सेहत / फिटनेस

Date : 03-Apr-2020

जब सारा परिवार साथ होता है, तो उनके लिए संतुलित आहार बनाने का सुख ही कुछ और है। इन दिनों आप अपने घर के भोजन में हरी सब्जियों को जरूर शामिल करें। ये पोषण से भरपूर होती हैं।    

1-पालक एक तरह से हरी सब्जियों में सुपरवेजिटेबल कही जा सकती है। इसमें विटामिन ए, सी, फोलिक एसिड, कैल्शियम वगैरह क्य नहीं होता। इसे आप दाल में मिलाएं, पालक के कोफ्ते बनाएं, पालक पनीर तो सबका फेवरिट होता ही है, पालक को हल्का उबालकर उसे आटे में मिलाकर भरवां पराठे बनाएं। 
 
2-खीरा गर्मियों के लिए तो रामबाण मानिए। विटामिन ई से भरपूर खीरा त्वचा को निखारता है। शरीर में नमी बनाए रखता है और कब्ज में राहत देता है। खीरे का रायता, खीरे का सलाद या फिर यूं ही स्नैक्स के तौर पर खाएं। इसे वजन कम करने वाली डाइट में शामिल किया जाता है।
 
3-ब्रोकोली को डायबिटीज में आदर्श आहार माना जाता है। इसे कैंसररोधी कहा जाता है। इसे हल्का चलाते हुए ही पकाएं। इसे एग भुर्जी में डालें। इमली, मसाले व काली मिर्च और करी पत्ता डालकर चटपटा बनाएं या चीज के साथ सैंडविच में लगाकर दें।
 
4-परवल रक्त को शुद्ध करता है। शुगर के मरीजों को खासतौर पर परवल खाने की सलाह दी जाती है। परवल में एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो असमय बुढ़ापे के लक्षणों को दूर रखते हैं। भरवां परवल या आलू-परवल की सब्जी का तो जवाब ही नहीं है स्वाद में।

5-जुकीनी भी पोषण के मामले में कम फायदेमंद नहीं है। इस सब्जी की अच्छी बात यह है कि फ्रिज में यह काफी दिन टिकी रह जाती है और इसे आप सब्जी या सलाद, दोनों तरह से खा सकते हैं। इसमें पेक्टिन नामक तत्व पाया जाता है, जो शोधों की मानें तो दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसमें खूब फाइबर होता है, इसीलिएइसे वजन कम करने वाली डाइट में शामिल किया जाता है। हाईबीपी व एस्थमा के रोगियों के लिएभी यह अच्छी होती है।

 

 

 


Date : 03-Apr-2020

आज अधिकतर लोग किसी ना किसी बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसी कई बीमारियां हैं, जिनके लक्षण समझ में नहीं आते हैं और फिर बाद में ये बीमारियां जीवन के लिए घातक हो जाती हैं। बिना दस्तक दिए धीरे-धीरे होने वाली बीमारियों को समझ पाना हर किसी के लिए बहुत मुश्किल होता है। साइलेंट किलर की तरह काम करने वाली ये बीमारियां हमें घेर न लें इसलिए समय-समय पर मेडिकल चेकअप कराते रहना चाहिए, साथ ही नियमित व्यायाम व खानपान में भी सावधानी रखनी चाहिए।

बड़ी बीमारी का संकेत देता है हाई ब्लड प्रेशर-
एम्स के डॉ. नबी वली के अनुसार, शरीर में ब्लडप्रेशर कई बीमारियों के संकेत दे देता है। बदलती दिनचर्या और तनावपूर्ण जीवन शैली के चलते इन दिनों हर तीसरा व्यक्ति उच्च रक्तचाप की समस्या से पीड़ित है। नियमित चेकअप और खानपान में सावधानी रखकर हाई ब्लडप्रेशर की समस्या से बचा जा सकता है। रक्तचाप के बढ़ने के कारण हार्टअटैक, किडनी की बीमारी, कोलेस्ट्रोल का बढ़ना और स्ट्रोक जैसी कई दिक्कतें खड़ी हो जाती हैं। ब्लड प्रेशर को संतुलित करने के लिए ज्यादा नमक और तले हुए खाने से बचना चाहिए। साथ ही वसायुक्त खाने से दूर रहना चाहिए।
 
डायबिटीज की बीमारी-
एम्स के डॉ. अनुराग शाही के अनुसार, डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसमें मरीज को प्रत्यक्ष रूप से कोई दर्द तो नहीं होता है, लेकिन इसका स्तर असामान्य हो जाए तो कई शारीरिक समस्याएं पैदा हो जाती हैं। डायबिटीज की बीमारी वैसे तो आनुवंशिक बीमारी मानी जाती है, लेकिन आज की अनियमित जीवनशैली भी इसका एक बहुत बड़ा कारण है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षण समझ नहीं आते हैं लेकिन चिड़चिड़ापन, पैरों में दर्द, गला सूखना और बार बार यूरिन आना इसके कुछ संकेत हो सकते हैं। यदि इस प्रकार के संकेत महसूस होते हैं, तो तुरंत मेडिकल चेकअप करा लेना चाहिए। खाने में कम कार्बोहाइड्रेट वाले खाने का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा शुगर फ्री या गुड का सेवन करना चाहिए।
 
किडनी की समस्या-
किडनी से संबंधित परेशानी भी मरीज के सामने अचानक आती है, लेकिन किडनी से संबंधित समस्या बीमारी सामने आने के काफी पहले ही शुरू हो जाती है। यदि शुरुआती लक्षणों को ही परख लिया जाए तो किडनी की समस्या से बचा जा सकता है। यदि बार-बार उल्टी जैसा जी करना, शारीरिक कमजोरी महसूस होना, शरीर में सूजन जैसे कोई संकेत दिखें तो तुरंत चेकअप करवा लेना चाहिए। किडनी की बीमारी अधिकतर बाहर का खाना खाने वाले लोगों को होती है, इसलिए बाहर के जंक फूड खाने से बचना चाहिए। इसके अलावा हरी सब्जियां, फाइबर से भरपूर फल और दही का नियमित सेवन करने से किडनी की बीमारी से बचा जा सकता है। साथ ही यह भी ध्यान देना चाहिए कि दिन में कितनी बार टॉयलेट आ रहे हैं। सामान्य तौर पर कोई व्यक्ति 8 से 10 बार यदि दिनभर में टॉयलेट करता है कि उसकी किडनी को स्वस्थ माना जाता है।
 
कैंसर के लक्षण-
कैंसर भी एक बड़ी साइलेंट किलर बीमारी है, जिसके शुरुआती लक्षणों को समझ पाना बेहद ही मुश्किल है। फेफड़ों में कैंसर, त्वचा का कैंसर, स्तन कैंसर और ब्लड कैंसर आदि कई प्रकार के कैंसर कई लोगों को हो रहे हैं। जिसका इलाज तो संभव है, लेकिन कैंसर के सभी बैक्टीरिया को खत्म करना काफी मुश्किल है। कैंसर की बीमारियों से बचने के लिए विटामिन ‘सी’ से भरपूर चीजें खानी चाहिए और नियमित व्यायाम करना चाहिए। इसके अलावा प्लास्टिक का अधिकतम उपयोग भी कैंसर का कारण माना जा रहा है।


Date : 27-Mar-2020

भारत में तेजी से कोरोना वायरस (Coronavirus) अपने पैर पसार रहा है। कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में समय-समय पर अपने हाथों को साबुन या सैनिटाइजर से धोकर इस वायरस के खतरे को कम किया जा सकता है। लेकिन उससे पहले ये जानना जरूरी है कि साबुन या सैनिटाइजर में से कोरोना से लड़ने के लिए सबसे मजबूत हथियार क्या है?

