महासमुन्द
केंद्रों में शॉर्टेज मिलने पर वसूली के नोटिस जारी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 18 मई। महासमुंद जिले के 47 धान उपार्जन केंद्रों में धान की कमी (शॉर्टेज) पाई गई है। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान धान खरीदी में अनियमितताएं सामने आने के बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक और उपायुक्त सहकारिता विभाग ने जिम्मेदार कर्मचारियों को नोटिस जारी कर वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी है।
कुल 49,838.4 क्विंटल धान खरीदी में से 1,652.09 टन (16 लाख 52 हजार 90 किलो) धान कम पाया गया है, जो कुल खरीदी का 33.15 प्रतिशत है।
नूनपानी अमरकोट केंद्र में 9.99 प्रतिशत शॉर्टेज दर्ज की गई। डोंगरीपाली केंद्र में 12.62 प्रतिशत शॉर्टेज दर्ज की गई।
धान की कमी की भरपाई संबंधित समितियों को मिलने वाले कमीशन से की गई है, जिससे समितियों को आर्थिक नुकसान हुआ है। रिकवरी नोटिस जारी होने के बाद भी इन्हीं खरीदी केंद्र प्रभारियों से दोबारा धान खरीदी कराई जा रही है।
बैंक प्रबंधन के अनुसार राशि जमा नहीं करने पर संबंधित कर्मचारियों के वेतन से कटौती और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए केंद्र प्रभारियों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और विक्रेताओं को जिम्मेदार माना गया है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, रायपुर द्वारा संबंधित कर्मचारियों को 7 दिनों के भीतर राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
103 केंद्रों में खुले में पड़ा धान
जिले के 182 में से 103 धान खरीदी केंद्रों में वर्तमान में 82 हजार 403 क्विंटल धान खुले में रखा हुआ है। मौसम और तेज धूप के कारण धान में सूखत की समस्या आ रही है, जिससे प्रत्येक बोरे में 1 से 2 किलो तक वजन कम हो रहा है। धान के उठाव की समय-सीमा (डेडलाइन) लगातार बढ़ाई जा रही है।
प्रमुख केंद्रों से वसूली की विवरणी
भोरिंग केंद्र में विक्रेता यशांत निर्मलकर को 734.02 क्विंटल की कमी के लिए 16,88,246 रुपए जमा करने का आदेश दिया गया है। जोबा केंद्र समिति प्रभारी रेवाराम साहू को 679.10 क्विंटल कमी के लिए 15 लाख61 हजार 930 रुपए जमा करने का नोटिस मिला है।
इसी तरह बिरकोनी केंद्र में लिपिक कुसुमलता निषाद से 21लारख, 40 हजार, 679 रुपए की वसूली निकाली गई है। कांपा केंद्र में समिति प्रबंधक मोहन सिंह जांगड़े को 13लाख, 92 हजार 857 रुपए की भरपाई करने को कहा गया है। इसी तरह अन्य समितियों का शामिल है।
जिला नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा का कहना है कि धान का उठाव 25 मई तक किया जाना है। उठाव की प्रक्रिया में विलंब हुआ है, इसलिए मिलरों को केंद्रों से धान का तेजी से उठाव करने के निर्देश दिए गए हैं। धान उपार्जन नीति के तहत समितियों के लिए सूखत मान्य नहीं है।
उपायुक्त सहकारिता ने निर्देश दिया था कि यदि निर्धारित समय सीमा 9 दिसंबर 2025 तक संतोषजनक स्पष्टीकरण या राशि जमा नहीं की जाती है तो छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 58.बी के तहत कड़ी वसूली की कार्रवाई की जाएगी। बावजूद राशि नहीं जमा नहीं कराई गई है।


