना बहुत जरूरी होता है.आपको बता दें कि मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्रजाति है जो रो सकता है. ऐसे में हम यहां आपको बताते हैं कि कभी कभी रोना क्‍यों जरूरी है.

ये हैं फायदे
1.आराम महसूस कराता है

अगर आप मन भर कर रोते हैं तो आप खुद को हल्‍का महसूस करते हैं. मेडिकल न्‍यूज टूडे के मुताबिक, साल 2014 की एक शोध में यह पाया गया कि अगर आप किसी बात से परेशान हैं और कुछ भी ठीक नहीं कर पा रहे तो जी भर कर रो लीजिए, आप खुद में आराम महसूस करेंगे. यही नहीं, आपका स्‍ट्रेस भी कम होगा और आप खुद को शांत महसूस कर पाएंगे. रोने के बाद आप सही निर्णय लेने में भी सक्षम महसूस करते हैं.

2.दर्द से मिलता है आराम

जब आप रोते हैं तो बॉडी में ऑक्‍सीटॉसिन और इंडोरफिर कैमिकल्‍स रिलीज होता है जो आपके मूड को बेहतर करने के साथ साथ फिजिकल और मेंटल पेन को भी कम करता है.

3.फील गुड कैमिकल को करता है रिलीज

जब आप मन भर कर रो लेते हैं तो बॉडी में ऑक्सिटोसिन और इन्डॉर्फिन जैसे केमिकल्स रिलीज होते हैं. ये फील गुड कैमिकल्‍स हैं  जिनके रिलीज होने पर आप खुद को धीरे धीरे हल्‍का महसूस करने लगते हैं और कुछ ही देर मेंं बेहतर पाते हैं.

4.शरीर के टौक्सिन को करता है बाहर

जब किसी तनाव की वजह से इंसान रोता है तो उससे शरीर में बना टौक्सिन धीरे धीरे आंसू के सहारे बाहर आने लगता है. यह आंसू कई तरह के गुड हार्मोन्‍स रिलीज  करते हैं जो शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए फायदेमंद होता है.

5.आती है अच्‍छी नींद

साल 2015 की स्‍टडी में पाया गया कि जब बच्‍चा रोता है तो रोने के तुरंत बाद उसे नींद अच्‍छी और गहरी आती है. इसी तरह वयस्‍क इंसानों के साथ भी होता है. रोने से दिमाग शांत होता है, बेचैनी घटती है और नींद अच्‍छी आती है.

6.आंखों की सेहत के लिए अच्‍छा

आंसू आंखों को साफ करने का काम भी करती है और कई तरह की बैक्‍टीरिया से बचाती है. साल 2011 की एक स्‍टडी में पाया गया कि आंसू में मौजूद लाइसोजाइम तत्‍व में दरअसल पावरफुल एंटीबैक्‍टीरियल प्रॉपर्टीज़ होती हैं जो आंखों को कई बायोटेरर एजेंट से बचाती हैं.

7.आंखों की रौशनी को बढ़ाता है

नेशनल आई इंस्‍टीट्यूट के मुताबिक बुनियादी आंसू आंखों को लुब्रिकेंट करने के साथ साथ आंखों की रौशनी को भी बढ़ाता है और लोग साफ देखने में सक्षम हो पाते हैं. यह आंखों के मेंबरेंस की नमी को बनाए रखता है और इसे सूखने से बचाता है. (news18.com)


23-Mar-2021 11:45 AM 83

आम तौर पर 60 की उम्र तक पहुंचते पहुंचते हम यह मान लेते हैं कि अब हमारे आराम करने के दिन आ गए. यही नहीं, समाज भी इस बात का एहसास दिलाने लगता है कि हमारी उम्र अब जिंदगी की ढलान पर है लेकिन सच्‍चाई यह है कि ऐसा नहीं होता. 60 की उम्र के बाद वह उम्र शुरू होती है जब आप अपनी तमाम जिम्‍मेदारियों को निभा चुके होते हैं और आपके पास खुद की खुशियों  के लिए वक्‍त निकालने का वक्‍त बचता है लेकिन यह तभी संभव है जब आप एक्टिव लाइफ लीड कर रहे हों. तो आइए जानते हैं कि 60 की उम्र के बाद भी किस तरह खुद को चुस्‍त दुरुस्‍त बनाए रखा जाए.

