रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 29 जनवरी। राज्य के निजी अस्पतालों ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि अगर आयुष्मान भारत योजना के तहत बकाया 1700 करोड़ रुपये का भुगतान 31 जनवरी तक नहीं हुआ, तो 1 फरवरी से सभी निजी अस्पतालों में इस योजना के मरीजों का इलाज बंद हो जाएगा।
निजी अस्पताल एसोसिएशन के अनुसार, पिछले साल अगस्त से सरकार की ओर से कोई पैसा नहीं मिला है। एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य और डॉक्टर राकेश गुप्ता ने बताया कि इतनी बड़ी रकम अटकने से अस्पतालों का रोजाना काम चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास स्टाफ की सैलरी, दवाइयां और अन्य खर्चों के लिए पैसे नहीं बचे हैं। अगर भुगतान नहीं हुआ तो हमें मजबूरी में इलाज रोकना पड़ेगा।’ एसोसिएशन ने यह फैसला सभी अस्पतालों की मीटिंग के बाद लिया है, ताकि सरकार पर दबाव बने।
सरकारी अस्पतालों में पहले से ही डॉक्टरों, दवाओं और बिस्तरों की कमी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस संकट से बचने के लिए सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए। राज्य स्वास्थ्य मंत्री से इस पर स्पष्ट बयान की उम्मीद की जा रही है। सरकार ने अभी तक अल्टीमेटम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अगर भुगतान हो जाता है, तो संकट टल सकता है। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही चुनौतियों से जूझ रही है और यह मामला इसे और गंभीर बना सकता है।
डा गुप्ता ने कहा कि जिस तरह छत्तीसगढ़ सरकार प्रति माह जरूरतमंद बहनों को महतारी वंदन योजना का भुगतान तय तिथि में करती है इसी प्रकार की भुगतान प्रणाली प्रति माह निजी अस्पताल संचालकों को नियमित रूप से भुगतान करने के लिए बनाए जाने की जरूरत है । पारदर्शी भुगतान प्रणाली ना होने के कारण योजना में नियमित अंतराल में रुकावट आ रही है।
जुलाई 2025 से किसी प्रकार का भुगतान नहीं हुआ। साथ ही जनवरी से मार्च 2025 के 90त्न से अधिक अस्पतालों का भुगतान बकाया है जिस पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।


