रायपुर

सीजीपीएससी 21, कहीं 2003-05 की पुनरावृत्ति तो नहीं...?
15-May-2023 7:31 PM
सीजीपीएससी 21, कहीं 2003-05 की पुनरावृत्ति तो नहीं...?

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 15 मई। सीजी- पी एस सी के   नतीजों, खासकर मेरिट सूची को लेकर धीरे,धीरे विरोध शुरू हो रहा है। सरकारी क्लास-1 की इस परीक्षा में इस बार नेता-अफसर पुत्र- पुत्रियो,दामाद-बहु  के चयनित होने को लेकर पूरी परीक्षा व्यवस्था पर उंगली उठ रही है। इतना ही नहीं इसमें पी एस सी चेयरमैन के दत्तक पुत्र भी सफल हुए हैं।

 इसे लेकर कुछ अभ्यर्थी कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। इनकी आज कलेक्टोरेट गार्डन में शाम -5 बजे बैठक रखी गई है।

2003 और 05 के नतीजों की तरह इस बार भी नतीजे विवाद में नजर आ रहे हैं। इस बार अफसर, और नेताओं के बेटे-बेटियों ने मेरिट लिस्ट में जगह बनाई है। खुद पीएससी चेयरमैन टॉमन सिंह सोनवानी के दत्तक पुत्र नितिश सोनवानी ने 7वां रैंक हासिल किया। यह भी संयोग है कि दिवंगत पीएससी चेयरमैन खेलनराम जांगड़े की बेटी संतनदेवी जांगड़े भी उनके पद पर रहते डिप्टी कलेक्टर बनी थीं।

राज्यपाल के सचिव अमृत खल्को की बेटी नेहा, और निखिल ने भी टॉप 15 में जगह बनाई। डीआईजी पीएल धु्रव की बेटी साक्षी भी 11वें नंबर पर रही। कांग्रेस नेता सुधीर कटियार की बेटी भूमिका और दामाद शशांक गोयल भी टॉप 15 में आए हैं। बिल्हा के विधानसभा प्रत्याशी रहे कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला के बेटे स्वर्णिम शुक्ला ने 16वां रैंक हासिल किया है। ये सभी डिप्टी कलेक्टर बनेंगे। ऐसे लोग भी हैं, जो पीएससी नतीजे पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं।

भाजपा प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने ट्विटर पर लिखा कि छत्तीसगढ़ पीएससी में  कथित नेता-अधिकारी के पुत्र-पुत्रियों के चयनित नतीजों ने प्रदेश के योग्य युवा वर्ग को गहरा आघात पहुंचाया है। पिछले चार साल में ऐसा कई बार हुआ है। पिछले 4 साल के सभी नतीजों की जांच की नितांत आवश्यकता है।

सामाजिक कार्यकर्ता मंजीत कौर बल ने फेसबुक पर लिखा कि आज दो परीक्षाओं की चर्चा है। सीबीएसई और पीएससी छत्तीसगढ़...मैं दूसरी चर्चा में एकदम बाहर हूँ..कौन बधाई का पात्र है कौन भ्रष्टाचार से शामिल हुआ है ...यह तथ्य सामने लाना कठिन है।

उन्होंने लोगों के बीच बातचीत का हिस्सा भी पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि आजकल टॉप 20 सीट्स बिक रही हैं..75 लाख का रेट चल रहा है...कुछ चयनित बड़े अफसरों और पीएससी के करीबियों के हैं। ऐसी चर्चाएं मेहनत से चयनित के बधाई पर भी शक पैदा करती हैं। उन्होंने आगे अपने पोस्ट में कहा कि अगर झूठ है तो बहुत अच्छा है...

लेकिन अगर सच है तो सोचिए भ्रष्टाचार कैसे अधिकारी चयन कर रहा..और ऐसे नाकाबिल अधिकारी चयनित होकर राज्य का क्या भला करेंगे? लोक सेवा आयोग जैसी संस्थाओं पर अगर प्रश्न चिन्ह लगेगा, तो युवाओं का राज्य प्रशासनिक सेवाओं से विश्वास जल्द ही उठेगा और राज्य की व्यवस्था चर्मराएगी। शायद इस पर गंभीरता से बातचीत होना चाहिए ..तथ्यों पर विचार होना चाहिए। चयन परिणामों का विश्लेषण होना चाहिए।

मंत्रालय विद्युत मंडल से भी आ रही बू

कुछ इसी तरह की बू विद्युत मंडल में पिछले दिनों नियुक्त किए गए 71 इंजीनियरों की नियुक्तियों को लेकर भी आ रही है। इसमें एक एमडी और ईडी स्तर के अधिकारियों पर उंगलियां उठ रही है। डंगनिया मुख्यालय में चर्चा है कि यह 7.10 करोड़ का मामला है। वहीं आज से मंत्रालय में भी लिपिक भर्तियों के लिए दस्तावेज सत्यापन का कार्य शुरू हो गया है। 2021 में हुई भर्ती परीक्षा में चयनित सहायक ग्रेड-3 के 4 सौ से अधिक कर्मचारियों की सूची जारी हुई। इन सबके शैक्षनिक दस्तावेजों का सत्यापन जीएडी के सेक्शन 8 में किया जा रहा है। इसके लिए सभी चयनित अभ्यर्थियों को आना होता है। इसके साथ-साथ यह भी खबरें हैं कि पीएसएस द्वारा मंत्रालय के लिए 90 भृत्यों की भर्ती में भी लेनदेन की हवा बहने लगी है। इन्हें अभी इमला लेखन की परीक्षा देनी है, और इसमें सफल होने पर सीधे नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा।

और इधर रमन का ट्वीट

इधर रमन सिंह ने भी आज ट्वीट कर कहा कि सीजीपीएससी के नतीजे आये, टॉप 20 स्थान पर बड़े अधिकारियों, कांग्रेसी नेता और व्यापरियों के रिश्तेदार चयनित हुए। अब सवाल यह हैं कि क्या सब कुछ निष्पक्ष ढंग से हुआ है? क्या सीजीपीएससी में भी भ्रष्टाचार की सेंध लग चुकी है? क्या गरीब या माध्यम वर्गीय युवाओं के साथ कोई छल नहीं हुआ है?


अन्य पोस्ट