चीन के वुहान शहर में पैदा हुआ कोरोना वायरस अब तक से भी दुनियाभर के कई देशों को अपना शिकार बना चुका है। भारत में भी कोरोना वायरस तेजी से अपने पैर पसार रहा है। देश के चारों कोनों में जारी लॉकडाउन के बीच भी कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब तक देश में संक्रमण के 724 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 19 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, दुनियाभर में जानलेवा कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की तादाद बढ़कर पांच लाख से अधिक हो गई है और 22,000 से अधिक लोग इस महामारी के चलते दम तोड़ चुके हैं।

इस जानलेवा वायरस के फैलने के बाद शुरुआत से ही लोगों को साबुन या सैनिटाइजर से हाथ धोने की सलाह दे रहे हैं। COVID-19 से बचने के लिए कुछ लोगों का मानना है कि हैंड सैनिटाइजर-साबुन से बेहतर है। कुछ स्वास्थ्य-विशेषज्ञों का कहना कि कोरोना वायरस से बचने के लिए हाथों का बैक्टीरिया फ्री होना बेहद जरूरी है। इतना ही नहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि अपने हाथों को समय-समय पर साबुन से धोकर या हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल कर वायरस के खतरे को कम किया जा सकता है। (ये भी पढ़ें: Coronavirus And Asthama : कोरोना वायरस से अस्थमा के मरीजों को कितना खतरा, जानें क्या है डॉक्टरों की सलाह)

यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ वेल्स के प्रोफेसर पॉल थॉर्डर्सन के अनुसार, कोरोना वायरस से बचने के लिए साबुन को ज्यादा बेहतर विकल्प बताया गया है। वायरस में मौजूद लिपिड को साबुन आसानी से खत्म कर सकता है। आपको बता दें साबुन में फैटी एसिड और सॉल्ट जैसे तत्व होते हैं जिन्हें एम्फिफाइल्स कहा जाता है। साबुन में छिपे ये तत्व वायरस की बाहरी परत को निष्क्रिय कर देते हैं। जिससे संक्रमित होने का खतरा न के बराबर हो जाता है।

हैंड सैनिटाइज़र और साबुन दोनों में ही वायरस को मारने के सक्षम गुण हैं। लेकिन कोरोना वायरस के बढ़ते कहर से बचने के लिए सैनिटाइज़र से बेहतर साबुन है। क्योंकि साबुन में सैनिटाइज़र के मुकाबले वायरस को तेजी से मारने की क्षमता है।

हम में से ज्यादातर लोग दिन में कई बार मुंह को छूते हैं, ऐसी स्थिति में वायरस का जड़ से खात्मा होना बेहद जरूरी है। सैनिटाइज़र आपको वायरस से लड़ने के लिए तैयार तो करेगा लेकिन उसको जड़ से खत्म करने के लिए साबुन बेहतरीन विकल्प है।

यदि आप टॉयलेट या बाहर से कहीं से आकर अपने हाथों को सिर्फ पानी से धो लेते हैं तो ये बिल्कुल गलत तरीका है। वायरस चिपचिपा होता है, जो केवल पानी से हाथ धो लेने के बाद भी नहीं जाता है। इसलिए आप जब भी बाहर से आएं या किसी चीज को छुएं तो अपने हाथों को साबुन से धुलें। साबुन में फैटी एसिड और सॉल्ट जैसे पदार्थ होते हैं जो वायरस से लड़ने में अधिक सक्षम हैं।

आपने कई बार महसूस किया होगा कि साबुन से हाथ धोते-धोते आपकी स्किन थोड़ी ड्राइ हो गई है। दरअसल ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि साबुन काफी गहराई में जाकर कीटाणुओं को मार गिराने की शक्ति होती है। वहीं, हैंड सैनिटाइज़र केवल हाथ को गहराई से साफ़ करता है कीटाणुओं को जड़ से खत्म करने में ये इतना असरदार नहीं है।

सैनिटाइजर क्यों साबुन जितना प्रभावशाली नहीं है

जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की एक शोध के अनुसार, लिक्विड या क्रीम के रूप में मौजूद सैनिटाइजर कोरोना वायरस से लड़ने में साबुन जितना बेहतर नहीं है। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सिर्फ और सिर्फ वही सैनिटाइजर काम करेगा जिसमें एल्कोहल की मात्रा अधिक होगी। इसके अलावा घरों में इस्तेमाल होने वाला साबुन ज्यादा बेहतर है। इसलिए कोशिश करें कि अपनी उंगुलियों के बीच और नाखूनों के अंदर ठीक से साबुन लगाकर हाथ धोने की, क्योंकि तभी हम इस जानलेवा बीमारी को मात दे सकते हैं।


Date : 27-Mar-2020

कुछ लोग नियमित रूप से गार्डनिंग यानी बागवानी करते हैं तो कुछ इसे वीकेंड हॉबी के रूप में अपनाते हैं। वैसे भी प्रकृति मानव जाति की सबसे बड़ी मित्र है और इसके करीब रहना बेहद फायदेमंद है। कई शोध बताते हैं कि प्रकृति के करीब रहना तनाव को दूर करने और गंभीर बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। यह अभ्यास मन और शरीर दोनों के लिए अच्छा है क्योंकि प्रकृति सबसे बड़ी हीलर है। इसलिए, जब भी तनावग्रस्त, उदास या निराश महसूस करें, तो घर के आंगन में जाएं और बागवानी शुरू करें। यदि आप बागवानी के इस व्यायाम को अपनाते हैं तो हर रोज तनाव से निपटना आसान हो सकता है। यह साबित होता है कि जब आप किसी शारीरिक कार्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो आपका दिमाग अन्य महत्वहीन चीजों से अलग हो जाता है। यह मानसिक शांति पाने और मानसिक स्वास्थ्य को बहाल करने में मदद करता है। बागवानी शारीरिक स्वास्थ्य में भी योगदान देती है जैसे खुदाई, रोपण, खरपतवार खींचना और कटाई जैसी प्रक्रियाएं हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं।

यदि किसी चीज से परेशान हैं या निराश या उत्तेजित हैं, तो एक फावड़ा उठाएं और मिट्टी खोदना शुरू करें और बीज बोएं। यदि बहुत गुस्से में हैं, तो इसके बजाय पेड़ों की अतिरिक्त शाखाओं को काट सकते हैं या झाड़ियों को काट सकते हैं। किसी और पर बरसने की बजाय, अंदर के गुबार को इस तरह से बाहर निकालना बेहतर है।

बागवानी केवल एक शौक नहीं है, बल्कि इससे विकास की मानसिकता विकसित करने में भी मदद मिल सकती है। जब बीज को पौधों के रूप में फलते-फूलते देखते हैं, तो समझते हैं कि कैसे एक छोटी-सी चीज किसी बड़ी चीज में विकसित हो सकती है। यह जीवन का एक बड़ा सबक है जो दिमाग को विकास और विकास की दिशा में सोचने की अनुमति देता है। बागवानी में समय बिताना उम्मीद बरकरार रखने में मदद करता है।

बागवानी गर्भावस्था के दौरान भी बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इस दौरान रचनात्मक होने से बच्चा बुद्धिमान होता है। www.myupchar.com के डॉ. विशाल मकवाना का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान रचनात्मक होने से दिमाग सक्रिय हो जाता है और बच्चा यह रचनात्मकता मां से हासिल करता है। लिखना, पेंटिग करना, बुनाई ही नहीं गार्डनिंग यानी बागवानी का शौक मस्तिष्क को आराम देता है, तनाव दूर करता है।

इतना ही नहीं बागवानी समान रूचि रखने वाले लोगों के साथ संबंध बनाने का एक शानदार अवसर है। अपने खाली समय में, गार्डनिंग क्लास जा सकते हैं, जहां आप बहुत सारे लोगों से मिलेंगे। यह बागवानी में क्या सही है क्या नहीं बताने के अलावा सामाजिक संबंध बनाने में मदद करता है। सामाजित संबंध जितना अधिक दृढ़ होगा, उतना मानसिक और भावनात्मक रूप से संतुष्टि का एहसास होगा। इससे सेहत बनाए रखने में मदद मिलती है।

www.myupchar.com के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि मिट्टी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया मस्तिष्क कोशिकाओं को न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन का उत्पादन करने के लिए एक्टिवेट कर सकते हैं। यह एक एंटीडिप्रेसेंट की तरह काम करता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि मिट्टी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया सीखने की क्षमता में मदद करते हैं।


Date : 24-Mar-2020

कोरोना वायरस लगातार घातक होता जा रहा है। भारत में लोगों को जागरुक बनाया जा रहा है। समय-समय पर हाथ धोने की जरूरत के बारे में बताया जा रहा है। तमाम सावधानियों के बीच ऑफिस में भी साफ-सफाई का ख्याल रखना जरूरी है। कंपनियां अपने स्तर पर काम कर रही हैं, लेकिन हर कर्मचारी की भी जिम्मेदारी की है कि वह अपने लैपटॉप और डेस्क के आसपास सफाई रखे, ताकि कोरोना वायरस जैसे खतरे को टाला जा सके। एम्स के डॉ. अजय मोहन के अनुसार, कोरोना वायरस एक तरह का वायरल इन्फेक्शन है। इसकी कोई दवा नहीं है, लेकिन सावधानी बरतकर इसके संक्रमण से बचा जा सकता है।

