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सरकार अहंकार छोड़े और किसानों की मांगें मंज़ूर करे: अरविंद केजरीवाल
13-Dec-2020 6:16 PM
सरकार अहंकार छोड़े और किसानों की मांगें मंज़ूर करे: अरविंद केजरीवाल

दिल्ली,13 दिसम्बर | दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि किसानों के समर्थन में वो सोमवार को एक दिन का उपवास रखेंगे.

उन्होंने कहा कि किसानों ने 14 दिसंबर को एक दिन का उपवास रखने की अपील की है कि सभी उनके समर्थन में एक दिन का उपवास रखें.

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ता और देश के सभी लोगों को किसानों की मांगों के समर्थन में सोमवार को एक दिन का उपवास रखने के लिए कहा.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से गुज़ारिश की है कि वो अहंकार छोड़े और किसानों की मांगों को मंज़ूर करे.

उन्होंने कहा, “सरकारें जनता से बनती हैं, जनता सरकारों से नहीं बनतीं. अगर जनता इन तीनों क़ानूनों को पसंद नहीं करती को इन्हें तुरंत ख़त्म किया जाए और एमएसपी को लेकर किसानों की फसलें खरीदने की गारंटी क़ानून बनाएं और किसानों की मांगों के तुरंत मंज़ूर करे.“

'आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है'

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, ऐसा नहीं होना चाहिए.

उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों से केंद्र सरकार के कुछ मंत्री और बीजेपी के कुछ लोग बार-बार कह रहे हैं कि ये आंदोलन देशद्रोहियों का है.”

उन्होंने सवाल कया, ”मैं उनसे पूछना चाहता हूं हज़ारों पूर्वसैनिक किसानों के साथ बैठे हुए हैं. हज़ारों सेनिक घरों में बैठ कर किसानों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. क्या वो देशद्रोही हैं? देश विदेश में खेले कई खिलाड़ी आज किसानों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, क्या वो देशद्रोही हैं? कई डॉक्टर, कई व्यापारी उन्हें समर्थन दे रहे हैं, क्या वो सब देशद्रोही हैं?”

उन्होंने कहा, “बीते दिनों मैंने कुछ लोगों से बात की उन्होंने मुझे बताया कि ये बिल ख़तरनाक हैं, क्योंकि इनमें लिखा है कि कोई व्यक्ति जितना चाहे अनाज की जमाखोरी कर सकता है.“

“अब तक जो ये क़ानून हैं उनके अनुसार इस देश के बीतर जमाखोरी करना अपराध है और ऐसा करने पर सज़ा होती थी, क्योंकि जमाखोरी से महंगाई बढ़ेगी. लेकिन अब इस क़ानून के अनुसार जमाखोरी करने पर कोई सज़ा नहीं होगी और जब तक महंगाई दोगुनी न हो जाए जमाखोरी पर पाबंदी नहीं लगाई जाएगी.“

उन्होंने कहा कि कोई इस ग़लतफहमी में न रहे कि चंद किसान ही इन क़ानूनों के ख़िलाफ़ हैं.(https://www.bbc.com/hindi)

 


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