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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डबल बेंच का निर्देश, अंतिम सुनवाई 20 अप्रैल को
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 7 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आज झीरम घाटी मामले में एनआईए द्वारा दायर एक याचिका पर जितेन्द्र मुदलियार को भी अपना पक्ष रखने की अनुमति प्रदान कर दी है।
25 मई 2013 के झीरम घाटी हमले में अनेक कांग्रेस नेताओं के साथ ही पूर्व विधायक उदय मुदलियार को भी नक्सलियों ने मार डाला था। उनके पुत्र जितेन्द्र मुदलियार ने दरभा थाने में 25 मई 2020 को एक शिकायत की जिसमें उन्होंने इस नरसंहार के पीछे के राजनीतिक षड़यंत्र की जांच की मांग की थी। इस पर वहां एफआईआर दर्ज कर ली गई।
इस एफआईआर के खिलाफ एनआईए, विशेष अदालत गई थी और उन्होंने इस एफआईआर को जांच के लिये एनआईए को देने की मांग की। कोर्ट ने उनकी मांग को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया। इसके बाद एनआईए इसी को लेकर हाईकोर्ट पहुंची है। जितेन्द्र मुदलियार ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर मांग की है कि एनआईए की याचिका में उन्हें भी पक्षकार बनाया जाये। जस्टिस मनीन्द्र मोहन श्रीवास्तव व जस्टिस नरेन्द्र व्यास की बेंच ने इस पर मुदलियार को अनुमति दी राज्य सरकार के साथ अपना भी पक्ष रखें।
दूसरी ओर एनआईए का आवेदन जिसमें दरभा थाने में दर्ज की गई एफआईआर को हस्तांतरित करने की मांग है पर 20 अप्रैल को अंतिम सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि झीरम घाटी नरसंहार की एनआईए जांच पूरी हो जाने के बाद जितेन्द्र मुदलियार व अन्य पीड़ितों ने आरोप लगाया था कि एनआईए ने इस घटना के पीछे के वृहद राजनीतिक षड़यंत्र की जांच नहीं की है। मार्च 2016 में तत्कालीन राज्य सरकार ने सीबीआई को राजनैतिक षड़यंत्र की जांच करने कहा, पर केन्द्र सरकार की ओर से जवाब दिया गया था कि चूंकि एनआईए ने जांच पूरी कर ली है इसलिये अब इस मामले में अलग से जांच की जरूरत नहीं है। इसके बाद बीते साल जितेन्द्र मुदलियार ने दरभा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।


