महासमुन्द
यही धान समीपवर्ती राजिम, कुरूद और अभनपुर की मंडियों में 1850 रु. से ऊपर बिक रहा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,14मई। कृषि उपज मंडी पोटियाझर में इन दिनों रबी धान की खरीदी तो जारी है, लेकिन व्यापारियों की दिलचस्पी नहीं लेने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है।
मंडी में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा नहीं होने के कारण धान की बोली महज 1650 रुपए प्रति क्विंटल तक सिमट गई है। यह स्थिति तब है, जब समीपवर्ती राजिम, कुरूद और अभनपुर की मंडियों में यही धान 1850 रुपए से ऊपर बिक रहा है।
जानकारी अनुसार महासमुंद मंडी में महज 5 से 6 व्यापारी ही सक्रिय हैं। कहा जा रहा है कि जब तक व्यापारियों की संख्या अधिक नहीं होगी, तब तक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा नहीं होगी और दाम नहीं बढ़ेंगे।
बीते दो साल के रिकॉर्ड देखें तो इसी मंडी में धान की बोली 2250 रुपए तक गई थी। लेकिन इस बार व्यापारियों की कम आवक ने किसानों को आर्थिक नुकसान की ओर धकेल दिया है। 7 तारीख से शुरू हुई खरीदी में अब तक केवल 5500 क्विंटल धान ही बिक पाया है।
जिले में इस रबी सीजन में धान लगाने वाले किसानों की संख्या काफी अधिक है। महासमुंद जिले में लगभग 35 हजार से ज्यादा किसानों ने रबी की फसल ली है। अब किसानों के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ रबी की फसल को औने-पौने दाम पर बेचने का दबाव है, तो दूसरी तरफ खरीफ सीजन के लिए खेत तैयार करने की जल्दी। किसानों को बीज,खाद और जुताई के लिए तत्काल नगद राशि की आवश्यकता है। जिसके कारण वे कम दाम पर भी धान बेचने को मजबूर हो रहे हैं।
सरकारी खबर है कि कृषि विभाग ने खरीफ सीजन को लेकर कमर कस ली है। जिले के सहकारी समितियों में खाद यूरिया, डीएपी और प्रमाणित बीजों का भंडारण शुरू कर दिया गया है।
कृषि विभाग के अनुसार इस साल खरीफ का लक्ष्य पिछले साल के मुकाबले बढ़ा है। किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए बैंक भी सक्रिय हैं। लेकिन मंडी की इस सुस्ती ने किसानों के बजट को बिगाड़ कर रख दिया है। यदि समय रहते व्यापारियों की संख्या नहीं बढ़ी, तो किसानों का खरीफ सीजन के लिए तैयारी प्रभावित हो सकता है।