ऐसे दफ्तरों में विशेष सावधानी की जरूरत है जहां बहुत सारे कर्मचारी एक ही हॉल में बैठकर काम करते हैं। यदि ऑफिस पूरी तरह से बंद है या सब तरफ कांच की दीवार है तो खतरा और बढ़ जाता है। जिन दफ्तरों में हवा आने-जाने की गुंजाइश नहीं है और साफ-सफाई का भी ख्याल नहीं रखा जाता है, वहां कोरोना जैसे संक्रमण का खतरा कई गुना है।

ऐसे करें काम की शुरुआत
काम की शुरुआत करने से पहले अपने बैठने की जगह को अच्छी तरह साफ करें या करवाएं। जिन-जिन चीजों को बार-बार छूते हैं जैसे लैपटॉप, कीबोर्ड, मोबाइल, डेस्क, रिमोट कंट्रोल, काउंटर टॉप और डोरनोब्स को साफ करवाएं। कोरोना वायरस फैलने के बाद सेनिटाइजर का इस्तेमाल बढ़ गया है। इन सभी चीजों को सेनिटाइजर या किसी अच्छे क्लीनिंग एजेंट से साफ करने के बाद ही काम शुरू करें। हर तीन घंटे में ऐसी साफ-सफाई जरूरी है।

काम करने के दौरान जब भी उठें, हाथ जरूर साफ करें। हाथ साबुन से धोएं और पानी नहीं है तो सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें। कुछ भी खाने से पहले हाथ धोना बहुत जरूरी है। 

यह है छिंकने का सही तरीका
यदि खुद को सर्दी जुकाम हो रहा है तो खांसते या छिंकते समय मुंह पर रुमाल रखें। यदि रुमाल नहीं है तो हथेलियों के बजाए हाथ की कोहली और कंधे के बीच वाले हिस्से से मुंह को दबाते हुए खांसे। इससे जीवाणु फैलेगा नहीं। यही बात अपने साथी कर्मचारियों को बताएं। टिश्यू पेपर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन उपयोग के बाद टिशू पेपर को सीधे डस्टबिन में डालें।

बात करते समय एक हाथ दूर खड़े रहें
यह बात स्कूल में बच्चों को सिखाई जाती है। अब यह काम ऑफिस में करने का वक्त आ गया है। अपने साथी से बात करते समय एक हाथ दूर रहें। इससे कोरोना ही नहीं, किसी भी तरह का संक्रमण तेजी से नहीं फैलेगा। हाथ तो बिल्कुल न मिलाएं। नमस्ते करना बिल्कुल सही है।

जब तक कोरोना वायरस का कहर जारी है, संभव हो तो ऑफिस में मास्क पहनकर काम करें। कई कंपनियां अपनी तरफ से मास्क उपलब्ध करवा रही हैं। गीला होने पर मास्क तत्काल बदल दें। उपयोग किए जा चुके मास्क को दोबारा न लगाएं।

वॉश रूम में साफ-सफाई का ख्याल रखें। सुनिश्चित करें कि बाथरूम और टॉयलेट की नियमित साफ-सफाई की जा रही है। कैंटीन में भी यही बात लागू होती है। 
जिन साथी कर्मचारियों को सर्दी-जुकाम है, उन्हें सलाह दे कि वे घर से ही काम करें या छुट्टी लेकर आराम करें। उन्हें डराएं नहीं, लेकिन सावधानी बरतने के लिए प्रेरित करें। जो साथी महिला कर्मचारी प्रेगनेंट हैं, उन्हें घर पर ही आराम करने की सलाह दें।


Date : 24-Mar-2020

कोरोना से देश में अब तक करीब 500 लोग कोरोना वायरस से पॉजिटिव पाए गए हैं. 10 लोगों की मौत हो चुकी है. कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र और केरल हैं. महाराष्ट्र में अब तक 97 और केरल में 95 केस सामने आए हैं. कोरोना की वजह से 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है.

कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों को है. ऐसे समय में बच्चों का भी काफी ध्यान रखने की जरूरत है.  बुजुर्गों और बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है ऐसे में यह वायरस उन्हें आसानी से शिकार बनाता है. आइए जानते हैं कि आखिर कैसे कोरोना वायरस से बच्चों और बुजुर्गों का बचाव किया जा सकता है.कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों को है. ऐसे समय में बच्चों का भी काफी ध्यान रखने की जरूरत है.  बुजुर्गों और बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है ऐसे में यह वायरस उन्हें आसानी से शिकार बनाता है. आइए जानते हैं कि आखिर कैसे कोरोना वायरस से बच्चों और बुजुर्गों का बचाव किया जा सकता है.
1. बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर न निकलने दें. यदि किसी कारणवश उन्हें बाहर जाना भी पड़ रहा है तो मुंह को मास्क से अच्छी तरह कवर करें.
2. बच्चों और बुजुर्गों को बार-बार हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने की सलाह दें. इसके अलावा घर या बाहर किसी भी चीज को छूने के बाद अच्छे से हाथ धुलवाएं.
3. यदि घर में कोई पीड़ित व्यक्ति है तो बच्चों और बुजुर्गों को उनसे दूर रखें. अंजान व्यक्ति से तकरीबन 3 से 6 फीट की दूरी बनाए रखें.
4. बच्चों और बुजुर्गों के नाखून बिल्कुल न बढ़ने दें . ऐसी जगहों पर कीटाणु-बैक्टीरिया बड़ी आसानी से जगह बना लेते हैं.
5. बच्चों और बुजुर्गों को सार्वजनिक स्थलों या ज्यादा भीड़ वाली जगहों पर न ले जाएं. इससे वायरस की चपेट में आने का खतरा काफी बढ़ जाता है.
6. घर की वो चीजों जिन पर आप बार-बार हाथ लगाते हैं, उन्हें समय-समय पर सैनिटाइज करते रहें.
7. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए अपने बच्चों और बुजुर्गों को सामान्य हाइजीन की आदतों के बारे में बताएं.
8. बच्चों और बुजुर्गों के इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखने के लिए उनकी डाइट में पौष्टिक आहार शामिल करें. कच्चा मांस या कच्ची हरी सब्जियां देने से परहेज करें.
9. घर में लॉकडाउन रहते हुए किसी भी बाहरी व्यक्ति को घर में दाखिल न होने दें. साथ ही रिश्तेदारों या दोस्तों के घर जानें से भी बचें.
10. कोरोना वायरस के बारे में बच्चों और बुजुर्गों समेत घर के अन्य सदस्यों को जागरूक करें और उन्हें मुंह पर मास्क पहनने और हाथ धोने जैसी बातें बताएं.

 

 

 

 


Date : 23-Mar-2020

लोगों के दिलों में कोरोना वायरस को लेकर दहशत इतनी बढ़ गई  है कि वे इस संक्रमण को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल कई अफवाहों पर आसानी से विश्वास करने लगे हैं। ऐसी अफवाहों से होने वाली टेंशन से लोगों को बचाने के लिए डब्लूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन ) ने कोरोना वायरस को लेकर दुनिया भर में फैले कुछ वायरल मिथक की सच्चाई बताने की कोशिश की है। हो सकता है इन वायरल अफवाहों के बीच कुछ ऐसी भी अफवाहें हो जिन्हें अब तक आप भी सच ही मान रहे हों। ऐसी ही अफवाहों के बीच आइए जानते हैं आखिर क्या है विश्व स्वास्थ्य संगठन की लोगों को सलाह।

गर्म मौसम में नहीं फैल सकता कोरोना?
कोरोना से फैली दहशत के बीच एक अफवाह सुनने को मिल रही है कि तापमान बढ़ने और मौसम के गर्म होने पर कोरोना वायरस खुद खत्म हो जाता है। इसलिए व्यक्ति को दिन में कई बार गुनगुने पानी से नहाना चाहिए। 
सच- डब्लूएचओ की मानें तो कोरोना का वायरस कहीं भी, किसी भी क्षेत्र में फैल सकता है। कोरोना संक्रमण का पर्यावरण या फिर किसी जलवायु से कोई संबंध नहीं है। तापमान बढ़ने से कोरोना के विषाणु का प्रभाव कम होगा या नहीं इसकी पुष्टि अभी तक किसी भी वैज्ञानिक ने नहीं की है। 

