रायगढ़
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायगढ़, 11 मई। लैलूंगा स्थित शासकीय अस्पताल इन दिनों एक विवाद को लेकर चर्चाओं में है। स्थानीय लोगों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अस्पताल का शासकीय शव वाहन अस्पताल परिसर में खड़ा रहने के बजाय एक निजी व्यक्ति अथवा ड्राइवर के घर में रखा जाता है, जबकि संबंधित व्यक्ति सरकारी कर्मचारी भी नहीं बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार शासन द्वारा अस्पतालों में शव वाहन इसलिए उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या, पोस्टमार्टम अथवा अस्पताल में मृत्यु होने की स्थिति में गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को नि:शुल्क सुविधा मिल सके। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में यह सुविधा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि कई परिवार आर्थिक तंगी के कारण निजी वाहन का खर्च वहन नहीं कर पाते। लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि लैलूंगा अस्पताल का शव वाहन नियमों के अनुरूप अस्पताल परिसर में उपलब्ध नहीं रहता, बल्कि निजी नियंत्रण में संचालित हो रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब भी शव वाहन की आवश्यकता पड़ती है, तब कई बार वाहन तत्काल उपलब्ध नहीं हो पाता। लोगों का आरोप है कि वाहन अस्पताल में न रहकर किसी निजी स्थान पर खड़ा रहता है, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में परिजनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शव वाहन से शव पहुंचाने के बदले राशि मांगे जाने की चर्चाएं लंबे समय से क्षेत्र में सुनाई देती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
खंड चिकित्सा अधिकारी लैलूंगा का कहना है कि शव वाहन एक ही है लेकिन इसका संचालन टेंडर वाले करते है उनके माध्यम से ड्राइवर रखा गया है शव वाहन तो अस्पताल में ही रहना चाहिए, ड्राइवर अपने घर में रखा है तो ये तो गलत है और पैसे लेन देन की बात मेरे संज्ञान में नहीं आया है मंै इस बात को उनके कंपनी वाले को बताता हूं।


