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सिंहदेव का पलटवार, कहा- डॉ. हर्षवर्धन गुमराह करने का प्रयास कर रहे
08-Apr-2021 1:04 PM
सिंहदेव का पलटवार, कहा- डॉ. हर्षवर्धन गुमराह करने का प्रयास कर रहे

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 8 अप्रैल।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के वैक्सीनेशन  को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार की कार्यप्रणाली पर आक्षेप करने के बाद  प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने जवाबी पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय कवरेज से ज्यादा टीकाकरण हुआ है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार को गुमराह नहीं करने की सलाह दी है। 

सिंहदेव ने ट्वीट किया कि छत्तीसगढ़ में 10 फीसदी से ज्यादा लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है जो कि राष्ट्रीय कवरेज से काफी ज्यादा है। एक दिन में 3 लाख लोगों को, राज्य की 1 फीसदी से अधिक जनसंख्या को, वैक्सीन दी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को छत्तीसगढ़ की जनता को गुमराह नहीं करना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जितनी ज्यादा वैक्सीन की खेप छत्तीसगढ़ को मुहैया करवाएगी, हम उतने ही ज़्यादा लोगों को जल्द से जल्द वैक्सीन दे पायेंगे। अगर टेस्टिंग की बात करें तो छत्तीसगढ़ राज्य देश में कुछ गिने राज्यों में से है जहां प्रति 10 लाख में सबसे ज़्यादा लोगों की टेस्टिंग हो रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का दावा कि छत्तीसगढ़ में कोरोना द्वारा मृत्यु दर का कारण टेस्टिंग है बिल्कुल बेबुनियाद है। हमे दुख है की राज्य में संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है पर 40000+ प्रति दिन टेस्ट की संख्या ने इसके रोकथाम और बचाव में सहायता की है। 

सिंहदेव ने आगे बताया कि गत दिवस ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उन्हें यह सूचित किया गया था कि एंटीजन टेस्टिंग की संख्या कम की जा रही है और अगले 3-4 दिनों में राज्य में 5 आरटीपीसीआर लैब की स्थापना की जा रही है जिनमे से एक के लिए केंद्र की सहायता की दरकार है।
छत्तीसगढ़ में संचयी टेस्ट/मिलियन 2,02,985 हैं जब की भारत के 1,93,415 हैं। प्रतिदिवस टेस्ट/मिलियन  1627 हैं जबकी भारत के 929 हैं। डॉ. हर्षवर्धन सभी तथ्य जानते हैं, उनके साथ मीटिंग में चर्चा होती रहती है। दु:ख की बात है कि फिर भी गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रीजी का यह वक्तव्य ऐसे समय पर आना जब सभी राज्यों और केंद्र ने पिछले दिन ही मिलकर महामारी से निपटने का निर्णय लिया था यह बहुत ही दु:खद है। क्या वह राज्य सरकारों के साथ इस प्रकार की सहकारिता की अपेक्षा कर रहे हैं?


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