राजनांदगांव

बटालियन का जवान पत्नी संग कर रहा रक्तदान मरणोपरांत देहदान की घोषणा
03-Apr-2026 3:41 PM
बटालियन का जवान पत्नी संग कर रहा रक्तदान  मरणोपरांत देहदान  की घोषणा

‘छत्तीसगढ़’  संवाददाता

राजनांदगांव, 3 अप्रैल। राजनांदगांव जिले का एक जवान अपनी पत्नी के संग सिलसिलेवार रक्तदान कर समाज में जागरूकता लाने की मुहिम चला रहा है। वहीं दंपत्ति ने मरणोपरांत देहदान की घोषणा कर लोगों के बीच एक अमिट और सकारात्मक कदम उठाया है। जीते-जी रक्तदान और मरने के बाद अंग व देहदान, यह महज एक नारा नहीं, बल्कि इस दंपत्ति की अपनी इंसानियत के प्रति निष्ठा है।

मिली जानकारी के मुताबिक रायगढ़ में छठवीं बटालियन में आरक्षक (चालक) के पद पर तैनात सोहन लाल साहू अपनी पत्नी रूखमणी साहू के साथ मिलकर रक्तदान को एक मिशन के रूप में आगे ले जाने के लिए सामाजिक मोर्चे पर तैनात है। दोनों रक्तदान को एक अहम जरूरत मानकर लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। पति-पत्नी ने मरणोपरांत  देहदान की भी घोषणा की है। दोनों रक्तदान और देहदान के लिए सभी को प्रेरित भी कर रहे हैं।

‘छत्तीसगढ़’  से बातचीत में आरक्षक सोहन ने बताया कि वह एक मिशन के रूप में काम कर रहे हैं। सभी को इस मुहिम में जोडऩे की कोशिश में उनकी पत्नी भी बराबर की भागीदार है। उन्हें उम्मीद है कि रक्तदान और देहदान के प्रति सभी एक दिन जागरूक होंगे। इस बीच आरक्षक सोहन ने अपने प्रयास से दर्जनभर से ज्यादा लोगों को रक्तदान कराया है।

 राजनांदगांव के एक छोटे से ग्राम नवागांव (सोमनी) के रहने वाले आरक्षक ने जरूरतमंदों को नया जीवन देने के उद्देश्य से अंग और देहदान करने के लिए एक संकल्प पत्र भरा है। स्वयं वह 14 बार रक्तदान कर चुके हैं। आरक्षक का कहना है कि भारत में रोजाना 63 हजार मौतें होती है, लेकिन देहदान की दर बेहद कम है। प्रति 10 लाख आबादी पर मात्र 0.52 लोगों ने देहदान किया। 2023 से अब तक 17 हजार से ज्यादा जीवित लोगों ने अंगदान किया। जबकि 5 लाख लोगों को अंग प्रत्यारोपण की सख्त जरूरत पड़ती है। बहरहाल आरक्षक और उनकी पत्नी की इस मुहिम की प्रशंसा हो रही है।

पत्नी ने लिखा सीएम को पत्र

आरक्षक सोहनलाल की पत्नी रूखमणी साहू ने नेक इरादे वाले अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने का उद्देश्य के साथ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने बताया कि देश के कुछ राज्य मध्यप्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक तथा गुजरात में देहदान और अंगदान करने वाले व्यक्तियों को मृत्यु पश्चात राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाती है। इससे समाज में नि:स्वार्थ सेवा की भावना बढ़ती है और ज्यादा लोग मुहिम में जुडऩे के लिए प्रेरित होते हैं।


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