रायपुर
रायपुर, 17 मई। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने कहा है कि हाईकोर्ट बिलासपुर द्वारा दैवेभो कर्मचारियों की पूर्व सेवा को पेंशन योग्य सेवा में शामिल किए जाने के फैसले पर राज्य शासन की अब तक की चुप्पी हजारों कर्मचारियों एवं पेंशनरों के साथ अन्याय है।
महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव तथा सेवानिवृत्त दैवेभो प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक अनिल पाठक ने संयुक्त बयान में कहा गया कि उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी प्रारंभ में दैवेभो के रूप में कार्यरत रहा हो तथा बाद में नियमित किया गया हो, तो नियमितीकरण से पूर्व की सेवा अवधि को भी पेंशन योग्य सेवा में जोड़ा जाना चाहिए।
महासंघ ने कहा कि शासन द्वारा प्रस्तुत विभिन्न आपत्तियों को न्यायालय द्वारा निरस्त किया जाना इस बात का प्रमाण है कि कर्मचारियों की वास्तविक सेवा को अनदेखा नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी माना है कि पात्र कर्मचारियों एवं पेंशनरों को उनकी पूरी सेवा अवधि का लाभ मिलना चाहिए तथा उन्हें पेंशन सहित अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है।
महासंघ ने मांग की है कि सामान्य प्रशासन एवं वित्त विभाग के माध्यम से तत्काल स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। अब तक इस लाभ से वंचित रखा गया है, उनके प्रकरणों की समीक्षा कर संशोधित पेंशन स्वीकृत की जाए तथा लंबित एरियर्स का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए।महासंघ ने जानकारी दी कि 20 मई को प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में इस विषय पर विस्तृत एवं सार्थक चर्चा की जाएगी तथा आगे की रणनीति तय की जाएगी।


