रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 18 फरवरी। राजधानी में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था 15 फरवरी से पूर्णतया लागू हो गई है। गृह (पुलिस) विभाग द्वारा 21 जनवरी को पत्र जारी कर राजपत्र की प्रतियां सभी संबंधितों को प्रेषित की गई है। इसमें पूर्ववर्ती सीआरपीसी अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 151 जो बाद में संशोधित बीएनएस भारतीय न्याय संहिता में परिवर्तित कर धारा 170 बना है । इसमें अपराधियों को गिरफ्तार करने उसकी सुनवाई करने उसे रिहा करने अथवा जमानत निरस्त कर जेल भेजने का अधिकार पूर्व में डिप्टी कलेक्टर व तहसीलदारों को था। न?ई अधिसूचना में धारा 170 का अधिकार पुलिस कमिश्नर को दिए जाने का उल्लेख नहीं है। किंतु 15 फरवरी से लगातार गृह पुलिस विभाग गिरफ्तार करने, सुनवाई करने एवं जेल भेजने अथवा रिहा करने की कार्रवाई कर रही है। यह अधिकारिता व क्षेत्राधिकार के विपरीत होने के साथ-साथ बिना अधिकार के किसी व्यक्ति को जेल भेजना या न्यायिक प्रक्रिया अपनाना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसी स्थिति में पुलिस प्रशासन द्वारा बीएनएस की धारा 170 में वर्तमान में गिरफ्तारी, जांच, जेल भेजना असंवैधानिक नियम विपरीत है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि इस प्रकरण में यदि कोई उच्च न्यायालय में पीडि़त पक्षकार याचिका प्रस्तुत करेगा तो पुलिस प्रशासन व गृह पुलिस विभाग को जवाब देने में परेशानी होगी। इस पूरी प्रक्रिया में राज्य प्रशासनिक सेवा एवं कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में अंदरूनी नाराजगी है। लेकिन वह व्यक्त नहीं कर पा रहे है। इसके साथ ही आईएएस अधिकारियों के भी बहुत सारे अधिकार छिनने से वह भी अंदरूनी नाराजगी प्रगट कर आपसी चर्चा में लगे हुए हैं।