1.दिल को बनाएं यंग

अगर आप मन से यंग हैं तो आपका शरीर भी आपका साथ देने के लिए तैयार रहेगा लेकिन अगर आपने मन में यह सोच लिया कि आपकी उम्र अब इन सब चीजों के लिए नहीं है तो यकीन मानिए आप केवल घर से हास्पिटल तक ही चक्‍कर लगाते रह जाएंगे. मन से पॉजिटिव रहिए और यह ठानिए कि आप बूढ़े नहीं हैं.

2.शरीर को भी रखें फिट
दिल से अगर आपने यंग होने की बात स्‍वीकार कर ली तो शरीर को हेल्‍दी और फिट रखना आसान हो जाता है. रिटायरमेंट के बाद खुद की सेहत पर खर्च करें. खान पान हेल्‍दी रखें और व्‍यायाम, योगा और वॉक करें. इसके लिए आप एक्‍पर्ट की सलाह ले सकते हैं. अपना एक रुटीन फॉलो करें और खुश और यंग दिखें, यकीन मानिए बुढ़ापा आपको छू भी नहीं पाएगा.

3.चेकअप जरूरी

छोटे बड़े किसी भी तरह की हेल्‍थ प्रॉब्‍लम को इग्‍नोर ना करें. साल में दो बार ओवरऑल चेकअप जरूर कराएं. खुद पर खर्च करने को अतिरिक्त खर्च न मानें. अगर आप सही समय पर डॉक्‍टर के साथ अपनी समस्‍याओं को डिस्‍कस कर लेंगे तो आपका खर्च भी कम होगा.

4.दोस्तों का साथ जरूरी

इस उम्र के लोगों की सबसे बड़ी समस्‍या है अकेलापन. ऐसे में परिवार के भरोसे मत रहिए और अपना ग्रुप बनाइए. अपने उम्र के लोगों के साथ पार्क में बैठिए, वॉक कीजिए और मौज मस्‍ती वाली बातें कीजिए. यहां आप समाज, परिवार और खुद के बारे में बात कर सकते हैं. ऐसा कर आप पाइएगा कि आप पहले की तुलना में ज्‍यादा खुश और सकारात्‍मक हैं.

5.डाइट का रखें विशेष ध्यान

अगर आपको फिट रहना है तो अपने खान पान पर विशेष ध्‍यान रखने की जरूरत है. एजयूके के मुताबिक, अगर आप गुड हेल्‍थ, एनर्जी से नज़दीकी और बीमारियों से दूरी चाहते हैं तो अपने डायट का विशेष ख्‍याल रखें. अपने खाने में खूब सारे फल, हरी सब्जियां, ऑयली फिश और होल ग्रेन को शामिल करें. इसके अलावा, आप अपने डायट में हल्‍का डेयरी प्रोडक्‍ट और लीन मीट शामिल कर सकते हैं. सैचुरेटेड फैट से बचें. एक उम्र के बाद पाचन शक्ति उतनी मज़बूत नहीं रहती. ऐसे में डॉक्‍टर की सलाह जरूर लें.

