रायपुर

पत्नी की गला दबाकर हत्या पति को आजीवन कैद
06-Feb-2026 7:37 PM
पत्नी की गला दबाकर हत्या पति को आजीवन कैद

एससी/एसटी एक्ट में भी दोषसिद्ध, मृत्युदंड से किया इंकार

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 6 फरवरी। चरित्र शंका में पत्नी की गला दबाकर हत्या करने के के मामले में विशेष न्यायालय (एससी/एसटी अत्याचार निवारण) ने अभियुक्त सोहन राम साहू को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एससी/एसटी विशेष जज पंकज कुमार सिन्हा ने बुधवार को फैसला सुनाया है।

सरकारी वकील उमाशंकर वर्मा ने बताया कि 12 अप्रैल 2025 की सुबह अभियुक्त सोहन साहू अपनी पत्नी ओमिका धु्रव, को जो नगर सेना गरियाबंद में कार्यरत थी। उसे अपने बाइक से ड्यूटी में छोडऩे के लिए गया था। इसके बाद में विजय नगर, राउत डेरा, सरगी नाला रोड से करीब 100 मीटर अंदर जंगल में ओमिका धु्रव का शव मिला। सूचना मिलने पर मृतका के भाई वानेंद्र कुमार ध्रुव ने इसकी सुचना पुलिस में दर्ज कराई। पुलिस ने सूचना पर मौके से शव बरामद कर पोस्टमार्ट के लिए भेजा गया।

जांच में सामने आया कि पति-पत्नी के बीच आपसी विवाद हुआ, जिसके बाद अभियुक्त ने दोनों हाथों से गला दबाकर हत्या कर दी। मौके पर अभियुक्त स्वयं मौजूद मिला और पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अभियोजन साक्ष्यों से हत्या की पुष्टि हुई।

विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा की अदालत ने यह माना कि अभियुक्त ने यह जानते हुए अपराध किया कि मृतका अनुसूचित जनजाति की है। अभियोजन पक्ष ने सभी आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित किया। अदालत ने अभियुक्त को धारा 103(1) एससी/एसटी  अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(1)के तहत दोषसिद्ध किया।

दंड के प्रश्न पर सुनवाई के बाद अदालत ने अभियुक्त को दोनों धाराओं में आजीवन कारावास और प्रत्येक में 2,000 रुपए का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न चुकाने की स्थिति में अतिरिक्त कठोर कारावास का भी प्रावधान किया गया है।

न्यायालय ने मृतका के माता-पिता शंकर लाल ध्रुव और रेखा बाई ध्रुव की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रतिकर योजना के तहत अधिकतम मुआवजा देने के निर्देश दिए।

न्यायालय ने कहा-पत्नी की हत्या अत्यंत निंदनीय अपराध है, किंतु मामले की परिस्थितियों को देखते हुए मृत्युदंड देना न्यायसंगत नहीं होगा। इसलिए आजीवन कारावास ही उचित दंड है।


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