निमोनिया की दवाइयों से रोका जा सकता है कोरोना वायरस?
निमोनिया के टीके जैसे न्यूमोकोकल वैक्सीन और हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी वैक्सीन से कोरोना के वायरस नहीं मरते हैं। इसके पीछे वजह यह है कि कोरोना वायरस अभी वैज्ञानिकों के लिए बिल्कुल नया और अलग है। इसे रोकने के लिए उन्हें खास इसी वायरस के लिए टीका बनाना होगा। 

अल्कोहल या फिर क्लोरीन के छिड़काव से मिलेगी राहत?
अल्कोहल या क्लोरीन फर्श पर कीटाणुओं को मारने का काम कर सकते हैं और ये दोनों ही कोरोना वायरस को रोकने के लिए प्रभावी उपाय नहीं हैं। 

कोरोना के वायरस को हैंड ड्रायरसे खत्म किया जा सकता है?
जिन लोगों को यह लगता है कि वो कोरोना वायरस को हैंड ड्रायर की मदद से खत्म कर सकते हैं वे गलत हैं। कोरोना वायरस को खुद से दूर रखने के लिए डब्लूएचओ ने व्यक्ति को अपने हाथों को अल्कोहल मिश्रित साबुन या हैंड वॉश से अच्छे से धोने की सलाह दी है। 

कोरोना वायरस मच्छर के काटने से फैलता है?
कोरोना वायरस किसी मच्छर के काटने से फैलता है या नहीं, अभी तक इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। कोरोना वायरस एक श्वसन वायरस है जो मुख्य रूप से एक संक्रमित व्यक्ति के खांसने-छींकने, उसकी लार की बूंदों के माध्यम से या नाक से दूसरे व्यक्ति को फैलता है। इस वायरस से खुद को बचाने के लिए अपने हाथों को बार-बार अल्कोहल वाले हैंड वॉश से अच्छे से रगड़कर साफ करें। इसके अलावा, खांसी और छींकने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ निकट संपर्क से बचें।

अल्ट्रावायलेट लाइट की मदद से कोरोना को खत्म किया जा सकता है?
बता दें, अल्ट्रावायलेट लाइट स्टरलाइजर का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अल्ट्रावायलेट लाइट के अधिक प्रयोग से त्वचा जल सकती है। 

लहसुन खाने से कोरोना वायरस के संक्रमण को रोका जा सकता हैय़
लहसुन खाने से व्यक्ति को सेहत से जुड़े कई फायदे मिलते हैं। लहसुन में रोगाणुरोधी गुण मौजूद होने से यह शरीर को कई रोग लगने से बचाता है। बावजूद इसके अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि लहसुन खाने से लोगों को कोरोनोवायरस से बचाया जा सका है।

खारे पानी से नाक साफ करने से कोरोना को रोका जा सकता है?
ऐसा नहीं कहा जा सकता कि खारे पानी से रोजाना नाक साफ करके आप खुद को कोरोना वायरस से बचा सकते हैं। हालांकि ऐसा करने से आपको सामान्य सर्दी से काफी हद तक जल्दी ठीक होने में मदद मिल सकती है। 

संक्रमित लोगों का पता लगाने में थर्मल स्कैनर कितने प्रभावी हैं?
थर्मल स्कैनर्स उन लोगों का पता लगाने में प्रभावी हैं, जिनमें कोरोनो वायरस के संक्रमण की वजह से बुखार जैसे लक्षण नजर आने लग गए हैं। हालांकि, ये उन लोगों का पता नहीं लगा सकते जो संक्रमित हैं लेकिन अभी तक उनमें बुखार जैसे लक्षण नहीं देखे गए हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि संक्रमित लोगों के बीमार होने और बुखार के विकसित होने से पहले 2 से 10 दिन लगते हैं।


Date : 23-Mar-2020

भोजन के बाद गैस, पेट फूलना और असुविधा होना एक सामान्य समस्या है। कई दफा लोग इसकी चर्चा नहीं करते। पर, यह समस्या खुलकर जीने भी नहीं देती। अगर आए दिन आप इससे दो-चार हो रही हैं तो इसका कारण और निवारण बता रही हैं स्वाति शर्मा। अरे मिश्रा जी एक रोटी में क्या बिगड़ जाएगा, खा लीजिए न। तिवारी जी की मेहमानवाजी मिश्रा जी पूरी रात नहीं भूल पाएंगे।

कहने को तो एक रोटी है...पर इससे क्या कुछ बिगड़ सकता है, इसे वे सभी जानते हैं जो मिश्रा जी की तरह गले पड़े भोजन का शिकार होते हैं। लेट नाइट पार्टी हो या टीवी देखते हुए स्नैक्स खाने की आदत...इन सभी आदतों में पहले मजा, बाद में सजा वाली कहानी सामने आती है। यानी गैस, अपच, पेट दर्द और पेट फूलना। कभी-कभार यह समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन इसका आए दिन बने रहना आपके जीवन को प्रभावित करने लगता है तो कुछ उपयोगी कदम उठाने की जरूरत है। 

सामान्य गलतियां हैं मुख्य कारण-
हमारी जीवनशैली की चौपट स्थिति हमारे स्वास्थ पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से प्रभाव डाल रही है। गैस बनने, पेट फूलने जैसी समस्या का भी यही मुख्य कारण है। जो लोग सामान्य तौर पर रात में भारी भोजन करते हैं, उन्हें इस तरह की समस्या बनी रहती है। इसके अलावा भोजन करने में समय का विशेष महत्व भी होता है। इसमें हुई गड़बड़ी भी आपको गैस की समस्या से जूझने पर मजबूर कर सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि सिर्फ पौष्टिक भोजन का ही नहीं, बल्कि उसे खाने के समय का ख्याल भी रखना होगा। इसके अलावा लोगों को कुछ खास चीजों से एलर्जी होती है, जिसकी वजह से उन्हें पेट में भारीपन महसूस होने लगता है। यह समस्या स्मोकिंग करने वालों को भी परेशान करती है।

विशेष परिस्थितियां भी हैं जिम्मेदार-
कुछ चिकित्सकीय परिस्थियों के कारण भी आपको गैस और पेट फूलने की शिकायत हो सकती है। मधुमेह और रक्तचाप में खाई जाने वाली दवाइयों के कारण ऐसी परेशानी आ सकती है। इसके अलावा जिन लोगों को पित्त की थैली यानी गॉलब्लैडर में पथरी की शिकायत होती है, उन्हें भी गैस की समस्या होती है। अगर आप हृदय रोगी हैं तो आपको खासतौर पर ब्लोटिंग से बचने की जरूरत है। कई बार रोगी अटैक और गैस के दर्द में अंतर नहीं कर पाता। लिवर सिरोसिस के मरीजों को भी इसकी शिकायत होती है, लेकिन समस्या गंभीर हो तो चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है। इन सभी परिस्थितियों में घरेलू नुस्खों या खानपान में लगाम से काम नहीं चलता। 

खास स्थितियां-
गर्भावस्था के अंतिम महीनों में गैस बनने की समस्या आम है। पर, कभी-कभी गर्भावस्था के शुरुआती माह में भी गैस की समस्या हो जाती है। इसका बड़ा कारण कब्ज होता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की चयापचय क्षमता में कमी आ जाती है, जिस कारण यह समस्या उभरती है। कई बार आयरन और कैल्शियम सप्लीमेंट्स से भी कब्ज और पेट फूलने जैसी समस्या होने लगती है।

अगर तकलीफ सामान्य है तो दवाइयों की कम डोज या खानपान में सुधार करके काम चल जाता है। समस्या ज्यादा हो तो खास दवाओं का सहारा लेना पड़ता है, साथ ही आयरन और कैल्शियम की जरूरत को भोजन से पूरा करने की कोशिश की जाती है। बच्चा होने के बाद इस समस्या का मुख्य कारण है वसा। पेट पर जमा अतिरिक्त चर्बी शरीर की अंदरूनी प्रणाली को प्रभावित करती है, जिससे पाचन तंत्र सही से काम नहीं कर पाता।

यूं पाएं निजात-
अगर आप इस समस्या से पीड़ित हैं, तो सबसे बड़ा इलाज है भोजन पर नियंत्रण। इस दौरान आपको बिना चबाने वाला भोजन ग्रहण करने की जरूरत है, यानी जो आसानी से पच जाए। समस्या होने पर टहलें, इससे एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव बढे़गा और पाचन क्रिया तेज होगी। समस्या अधिक होने पर आपको दवाओं का सहारा लेना पड़ेगा।

