रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 16 जून। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनरों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मध्यप्रदेश शासन ने छत्तीसगढ़ को पत्र लिखकर यह प्रस्ताव दिया है कि राज्य पुनर्गठन के 26 वर्ष बाद पेंशनरों की महंगाई राहत (डीआर) के भुगतान के लिए हर बार दोनों राज्यों की सहमति लेने की आवश्यकता समाप्त की जाए और इस संबंध में स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
मध्यप्रदेश शासन का मत है कि जब दोनों राज्यों के कर्मचारियों एवं पेंशनरों का विभाजन पूर्ण हो चुका है तथा वित्तीय दायित्व भी निर्धारित हैं, तब महंगाई राहत जैसे मामलों में बार-बार सहमति लेने की प्रक्रिया व्यावहारिक नहीं रह गई है। इससे पेंशनरों को समय पर लाभ मिलने में अनावश्यक विलंब होता है।
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही इसी मांग पर हाल ही में महानदी भवन में वित्त सचिव रोहित यादव के साथ हुई बैठक में भी सकारात्मक चर्चा हुई थी। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय महामंत्री वीरेन्द्र नामदेव के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल के बैठक के दौरान वित्त सचिव ने आश्वस्त किया था कि पेंशनरों को महंगाई राहत प्रदान करने के लिए मध्यप्रदेश शासन की सहमति लेने की वर्तमान व्यवस्था समाप्त करने के विषय पर शासन स्तर पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है तथा इस संबंध में शीघ्र निर्णय लिया जा सकता है।
महासंघ का मानना है कि यह विषय केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के पेंशनरों के हित से भी जुड़ा हुआ है। वर्तमान व्यवस्था के कारण महंगाई राहत, एरियर तथा अन्य पेंशन लाभों के भुगतान में प्रशासनिक विलंब होता है, जिससे दोनों राज्यों के लाखों पेंशनर प्रभावित होते हैं। जिनकी अनुमानित संख्या 7 लाख बताया जाता है। इसमें छत्तीसगढ़ राज्य के 1.30 पेंशनर शामिल है।
नामदेव ने कहा कि राज्य पुनर्गठन के समय वित्तीय दायित्वों के बंटवारे के लिए बनाए गए प्रावधान उस दौर की आवश्यकता थे, लेकिन 25 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद दोनों राज्यों की स्वतंत्र वित्तीय, प्रशासनिक एवं कोषागार व्यवस्थाएं पूरी तरह स्थापित हो चुकी हैं। ऐसे में पेंशनरों के वैधानिक अधिकारों को अंतरराज्यीय सहमति की प्रक्रिया से जोडक़र रखना न्यायसंगत नहीं है।
महासंघ ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों से आग्रह किया है कि वे संयुक्त रूप से भारत सरकार को अनुशंसा भेजकर धारा 49(6) में आवश्यक संशोधन अथवा उसके निरस्तीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ कराएं।


