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रायगढ़ का प्रकरण
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 12 मार्च। रायगढ़ के एक बिल्डर द्वारा अपने पंजीकृत रियल एस्टेट प्रोजेक्ट की त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट नहीं उपलब्ध कराने पर रेरा ने बिल्डर पर एक लाख का जुर्माना ठोंका है। साथ ही प्रोजेक्ट में बिक्री पर प्रतिबंध भी लगाने के आदेश दिए गए हैं।
बताया गया कि रायगढ़ के बेलाडूला स्थित रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ओम विहार कॉलोनी रेरा में पंजीयन 17 जुलाई 2018 को हुआ था। उक्त प्रोजेक्ट के प्रमोटर स्व. परमानंद गुप्ता के विधिक वारिस हैं। भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक सभी प्रमोटर्स को उनके प्रत्येक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की त्रैमासिक प्रगति रेरा के वेबपार्टल पर अद्यतन करना अनिवार्य है।
बावजूद इसके ओम विहार कॉलोनी के प्रमोटर द्वारा उपरोक्तानुससार प्रावधानों तथा प्राधिकरण के निर्देशों का अवहेलना करते हुए पंजीयन के पश्चात विवादित रियल एस्टेट प्रोजेक्ट की प्रगति प्राधिकरण के वेबपोर्टल पर अद्यतन नहीं किया गया है। प्राधिकरण ने विधिवत सुनवाई के बाद भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए प्रमोटर के विधिक वारिसों को एक लाख का जुर्माना किया गया।
इस राशि को आरआरसी के माध्यम से वसूली के लिए आरआरसी जारी करते हुए कलेक्टर, जिला-रायगढ़ को पत्र जारी कर निर्देशित किया गया है। साथ ही विवादित प्रोजेक्ट में विक्रय पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिसके लिए कलेक्टर-जिला-रायगढ़ व जिला-पंजीयक रायगढ़ को पृथक से पत्र प्रेषित किया गया है।
यदि प्रमोटर के विधिक वारिस/वारिसों द्वारा उपरोक्तानुसार निर्धारित समयावधि में उपरोक्त आदेशों का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 अंतर्गत उन्हें डिफाल्टर घोषित करने तथा छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत (कॉलोनाईजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्बंधन तथा शर्ते) नियम, 1999 अंतर्गत उनके विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी।