अपनाएं बचाव के तरीके-
 यहां आप दुर्घटना से सावधानी भली वाला फॉर्मूला अपनाएं। सबसे पहले अपने भोजन पर गौर करें। ऐसी चीजों को पहचानें, जिनको ग्रहण करने से आपको ये समस्या आमतौर पर हो जाती है। आपको ग्लूटन, मूंगफली, खोया या दूध के अन्य उत्पाद जैसी किसी भी चीज से एलर्जी हो सकती है। इनके अलावा कुछ सामान्य-सी बातों को अपनाने से आप पेट फूलने की इस समस्या से बच सकती हैं:
-रात के भोजन और सोने के बीच कम से कम दो-तीन घंटे का अंतराल रखें। भोजन के तुरंत बाद लेटे नहीं, टहलें। इससे खाना पचने में आसानी होगी।
-खाली पेट चाय न पिएं। अगर पहली चाय के साथ कुछ नहीं खातीं तो उससे पहले गुनगुना पानी जरूर पिएं।
-त्योहारों में या गरिष्ठ खानपान के बाद गुनगुना पानी पिएं।
-भोजन में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं। केला खाएं।
-तनाव से बचें। प्राणायाम कर सकती हैं।
-कुछ पेल्विक एक्सरसाइज (ताड़ासन, शलभासन) आपकी मदद कर सकती हैं।
(एमडी डॉ. नेहा यादव से बातचीत पर आधारित)


Date : 13-Mar-2020

तुलसी के बीजों को पानी में भिगोकर सेवन करने के फायदे कई होते हैं. यह तो आप जानते ही हैं तुलसी की पत्तियां और बीज एंटिऑक्सिडेंट्स का भरपूर स्रोत होते हैं. तुलसी के बीज के फायदे  दुगने करने के लिए आपको तुलसी के बीजों को पानी में भिगोकर खाने से जबरदस्त फायदे हो सकते हैं.
अगर आपको बताया जाए की एक चीज ऐसी है जिसे सिर्फ पानी में भिगोकर खाने से आपके स्वास्थ्य को कमाल के फायदे हो सकते हैं तो कौन नहीं इस एक चीज के बीजों का फायदा पानी में भिगोकर लेना चाहेगा. आपके मन में भी सवाल आ रहा होगा आखिर वह एक चीज है क्या? जी हां! हम तुलसी के बीजों (Basil Seeds) के बारे में बात रहे हैं. तुलसी के बीजों को पानी में भिगोकर सेवन करने के फायदे (Benefits Of soaked Basil Seeds) कई होते हैं. यह तो आप जानते ही हैं तुलसी की पत्तियां (Basil Leaves) और बीज एंटिऑक्सिडेंट्स का भरपूर स्रोत होते हैं. तुलसी के बीज के फायदे (Benefits Of Basil Seeds) दुगने करने के लिए आपको तुलसी के बीजों को पानी में भिगोकर (Soaked Basil Seeds In Water) खाने से जबरदस्त फायदे हो सकते हैं. तुलसी के बीज गुणों के भंडार होते हैं. तुलसी के बीजों में फाइबर (Fiber In Basil Seeds) की भी फरपूर मात्रा पाई जाती है. तुलसी के बीज न केवल डायबिटीज (Diabetes) के लिए बल्कि स्किन की देखभाल (Skin Care) के लिए भी फायदेमंद होते हैं. तुलसी के बीज आपका पाचन भी बेहतर कर सकते हैं.  (Basil Seed For Improve Digestion) इनका सेवन करने के लिए आप रात को तुलसी के बीज पानी में भिगों दें और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें. ऐसा करने से आप कई बीमारियों से बच सकते हैं. यहां जानें तुलसी के बीजों को पानी में भिगोकर खाने के फायदों के बारे में...
ये होते हैं तुलसी के बीजों के फायदे |

1. डायबिटीज को कंट्रोल करने में फायदेमंद
तुलसी के बीजों को ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. टाइप 2 डायबिटीज के लिए तुलसी के बीज काफी असरदार माने जाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इन बीजों का सेवन करने से यह आपके मैटाबॉलिज्म को धीमा कर देते हैं और कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में बदलने में मदद करते हैं. डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए आपको तुलसी के बीजों को रात को दूध या पानी में भिगोकर रख देना और सुबह नाश्ते के साथ इनका सेवन करने से आपको फायदा खुद ही दिखने लगेगा! तुलसी के बीजों के पानी को हेल्दी ड्रिंक के रूप में किया जाता है. तुलसी के बीजों को डायबिटीज के लिए फायदेमंद मानने के पीछे कई शोध भी हो चुके हैं.

तुलसी के बीजों को पानी में भिगोकर सेवन करने से डायबिटीज में फायदा मिल सकता है
2. वजन घटाने के साथ घटाते हैं कमर की चर्बी
तुलसी के बीज न सिर्फ डायबिटीज के लिए बल्कि आपके वजन को भी घटा सकते हैं. तुलसी के बीजों का सेवन करने से आप कमर का फैट भी कम कर सकते हैं. तुलस के बीजों में डायटरी फाइबर काफी मात्रा में पायजा जाता है. जो आपको लंबे समय तक तृप्त रख सकते हैं. साथ तुलसी के बीजों को पानी में भिगोकर सेवन करने से आपको शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद मिल सकती है. 

3. पेट और पाचन के लिए कारगर
तुलसी के बीज आपके पेट और पाचन के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकते हैं. यह आपकी आंतों को साफ कर पेट के स्वास्थ्य को दुरुस्त बनाने में मदद कर सकते हैं. अगर आप एसिडिटी या पेट फूलने जैसी समस्या से परेशान रहते हैं तो आपको तुलसी के बीजों का सेवन पानी या दूध के साथ कर सकते हैं. ऐसा करने से पाचन में मदद मिल सकती है. इससे आपका पेट भी साफ रख सकता है. इनमें फाइबर होने की वजह से यह पाचन के लिए असरदार हो सकते हैं.

तुलसी के बीजों का सेवन पेट के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हो सकता है
4. मुंह में छाले या दुर्गध हटाने के लिए भी फायदेमंद
मुंह में छाले या दुर्गध हटाने के लिए तुलसी के बीजों को पानी में भिगोकर सेवन करने से आपको इससे छुटकारा मिल सकता है. अगर आपको भी ऐसी शिकायत रहती है तो आपको इन बीजों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए. तुलसी के बीजों में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल, एंटी-वायरल गुण होते हैं जो आपके लिए माउथ फ्रेशनर का काम भी कर सकते हैं.

इन तीन लोगों को तुलसी के बीजों के सेवन से बचना चाहिए
- अगर आपके शरीर में घाव हुआ है या सर्जरी हुई है तो तुलसी के बीजों का सेवन न करें. 
- गर्भवती महिलाओं और बच्चों तुलसी के बीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. 
- किसी भी तरह की सर्जरी के कुछ समय तक इन बीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.
-तुलसी के बीजों का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें.


