रायपुर

विशेष साक्षात्कार: डाक टिकटों का संग्रहण 71 साल का जुनून, विनु भाई को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड
16-Jan-2026 7:01 PM
विशेष साक्षात्कार: डाक टिकटों का संग्रहण 71 साल का जुनून, विनु भाई को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड

भारतीय डाक टिकटों, विदेशी स्टैम्प और लैटर को भी सहेजा

-टिकेश कुमार

रायपुर, 16 जनवरी। अकोला महाराष्ट्र्र में एक व्यापारी परिवार में जन्मे  विनु भाई बाविशी जिनका विवाह रायपुर निवासी गीता बेन से हुआ था। बचपन के दिनों से उन्हें डाक टिकटों के संग्रहण का  शौक था। जो समय के साथ जुनून बन गया। इस जुनून के उन्हें एक नई पहचान दी।  साधारण कारोबारी परिवार से निकलकर वीनू भाई ने डाक टिकट संग्रहण  को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया और 71 वर्षों की साधना से इसे अपनी सबसे बड़ी पूंजी में बदल दिया।

वीनू भाई की फिलाटेली यात्रा की शुरुआत तब हुई, जब वे मात्र 17 वर्ष के थे। वर्ष 1954 में दोस्तों के घर पढ़ाई के दौरान उन्होंने पहली बार डाक टिकटों के बारे में सुना। उस समय शायद किसी ने यह नहीं सोचा था कि ‘स्टैम्प’ शब्द एक दिन उनके जीवन की पहचान बन जाएगा। शुरुआत में वे अपने पिता के व्यापार से संबंधित डाक से प्राप्त टिकटों को सहेजने लगे। उस दौर में टिकटों की कीमत केवल आने भर थी, लेकिन उनके लिए वह अमूल्य धरोहर बनती चली गई।

समय के साथ यह शौक जुनून में बदल गया। कारोबारी जिम्मेदारियों के बावजूद विनु भाई ने अपने सपने को कभी पीछे नहीं छोड़ा। उन्होंने भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों के भी दुर्लभ डाक टिकटों का संग्रह किया। इसके लिए उन्होंने अपनी आय का बड़ा हिस्सा खर्च किया, लेकिन कभी पछतावा नहीं किया। उनकी विशेष रुचि महात्मा गांधी की तस्वीर वाले टिकटों और जैन धर्म पर आधारित डाक टिकटों में रही।

इस सफर में उन्हें अपनी पत्नी स्वर्गीय गीता बेन और पूरे परिवार का भरपूर सहयोग मिला। पत्नी ने उनके शौक को समझा, अपनाया और हर कदम पर साथ दिया। वर्ष 1980 में जब उन्होंने अपना व्यवसाय बेटों को सौंपकर सेवानिवृत्ति ली, तब अधिकांश लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं, लेकिन वीनू भाई ने अपने जीवन का हर पल डाक टिकटों को संजोने और सहेजने में लगा दिया।

आज उनके पास लगभग 1906 शीट्स में डाक टिकटों का विशाल संग्रह है और वे अब भी 25 से अधिक नई शीट्स का संग्रह कर चुके हैं। उनके इस समर्पण ने उन्हें देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पहचान दिलाई। केवल्यधाम महातीर्थ, कुम्हारी में जैन फिलाटेली सोसायटी ऑफ इंडिया का छठवां राष्ट्रीय अधिवेशन 17 एवं 18 जनवरी को आयोजित किया जा रहा है। जिसमें जैन धर्म पर आधारित डाक टिकटों की भव्य प्रदर्शनी आदिपेक्स 2026 का भी आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन में देश के लगभग 14 राज्यों से सैकड़ों जैन डाक टिकट संग्रहकर्ता भाग लेंगे।

इस कार्यक्रम में श्री विनु बाविशी को उनकी जीवनभर की साधना और समर्पण के लिए जैन समाज की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।

 देश विदेश में मिली ख्याति

उनकी संग्रह की गई डाक टिकटों ( फिलाटेली) के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें कई बार स्वर्ण और रजत पदकों से सम्मानित किया गया।

 राष्ट्रपिता की 350 से अधिक दुर्लभ फोटो

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जीवनी पर आधारित 350 से भी अधिक फोटो उनके संग्रह में शामिल । इसके अलावा गांधी दर्शन , गांधी विचार और 86 कार्टून क्लिक्स पोस्टल स्टैम्प कलेक्शन में, इसके अलावा उन्हें दुर्लभ सिक्के और मूर्ति के संग्रहण में भी रुचि रही।

 बेटा अब आगे बढ़ाएगा

 श्री विनु भाई के बेटे राजेश बाविशी बताया कि पिता की इस धरोहर को वे सवार रहे है। ओर भविष्य में भी इस कार्य को आगे बढ़ाएंगे। आज वे इस कार्य में उनकी मदद करते हैं। इस में उन्हें परिवार का भी पूरा सहयोग मिला।

 

 


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