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फ्रांस: 33 साल तक चलती रही धोखाधड़ी, दवा कंपनी पर लगा जुर्माना
29-Mar-2021 6:47 PM
फ्रांस: 33 साल तक चलती रही धोखाधड़ी, दवा कंपनी पर लगा जुर्माना

फ्रांस की एक दवा कंपनी को धोखाधड़ी और ग़ैरइरादतन हत्या के आरोप में दोषी पाया गया है. फ्रांस के इस हेल्थ स्कैंडल के केंद्र में वजन कम करने का दावा करने वाली दवा 'मीडिएटर' है.

'मीडिएटर' के बारे में ये दवा कंपनी ने ये दावा किया था कि मधुमेह के वैसे मरीज़ जिनका वजन ज़्यादा है, इसका इस्तेमाल कर सकेंगे. ये दवा बाज़ार में 33 सालों तक बेची जाती रही.

हालांकि बाद में ये बात सामने आई कि इसके इस्तेमाल से इंसान के दिल को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. इस विवाद के बाद आख़िरकार साल 2009 में ये दवा बाज़ार से हटा ली गई.

माना जाता है कि सैंकड़ों लोगों की मौत इस दवा के सेवन की वजह से हो गई. इसके साइड इफेक्ट्स को लेकर कई बार चेतावनियां जारी की गईं लेकिन इसके बावजूद तकरीबन 50 लाख लोगों को डॉक्टरों ने ये दवा लिखी.

हालांकि 'मीडिएटर' बनाने वाली फार्मा कंपनी सेरवियर इस दवा के किसी किस्म के साइड इफेक्ट के बारे में जानकारी होने से करती रही लेकिन सोमवार को एक अदालत ने कंपनी पर 32 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया.

जज सिल्वी डॉउनिस ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा, "हालांकि वे इस दवा के जोखिम के बारे में सालों से जानते थे.... लेकिन उन्होंने कभी भी ज़रूरी कदम नहीं उठाया."

कंपनी के पूर्व डिप्टी चेयरमैन को कोर्ट ने चार साल क़ैद की सज़ा सुनाई है, हालांकि सज़ा पर अभी तामील नहीं होगी.

फ्रांस में दवाओं का नियमन करने वाली सरकारी एजेंसी पर कोर्ट ने इस हेल्थ स्कैंडल में उसकी भूमिका के लिए तीन लाख यूरो का जुर्माना लगाया है.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ जज ने कहा कि नियामक एजेंसी अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में गंभीर रूप से नाकाम रही.

फ्रांस की डॉक्टर इरीन फ्रैकों को इस बात का श्रेय दिया जाता है कि उन्होंने 'मीडिएटर' दवा के साइड इफेक्ट्स के बारे में दुनिया को बताया.

सोमवार के फ़ैसले के बाद डॉक्टर इरीन फ्रैकों ने उम्मीद जताई कि इस फ़ैसले से हमें ये समझने में मदद मिलेगी कि ऐसी धोखाधड़ी कैसे सालों तक जारी रखी जाती है.

इटली, स्पेन समेत यूरोपीय संघ के कई देशों ने 2000 के दशक की शुरुआत में इस दवा पर प्रतिबंध लगा दिया था. हालांकि फ्रांस ने मधुमेह रोगियों में भूख कम करने वाली दवा के तौर पर इसका इस्तेमाल जारी रखा गया.

एक स्टडी में ये बात सामने आई कि 'मीडिएटर' के इस्तेमाल के कारण साल 1976 से साल 2009 के बीच 500 लोगों की जाने गईं. हालांकि एक दूसरी स्टडी में मरने वालों की संख्या दो हज़ार के करीब होने की बात कही गई थी. (bbc.com)


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