राजनांदगांव

तेन्दूपत्ता तोड़ाई ने पकड़ी रफ्तार
07-May-2026 4:12 PM
तेन्दूपत्ता तोड़ाई ने पकड़ी रफ्तार

खैरागढ़ की 20 समितियों में नीलामी के बाद संग्रहण शुरू

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

राजनांदगांव, 7 मई। खैरागढ़ जिले में तेन्दूपत्ता तोड़ाई ने रफ्तार पकड़ ली है। तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए 20 समितियों की विधिवत रूप से नीलामी की प्रक्रिया समाप्त हो गई है।

बेहतर मौसम होने के चलते तेन्दूपत्ता की गुणवत्ता को लेकर व्यापारी संतुष्ट हैं। यही कारण है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंधप्रदेश के अलावा राजनांदगांव और बिलासपुर के ठेकेदारों ने भी नीलामी में भाग लेकर संग्रहण का काम शुरू किया है। एक जानकारी के मुताबिक खैरागढ़ वन मंडल में 37 हजार 900 मानक बोरा तेन्दूपत्ता तोड़ाई का लक्ष्य रखा गया है। प्रति हजार बंडल के पीछे वन महकमे की ओर से श्रमिकों को 5500 का मेहनताना दिया जा रहा है। इससे पहले चरण पादुका श्रमिकों  को वितरित किया गया है।

बताया जा रहा है कि 15 मई तक तोड़ाई के लिए मियाद तय की गई है। खैरागढ़ वन मंडल में हर साल तेन्दूपत्ता नीलामी से एक बड़ा राजस्व  शासन के कोष में जमा होता है। ऊंचे दाम पर नीलामी होने से वन समितियों को भी लाभांश मिलता है। ऐसे में इस साल भी वन समितियों को सरकार की ओर से तय लाभांश मिलने की उम्मीद है। इस बीच बकरकट्टा, घाघरा, गंडई समिति का अचानकपुर, ढ़ारा के अलावा अन्य समितियों में तोड़ाई के बाद तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया जा रहा है। वन समितियों की ओर से तोड़े गए पत्तों की सुरक्षा की जा रही है।

बताया जा रहा है कि घने जंगलों में तोड़ाई के लिए ग्रामीण बड़ी संख्या में अलसुबह से पहुंच रहे हैं।  उधर आला अफसरों की ओर से श्रमिकों को सभी प्रकार की व्यवस्था में मदद की जा रही है। क्षेत्रीय वन परिक्षेत्र अधिकारी से लेकर बीट गार्ड भी तोड़ाई में लगे श्रमिकों के साथ जंगल में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। खैरागढ़ वन मंडल घने जंगलों से घिरा हुआ है। ऐसे में अंदरूनी क्षेत्रों में तोड़ाई के लिए श्रमिक  पूरे उत्साह के साथ जंगल में डटे हुए हैं।

हिंसक जानवरों से खतरा

तेन्दूपत्ता तोड़ाई के दौरान श्रमिकों पर हिंसक जानवरों का खतरा भी मंडरा रहा है। हर साल वन्य प्राणी के हमले से श्रमिक आहत भी होते हैं। तीन दिन पहले राजनांदगांव जिले के लालबहादुर नगर के नजदीक कोहलाकसा में जंगली सुअरों के हमले में दर्जनभर ग्रामीण जख्मी हो गए। बीते साल भी खैरागढ़ क्षेत्र में भालू के हमले में एक ग्रामीण बुरी तरह से घायल हुआ था। इस तरह हर साल तेन्दूपत्ता तोड़ाई के दौरान श्रमिकों को जान जोखिम में डालना पड़ता है। जंगलों में सुरक्षा को लेकर श्रमिकों के पास ठोस व्यवस्था नहीं होती। सिर्फ अपने बूते ही श्रमिक हमला होने पर जानमाल की रक्षा करने के लिए विवश होते हैं। बहरहाल तोड़ाई के सीजन में जंगली जानवरों के हमले में जख्मी होने या जान गंवाने का खतरा बढ़ा रहा है।


अन्य पोस्ट