Date : 13-Mar-2020

आज हमारा रहन-सहन पहले की तुलना में काफी बदल गया है। पहले अधिकतर लोग हाथ से काम किया करते थे, लेकिन मशीनीकरण के इस युग ने हमारे हर काम को आसान कर दिया। शारीरिक व्यायाम नहीं हो पाने के कारण आज अधिकतर लोग कई बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। इन बीमारियों में सबसे बड़ी दिल से संबंधित बीमारियां है, जैसे उच्च रक्तचाप, निम्न रक्तचाप, स्ट्रोक, हार्ट अटैक और कोलेस्टॉल का बढ़ना है। लेकिन इसे दूर करने के लिए हमारे पास घर में ही नित्य प्रयोग में आने वाली कुछ चीजें ऐसी हैं, जिनका सेवन यदि बढ़ा दिया जाए तो दिल को सेहतमंद किया जा सकता है।

www.myupchar.com से जुड़े एम्स के डॉ. नबी वली के अनुसार, कार्डियोवेस्क्युलर रोग में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्त प्रवाह बाधित होता है और हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।

इसलिए होती है दिल की बीमारी

घरेलू नुस्खा जानने से पहले ये जरूर जान लें कि दिल से संबंधित बीमारी क्यों होती है। दरअसल अनियमित दिनचर्या, वसायुक्त ज्यादा भोजन खाने और नियमित व्यायाम नहीं करने के कारण हमारी रक्त धमनियों में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ जाता है। शरीर में जब कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है तो रक्त का परिवहन प्रभावित होता है। दिल को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां ज्यादा कोलेस्ट्रॉल के कारण सिकुड़ने लगती हैं तो दिल पर ज्यादा दबाव आने लगता है और अंतत: दिल का दौरा पड़ने जैसी बीमारी हो जाती है।

घरेलू नुस्खों को अपनाकर रखें दिल का ख्याल

दिल को सेहतमंद रखने के लिए एक अचूक औषधि घर पर ही बनाई जा सकती है। इसके लिए आपको सिर्फ पांच चीजों की आवश्यकता होगी। ये पांच चीजें भी आपको आसानी से उपलब्ध भी हो जाएंगी। ये हैं - लहसुन, अदरक, नींबू, एप्पल विनेगर और शहद।

ऐसे तैयार करें औषधी

लहसुन, अदरक, नींबू का एक-एक कप शुद्ध रस निकाल लें। ध्यान रहे कि इसमें एक बूंद भी पानी न मिलाएं। इस तरह तीन कप तैयार इस मिश्रण में एक कप शुद्ध एप्पल विनेगर भी मिला दे। अब आपके पास कुल चार कप मिश्रण तैयार हो चुका है। इस मिश्रण को तब तक उबालते रहे, जब तक कि ये वाष्पित होकर वापस तीन कप नहीं हो जाए। इसके बाद इसे ठंडा होने के लिए रख दें। जब ये ठंडा और गाढ़ा हो जाए तो इसमें तीन कप शुद्ध शहद मिलाकर एक कांच की बोतल में भरकर रख दें और सुबह-शाम दो-दो चम्मच गर्म पानी में मिलाकर पीएं। यह औषधी दिल से जुड़ी बीमारियों को दूर कर देती है। साथ ही कोलेस्ट्रॉल भी कम कर देती है। ब्लॉकेज भी दूर हो जाते हैं।

यह भी पढ़ें- बढ़ा हुआ यूरिक एसिड दे सकता है बीमारियां, इन घरेलू उपायों से करें कंट्रोल
हर चीज दिल के लिए फायदेमंद

लहसुन : लहसुन में एंटीबैक्टीरियल और एंटी ऑक्सिडेंट तत्व होते हैं जो ब्लड प्रेशर को संतुलित करते हैं। कहते हैं एक लहसुन की कली रोज कच्चा खाने से दिल की बीमारी कभी नही होती

अदरक : अदरक में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम के तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में सभी ज़रूरतों को पूरा करते है, अदरक शरीर में खून जमने से रोकता है। मिनेस्टा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि अदरक खाने से कॉलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है।

नींबू : नींबू में विटामिन-सी काफी मात्रा में पाया जाता है जो रक्तचाप को कम करने में सहायक होता है। इसके अलावा कॉलेस्ट्रॉल कम करने में भी सहायक होता है।

शहद : शहद में विटामिन्स, आयरन, कैल्शियम, मैग्निशियम तत्व मौजूद होते हैं। शहद हार्ट के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। इसके सेवन से कॉलेस्ट्रॉल भी कम होता है।


Date : 27-Feb-2020

हर दिन स्मार्टफोन का घंटों तक इस्तेमाल करने से आप पर आपकी सोच से भी ज्यादा नकारात्मक असर पड़ रहा है। कनाडा के टोरंटो वेस्टर्न हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि हर दिन स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर ज्यादा वक्त बिताने से मानसिक तनाव बढ़ता है और अपनी जान लेने जैसे नकारात्मक विचार मन में ज्यादा आते हैं। 

सीएमएजे नाम की पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन की रिपोर्ट द्वारा डॉक्टर, अभिभावक और टीचर्स के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि कैसे वे टीनएजर्स को स्मार्टफोन की इस लत से दूर करने में मदद कर सकते हैं। 

शोधकर्ताओं ने इस लत से छुटकारा पाने के लिए नींद, पढ़ाई, सामाजिक गतिविधियों, रिश्तों और ऑनलाइन गतिविधियों के बीच सही संतुलन बनाने की सलाह दी है।

 


Date : 27-Feb-2020

शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि साधारण ब्लड टेस्ट कार्डियोवैस्कुलर एजेंट और हृदय रोग के जोखिम की पहचान व होने वाली मौतों को कम करने में मदद कर सकता है। जर्नल ऑफ  द अमेरिकन कॉलेज ऑफ  कार्डियोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि रक्त में माइलॉयड-बीटा का उच्च स्तर हृदय रोग का एक प्रमुख संकेतक हो सकता है।

अमाइलॉइड-बीटा अल्जाइमर रोग को बढ़ाने के लिए जाना जाता है, फिर भी ब्रिटेन के न्यूकैसल विश्वविद्यालय के शोधकर्ता कोन्स्टैन्टिनो स्टेलोस ने अपने शोध में अब निष्कर्ष निकाला है कि संवहनी कठोरता, धमनियों का मोटा होना, दिल की विफलता और हृदय रोग प्रगति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

शोधकर्ता स्टेलोस के अनुसार यह आशा की जाती है कि यह शोध एक दिन एक साधारण ब्लड टैस्ट का उपयोग नैदानिक ‘बायोमार्कर’ के रूप में किया जा सकता है ताकि उन रोगियों की पहचान की जा सके जो जोखिम में हैं जिनके लिएनिवारक उपाय किए जा सकें और मृत्यु दर कम हो सके।

निष्कर्षों के लिए शोध दल ने 9 देशों में कई अध्ययनों से 6600 से अधिक रोगियों के रक्त के नमूनों का विश्लेषण किया और पाया कि रोगियों को उनके अमाइलॉयड-बीटा स्तरों के आधार पर हृदय रोग के उच्च और निम्न जोखिम श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।

नीदरलैंड की यूनिवॢसटी ऑफ  ट्वेंटे व वैगनिंगेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक नैनोसैंसर विकसित किया है जो रक्त की एक बूंद से कैंसर का पता लगा सकता है। नैनोस्केल पर सैंसर 2 कंघों की तरह एक-दूसरे में गुंथा हुआ दिखता है, जो कंघों के दांतों के बीच जगह छोड़ देता है। इसमें 120 नैनोमीटर के आसपास के इलैक्ट्रोड होते हैं। छोटे आकार की जगह संकेतों को बताती है।


Date : 24-Feb-2020

ब्रेन अटैक मस्तिष्क में रक्त आपूर्ति की कमी हो जाने के कारण होता है। रक्त आपूर्ति करने वाली आर्टरी में ब्लॉकेज हो जाने के कारण ऐसा होता है। यह ब्लॉकेज शरीर में कहीं भी रक्त का थक्का बन जाने से हो सकता है, जो धीरे-धीरे मस्तिष्क की आर्टरी तक पहुंच जाता है और व्यवधान पैदा करता है। वसा की अधिकता के कारण रक्‍त नलिका (आर्टरी) संकीर्ण हो जाती है जिससेयह व्यवधान या ब्लॉकेज पैदा होता है। हेमोरेजिक यानी मस्तिष्क में खून की नली फट जाने से जो ब्रेन अटैक होता है उसकी मुख्य वजह अनियंत्रित हाइपरटेंशन होता है। इसी के साथ धमनियों की कमजोर दीवारों में दरार होना विकृत रक्त नलिकाओं के फूलकर गुब्बारा बन जाना जैसे कई अन्य कारक भी होते हैं।

स्ट्रोक के लक्षण स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण और संकेत हैं

1. चेहरे, बांह, पैर (खासकर शरीर के एक तरफ) में अचानक संवेदन शून्यता या कमजोरी पैदा हो जाना।

2. अचानक भ्रम की स्थिति, बोलने या किसी बात को समझने में दिक्कत।

3. एक या कभी-कभी दोनों आंखों से देखने में दिक्कत आने लगती है।

4. चलने में अचानक तकलीफ होना, चक्कर आना, संतुलन या समन्वय का अभाव हो जाना।

5. मस्तिष्क में खून का रिसाव होने की वजह से अचानक भयंकर सिरदर्द होने लगता है। इसके साथ ही उल्टी आना, दौरा पड़ना या मानसिक चेतना का अभाव जैसी शिकायतें भी होती हैं। इन मामलों में चिकित्सक नॉन-कॉन्ट्रास्ट सीटी स्कैनिंग तत्काल कराने की सलाह देते ह

कितनी खतरनाक है यह बीमारी?

