रायगढ़
जिला प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, 15 दिनों का अल्टीमेटम
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायगढ़, 17 फरवरी। घरघोड़ा स्थित एनटीपीसी तिलाईपाली प्रबंधन के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर पिछले 21 दिनों से धरना प्रदर्शन कर रहे आठ गांवों के सैकड़ों महिला पुरुष सोमवार को रायगढ़ पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर आवाज को बुलंद किया। ग्रामीणों ने अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर के नाम अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है और कहा है कि अगर तय मियाद में उनकी मांगों पर गौर नहीं किया जाता है तो आगे उग्र प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
सोमवार को घरघोड़ा अंचल से बड़ी तादात में ग्रामीण महिला पुरुष अपनी हक की लड़ाई लडऩे, हाथों में अपनी मांगों से संबंधित तख्तीयां थामे जिला मुख्यालय पहुंचे और और शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम में एकत्रित होकर एनटीपीसी तिलाईपाली के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। हालांकि ग्रामीणों के इस प्रदर्शन की जानकारी प्रशासन को पहले से ही थी, जिसके लिए उन्होंने सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी कर रखे थे। ग्रामीणों के आने की सूचना मिलने के बाद अपर कलेक्टर खुद मिनी स्टेडियम पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा करने के बाद उनसे ज्ञापन लिया और उचित समाधान करने की बात कही। ग्रामीणों ने बताया कि चार पंचायत के अन्तर्गत आने वाले आठ ग्राम तिलाईपली, कुधुरमौहा, नयारामपुर, चोटीगुड़ा, साल्हेपाली, अजीतगढ़ और रायकेरा के किसान पिछले 21 दिनों से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे हैं, इस बीच 31 जनवरी को प्रशासन की ओर से तहसीलदार घरघोड़ा और एनटीपीसी के अधिकारी मौजूदगी में बैठक भी हुई मगर अधिकारी बिना कोई स्पष्ट जवाब दिये चले गए।
ऐसे में अब वे अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन के पास आये हैं। किसानों का आरोप है कि उनका क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची में आता है, जहां भूमि अधिग्रहण से पूर्व ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य है। मगर अधिसूचना के तहत बिना उचित सूचना और सहमति के भूमि अधिग्रहण किया गया, जो नियमों का उल्लंघन है।
ऐसे में ग्रामीणों ने 10 फरवरी को महा ग्रामसभा आयोजित कर चार मुख्य विषयों पर प्रस्ताव पारित किए हैं और उसके अनुरूप अधिग्रहण निरस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि एनटीपीसी द्वारा क्षेत्र में बहुत से गांव में बिना मकान के मुआवजा दिया गया है जिस पर उचित कार्यवाही किया जाय और यदि कार्यवाही नहीं हो सकता तो बाकी बचे किसानों को उसी प्रकार से बिना घर के मुआवजा दिया जाये।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि तेन्दुपत्ता कार्डधारी को प्रति कार्ड 5 लाख राशि मुआवजा देने के लिए शासन, प्रशासन और एनटीपीसी द्वारा आश्वासन दिया गया था जिसे अभी तक किसी भी कार्डधारी को नहीं दिया गया है। पूर्व में एनटीपीसी द्वारा किसानों से बिना जानकारी के सहमति बहला-फुसलाकर और ठगी कर परामर्श सहमति के नाम पर प्रत्येक गांव में जनसमस्या निवारण केन्द्र खोला गया था उसमें रजिस्टर में हस्ताक्षर कराया गया उसे ही एनटीपीसी के अन्य दस्तावेजों में संलग्न किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट प्रबंधन और ठेका कंपनियों द्वारा बाहरी लोगों को नौकरी पर रखा जा रहा है और स्थानीय युवाओं की उपेक्षा की जा रही है। ग्रामीणों की मांग कि ऐसे ठेका कम्पनी के साथ अवैध रूप से काम कर रहे लोगों को हटाया जाये या फिर प्रभावित गांव के युवाओं को बतौर आर्थिक सहायता राशि 15-15 लाख रुपया दिया जाये। ग्रामीणों नें दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर 15 दिनों के अंदर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आगे वे एनटीपीसी कोयला खनन और संबंधित खदानों के समस्त कार्यों को अवरुद्ध करने को बाध्य होंगे।