6.बॉडी को रखें डिहाईड्रेट

आपके लिए खूब सारा पानी पीना बहुत जरूरी है. इससे आपका शरीर डिहाईड्रेट रहेगा और आप टायर्ड महसूस नहीं करेंगे. आप चाय, कॉफी, जूस भी ले सकते हैं लेकिन चीनी वाली चीजों से दूरी रखें. टॉक्सिक अल्‍कोहल से बचें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


21-Mar-2021 11:31 AM 81

 

हरसिंगार के फूलों को अब तक आपने ईश्वर के चरणों में समर्पित करने के लिए इस्तेमाल किया होगा या फिर इन फूलों की खुशबू का आनंद लेने के लिए पेड़ से तोड़ा होगा. लेकिन क्या कभी आपने हरसिंगार के फूलों, पत्तों, जड़, छाल और बीजों का इस्तेमाल स्वास्थ्य सम्बन्धी दिक्कतों को दूर करने के लिए किया है? क्या आप जानते हैं कि इन सबके इस्तेमाल से किन-किन दिक्कतों को दूर किया जा सकता है? अगर नहीं, तो यहां जानें.

तनाव दूर करता है

तनाव को दूर करने के लिए आप हरसिंगार के फूलों का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए कुछ दिनों तक लगातार इन फूलों की ख़ुश्बू लेते रहें इससे तनाव को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही हरसिंगार के फूलों की बिना दूध की चाय बनाकर इसका सेवन करने से भी तनाव दूर होता है.

खांसी से छुटकारा
अगर आप खांसी की समस्या से परेशान हैं, तो आप इसको दूर करने के लिए हरसिंगार के पेड़ की छाल को इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आप छाल का चूर्ण बनाकर इसका सेवन कर सकते हैं.

 डैंड्रफ करे दूर

हरसिंगार के बीजों को बारीक पीसकर, इस पेस्ट को स्कैल्प पर लगाने से बालों में रूसी की समस्या खत्म होती है.

नाक और गले से खून आना करे बंद

कई बार लोगों को नाक से या गले से खून आने की (बिना किसी बड़ी बीमारी के) दिक्कत होती है. इससे निजात पाने के लिए हरसिंगार के पौधे की जड़ को धोकर कुछ दिनों तक चबाने से ये दिक्कत ख़त्म होती है.

पेट में कीड़े की समस्या से छुटकारा

पेट में कीड़े होने की समस्या से भी हरसिंगार निजात दिलाता है. इसके लिए हरसिंगार के पत्तों को तोड़कर उसका रस निकाल कर 5 मिलीग्राम की मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है.

डायबिटीज में फायदेमंद

डायबिटीज के लिए भी हरसिंगार काफी फायदेमंद होता है. हरसिंगार के पत्तों का काढ़ा बनाकर 10 मिलीग्राम की मात्रा में इसका सेवन करने से डायबिटीज रोग में फायदा होता है.

गठिया रोग में लाभदायक

गठिया रोग में आराम पाने के लिए आप हरसिंगार की जड़ का काढ़ा बनाकर 10 ग्राम की मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं. साथ ही पत्तों को पीसकर इस पेस्ट को जोड़ों पर लगाने से भी दर्द में आराम मिलता है.

खुजली और दाद से छुटकारा

खुजली, दाद-खाज की दिक्कत होने पर हरसिंगार के पत्तों को पीसकर इसका रस निकाल कर प्रभावित जगह पर लगाने से दाद-खाज-खुजली जैसे त्वचा रोग में आराम मिलता है.

बुखार में फायदेमंद

बुखार को ठीक करने के लिए भी हरसिंगार का सहारा लिया जा सकता है. इसके लिए हरसिंगार के पत्ते का काढ़ा बनाकर इसमें अदरक का चूर्ण और शहद मिलाकर 30 मिलीग्राम की मात्रा तक इसका सेवन करने से बुखार उतर जाता है.

बालों के लिए अच्छा

बालों को लंबा और मजबूत बनाने में भी हरसिंगार मदद करता है. इसके लिए हरसिंगार के बीजों का काढ़ा बनाकर इससे बालों को धोने से बालों का झड़ना रुकता है और बाल लंबे और मजबूत होते हैं (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


20-Mar-2021 1:14 PM 66

दांतों का ख्याल रखते हैं, दो बार ब्रश भी करते हैं, फिर भी सुबह जब सो कर उठे तो सांस की बदबू आती है. क्यों होता है ऐसा?

