रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 25 मई। पीएससी 2021 के घोषित नतीजों को लेकर नित नई जानकारियों सामने आ रहीं है। इसमें पिछली परीक्षों के मुकाबले इस बार अफसर-नेता पुत्र-पुत्रियों, बहुओं, दामाद की सफलता के लिए पूरी परीक्षा पद्धति ही बदले जाने का खुलासा हुआ है। सोशल मीडिया में ऐसी ही एक जानकारी इन दिनों अभ्यर्थियों के बीच वायरल है। इस खबर में हम उन्हीं तथ्यों को प्रस्तुत कर रहे हैं जो वायरल हैं।
इसमें कहा गया है कि घोटाले करने का एक पैटर्न है, आप खुद भी चेक कर सकते है, कौन कौन सा अभ्यर्थी, पैसा देके बना है।
पहला चरण : पेपर काफी कठिन छपेगा, और 10-15 उल जलूल प्रश्न दिए जायेंगे, जहाँ पे विवाद बनेगा ही।
दूसरा चरण : प्रीलिम्स का पेपर अपने प्रियजनों या जिनका भुगतान हो गया है, उन्हें बाँट दिया जाता है, ये चेक करने के लिए आप प्रीलिम्स के मार्क्स चेक कर सकते है, जिनको पेपर मिल चुका है उनका 120 -150 तक मार्क्स आएगा जबकि उसी पेपर में 99.99 प्रतिशत अभ्यर्थी 100 माक्र्स भी नहीं ला पाएंगे
तीसरा चरण : मुख्या परीक्षा के पेपर बाँट दिए जाते है, इसका उदाहरण आपको देखने को मिलेगा पेपर 1 ( भाषा पेपर ) से वैसे तो सभी 7 पेपर बाँट दिए जाते है मगर भाषा का पेपर ऐसा होता है, जिसमे आपको आंसर पता है, तो मार्क्स नहीं कट सकते , निबंध में भी टॉपिक पहले से पता होता है तो कोचिंग वालो से ये बेस्ट निबंध तैयार करवाके वहां छाप के आते है, इसीलिए इनके नंबर उसमे भी सर्वाधिक दिखता है। आप भाषा के पेपर में भी असली अभ्यर्थी और नकली के में नंबर देख के फर्क कर सकते है।
अंतिम चरण : अगर इनके मार्क्स बहुत ज्यादा अच्छे आ गए, जिससे कन्फर्म हो जाता है की टॉप 10 तो कन्फर्म है तो फिर इंटरव्यू में बहुत काम मार्क्स दिए जाते है ताकि कही भी शक न हो।
आप ये सारे लॉजिक, पुराने 4-5 साल के रिजल्ट में देख सकते है, शक के और कारण
1, ऐसे फर्ज़़ी टॉपर का कही सोशल मीडिया में अकाउंट नहीं होता न ही टॉप करने के बाद इनका कोई इंटरव्यू आता है
2, ये पोस्ट लेके लगभग गायब हो जाते है, कभी भी इनको नए विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते नहीं पाएंगे, भले की उनका रैंक 4 क्यों न हो 3, चूँकि अब ये तरीका ओपन हो गया है, सोनवानी एंड टीम, अगले साल नए तरीके ढूंढ लेंगे भ्रष्टाचार करने का , मगर उससे पहले ये सब पैटर्न आने वाले ्रष्टस्न के रिजल्ट में आप देख पाएंगे।
राज्यपाल से सीबीआई जांच की मांग
रायपुर, 25 मई। भाजपा के नेता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गुरूवार को राज्यपाल विश्वभूषण से मुलाकात कर पीएससी 21 के नतीजों की सीबीआई से जांच की मांग की है। अपने ज्ञापन में उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ पीएससी 2021 परीक्षा परिणाम छत्तीसगढ़ के लाखों युवा उम्मीदवारों के लिए चिंता का विषय है। इसमें अधिकारियों और राजनेताओं के बच्चों का आकस्मिक चयन एक ऐसा मुद्दा है जो पीएससी उम्मीदवारों के सपनों को मार रहा है। राज्य के युवाओं को पीएससी के अधिकारियों ने एक संगठित अपराध स्तर के तौर-तरीकों के माध्यम से धोखा दिया हैं और सभी तथ्य यह संकेत दे रहे हैं कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया में अधिकारियों और राजनेताओं के बच्चों को लाभ पहुंचाने के लिए धांधली की गई है।
एक प्रतिनिधिमंडल जिसमें उज्जवल दीपक, गौरी शंकर श्रीवास, राहुल टिकरिहा, स्मिता सिंह एवं जसपाल सिंह सूरी ने राज्यपाल से मुलाकात कर यह मांग की है-1. इस मामले की सीबीआई जांच हो 2. पीएससी 2021 के परिणाम रद्द करें 3. पीएससी के अध्यक्ष श्री टामन सोनवानी का निलंबन 4. पीएससी परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक का निलंबन 5. पीएससी के अध्यक्ष और परीक्षा नियंत्रक का नार्को टेस्ट।
राज्य के उम्मीदवारों को उचित अवसर देने के लिए क्कस्ष्ट मानकों को पूरा करने वाली एक नई परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि डिप्टी कलेक्टर के चयन के लिए लेन देन किया गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद की है, कि पीएससी के उम्मीदवारों की शिकायतों पर उचित ध्यान दिया जाएगा और महामहिम राज्यपाल इस दिशा में कोई कड़ी कार्यवाही करेंगे।


