ताजा खबर

गढ़चिरौली में दो दशक में पुलिस-नक्सल लड़ाई में मारे गए 5सौ ग्रामीण
08-Dec-2020 1:19 PM
गढ़चिरौली में दो दशक में पुलिस-नक्सल लड़ाई में मारे गए 5सौ ग्रामीण

दो सौ जवानों की शहादत के साथ 250 नक्सली भी ढेर

   प्रदीप मेश्राम की विशेष रिपोर्ट​   
राजनांदगांव, 8 दिसंबर (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)।
महाराष्ट्र के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले में बीते दो दशक में  पुलिस और नक्सलियों के बीच चल रही निर्णायक लड़ाई में अंदरूनी इलाकों में बसे तकरीबन पांच सौ ग्रामीणों को जहां नक्सलियों ने मुखबिरी और पुलिस के करीबी होने के आरोप में मौत के घाट उतार दिया। वहीं इस हिंसक लड़ाई में भारी तादाद में जवानों को निशाना बनाया है। नक्सल हमलों में भी इस जिले में दो सौ से अधिक सुरक्षा बलों को अपनी शहादत झेलनी पड़ी। इस शहादत में जिला पुलिस बल के अलावा पैरामिलिट्री फोर्स भी है। 

नक्सलियों को भी इस दौरान काफी नुकसान हुआ है। नक्सलियों के शीर्ष केडर को पुलिस के हाथों अपनी जान गंवानी पड़ी है। बताया जा रहा है कि गढ़चिरौली का अधिकांश हिस्सा घने जंगलों से घिरा हुआ है। महाराष्ट्र का यह सबसे उपद्रवी नक्सल जिला माना जाता है। नक्सलियों से भिडऩे के लिए महाराष्ट्र पुलिस की मदद के लिए केंद्र सरकार की अद्र्धसैनिक बलें भी जिले में तैनात है। उसके बावजूद हिंसक गतिविधियों में कमी नहीं आ रही है। हालांकि गुजरे 5 सालों में पुलिस के हाथों काफी जनहानि हुई है। जिसमें करीब 4 साल पहले इंद्रावती नदी के किनारे पुलिस ने नक्सलियों के एक बड़े कैम्प में धावा बोलकर एकमुश्त 52 नक्सलियों को मार गिराया था। यह नक्सलियों को होने वाली सर्वाधिक क्षति में से एक है। 

मिली जानकारी के मुताबिक गढ़चिरौली में 20 साल में पुलिस के कई बड़े अफसरों को भी शहादत झेलनी पड़ी। एक जानकारी मुताबिक जिला पुलिस बल के 169 जवान नक्सलियों से लड़ते शहीद हुए। वहीं पैरामिलिट्री फोर्स, एसआरपीएफ समेत दूसरी केंद्रीय बलों के 43 जवान भी नक्सलियों से लड़ते शहीद हुए। कुल मिलाकर गढ़चिरौली में 212 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं। इसी तरह नक्सलियों ने अपने हिंसक रूप से आतंक मचाते हुए जिले के अलग-अलग हिस्सों में 536 ग्रामीणों का कत्ल किया है।

नक्सलियों के जानलेवा मुहिम में कई ग्रामीणों को घर छोडऩे के लिए भी मजबूर कर दिया। एक जानकारी के मुताबिक इस जिले में कई ग्रामीण अपने पैतृक गांव को छोडक़र इधर-उधर भटक रहे हैं। इसी तरह पुलिस ने भी अपने अदम्य साहस के दम पर 253 नक्सलियों को अपनी गोली का निशाना बनाया है। 
बताया जा रहा है कि नक्सलियों के खिलाफ पुलिस की मौजूदा स्थिति काफी मजबूत है। गढ़चिरौली को नक्सल आपरेशन के लिए साधन संपन्न भी बनाया गया है। इसी कड़ी में गढ़चिरौली को केंद्र सरकार ने विशेष रूप से आपातकालीन हालतों से निपटने के लिए हेलीकाप्टर भी मुहैया कराया है। 

इस संबंध में गढ़चिरौली पीआरओ प्रशांत दिवाते से मिली जानकारी में नक्सलियों को लगातार फोर्स से कड़ी चुनौती मिल रही है। बीते दो दशक में हुए हिंसक वारदातों की तुलना में गुजरा 5 साल पुलिस के लिए सफलता से भरा हुआ है। पुलिस ने कई हार्डकोर नक्सलियों को जहां हथियार छोड़ मुख्यधारा में वापस लाया है। वहीं नक्सल पुनर्वास नीति से कई नक्सलियों की जीवन दशा बिल्कुल बदल गई है।
 
बताया जा रहा है कि नक्सलियों को भी पुलिस की बढ़ती दखल से परेशानी खड़ी हुई है। बहरहाल गुजरे 20 साल में महाराष्ट्र सूबे के इकलौते नक्सलग्रस्त इस जिले में अब भी पुलिस-नक्सल लड़ाई पूरी तरह से थमी नहीं है। दोनों के बीच जारी जंग से भोले-भाले ग्रामीण से लेकर फोर्स को भी अपनी जान गंवानी पड़ी है।


अन्य पोस्ट