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इम्फाल/आइजोल, 29 मार्च | मणिपुर सरकार ने सीमावर्ती म्यांमार के जिला प्रशासन से कहा है कि वह सीमा पार से आए लोगों को भारतीय क्षेत्र में प्रवेश न करने दे। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। मणिपुर सरकार के निर्देश सीमावर्ती जिलों चंदेल, टेंग्नौपाल, कामजोंग, उखरूल और चुराचंदपुर के पांच उपायुक्तों को जारी किए गए। कहा गया, "गंभीर चोटों के मामले में, मानवीय विचारों पर चिकित्सा ध्यान दिया जा सकता है।"
मणिपुर सरकार के विशेष सचिव (गृह) एच. ज्ञान प्रकाश द्वारा उपायुक्तों को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि म्यांमार में हो रही घटनाओं के कारण, यह सूचित किया जाता है कि उस देश के नागरिक भारत के मणिपुर सहित सीमावर्ती राज्यों में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रकाश ने पांच डीसी से कहा कि वे भोजन और आश्रय प्रदान करने के लिए कोई शिविर न खोलें, सिविल सोसायटी संगठनों को भी आश्रय और भोजन प्रदान करने के लिए किसी भी शिविर को खोलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, शरण लेने या प्रवेश करने का प्रयास करने वाले लोगों को विनम्रता से दूर कर दिया जाना चाहिए और आधार नामांकन को तत्काल रोका जाना चाहिए और आधार नामांकन किट को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
मणिपुर के गृह विभाग ने मंगलवार तक संबंधित जिला प्रशासन से कार्रवाई पर रिपोर्ट भी मांगी है।
अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को महिलाओं और बच्चों सहित कुछ म्यांमार ने मोरेह-तमू सीमा के माध्यम से मणिपुर में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें भारतीय सीमा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी।
मणिपुर मीडिया ने बताया कि पिछले हफ्ते म्यांमार में गोली लगने से घायल तीन म्यांमार नागरिकों को मणिपुर में प्रवेश करने की अनुमति दी गई और उन्हें इम्फाल के जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (जेएनआईएमएस) में भर्ती कराया गया। उनमें से दो की हालत गंभीर है।
मणिपुर की राज्य सरकार ने अपने सीमावर्ती ज़िलों को ये निर्देश दिया है कि म्यांमार से आने वाले शरणार्थियों के लिए रिफ़्यूजी कैंप न खोले जाएं. बीबीसी के सहयोगी पत्रकार दिलीप कुमार शर्मा ने ये जानकारी दी.
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मिज़ोरम, नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश को म्यांमार से आने वाले अवैध शरणार्थियों को आने से रोकने के लिए इंतज़ाम करने को कहा था.
12 मार्च को लिखी गई इस चिट्ठी में गृह मंत्रालय ने कहा था, "जैसा कि आपको पता है कि म्यांमार की मौजूदा आंतरिक परिस्थितियों के कारण भारत-म्यांमार सीमा से भारतीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध तरीक़े से लोगों के दाख़िल होने की संभावना है. इस संदर्भ में गृह मंत्रालय ने 25 फ़रवरी को पहले ही एक सर्कुलर जारी करके मिज़ोरम, नगालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिवों और भारत-म्यांमार सीमा पर तैनात बोर्डर गार्डिंग फ़ोर्स को अलर्ट रहने और भारतीय क्षेत्र में लोगों को आने से रोकने के लिए एडवाइज़री जारी की थी."
गृह मंत्रालय ने ये भी कहा कि म्यांमार से लोग अवैध रूप से भारत आ रहे हैं और एजेंसियों को बाहरी लोगों की पहचान करने और उन्हें बिना देरी किए वापस म्यांमार भेजने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है.
इस चिट्ठी में गृह मंत्रालय ने ये बात भी स्पष्ट की थी कि राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को किसी विदेशी व्यक्ति को शरणार्थी का दर्जा देने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि भारत ने यूनाइटेड नेशंस रिफ़्यूजी कन्वेंशन पर दस्तख़त नहीं किए हैं.
म्यांमार में लोकतंत्र समर्थकों और सेना के बीच चल रहे संघर्ष के कारण पिछले दिनों बोर्डर के उस पार से भारत आने वाले शरणार्थियों की संख्या बढ़ गई है.
(आईएएनएस)


