रायगढ़

जब तक प्लांट लगाने की गारंटी नहीं, तब तक जमीन भी नहीं
01-Jun-2026 6:55 PM
जब तक प्लांट लगाने की गारंटी नहीं, तब तक जमीन भी नहीं

सिंघल स्टील प्लांट के खिलाफ 20 गांवों ने फूंका बिगुल

कहा-जेएसडब्ल्यू व वीजा कंपनी की तरह जमीन बंधक नहीं बनने देंगे

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायगढ़, 1 जून। रायगढ़ जिले के पतरापाली, कोतरलिया समेत आसपास के करीब 20 गांवों में प्रस्तावित सिंघल स्टील प्राइवेट लिमिटेड के ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट के खिलाफ जनाक्रोश तेज हो गया है। 6 जुलाई को प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले ही ग्रामीणों ने कंपनी और प्रशासन को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि बिना लिखित गारंटी के जमीन अधिग्रहण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रभावित गांवों के ग्रामीणों, बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों की कंपनी प्रबंधन के साथ हुई बैठक में लोगों ने जमकर विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का कहना था कि जिले में पहले से ही 100 से अधिक बड़े उद्योग संचालित हैं, जिनके प्रदूषण से खेती-किसानी चौपट हो रही है, भूजल प्रदूषित हो चुका है,और लोगों का स्वास्थ्य लगातार प्रभावित हो रहा है। ऐसे में एक और उद्योग लगाने से पहले पुराने उद्योगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

बैठक में ग्रामीणों ने सबसे बड़ा सवाल उठाया कि कौन गारंटी देगा कि जमीन लेने के बाद प्लांट वास्तव में लगाया जाएगा? लोगों ने आरोप लगाया कि जेएसडब्ल्यू और वीजा स्टील जैसी कंपनियों ने हजारों एकड़ जमीन अधिग्रहित कर वर्षों से अपने कब्जे में रखी है, लेकिन परियोजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं,इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि सिंघल स्टील के प्रस्तावित प्लांट के लिए करीब 1000 एकड़ भूमि की आवश्यकता है।

वहीं, पहले से वीजा स्टील द्वारा लगभग 500 एकड़ और जेएसडब्ल्यू द्वारा करीब 1000 एकड़ जमीन अधिग्रहित कर रखी गई है, इन जमीनों पर आज भी खेती नहीं हो रही और प्रभावित परिवार रोजगार व मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि कंपनी निर्धारित समय सीमा में प्लांट स्थापित नहीं करती है, तो अधिग्रहित भूमि दो वर्ष के भीतर मूल भू-स्वामियों को वापस लौटाई जाए,साथ ही पुनर्वास नीति के तहत रोजगार, उचित मुआवजा, आवास और अन्य सुविधाओं की कानूनी गारंटी दी जाए।

बैठक के बाद ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि वे कलेक्टर और राज्य शासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराएंगे, उनका कहना है कि जनसुनवाई से पहले कंपनी और प्रशासन को लिखित रूप से यह स्पष्ट करना होगा कि परियोजना कब शुरू होगी, कितने लोगों को रोजगार मिलेगा और जमीन अधिग्रहण के बाद किसानों के हितों की सुरक्षा कैसे की जाएगी। ग्रामीणों ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि रायगढ़ अब और प्रदूषण नहीं झेलेगा, पहले अधूरी परियोजनाओं और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों का हिसाब दो, उसके बाद नए प्लांट की बात करो। हमारी जमीन किसी कंपनी की जागीर नहीं है। ग्रामीणों के इस तीखे विरोध के बाद अब 6 जुलाई को होने वाली जनसुनवाई पर पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं।


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