रायपुर

होलाष्टक शुरू, 8 दिनों तक मांगलिक कार्यों पर रहेगी रोक
25-Feb-2026 8:14 PM
होलाष्टक शुरू, 8 दिनों तक मांगलिक कार्यों पर रहेगी रोक

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बेमेतरा, 25 फरवरी। होलाष्टक का प्रभाव 24 फरवरी से शुरू हो गया है। पंचांग के अनुसार इस दिन सुबह 7.02 से होलाष्टक प्रारंभ हो गया हैं ,जो 3 मार्च को होलिका दहन तक रहेगा। इन दिनों में किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। धार्मिक और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक की अवधि में ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है। इन आठ दिनों में चंद्रमा, सूर्य, शनि और अन्य ग्रह उच्च अवस्था में होते हैं।

ग्रहों की इस स्थिति के कारण व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक एकाग्रता प्रभावित होती है। यही कारण है कि इस समय नया घर खरीदना, भूमि पूजन, मुंडन, विवाह, सगाई या नए वाहन की खरीदी बिक्री जैसे शुभ कार्य परिणाम नहीं देते।

होलाष्टक तक का संबंध प्रहलाद की पौराणिक कथा से है। हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु की भक्ति से क्रोधित होकर अपने पुत्र प्रहलाद को होलिका दहन में बिठाकर मारने का प्रयास किया था। इन आठ दिनों तक प्रहलाद को पर्वत से फेंकने, विष देने और हाथियों से कुचलना जैसे कई प्रयास किए गए। अंत में होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, जहां होली का भस्म हो गई और प्रहलाद सुरक्षित रहे।

परंपराएं व सावधानियां

देशभर में होलाष्टक को लेकर गहरी लोक मान्यताएं हैं। माघ पूर्णिमा को होली का डांडा रोपित होने के साथ ही वातावरण में बदलाव महसूस होने लगता है। परंपरा के अनुसार विवाह की पहली होली पर नवविवाहिताओं को अपने ससुराल में नहीं रहना चाहिए। माना जाता है कि उसे होली की आंच से बचाना शुभ होता है। इसलिए नियमों का पालन करना चाहिए।

क्या करें और क्या न करें

शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक में शुभ कार्य करना मना है। लेकिन यह समय दानपुण्य, ध्यान और मंत्र साधना के लिए बेहतर है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप और भगवान विष्णु, शिव या भगवान हनुमान के आराधना विशेष फलदाई होती है। 3 मार्च को होलिका दहन के बाद जैसे ही नकारात्मकता खत्म होगी फिर से मांगलिक कार्यों के शहनाईयां गुजरने लगेगी। होलाष्टक के दिनों में केवल ईश्वर-भजन और दान करने को ही प्राथमिकता दी जा रही है। इसलिए लोगों को इन दिनों में भजन करना चाहिए।


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