महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,11मई। जिला न्यायालय परिसर में आयोजित नेशनल लोक अदालत में वर्षों से अलग रह रहे दो दंपतियों ने आपसी मतभेद भुलाकर फिर से साथ रहने का फैसला किया। खंडपीठ 02 के समक्ष आए इन मामलों में पीठासीन अधिकारी की आत्मीय समझाईश का ऐसा असर हुआ कि पतियों ने नशा त्यागने और पत्नियों ने गिले-शिकवे मिटाकर घर बसाने का संकल्प लिया।
पहला मामला विविध दाण्डिक प्रकरण-143 के तहत बागबाहरा ब्लॉक की एक महिला ने अपने पति के खिलाफ भरण-पोषण का मामला दर्ज कराया था। उनका विवाह अप्रैल 2007 में हुआ था। दंपत्ति के दो बच्चे भी हैं और कई साल तक जीवन ठीक चला। लेकिन पति को तंबाकू, गुटखा और शराब की लत लग गई। नशे के कारण होने वाले आए दिन के विवाद से तंग आकर पीडि़ता 2023 से अलग रह रही थी।
इसके बाद साल 2024 से यह मामला कुटुंब न्यायालय में लंबित था। लोक अदालत में खंडपीठ क्रमांक-02 के पीठासीन अधिकारी प्रफुल्ल कुमार सोनवानी ने दोनों को जीवन की नई शुरुआत के लिए प्रेरित किया। पीठासीन अधिकारी की समझाइश पर पति ने भरे मन से अपनी गलती स्वीकारी और भविष्य में कभी नशा न करने का वादा किया। पत्नी भी बच्चों के भविष्य और पति के बदलाव को देख साथ रहने को तैयार हो गई। समझौते के साथ ही भरण-पोषण का केस समाप्त कर दिया गया।
इसी तरह एक अन्य मामले में महासमुंद ब्लॉक की महिला और उनके पति के बीच सुलह हुई। इनका विवाह नवंबर 2019 में हुआ था। पांच साल तक सुखद वैवाहिक जीवन के बाद जून 2025 से दोनों के बीच आपसी सामंजस्य की कमी और छोटे.छोटे विवादों के कारण अलगाव हो गया था।
लोक अदालत में सुलह प्रक्रिया के बाद दोनों ने साथ रहने पर सहमति जताई। इस सुखद अंत पर पीठासीन अधिकारी ने दंपति को पौधा भेंट किया। उन्होंने संदेश दिया कि जिस तरह एक पौधे को सींचकर बड़ा किया जाता है, वैसे ही विश्वास के साथ अपने वैवाहिक जीवन की इस नई शुरुआत को हरा.भरा रखें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से आयोजित इस लोक अदालत में केवल मुकदमों का निपटारा ही नहीं हुआ। बल्कि टूटने की कगार पर खड़े परिवारों को नई दिशा मिली। कोर्ट में मौजूद अन्य लोगों ने भी इस पहल की सराहना की।


