रायपुर

12 की देशव्यापी हड़ताल में रेल कर्मचारी भी शामिल होंगे
08-Feb-2026 8:43 PM
12 की देशव्यापी हड़ताल में रेल कर्मचारी भी शामिल होंगे

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 8 फरवरी। 12 फरवरी की देशव्यापी ट्रेड यूनियन हड़ताल में रेल कर्मचारी भी शामिल होंगे।ऑल इंडिया सेंट्रल कौंसिल ऑफ़ ट्रेड यूनियन से सम्बद्ध इंडियन रेलवे एम्पलाईज फेडरेशन ने अपने सभी  कर्मियों से अपने-अपने कार्य स्थल, ब्रांच, डिवीजन, जोनल स्तर जहां भी संभव हो सके इस एक दिवसीय हड़ताल करने  कहा है। इसके जरिए रेल कर्मी रेल का निजीकरण रोकने, ठेकेदारीआउटसोर्सिंग बंद करने, युवाओं के लिए रोजगार का प्रबंध  और एनपीएस, यूपीएस रद्द कर ओपीएस की बहाली की मांग करेंगे।

एक बयान में फेडरेशन ने कहा कि आज भारतीय रेलवे अत्यंत गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। एक ओर रेलवे में  स्टाफ की भारी कमी है तो दूसरी ओर  सेवारत  कर्मचारियों पर अत्यधिक कार्यभार डाला जा रहा है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार भारतीय रेलवे में तीन लाख से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। तो आवश्यक औजारों व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों और संरक्षात्मक यंत्रों की भारी कमी है तथा जो उपलब्ध हैं उनकी गुणवत्ता भी बेहद खराब है। घटिया मटेरियल, भ्रष्टाचार, अफसरशाही की तानाशाही और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण कर्मचारी बुरी तरह परेशान हैं। आए दिन हमारे ट्रैक मेंटेनर साथी रन ओवर जैसी दर्दनाक घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।

देश की तथाकथित राष्ट्रवादी सरकार भारतीय रेलवे सहित देश की तमाम सार्वजनिक संस्थाओं जल, जंगल, जमीन, तथा तमाम संसाधनों को चंद देसी-विदेशी पूंजीपतियों और कॉरपोरेट कंपनियों के हवाले करने पर तुली हुई है। सभी श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम कोड लागू करना  स्पष्ट करता है कि आत्मनिर्भर भारत, विश्वगुरु और विकसित भारत जैसे नारे केवल जनता को भ्रमित करने के लिए हैं।

इसी के विरोध में यदि भारतीय रेलवे के लाखों कर्मचारी एकजुट होकर इस आम हड़ताल को समर्थन देते हैं तो यह संघर्ष देश की सत्ता की आंखें खोल सकता है।

विदेशी सरकारें अपने रेलवे का राष्ट्रीकरण कर रहीं

फेडरेशन का कहना है हमारे सामने यह बड़ा सवाल है कि जब जापान अर्जेंटीना और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश लगभग तीस से पैंतीस वर्षों के असफल निजीकरण के अनुभव के बाद जनता और ट्रेड यूनियनों के संघर्ष और दबाव के चलते अपनी रेलवे का पुन: राष्ट्रीयकरण कर रहे हैं तो क्या हम चुपचाप बैठे रहेंगे या संघर्ष का परचम बुलंद करेंगे। यह सचाई है कि यूके में वेल्स और स्कॉटलैंड के बाद अब पूरे देश में रेलवे के राष्ट्रीयकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और वर्ष 2027 तक सभी निजी कंपनियों को रेलवे से बाहर कर दिया जाएगा। राष्ट्रीयकरण के बाद वहां रेल सेवाओं में सुधार हुआ है, रेलवे किराए में चालीस से पचास प्रतिशत तक कमी आई है और कर्मचारियों के वेतन तथा सामाजिक सुरक्षा में सुधार हुआ है।


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