  डॉयचे वैले पर ऋतिका पाण्डेय रिपोर्ट  

सुबह सोकर उठने पर सबके मुंह से किसी ना किसी तरह की अलग सी गंध आती है. रात को तो ऐसा नहीं था फिर रात भर में मुंह में ऐसा क्या हो जाता है, जिससे बदबू पैदा होती है. पहली बात तो यह कि मुंह में हमेशा ही कुछ बैक्टीरिया रहते हैं. रात को जब हमारी लार वाली ग्रंथियां कम मात्रा में लार निकालती हैं तो इसके चलते मुंह थोड़ा सूख जाता है. इस माहौल में मुंह के कुछ बैक्टीरिया खूब फलते फूलते हैं. यह खास बैक्टीरिया सल्फर-वाले व्यर्थ पदार्थ निकालते हैं और इन्हीं के कारण मुंह से बदबू आती है.

असल में बैक्टीरिया को ऊर्जा मिलती है अमीनो एसिड और प्रोटीन के पाचन से. कुछ अमीनो एसिड में सल्फर पाया जाता है, जो बैक्टीरिया के इस्तेमाल करने के बाद मुक्त हो जाता है. बैक्टीरिया के इस पाचन की प्रक्रिया में सल्फर के अलावा कुछ बदबूदार गैसें भी निकलती हैं. रिसर्च में पाया गया है कि सांस की दुर्गंध में कई चीजों का मिश्रण होता है. यह चीजें हो सकती हैं - कैडावरीन (लाश की गंध), हाइड्रोजन सल्फाइड (सड़े अंडे की गंध), आइसोवैलेरिक एसिड (पसीने वाले पैर की गंध), मिथाइलमेर्काप्टेन (मल की गंध), पट्रीशाइन (गलते मांस की गंध) और ट्राइमिथाइलअमीन (सड़ती मछली जैसी गंध).

रात को सोने से पहले ब्रश करने और जीभ को साफ करने से अगली सुबह सांस की दुर्गंध में कमी लायी जा सकती है. लेकिन मुंह के बैक्टीरिया रात को जब बंद जगह में नमी पाते हैं तो तेजी से अपनी संख्या बढ़ाते हुए 600 से भी ज्यादा तरह के कंपाउंड बनाते हैं.

कई लोग माउथवॉश का भी इस्तेमाल करते हैं. असल में माउथवॉश में पाये जाने वाले जाइलिटॉल, ट्रिकलोजान और इसेंशियल ऑयल जैसे पदार्थ बैक्टीरिया को पसंद नहीं आते. लेकिन सच यह है कि थोड़े ही समय बाद यह भी बैक्टीरिया पर बेअसर हो जाते हैं. इसलिए सुबह मुंह से ऐसी गंध आना आम बात है और इसके लिए बहुत परेशान होने की जरूरत नहीं. लेकिन अगर बदबू बहुत तेज हो तो जरूर डॉक्टर के पास जाना चाहिये क्योंकि यह हेलीटोसिस की स्थिति हो सकती है. दांतों में कैविटी, मसूडों में सड़न और टॉन्सिल होने पर भी दुर्गंध बढ़ जाती है. (dw.com)
 


18-Mar-2021 8:07 PM 29

कोरोना इंफेक्शन के बाद बहुत से मरीजों की स्वाद लेने और सूंघने की क्षमता चली जाती है और देर तक वापस नहीं आती. यदि लंबे समय तक स्वाद और गंध महसूस न हो तो लोग परेशान हो जाते हैं. क्या स्वाद और गंध वापस लाने की कोई तरकीब है?