स्ट्रोक के कारण मस्तिष्क में नुकसान से पूरा शरीर प्रभावित हो सकताहै- जिसके परिणामस्वरूप आंशिक से लेकर गंभीर विकलांगता तक आ सकती है। इनमें पक्षाघात, सोचने, बोलने मे परेशानी और भावनात्मक समस्याएं शामिल हैं। कई रिस्क फैक्टर्स हो सकते हैं :- उम्र बढ़ने के साथ ही खतरा भी बढ़ता जाता है। पुरुषों में स्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है। पश्चिमी देशों की तुलना में इंडोएशियाई निवासियों में स्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है। पारिवारिक पृष्ठभूमि भी स्ट्रोक और हृदय रोग में अहम भूमिका निभाती है।

1.हाइपर टेंशन

2. हार्ट डिसीज

3. कैरोटिड आर्टरी डिसीज

4. हाई कोलेस्ट्रोल लेवल

5. स्मोकिंग एंड एल्कोहल ड्रिंकिंग हैबिट

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हुए कई शोध अध्ययनों के कारण अब ऐसी औषधियां मिलने लगी हैं जिनसे स्ट्रोक को होने से पहले ही रोका जा सकता है। स्ट्रोक से होने वाली क्षति को भी नियंत्रित करके कम से कम किया जा सकता है।

डॉ. सतनाम सिंह छाबड़ा डायरेक्टर,न्यूरो एंड स्पाइन, सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली


Date : 21-Feb-2020

यूरिन इन्फेक्शन यानी पेशाब संबंधी बीमारी आम समस्या है। उम्र के साथ यह समस्या बढ़ती जाती है। वहीं महिलाओं को इससे ज्यादा जुझना पड़ता है। अब इस समस्या से जुड़ा एक रोचक अध्ययन सामने आया है। इसके मुताबिक, जो लोग शाकाहारी भोजन करते हैं, उनमें यूरिन इन्फेक्शन की आशंका कम होती है। यूरिन संबंधी बीमारियों को डॉक्टरों की भाषा में यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रेक्ट इन्फेक्शन्स कहा जाता है। यूटीआई आमतौर पर ई. कोलाई जैसे आंत बैक्टीरिया के कारण होता है, जो मूत्रमार्ग में प्रवेश करते हैं। ये न केवल मूत्राशय, बल्कि गुर्दे को भी प्रभावित करते हैं। ताइवान में बौद्ध टीजू ची मेडिकल फाउंडेशन का यह अध्ययन 'जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट' मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने पाया कि मांसाहारियों की तुलना में शाकाहारियों में यूटीआई का जोखिम 16 प्रतिशत कम था। यही नहीं, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह फायदा अधिक देखा गया।
पोल्ट्री और सूअर के मांस को ई. कोलाई का स्रोत माना गया है तथा इसी ई. कोलाई के कारण यूरिन का इन्फेक्शन होता है। शाकाहारी लोग इन खाद्य पदार्थों से दूर रहते हैं, इसलिए ई. कोलाई से भी बचे रहते हैं।
www.myupchar.com  से जुड़ीं एम्स की डॉ. वीके राजलक्ष्मी के अनुसार, बच्चों की तुलना में वयस्कों में यह बीमारी अधिक होती है। वहीं पुरुषों की तुलना में महिलाओं और लड़कियों में इसकी आशंका अधिक रहती है। हालांकि, इसके पीछे का कोई स्पष्ट कारण नहीं है, लेकिन अंगों की बनावट को इसका कारण माना जा सकता है। 
इस बीमारी के कुछ बहुत सामान्य लक्षण हैं, जिन्हें समय रहते पहचान लिया जाए और इलाज लिया जाए तो बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है। बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय जलन होना, पेशाब में खून आना, पेशाब करते समय पेट के निचले हिस्से में जलन होना इसके सामान्य लक्षण हैं।
युरिन इन्फेक्शन के कई कारण हो सकते हैं जैसे- असुरक्षित यौन संबंध, अस्वच्छ रहने की आदत, पथरी, गर्भावस्था, एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक प्रयोग, मूत्राशय को पूरी तरह खाली न कर पाना आदि। साथ ही डायबिटीज, मोटापा, गर्भावस्था, आनुवंशिकता भी युरिन इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं। पुरुषों में डायबिटीज या प्रोस्टेट के बढ़ने के कारण युरिन इन्फेक्शन होता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, गुप्तांग शरीर का संवेदनशील हिस्सा होते हैं। साथ ही इनमें बाहरी संक्रमण का खतरा भी अधिक होता है। यदि यूरिन पास होने वाली ट्यूब यानी यूरेथरा की सही तरीके से सफाई ना की जाए तो संक्रमण फैलने खतरा बढ़ जाता है। कई मामलों में यह संक्रमण ब्लैडर तक पहुंच सकता है। ब्लैडर में सूजन जैसी समस्या भी देखने को मिलती है। सलाह दी जाती है कि बाथटब के बजाय शॉवर या बाल्टी से नहाएं। बाथटब के कारण यह इन्फेक्शन फैल सकता है। यौन संबंध से पहले और बाद में साफ सफाई का ध्यान रखें। जिन लोगों में पथरी की शिकायत रहती है या किसी कारण से मू्त्र मार्ग की सर्जरी हुई है, उन्हें विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए। यदि समस्या लंबे समय से बनी हुई है और अपने-आप ठीक नहीं हो रही है तो डॉक्टर को दिखाएं।

 

 


Date : 17-Feb-2020

डायट्री फाइबर, कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, विटामिन बी6, आयरन जैसी खूबियों से भरपूर खजूर वैसे तो सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। खजूर या डेट्स को अगर दूध के साथ मिलाकर खाया जाए तो यह पाचन को मजबूत बनाता है, फाइबर से भरपूर होता है, ब्रेन हेल्थ के लिए भी अच्छा माना जाता है लेकिन हर चीज को खाने पीने की एक लिमिट होती है। अगर आप एक दिन में 5 से ज्यादा खजूर खा लें तो इससे आपके सेहत को कई तरह से नुकसान भी पहुंच सकता है। आयुर्वेदाचार्य डॉ. ए के मिश्रा भी यही कहते हैं कि ज्यादा खजूर खाने से स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
पेट की समस्या
बाजार में बिकने वाला खजूर लंबे समय तक खराब न हो इसके लिए उसमें प्रिजर्वेटिव के तौर पर सल्फाइट का इस्तेमाल किया जाता है। सल्फाइट केमिकल कंपाउंड होता है जिससे हानिकारक बैक्टीरिया को दूर रखा जाता है लेकिन इसी सल्फाइट की वजह से कई लोगों को गंभीर ऐलर्जी हो सकती है। पेट दर्द, गैस, पेट फूलना और डायरिया जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। खजूर फाइबर का बेहतरीन सोर्स है और यही फाइबर शरीर में अगर ज्यादा मात्रा में पहुंच जाए तो कई बार नुकसान भी पहुंचा सकता है।
हाइपरक्लेमिया का कारण
खजूर में पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है। इसके ज्यादा सेवन से शरीर में पोटैशियम का स्तर बढ़ जाता है। इस स्थिति को हाइपरक्लेमिया कहा जाता है। इससे मितली आना, बेहोशी, मांसपेशियों में कमजोरी-झुनझुनाहट और ऐंठन की समस्या हो जाती है।
वजन बढ़ना
खजूर में कैलरी की मात्रा भी अधिक होती है। एक ग्राम खजूर में करीब 2.8 कैलरी होती है इसलिए इसके ज्यादा सेवन से तेजी से वजन बढ़ता है।
डायबिटीज और बीपी की दिक्कत
खजूर नैचरली मीठा होता है और अगर इसका अधिक मात्रा में सेवन किया जाए तो इससे न सिर्फ डायबिटीज की दिक्कत हो सकती है बल्कि ब्लड प्रेशर भी बढ़ सकता है।
अस्थमा हो सकता है ट्रिगर
खजूर ऐलर्जी का कारण बनता है और एलर्जी अस्थमा को ट्रिगर कर सकती है इसलिए अस्थमा के रोगियों को खजूर का सेवन करते समय विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। किसी स्ट्रीट वेंडर से खजूर न खरीदें क्योंकि ये ज्यादा नुकसानदायक होते हैं और ऐलर्जी पैदा कर सकते हैं।
बच्चों के लिए नुकसानदायक
खजूर मोटे ड्राइ फ्रूट्स में एक है, जिसे पचाने के लिए ठीक से चबाने की जरूरत होती है। बच्चों की आंत विकासशील अवस्था में होती है, जिससे खजूर को पचाना मुश्किल हो जाता है और उन्हें पेट की समस्याएं हो सकती हैं।
-एजेंसियां


