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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भिलाईनगर, 16 दिसंबर। राज्य के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान रूंगटा एजुकेशन सोसायटी को बैंक द्वारा कब्जा किए जाने के बावजूद प्रदेश के रोजगार प्रशिक्षण संचालनालय रायपुर द्वारा शैक्षणिक सत्र 2020 - 21 में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) संचालन की अनुमति दे दी गई है। इसके आधार पर संस्था द्वारा उम्मीदवारों को प्रवेश भी दिया गया है। जबकि रुंगटा एजुकेशन सोसाइटी एनसीवीटी द्वारा अभी तक मान्यता नहीं दी गई है। राज्य शासन के निर्धारित नियम, कानूनों को ताक में रखकर राज्य शासन के साथ विश्वासघात करते हुए रुंगटा एजुकेशन सोसाइटी को बिना मान्यता के आईटीआई संस्थान संचालन की अनुमति देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ राज्य शासन ने कार्यवाही करने का मन बना लिया है।
गौरतलब हो कि रुंगटा एजुकेशन सोसाइटी एवं गारंटर्स के लगभग आधा दर्जन से ज्यादा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एचडीएफसी बैंक ने अपनी संपत्ति बताते हुए बंधक बना लिया है। इस संबंध में जानकारी होने के बाद भी रोजगार एवं प्रशिक्षण संचालनालय रायपुर के जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा रुंगटा एजुकेशन सोसाइटी को शैक्षणिक सत्र 2020 - 21 में आईटीआई संचालन की अनुमति दे दी गई। जिसका परिणाम यह हुआ है कि बैंक द्वारा संस्था की पूरी संपत्ति अपने कब्जे में लिए जाने के बावजूद उम्मीदवार आईटीआई के लिए प्रवेश ले चुके हैं । जबकि रूमता एजुकेशन सोसाइटी को एनसीवीटी नई दिल्ली के द्वारा अभी तक आईटीआई हेतु मान्यता नहीं दी गई है। संस्थान के द्वारा मान्यता प्राप्ति के लिए एनसीवीटी को आवेदन दिया गया है । जिसकी प्रक्रिया अभी चल रही है। प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने के बाद भी रोजगार एवं प्रशिक्षण संचालनालय द्वारा वर्तमान शैक्षणिक सत्र में प्रवेश हेतु अनुमति दिया जाना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। सभी नियम एवं कानूनों को ताक में रखकर राज्य शासन के साथ विश्वासघात करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ राज्य शासन उचित कार्यवाही करने के मूड में आ गया है। ताकि भविष्य में अन्य अधिकारी इस प्रकार की गलती की पुनरावृत्ति ना कर सके।
कब्जा नोटिस जारी करते हुए बैंक ने सूचना दी है कि समूह पर बैंक का 60 करोड़ से ज्यादा का ऋृण है। जिसे चुकाने में रूमता एजुकेशन सोसायटी असमर्थ है इसलिए सारी संपत्तियों को बंधक बना लिया गया है. इसके बाद कोई भी संस्थान से संबंधित संपत्ति की खरीदी एवं विक्रय नही कर सकता है।
बैंक ने कब्जे में ली संस्था एवं गारंटर्स की संपत्तियां
एचडीएफसी बैंक लिमिटेड मुंबई तथा उसकी भिलाई शाखा ने विगत 25 नवंबर 2020 को कब्जा नोटिस सार्वजनिक किया है इस नोटिस के मुताबिक जीडीआर एजुकेशन सोसायटी ने एचडीएफसी बैंक लिमिटेड से कुल 60,47,99,697.47 करोड़ का ऋण तथा 1 जुलाई 2019 से उक्त ऋण के एवज में ब्याज भी आज पर्यंत तक अदा नहीं किया है। भुगतान हेतु संस्थान को 30 जुलाई 2019 को नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस में संस्थान को 60 दिन की अवधि दी गई थी। जिसमें संस्थान निर्धारित अवधि में ऋण का में ब्याज चुकारा करना था। परंतु संस्थान भुगतान कर पाने और सफल रहा था। बैंक ने सुरक्षा हित प्रवर्तन विनियम 2002 की धारा 13(12) सहपठित नियम के तहत मिली शक्तियों के हित संपत्तियों को बंधक बना लिया है.
सभी गारंटर्स को नोटिस जारी
भिलाई शाखा ने सार्वजनिक सूचना देते हुए चेताया है कि जीडीआर एजुकेशन सोसायटी और उसके गारंटर्स जिनमें से अधिकांश रिश्तेदार हैं की संपत्तियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अपने कब्जे में ले लिया है. कर्जदार राशि पटाने में असफल रहे, इसलिए गारंटर्स और आमजनों को सूचित किया जाता है कि बैंक ने अपने ऋृण को पाने के लिए उपरोक्त संपत्तियों को बंधक बना लिया है तथा उसे बेचने, नीलाम करने इत्यादि के लिए स्वतंत्र है. कंपनी के गारंटर्स सोनाल रूंगटा, संतोष रूंगटा, संजय रूंगटा, सौरभ रूंगटा, श्रीमती रजनीदेवी रूंगटा, शकुंतला रूंगटा और तृप्ति रूंंगटा को भी इन संपत्तियों को ना बेचने की चेतावनी दी गई है। बैंक के सूत्रों के मुताबिक जल्द ही सभी संपत्तियों को बेचकर बैंक अपना ऋृण वसूलने की तैयारी कर रहा है।
रूंगटा ग्रुप की जमीनें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान को बैंक ने लिया कब्जे में
एडीएफसी बैंक ने जीडीआर गु्रप की जिन परिसंपत्तियों को बंधक बनाया है, उनमें दुर्ग में स्थित 5.080 हेक्टेयर की जमीनें, उस पर स्थित सभी भवन, विशेषकर डेंटल कॉलेज परिसर, रूंगटा एजुकेशन सोसायटी, जीडीआर कॉलेज को बंधक बनाया गया है। इसके अलावा डायवर्टेड भूमि का सभी हिस्सा, ग्राम कुरूद, भिलाई और दुर्ग जिले में स्थित जमीनें और भवन शामिल हैं।