   डॉयचे वैले पर टीना रोथ की रिपोर्ट- 

कारेन और हाइनर रीजे को मछली वाली ब्रेड पसंद है, प्याज मिली हुई. लेकिन जब से उन्हें कोविड हुआ है, दोनों की जीभ में कोई स्वाद नहीं रहा. कारेन रीजे बताती हैं कि थोड़ा बेस्वाद है. वैसे उन्हें खट्टा सा स्वाद तो आ रहा है, लेकिन सही में बिस्मार्क ब्रेड जैसा नहीं है. वहीं हाइनर रीजे बताते हैं कि वे प्याज को उसकी आवाज से पहचान रहे हैं, उसका स्वाद उन्हें नहीं आ रहा. कोरोना के मरीजों पर अब तक जो रिसर्च हुए हैं उसके अनुसार स्वाद न आने की वजह जीभ का तंत्र नहीं है. दरअसल कोरोना बीमारी के बाद सूंघने की क्षमता बिगड़ जाती है और उसका असर स्वाद पर भी पड़ता है.

इंफेक्शन की हालत में कोरोना वायरस नाक के मेम्ब्रेन में गंध लेने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है. आम तौर पर वे फिर से पैदा हो जाती हैं. लेकिन कुछ मरीजों में सूंघने की क्षमता लंबे समय तक वापस नहीं आती या स्थायी रूप से चली जाती है. डॉ. मार्टिन लॉडियन कील मेडिकल कॉलेज में पढ़ाते हैं. वे बताते हैं, "ऐसा लगता है कि सूंघने की क्षमता में करीब 10 प्रतिशत की कमी जारी रहती है." ये पूरी कमी नहीं है लेकिन कोविड बीमारी के बाद सूंघने की क्षमता में बदलाव जरूर होता है.

गंध को महसूस करने में गड़बड़ी के कारण का पता लगाना आसान नहीं है. हर खुशबू सुगंध के अलग अलग मॉलिक्यूल से पैदा होती है, और हर मॉलिक्यूल के लिए एक खास रिसेप्टर जरूरी होता है जो उसे उचित सुगंध देता है. जब कोरोना वायरस के कारण सूंघने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं तो सुगंध वाले कुछ मॉलिक्यूलों को उनका रिसेप्टर नहीं मिलता. इस तरह दिमाग तक सुगंध का पूरा प्रभाव पहुंच नहीं पाता और इसकी वजह से सुगंध का पता नहीं चलता और उलझन की स्थिति पैदा होती है.

ऐसा ही अनुभव हाइनर रीजे को भी हुआ. उनके घर में ताजा ताजा रोस्ट की गई कॉफी की बींस थीं. कॉफी के दानों को भूना जाए तो वह अच्छी सोंधी सी खुशबू देती है. लेकिन हाइनर रीजे ने बताया कि वे जब अपने ड्रॉइंग रूम से निकल कर किचन की तरफ पहुंचे तो उन्हें "अजीब सी गंध आई गैस जैसी." संभव है कि घ्राण शक्ति में इस गड़बड़ी की वजह सिर्फ वायरस से इंफेक्ट हुए नाक के मेम्ब्रेन में कोशिकाओं का नष्ट होना नहीं है. जानवरों पर किए गए टेस्ट में साबित किया जा सका है कि कोरोना वायरस सूंघने वाली कोशिकाओं और तंत्रिका से होता हुआ दिमाग तक चला जाता है. वहां वह गंध के लिए इंपल्स देने वाले हिस्सों को नष्ट कर देता है.

दिमाग की कोशिकाएं इंपल्स ही न दें तो नाक गंध को सूंघे कैसे. ऐसी स्थिति में रास्ता क्या बचता है? कई स्टडी से पता चला है कि सूंघने की आसान ट्रेनिंग करने से सूंघने की क्षमता फिर से बेहतर हो सकती है. इसके लिए मरीजों को चार अलग तरह की परफ्यूम सुंघाई जाती हैं. डॉ. लॉडियन बताते हैं, "इसके लिए मरीज उन्हें खुद अपनी नाक के नीचे रखते हैं, सूंघते हैं और पहचानने की कोशिश करते हैं." यह दो बार किया जाता है, एक बार सुबह और एक बार शाम में. दस से पंद्रह सेकंड के लिए.

