महासमुन्द

यूजीसी कानून के विरोध में सवर्णों ने घेरा कलेक्टोरेट, रैली निकाल किया प्रदर्शन
04-Feb-2026 3:56 PM
यूजीसी कानून के विरोध में सवर्णों ने घेरा कलेक्टोरेट, रैली निकाल किया प्रदर्शन

राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 4 फरवरी। केंद्र सरकार द्वारा 13 जनवरी 2026 को पारित किए गए नए यूजीसी कानून को काला कानून बताते हुए कल दोपहर सवर्ण समाज जनों ने हाथों में तख्तियां लेकर बाइक रैली निकाली तथा इस कानून के विरुद्ध जमकर नारेबाजी तथा प्रदर्शन किया। बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति तथा प्रधान मंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। कहा कि यदि इस काले कानून को वापस नहीं लिया गया तो सवर्ण समाज उग्र प्रदर्शन के लिए बाध्य होगा तथा सडक़ों की लड़ाई लड़ेगा।

मिली जानकारी के मुताबिक यूजीसी कानून की आग महासमुंद जिले में भी पहुंच चुकी है।

कल लोहिया चौक पर हजारों की संख्या में एकत्रित हुए लोगों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर केंद्र सरकार की नीतियों के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। दोपहर 12 बजे से शुरू हुआ यह आंदोलन एक विशाल बाइक रैली के रूप में तब्दील हुआ। विधायक निवास भाजपा कार्यालय के समक्ष नारेबाजी की गई।  सवर्ण समाज के प्रमुखों ने ज्ञापन में कहा कि केंद्र सरकार अपने वोट बैंक को सुरक्षित करने के लिए सवर्णों को बली का बकरा बना रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून अव्यवहारिक है और समाज को खंडित करने वाला है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती, तो देशव्यापी भारत बंद का आह्वान किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान एक बड़ा बयान देते हुए समाज प्रमुखों ने कहा कि राज्य स्तर पर रणनीति तैयार हो चुकी है। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सवर्ण समाज के सांसद, विधायक और पार्षद चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल के हो, सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देंगे।

उन्होंने बांग्लादेश और नेपाल के हालिया जेन जी आंदोलनों का हवाला देते हुए केंद्र को आगाह किया कि देश में अप्रिय स्थिति निर्मित हो सकती है। इस वृहद आंदोलन में ब्राह्मण, जैन, सिख, राजपूत क्षत्रिय, मराठा, अग्रवाल, माहेश्वरी, सिंधी, गुप्ता, कायस्थ, गुजराती, बंग, दक्षिण भारतीय ब्राह्मण और छग करण महंती समाज सहित कुल 14 से अधिक समाजों के पदाधिकारी एवं भारी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।


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