रायगढ़

धान खरीदी में लापरवाही, तीन निलंबित व दो का वित्तीय प्रभार समाप्त
03-Jan-2026 11:16 PM
धान खरीदी में लापरवाही, तीन निलंबित व दो का वित्तीय प्रभार समाप्त

रायगढ़, 3 जनवरी। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता और शासन निर्देशों के कड़ाई से पालन को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जांच व निरीक्षण के दौरान कई धान खरीदी केंद्रों पर गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के अनुमोदन से समिति प्रबंधक-सहायकों पर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई में तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है, जबकि दो कर्मचारियों का वित्तीय प्रभार समाप्त कर दिया गया है।

जिला प्रशासन के अनुसार सहकारिता विभाग की जांच में यह तथ्य सामने आया कि कुछ समितियों में शासन द्वारा निर्धारित ढाला पद्धति से धान परीक्षण नहीं किया जा रहा था। किसानों द्वारा बोरे में लाए गए धान को बिना परीक्षण सीधे शासकीय बोरों में भरकर तौल करने जैसी लापरवाहियां दर्ज की गईं, जिसे नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया।

उप आयुक्त सहकारिता विभाग के मुताबिक आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित जमरगीडी (पं.क्र. 1553) के सहायक समिति प्रबंधक एवं धान खरीदी प्रभारी दीनबंधु पटेल तथा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कापू (पं.क्र. 48) के सहायक समिति प्रबंधक श्यामनारायण दुबे द्वारा निर्देशों की अवहेलना व लापरवाही पाए जाने पर उनका वित्तीय प्रभार तत्काल प्रभाव से समाप्त किया गया है।

वहीं आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित छाल (पं.क्र. 615) के सहायक समिति प्रबंधक ठण्डाराम बेहरा और आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कोड़ासिया (पं.क्र. 833) के समिति प्रबंधक व फड़ प्रभारी प्रहलाद बेहरा को गंभीर लापरवाही और कारण बताओ सूचना पत्र का जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर निलंबित किया गया है। इसके अलावा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित खडग़ांव (पं.क्र. 180) में धान उपार्जन केंद्र के नोडल अधिकारी के खिलाफ गाली-गलौच व धमकी की शिकायत सही पाए जाने तथा सहायक समिति प्रबंधक कृपाराम राठिया द्वारा भी गंभीर लापरवाही सामने आने पर उन्हें भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी अवधि 15 नवंबर से 31 जनवरी 2026 तक लागू है और इस संपूर्ण अवधि में धान उपार्जन कार्य से जुड़े कर्मचारियों पर आवश्यक सेवा संधारण एवं विच्छिन्नता निवारण अधिनियम, 1979  लागू किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी समितियों को निर्देशित किया है कि धान खरीदी तय प्रक्रिया, नियमों और पारदर्शिता के साथ की जाए ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और शासन की योजनाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचे।


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