सूंघने के अभ्यास के लिए पेंसिल वाले परफ्यूम इस्तेमाल किए जाते हैं जिनमें गुलाब, यूकेलिप्टस, नींबू और लौंग की गंध होती है. खुशबू के इन नमूनों को खुद तैयार किया जा सकता है. या तो खुशबू वाले तेल हों या तेज गंध वाले मसाले. कोई खास सुगंध लेना जरूरी नहीं. सुगंध को जानना और उसे पता करना जरूरी नहीं होता, अहम है उसे महसूस करना. डॉ. लॉडियन बताते हैं, "पहले महसूस करने की कोशिश कीजिए, फिर दिमाग को ट्रेन कीजिए, फिर संभव है कि नए सर्किट बनेंगे और आप रोजमर्रा में फिर से सूंघने की क्षमता विकसित कर लेंगे."

ट्रेनिंग से थोड़ी मदद मिली है. कारेन और हाइनर को अब उम्मीद है कि वे जल्द ही चीजों को बेहतर सूंघ पाएंगे और उनकी स्वाद की क्षमता भी बेहतर होगी. (dw.com)

एमजे


17-Mar-2021 11:01 AM 75

बाजार में इन दिनों तरबूज के ढेर लगे हुए नजर आ रहे हैं. ऊपर से थोड़ा सख्त नजर आने वाला तरबूज अंदर से पूरी तरह पानी से भरा हुआ होता है. अक्सर दुकानदार आपको तरबूज का एक टुकड़ा काटकर दिखाता होगा और उसके लाल रंग का वास्ता देकर आपको उसे खरीदने के लिए कहता होगा. आप भी उसके लाल रंग को देखकर उसके मीठे होने का अंदाजा लगा लेते होंगे और खरीदकर घर ले आते होंगे. पर क्या आप जानते हैं कि जिसे आप सिर्फ मीठा फल समझकर खरीद लाते हैं असल में वो गुणों की खान है. जी हां, तरबूज न सिर्फ शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है बल्कि यह कई बीमारियों को भी दूर करता है. तरबूज खाने से स्ट्रेस कम होता है और थकान दूर होती है. साथ ही यह बालों और स्किन के लिए भी बहुत ही अच्छा है. आइए आपको बताते हैं तरबूज खाने के 7 जबरदस्त फायदों के बारे में.

तरबूज खाने के गजब के फायदे

-तरबूज में लाइकोपिन पाया जाता है जो त्वचा की चमक को बरकरार रखता है.

-हृदय संबंधी बीमारियों को रोकने में तरबूज एक रामबाण उपाय है. ये दिल संबंधी बीमारियों को दूर रखता है. दरअसल ये कोलस्ट्रॉल के लेवल को कंट्रोल में रखता है जिससे इन बीमारियों का खतरा कम हो जाता है.

-तरबूज में विटामिन और मिनरल की मात्रा अधिक होने के कारण ये शरीर के इम्यून सिस्टम को भी अच्छा रखता है. इसमें मौजूद विटामिन ए आंखों के लिए बहुत अच्छा होता है.

-तरबूज खाने से दिमाग शांत रहता है और गुस्सा कम आता है. दरअसल तरबूज की तासीर ठंडी होती है इसलिए ये दिमाग को शांत रखता है.

-तरबूज के बीज भी काफी काम के होते हैं. इसके बीजों को पीसकर चेहरे पर लगाने से स्किन ग्लोइंग नजर आती है. तरबूज को चेहरे पर रगड़ने से निखार तो आता है ही साथ ही ब्लैकहेड्स भी हट जाते हैं. इसके अलावा तरबूज के बीजों का लेप सिर दर्द में भी आराम पहुंचाता है.

