रायपुर

आज दान केवल नाम के लिए-साध्वी
04-Aug-2023 6:57 PM
आज दान केवल नाम के लिए-साध्वी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 4 अगस्त। साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने अपने चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला में शुक्रवार को कहा कि आजकल दिखावे के लिए दान करते है। केवल नाम के लिए आज दान किया जा रहा है। मंदिरों के निर्माण में दान देने से दानदाता का नाम शिलालेखों पर लिखा जाता है। किसी पार्क, शमशान घाट, फुटपाथ और पब्लिक प्लेस पर बैठक व्यवस्था, वाटर कूलर, पौधरोपण करते समय ट्री गार्ड पर अपना नाम लिखवाना, बड़े-बड़े भंडारे करवाना और इन कामों को करते हुए फोटो खिंचवाना आज दान देने का एक ट्रेंड बन गया है। दानदाता जब अपना नाम इन जनहित के कार्यों में छपवाए तो वह सिर्फ दानदाता का प्रचार-प्रसार ही है और कुछ नहीं। जिस दिन आपकी आंखें बंद हो जाएगी, उस दिन आपका यह दिखावे का नाम भी लोग भूल जाएंगे।

जैन दादाबाड़ी में चल रहे चातुर्मास में धर्मावलंबियों से उन्होंने कहा कि आप अपना नाम लोगों के दिलों में जिंदा रखना चाहते हो तो वैसा आपको काम भी करना होगा और जिस दिन आपने ऐसा सोच कर काम किया पता नहीं कितना वक्त लग जाएगा। लेकिन आज जो लोगों के दिल में जिंदा है, उन्होंने यह कभी नहीं सोचा होगा कि मुझे अपना इतना बड़ा नाम बनाना है। वे बस अपने सेवा के कार्यों में लीन रहते हैं और वह इतना बड़ा काम कर लेते हैं उन्हें खुद भी पता नहीं चलता और ऐसे कार्यों से वे लोगों की दिलों में राज करते हैं। आप जब दिखावे के लिए दान देंगे तो वह कभी धर्म में परिवर्तित नहीं होगा। दान अपना लोभ कम करने के लिए दिया जाता है और ऐसे ही दान करोगे तब वहां धर्म बनेगा और आपको मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कराएगा।

आज उनके प्रवचन के एक माह पूरे हुए। सहनशील कैसे बने विषय पर साध्वी कहती है कि जीवन में हमेशा आपको चुभन रहेगी। आज किसी का भी जीवन पूरी तरह से सुखमय नहीं है और जो अपने आप को सबसे सुखी बताते हैं वह खुद ही अंदर से दुखी रहते हैं। वह सुख केवल उनका बाहरी दिखावा है। आज आंतरिक और व्यवहारिक दोनों चुभन व्यक्ति को घेरे हुए हैं। यह चुभन लगातार होती रहती है, जो इस चुभन को सहन करता है वह सिद्ध हो जाता है। वह पत्थर जो वर्षों से एक जगह पर रहकर सारे मौसमों को सहन करता है वही पूजा जाता है। जो पत्थर मौसम की मार नहीं सहन कर पाते और अपनी जगह से लुढक़ जाते हैं, वह कभी नहीं पूजे जाते हैं। सहन करने की भी एक सीमा होती है, आप किसी भी ग्रंथ को पढ़ लीजिए, आपको सहनशीलता का अनुभव हो जाएगा। कर्मों के कर्ज को चुकाने के लिए आपको सहनशील बनना ही होगा। आज तो पड़ोसियों का व्यवहार भी आपको नहीं सुहाता है, थोड़ी सी बात पर भी जमकर कहासुनी और तू-तू, मैं-मैं हो जाती है।


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