महासमुन्द

साय सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर - विनोद चंद्राकर
23-Feb-2026 2:59 PM
साय सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर - विनोद चंद्राकर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 23फरवरी। छत्तीसगढ़ में भाजपा की साय सरकार प्रशासनिक तंत्र पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा है। पूरे प्रदेश सहित महासमुंद जिले में व्यापक भ्रष्टाचार कर अधिकारियों ने महत्वपूर्ण योजना का सत्यानाश कर दिया है। छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 योजनांतर्गत संचालित परियोजना जिले में एआई जनरेटेड तस्वीरों का इस्तेमाल कर जल संरचनाएं दिखाया गया। जिले को गत दिनों राष्ट्रपति ने जिस उपलब्धि के लिए प्रथम पुरस्कार दिया है, दरअसल जमीनी स्तर पर इसमें कोई काम हुआ ही नहीं है। इस कार्य में जिस विभाग को कार्य एजेंसी बनाया गया। उसी के सबसे बड़े अधिकारी ने इस व्यापक भ्रष्टाचार को अंजाम देकर जिलाधीश को भी भ्रमित करने का कार्य किया है।

उक्त वक्तव्य पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन द्वारा उप संचालक कृषि सह परियोजना प्रबंधक डब्लूसीडीसी जिला-महासमुंद को उक्त योजना में जिले में हुई आर्थिक अनियमितताओं को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किये जाने पर व्यक्त की है।

श्री चंद्राकर ने कहा कि यह सम्मान का विषय है कि महासमुंद जिले को जल संरक्षण के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि के आधार पर प्रथम पुरस्कार मिला है। लेकिन, उपसंचालक कृषि द्वारा जमीनी स्तर पर कार्य ना कराकर एआई जनरेटेड तस्वीर प्रस्तुत कर जिलाधीश को भ्रमित किया गया। धरातल पर कहीं भी चेक डैम, तालाब और पौधारोपण जैसे कार्य नहीं कराए गए। केवल कागजों में प्रोजेक्ट तैयार किया गया।

श्री चंद्राकर ने कहा कि उक्त योजना की स्वीकृत राशि जो कि लाखों रूपये में है, जो एक कर्मचारी के निजी खाते में शास. योजना की राशि को जमा कर लिया गया है।

जो वित्त निर्देश 32/2016 का खुला उल्लंघन है। जबकि शासकीय भुगतान के लिये 5000/- रू. से ज्यादा होने पर शासन द्वारा ई-पेंमेट की व्यवस्था की गई है। भण्डार नियम 2002 यथा संशोधित नियम 2022 का पालन बिल्कुल ही नहीं किया गया है। इसी तरह बिल में पीआईए, डब्ल्यूडीटी का हस्ताक्षर प्रमाणीकरण भी नहीं कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी आर्थिक अनियमितता यह है, कि एक ही वेंडर को बार-बार भुगतान किया जा रहा है, तथा 10 लाख रूपये अग्रिम में बिना कार्य किये भुगतान कर दिया गया है। जिससे स्पष्ट है, कि कमीशनखोरी चरम पर है। और नियमों को ताक पर रख कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। परियोजना-1 एवं 2 में जियो टैग नहीं किया जा रहा है। भुगतान के समय नोट शीट में हितग्राही का बैंक खाता एवं वेंडर का नाम दर्शित ही नहीं किया गया है। मौके पर कहीं कोई कार्य नहीं दिख रहा, केवल एआई से बनाई गई तस्वीरों को जमा कर वरिष्ठ अधिकारियों को भी भ्रमित कर प्रथम स्थान प्राप्त किया गया है। इस संबंध में कलेक्टर महासमुंद को पत्र के माध्यम से अवगत करा कर उन्होंने जांच की मांग की है।


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