Date : 06-Feb-2020

त्वचा की रंगत और उसका टेक्स्चर बहुत कुछ कह देता है। रोगी की त्वचा स्वस्थ इंसान की त्वचा से अलग दिखाई देती है। इसी तरह यदि कैंसर का रोग शरीर में प्रवेश कर चुका हो तब भी त्वचा अलग ही रंग की हो जाती है। त्वचा के बदलते स्वरूप को पहचानकर कैंसर की गठान का समय रहते पता लगाया जा सकता है। यह जांच स्थिति, स्त्री एवं पुरुष दोनों के लिए है। इस स्वयं परीक्षण अथवा किसी की सहायता से किए गए परीक्षण में त्वचा पर उपस्थित कुछ निशानों को पहचानना चाहिए। इसके लिए महीने की किसी भी एक सुनिश्चित तारीख को परिवार के किसी सदस्य की मदद से त्वचा में उपस्थित होने वाले किसी भी लाल, काले, नीले या कत्थई रंग के दाग धब्बे को देखने का प्रयास करें जो आपकी पीठ पर, हाथों में, जननांगों के आसपास या आंखों के नीचे उपस्थित हो सकते हैं।

त्वचा के इस बदलते स्वरूप के जरिए शरीर के भीतर के कैंसर को पकड़ा जा सकता है। शरीर की इस अद्भुत भाषा को चिकित्सा विज्ञान के त्वचा पर उपस्थित होने वाले लक्षणों के नाम से पहचाना जाता है। त्वचा का कैंसर मिलेनोमा और अन्य कैंसर इस तरह के और असामान्य और निकट भविष्य में पैदा हुए पहली बार देखे जाने वाले मस्से, तिल, भंवरी, लहसुन जैसे त्वचा के निशानों को देखना और पहचानना चाहिए। शरीर के जिस हिस्से को आप नहीं देख सकते हैं वह हिस्सा किसी व्यक्ति की मदद से या शीशे के सामने खड़े होकर परखा जा सकता है।

स्वयं परीक्षण को दें प्राथमिकता
स्त्री एवं पुरुष दोनों को महीने की 1 तारीख को अपने दोनों हाथों से शरीर की त्वचा में हाथ फेरते हुए कहीं कोई गठान सूजन आदि को महसूस कर पहचानने का प्रयास करना चाहिए। खासतौर से गर्दन के क्षेत्र में जहां 300 लिंफ ग्रंथियां या गठानें मात्र गर्दन में उपस्थित होती हैं जो शरीर की भाषा और रोग की स्थिति को बताने का कार्य करती है।

इनमें से यह गठानें बच्चों में खासतौर से फेफड़ों के संक्रमण खांसी या टीवी के संक्रमण जैसी बीमारियों के निदान में अति सहायक होती हैं, लेकिन गर्दन के बाएं हिस्से में यदि एक तरह की गठान मिले तो तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए जो करीब करीब 7 या 8 तरह के शरीर के भीतर होने वाले कैंसर की पहचान कराने में अति मददगार सिद्ध होती है।


Date : 06-Feb-2020

कुछ ऐसे ही लोग सिर्फ सूर्य की रोशनी का महत्व समझ सकते हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी का कुछ पल देर अंधेरे में गुजारा है। हमें इलाज की बेहतर सुविधाओं के जरिए अस्थायी नेत्रहीनता दूर करने पर जोर देना चाहिए क्योंकि नेत्रहीनता से प्रभावित प्रत्येक पांच में से चार व्यक्तियों का इलाज संभव हो सकता है। जागरूकता बढ़ाना आज की मांग है, खासकर बुजुर्गों के बीच, क्योंकि वे अपने शरीर के चेतावनी भरे लक्षणों की अनदेखी कर देते हैं और दृष्टि की समस्या से पीड़ित लोगों में से 60 प्रतिशत लोग 50 साल से अधिक उम्र के ही होते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, विश्व में लगभग 4.50 करोड़ नेत्रहीनों में से लगभग 80 प्रतिशत लोग 50 साल से अधिक उम्र के हैं। लिहाजा 50 या इससे अधिक की उम्र वाले 50 साल या इससे अधिक की उम्र वाले प्रत्येक व्यक्ति को संपूर्ण नेत्र जांच कराने के लिए किसी आई केयर प्रोफेशनल से संपर्क करना चाहिए।
पहले से कोई संकेत नहीं आते
नेत्र संबंधी कई रोगों में कोई पूर्ववर्ती लक्षण या संकेत नजर नहीं आते लेकिन समग्र जांच से दृष्टिहीनता की स्थिति आने से पहले शुरुआती चरण के नेत्र रोगों का पता चल सकता है। शुरुआती जांच और इलाज से आपकी दृष्टि सुरक्षित रह सकती है। आपको यदि कोई दृष्टि संबंधी समस्या का भी अनुभव हो रहा है तो समग्र नेत्र जांच के लिए किसी आईकेयर प्रोफेशनल से ही संपर्क करें। इसलिए हमें लोगों को शिक्षित करना होगा कि मोतियाबिंद, डायबिटीक रेटिनोपैथी, ग्लूकोमा, ड्राई आई आदि जैसी अधिक उम्र संबंधी नेत्र समस्याएं हमारे देश में आंखों की खराब सेहत का एक बड़ा कारण है, लेकिन उचित देखभाल और सही समय पर किसी मेडिकल एक्सपर्ट द्वारा चिकित्सा सहायता मुहैया कराने से इनका इलाज किया जा सकता है और मरीजों को अच्छीदृष्टि तथा आत्मविश्वास की जिंदगी जीने का आनंद मिल सकता है।
मिथकों को दूर कर
साथ ही हमें लोगों को यह भी बताना होगा कि टेक्नोलॉजी की तरक्की की बदौलत हमें आंखों की देखभाल संबंधी सभी तरह के मिथकों को दूर करने की जरूरत है, क्योंकि शुरुआती जांच में जरा भी देरी हमें दृष्टि से वंचित कर सकती है। हमें अच्छे आईकेयर के महत्व और नेत्रदान के बारे में लोगों के बीच अधिकतम जागरूकता और सक्रियता बढ़ाने की जरूरत है। हमें लोगों को यह भी बताना होगा कि कैसे नेत्रदान से किसी की जिंदगी को रोशन किया जा सकता है। अतः यदि आपको आंखों के सामने सीधी रेखाएं नजर आती हैं या आपको देखने में अस्पष्टता या धुंधलापन महसूस होता है या दूर की चीज देखने में दिक्कत आती है या बारीक चीजों को देखने में र्दिक्कत होती है, पन्नो पर किसी अंक या चेहरे को पढ़ने में दिक्वत आती है या आंखों से लगातार पानी आता रहता है, तो आपको तुरंत किसी प्रोफेशनल की मदद लेनी चाहिए।
अच्छी दृष्टि के कारगर उपाय
खानपान स्वस्थ रखें: आंखों की सुरक्षा स्वस्थ संतुलित खानपान से ही शुरू होती है। ओमेगा-3, फैटी एसिड, जिंक और विटामिन सी तथा ई से युक्त पौष्टिक आहार मैस्कुलर डिजेनरेशन और कैटरेक्ट आदि जैसी उम्र संबंधी दृष्टि समस्याओं से निजात दिलाने में मददगार हो सकते हैं। हरी सब्जियां, साइट्रस फल, बादाम, आंखों की सेहत को अच्छा बनाए रखते हैं।
धूम्रपान त्यागें : धूम्रपान से आपको कैटरेक्ट्‌स, ऑप्टिक नर्व डैमेज और मैस्कुलर डिजेनरेशन आदि जैसी समस्याएं उत्पन्ना हो सकती हैं। सनग्लास का इस्तेमाल करें। धूप और नुकसानदेह यूवी किरणों में ज्यादा देर रहने से आपको कैटरेक्ट्‌स की समस्या हो सकती है।
हमेशा कंप्यूटर पर काम करने के दौ