-तरबूज के नियमित सेवन से कब्ज की समस्या दूर होती है. तरबूज खाने से पेट की समस्याओं से छुटकारा मिलता है. साथ ही खून की कमी होने पर इसका जूस फायदेमंद साबित होता है.

-तरबूज खाने से शरीर की थकान दूर होती है और शरीर को आराम मिलता है. साथ ही यह तनाव को भी कम करने में मदद करता है.(Disclaimer:इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)
 


16-Mar-2021 10:56 AM 326

 

मानव शरीर में पानी की मात्रा लगभग 60 प्रतिशत होती है. पानी ना केवल हमारे शरीर में ऑक्‍सीजन और पोषक तत्‍वों को पहुंचाने का काम करता है, शरीर के अंगों और उत्‍तकों की रक्षा भी करता है. हालांकि यह बात हम सभी जानते हैं कि हमारे लिए पानी पीना कितना महत्‍वपूर्ण है और हमारी अच्‍छी सेहत हमारे वॉटर इंटेक पर निर्भर करती है. लेकिन यह जरूरी नहीं कि आप भरपूर पानी पीने के बावजूद स्‍वस्‍थ रहते हों. हो सकता है कि आपकी एक छोटी सी आदत की वजह से आपके शरीर को पानी का सही फायदा नहीं मिल रहा हो. जैसे कई लोगों को खड़े होकर पानी पीने की आदत होती है. आमतौर पर लोग जल्‍दबाजी में खड़े खड़े ही पानी पी लेते हैं. लेकिन आपको बता दें कि हड़बड़ी की ये आदत आपकी सेहत के लिए बहुत ही हानिकारक है. हम आपको बताते हैं कि खड़े होकर पानी पीना सेहत के लिए किस तरह से नुकसानदेह हो सकता है.

1.पाचन क्रिया को करता है प्रभावित

अगर आप खड़े होकर पानी पीते हैं तो पानी तेजी से गले में मौजूद फूड पाइप से होता हुआ पेट में जाता है. तेजी से आते पानी के प्रेशर से आसपास के अंगों और पेट की दीवारों को नुकसान पहुंचता है जिससे आगे चलकर आपकी पाचन क्रिया प्रभावित हो सकती है. इसकी वजह से हार्ट बर्न और अल्‍सर की समस्‍या भी हो सकती है.

2.किडनी से जुड़ी समस्या

खड़े होकर पानी पीने से पानी प्रेशर के साथ पेट में जाता है जिससे सभी अनफिल्‍टर्ड चीजें ब्लडर में जमा हो जातीं हैं और इसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है. दरअसल किडनी का काम पानी को सही ढंग से छानना होता है. जब आप खड़े होकर पानी पीते हैं तो ये अपना काम ठीक तरीके से नहीं कर पाती और पानी सही तरह से फिल्‍टर नहीं हो पाता और ये किडनी में ही स्‍टोर हो जाता है.  जिससे बाद में चल कर किडनी की समस्या, यूरीन में इंफेक्शन और जलन महसूस हो सकती है.

3.अर्थराइटिस का रहता है खतरा

अगर आप खड़े होकर पानी पीते हैं तो इसकी वजह से आगे चलकर आपको अर्थराइटिस भी हो सकता है. दरअसल जब आप खड़े होकर पानी पीते हैं तो यह शरीर में फ्लूइड के बैलेंस को भी बिगाड़ता है. यही नहीं, जोड़ों के बीच मौजूद फ्लूइड के भी संतुलन को भी यह प्रभावित करता है जिससे उंगलियों, घुटनों, कमर आदि जोड़ों में दर्द की समस्‍या आ जाती है.

4.प्‍यास नहीं बुझती

अगर आप खड़े खड़े पानी पीते हैं तो आपकी प्‍यास पूरी तरह नहीं बुझती और आपको बार बार प्‍यास लगती है. इसलिए बेहतर होगा अगर आप बैठकर तसल्‍ली से पानी पिएं. यह आपके सेहत के लिए बहुत ही जरूरी है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)


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