राजनांदगांव
नक्सल समस्या के खात्मे में अफसरों की बहादुरी की भी चर्चा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 3 अप्रैल। राजनांदगांव रेंज में नक्सलियों की संख्या शून्य हो गई है। रेंज का चारों जिला नक्सलमुक्त हो गया है। रेंज को नक्सल चंगुल से बाहर निकालने के लिए पुलिस को जवानों की शहादत की भारी कीमत चुकानी पड़ी। वहीं नक्सलियों के खिलाफ रणनीतिक ढ़ाल बनकर खड़े रहे। कुछ ऐसे अफसर भी है जिनकी मौजूदगी से पुलिस ने नक्सलियों को ढ़ेर करने व कच्चे रास्तों में फोर्स को बम से उड़ाने की योजना को विफल किया गया।
राजनांदगांव रेंज के घोर नक्सलग्रस्त जिला मोहला-मानपुर के मौैजूदा एसपी वाईपी सिंह और नक्सल क्षेत्र बस्तर से राजनांदगांव रेंज में लंबी तैनाती वाले डीएसपी अजित ओगरे की योगदान का भी जिक्र हो रहा है। इन दोनों अफसरों की बहादुरी की चर्चा न सिर्फ राजनांदगांव, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में हो रही है। नक्सलियोंं के विरूद्ध आईपीएस वाईपी सिंह और डीएसपी अजित ओगरे ने ऐसे समय में लोहा लिया जब नक्सलियों का दबदबा चरम पर था।
12 जुलाई 2009 को कोरकोट्टी नक्सल हमले में एसपी स्व. विनोद चौबे और 29 जवानों की शहादत की घटना के बाद केंद्र सरकार ने बीएसएफ अफसर वाईपी सिंह को राजनांदगांव में नक्सलियों से लडऩे के लिए भेजा। साल 2010 में सिंह ने नक्सलियों के खिलाफ पुलिस के साथ मिलकर रणनीतिक मोर्चा बनाया। राजनांदगांव में सिंह ने करीब 10 साल तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से माओंवादियों के खिलाफ जंग लड़ी।
बताया जाता है कि वाईपी सिंह ने एक दशक में जवानों की रक्षा पर फोकस किया। यही कारण है कि नक्सली कोरकोट्टी हमले के बाद बड़ी वारदात करने में नाकाम रहे। वाईपी सिंह ने कई मुठभेड़ों और नक्सल हमले में सामने रहकर जवानों के साथ लड़ाई की। बताया जाता है कि वाईपी सिंह ने करीब 20 साल तक ढ़ेरों नक्सल गश्त कर जवानों को जमीनी लड़ाई लडऩे की तरीके से भी रूबरू कराया।
आईपीएस अवार्ड होने के बाद राज्य सरकार ने उनके अनुभव का लाभ उठाने के लिए मोहला-मानपुर में बतौर एसपी पदस्थ किया। अब यह जिला नक्सली प्रभाव से परे रह गया। इधर 2004 बैच के उपनिरीक्षक अजीत ओगरे ने अपनी सेवाकाल में करीब 22 साल बस्तर और राजनांदगांव में नक्सलियों का सामना किया। ओगरे ने करीब 60 से ज्यादा नक्सलियों को मार गिराया। वही कई मुठभेड़ में नक्सलियों से लड़ते वह खुद घायल हुए। ओगरे ने बस्तर के अलग-अलग जिलों में नक्सलियों से सीधा मुकाबला किया। ओगरे ने बस्तर के दुर्गम इलाकों में घुसकर जंग लड़ी। उनकी इस बहादुरी के एवज में सरकार ने आऊट-ऑफ-प्रमोशन देकर निरीक्षक बनाया। वही उनके लड़ाकेपन से प्रभावित होकर राज्य सरकार ने डीएसपी प्रमोट किया। बहरहाल राजनांदगांव रेंज में नक्सली समस्या अब खत्म हो गर्ई लेकिन इन दोनों अफसरों की भूमिका को भी हमेशा सराहा जाएगा।


